kya aap safed jahar kha rahe hai in Hindi Health by Sunita Bapna books and stories PDF | क्या आप सफ़ेद जहर खा रहे है ?

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क्या आप सफ़ेद जहर खा रहे है ?

          क्या आप रोज सफ़ेद जहर खा रहे हैं

प्राकृतिक चिकित्सक और आयुर्वेद के आचार्यों ने सफ़ेद चीनी को सफ़ेद जहर का नाम दिया है |चीनी में अम्लता का गुण पाया जाता है,और ये आंतों में सड़ांध भी पैदा करती है | इसमे कोई पोषक तत्व नहीं होता है और इसके पाचन मे आमाशय को अपने enzymes काम लेने पड़ते है | यानि शरीर की जीवनी शक्ति तो इसको पचाने में खर्च होती है ही , साथ में आहार में कैलोरी की मात्रा भी बढ़ जाती है | यही कारण है की वजन घटाने के लिए सबसे पहले चीनी बंद करने की सलाह दी जाती है| |यह इस बात की पुष्टि करती है की चीनी का आहार मे सिर्फ और सिर्फ नकारात्मक रोल है |

सफ़ेद चीनी को ‘चूने का चोर’ कहा जाता है।इसके अधिक प्रयोग से दांतों व हड्डियों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है जो कालांतर में विभिन्न रोगो को जन्म देता है |

 आज विज्ञापनों ने जहां कुछ हद तक जागरूक बनाया है, तो उसे बहुत गुमराह भी किया है| तथाकथित सभ्यता  की दौड़ में चीनी के नुकसान तो मालूम हो गए और उसके विकल्प में sugar free (equal,stevia) आदि का प्रयोग करने लगा जो की चीनी से भी ज्यादा हानिकारक है| ये तथाकथित शुगर फ्री में सिर्फ रसायनिक तत्व होते ,जिसका  पाचन करना शरीर  के लिए और भी दुष्कर है |इसको कहते है ‘आकाश से गिरे और खजूर में अटकना’ |यह कितने आश्चर्य की बात है की एक तरफ तो स्वास्थ्य के लिए ओरगनिक फल और सब्जियों को महँगे भावो में खरीद रहे क्योंकि केमिकल के दुष्प्रभावों से बचना चाहते  है और दूसरी और खुद ही  उन्ही केमिकल्स  का सेवन  कर रहे है | आज पश्चिम सभता के प्रभाव से हमारे आहार में अनेकानेक बदलाव आए है, जैसे कोल्ड ड्रिंक्स, पिज्जा, बेर्गर,नूडल्स आदि |इन सबको पचाने में शरीर की जीवनी शक्ति का दुरुपयोग होता है जिससे शरीर  के बाकी संस्थानो की कार्य क्षमता  कम हो जाती है, परिणाम आपके सामने है , छोटी उम्र में तरह तरह की बीमारियों का प्रकोप और प्रतिरोधक शक्ति की कमी|अब प्रश्न ये है की चीनी बंद कर दे तो क्या मीठा खाये ?आयुर्वेद के अनुसार भी मीठा सप्त रस  में एक है ,फिर हमारी रसना को भी मीठे की तलब होती है |

प्रकृति ने हमारे जीवन मे हर वस्तु दी है,जरूरत है आँख खोल कर देखने की |

शहद एक प्रकृति का अनुपम उपहार है आर्युवेद में शहद  को एक खाद्य और प्राकृत्रिक औषधि के रूप में निरूपित किया गया है जो शरीर को स्वस्थ ,निरोग और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए इसे अमृत का नाम दिया है |

शहद या मधु एक प्राकृतिक मधुर पदार्थ है जो मधुमक्खियों द्वारा फूलों के रस को चूस तथा उसके बाद छत्ते के कोषों में एकत्रित करने के फलस्वरूप बनता है | मधुमक्खियों  जो रस फूलों से चूसती  है उसमे अधिकतर प्राकृतिक शर्करा और पानी का मिश्रण होता है| मधुमक्खियों उसमें एंज़ायम मिला देती है जिससे वह   एक रसायनिक तत्व बन जाता है जो चीनी (sucrose) को  फल शर्करा (Fructose) और अंगूरी शर्करा (Glucose मे बदल देता । फिर छत्तों मे उनमे से जलीय अंश उड़ जाता है , जिससे शहद खराब नहीं होती है | यही कारण है की शहद चीनी से मीठी होती है और उसका घनत्व 1.36   किलोग्राम प्रति लिटर होता है |

शहद में 80% प्राकृतिक शर्करा होती ,18% जल  और 2% खनिच तत्व,विटामिन और पराग होते है|

इसके अलावा शहद में बी-6, आवश्यक खनिज पदार्थ जैसे ताँबा,सोडियम, फास्फोरस ,आयोडीन व लोह तत्व और कुछ अमीनो एसिड भी होते है | शहद में वो सभी तत्व पाये जाते है जो शारीरक विकास के लिए आवश्यक है |प्रोटीन तन्तु निर्माण, चूना हड्डियों को मजबूत बनाता है लोह तत्व रक्त के लिए आवश्यक है और विटेमिन की महानता से सभी परिचित है |इसमे  पायी जाने वाली शर्करा किसी भी श्लेष्मिक कला(mucous membrane) द्वारा रक्त में मिल जाती है जिससे न तो पाचन संस्थान पर बोझ पड़ता है बल्कि शरीर  में तुरंत आत्मसात हो जाती है | इसके पोषक  गुणों में सबसे महत्व पूर्ण तथ्य यह है की इसमे प्रचुर मात्रा मे antioxidants पाये जाते है, एक खास "pinocembrin"  नामक

Antioxidants सिर्फ शहद में पाया जाता है और इसमे वसा और cholesterol भी नहीं बढ़ता है |

एक टेबलस्पून में 64 कैलोरी होती है, जबकि चीनी में 48 कैलोरी होती है| शहद चीनी से अधिक मीठी होती है इसलिए  कम मात्राकी जरूरत होती है | चीनी में empty केलोरी होती है जों स्वास्थ्य के लिए हानिकर होती शरीर में मोटापा बढ़ाता है, जबकि शहद से हृदय प्रणाली को  मजबूत बनाता है |

शहद का Glycemic index(GI) 45 जबकि चीनी का 65 है |इसका मतलब यह है कि इसका  रक्त प्रहाव में अवशोषण धीरे धीरे होता और इंसुलिन का स्त्राव भी धीरे होने से रक्त में अचानक शर्करा का स्तर नहीं बढ़ता है |
                  शहद के कुछ घरेलू उपयोग

बच्चों के रोग में

खांसी जुकाम : माँ का या गाय के एक छोटे चम्मच में आधा चम्मच शहद मिला कर दिन में दो तीन बार दे |

शहद और नींबू का रस संभाग मिला कर रख ले |आधा चम्मच इस रस को थोड़ा गुनगुना पानी में मिला कर दे  |

तुलसी का रस + अदरक का रस + शहद संभाग मिला कर रख ले |दिन में आधा चम्मच दो से तीन बार दे |

कब्ज  संतरे यो टमाटर के एक चम्मच रस में 3 से 10 बूंद शहद मिला कर दिन में तीन बार देने से कब्ज कि शिकायत दूर हो जाती है |

निंद्रा में पेशाब करना

बच्चे को रात में सोने से पहले एक चम्मच शहद कुछ दिन तक लगातार देना चाहिए | शहद में पानी सोखने कि शक्ति के कारण निंद्रा में पेशाब करने कि आदत धीरे धीरे छूट जाती है |शाम के बाद बच्चे को पानी कम देना चाहिए और सफेद चीनी का प्रयोग कम से कम कर देना चाहिए |

संधिवात व जोड़ो केई जोड़ों के दर्द में

एक टेबलस्पून शहद में एक टीस्पून दालचीनी पिसी मिला कर सुबह खाली पेट दे ,15-20 मिनट कुछ न खाएं या 2 चम्मच मधु आधा चम्मच पीसी दालचीनी एक कप सादे पानी में घोल कर सुबह शाम दे ,सात  आठ दिनों में दर्द में आराम होने लगता है |

चेहरे की सुंदरता के लिए

एक चम्मच शहद +एक चम्मच नींबू का रस मिला कर पेस्ट बना ले ,इसे चेहरे फेस पेक जैसे लगा ले दस मिनट बाद धो ले |आपके चेहरे की त्वचा तो मुलायम होगी ही चेहरे पर ताजगी और चमक आ जायेगी |

हाथ पाँव में जलन

चार पाँच इमली (पुरानी हो तो और अच्छा)) को रात में मिट्टी के बर्तन में भिगो दे सुबह छान केआर दो चम्मच शहद मिला कर खाली पेट पी जाए |10-15 दिन के प्रयोग से जलन गायब हो जाती है |

शहद के सेवन में निम्न बातों का ध्यान रखना जरूरी है :

·        शहद को आग पर कभी न तपाये| सार्दियों में इसमे गाढ़ापन आ जाता और नीचे रवेदार हो जाए तो कुछ देर धूप मे रख दे या बोतल को गरम पानी में रख दे |

·        चाय व काफी के साथ इसका प्रयोग बिलकुल न करें |

·        मोटापा दूर करने के लिए इसे सुबह नींबू और गुनगुने पानी में ले और शरीर को मांसल बनाने या मोटा करने के लिए ठंडा पानी में ले |

·        चढ़ते बुखार में दूध और घी के साथ शहद का सेवन जहर के समान है |

शुद्ध शहद  की पहचान

·        शुद्ध शहद पानी में तुरंत नहीं घुलता है |

·        यह  सर्दियों में जम जाता है और गर्मियों में पिघल जाता है |

·        शुद्ध शहद  में रुई की बत्ती भिगो कर जलाने से जलती है |

·        शुद्ध शहद   कपड़े तथा कागज पर डालने से धब्बा नहीं पड़ता है |

·        शुद्ध शहद  प्लेट में टपकाने से साँप की कुंडली जैसा गिरता है जबकि अशुद्ध शहद गिरते ही फैल जाता है |

·        कुत्ता इसे सूंघ कर छोड़ देगा ,खाएगा नहीं |

यदि हम रोगों की विभीषिका से बचना चाहते है,और शरीर को स्वस्थ और सुडौल बनाने चाहते है, तो मधु  का प्रयोग हमारे लिए परम हितकारी, सुपाच्य और पोषण से भरपूर अति उत्तम विकल्प है |