Ayan: A fire of hatred or a search for existence - 29 in Hindi Thriller by Irfan ayan Khan books and stories PDF | अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 29

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अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 29

चाचा अपनी जगह एक मसीहा की तरह शांत थे। उन्होंने अयान को थपकी दी और बोले, "जा बेटा, अब जल्दी से हाथ-मुँह धो और अपने काम पर निकल। अपनी पगार मत कटवा लेना।"

अयान नहाने के लिए बाहर की तरफ भागा। नहा-धोकर जब वह वापस आया, तो उसके दिल में एक नया जोश था। उसे यकीन था कि जब तक चाचा का साया और माहिरा का साथ है, वह दुनिया की हर मुश्किल से लड़ सकता है। 

उसने संदूक से अपनी काली शर्ट निकाली और उसे पहन लिया। काली शर्ट के गहरे रंग में अयान का चेहरा आज और भी दबंग लग रहा था।

उसने अपनी पुरानी पैंट पहनी और फिर उसकी नज़र अपनी कलाई पर गई, जहाँ वो शाही प्लैटिनम का कड़ा चमक रहा था। 

अयान ने बिना वक्त गंवाए अपनी शर्ट की आस्तीन  को नीचे खींचा और उस कड़े को पूरी तरह छिपा लिया। उसे पता था कि काम पर जाते वक्त इस पहचान को दबाकर रखना ही समझदारी है।

होटल निकलने से पहले वह धीरे से माहिरा के करीब पहुँचा और बड़े प्यार से उसके माथे को चूमा। उस एक पल के लिए जैसे वक्त थम गया था। 

अयान ने फिर माहिरा की आँखों में आँखें डालकर बड़े धीमे स्वर में कहा” माहिरा..अपना ख्याल रखना। 

माहिरा ने मुस्कुराते हुए हामी तो भरी, पर उसकी आँखों में एक अनजाना सा डर था।

फिर उसने मुड़कर करीम चाचा की तरफ देखा और कहा, "चाचा, मैं होटल जा रहा हूँ। माहिरा का ख्याल रखना।"

करीम चाचा ने अपनी लाठी पर हाथ टिकाया और एक गहरी, भरोसेमंद आवाज़ में बोले, "बेटा, तू फिक्र मत कर। 

मेरे होते हुए तेरी इस अमानत को कोई छू भी नहीं सकता। माहिरा को हाथ लगाने से पहले, उस हाथ को इस करीम के जिस्म से गुज़रना होगा।"

चाचा की आँखों में वो पुराना तेवर देखकर अयान को एक अजीब सी तसल्ली मिली। उसने एक आखिरी बार माहिरा को देखा और फिर तेज़ कदमों से घर की दहलीज पार  की।

उसे क्या पता था कि चाचा की ये बातें महज़ दिलासा नहीं, बल्कि आने वाले तूफान का आगाज़ थीं।

अयान बस्ती की उन घुटन भरी और तंग गलियों से बाहर निकलकर सीधा मेन रोड पर आ गया। रोड पर आते ही शहर की तपती धूप और धूल भरी हवा उसके चेहरे से टकराई। 

सामने पक्की सड़क पर गाड़ियों का शोर और ट्रैफ़िक की चीख-पुकार शुरू हो चुकी थी। सड़क के किनारे फुटपाथ टूटा-फूटा था, जहाँ जगह-जगह रेहड़ी-पटरी वाले अपनी दुकानें सजा रहे थे। 

अयान उसी भीड़ और शोर के बीच से रास्ता बनाते हुए होटल की तरफ तेज़ी से कदम बढ़ा रहा था। रोड के एक तरफ ऊँची-ऊँची इमारतें थीं और दूसरी तरफ वो धूल भरा रास्ता, जिस पर चलते हुए अयान की काली शर्ट पर धूल जमने लगी थी।

अयान होटल के अंदर दाखिल हुआ। अंदर बर्तनों की खनक और मसालों की तेज़ महक के बीच, उसका साथी नितिन जूठे बर्तनों के ढेर के पास खड़ा था। 

अयान को देखते ही नितिन ने हैरानी से उसकी तरफ देखा और करीब आकर धीरे से पूछा, "क्या भाई, तुम आ गए? कुछ दिन से कहाँ थे तुम?"

अयान ने अभी जवाब देने के लिए मुँह खोला ही था कि उसकी नज़र काउंटर की तरफ गई, जहाँ मैनेजर अपनी ऊँची कुर्सी पर बैठा बड़े गौर से उसे ही देख रहा था।

मैनेजर ने उसे पास बुलाया और पैनी नज़रों से देखते हुए पूछा, "बड़ी फुर्सत से आए हो। कुछ दिन से कहाँ गायब थे? 


और... उस दिन जो तुम्हारे सिर पर इतनी गहरी चोट लगी थी, अब आराम है ना? वैसे, उस दिन जो तुम्हें हॉस्पिटल लेकर गई थी, वह लड़की कौन थी? और सबसे बड़ी बात, वह तुम्हें 'सर' क्यों कह रही थी?"

अयान के चेहरे पर एक पल के लिए भी शिकन नहीं आई, उसने बहुत ही ठंडे दिमाग से झूठ बोल दिया, "जी सर, अब आराम है। 

और वह... वह बस मेरी एक दोस्त थी। उसे मज़ाक करने की 
आदत है, इसलिए वह मज़े में सर-सर कह रही थी।"

मैनेजर ने उसे कुछ देर तक खामोशी से देखा, जैसे वह सच और झूठ के बीच का फर्क ढूंढ रहा हो। 

फिर कुर्सी पर पीछे झुकते हुए बोला, "अच्छा, मज़ाक कर रही थी! ठीक है, तुम इतने दिन गायब रहे पर तुम्हारी मेहनत देखकर मैं तुम्हारा इस बार का पेमेंट नहीं काटूँगा। अब जाओ और अपने काम पर लगो।”

अयान जैसे ही काउंटर से हटकर अंदर की तरफ बढ़ा, होटल के सुबह का शोर उसके कानों से टकराया। सुबह का वक्त था, इसलिए ऑफिस जाने वालों और मजदूरों की भारी भीड़ नाश्ते के लिए उमड़ पड़ी थी। 

वेटर हाथों में प्लेटें थामे इधर-उधर तेज़ी से भाग रहे थे और काउंटर के पास 'जल्दी करो भाई, लेट हो रहा हूँ!' की आवाज़ें गूँज रही थी

हवा में कड़क चाय और गरमा-गरम समोसों की खुशबू तैर रही थी। बर्तनों के टकराने की खनक और लोगों की बातचीत का शोर से होटल भरा हुआ था।

अयान जूठे बर्तनों के सिंक के पास पहुँचा ही था कि नितिन ने उसे घेरा। 

नितिन ने एक हाथ से अपनी शर्ट की आस्तीन से माथे का पसीना पोंछा और उसे कोहनी मारते हुए दबी आवाज़ में बोला,"अरे वाह अयान भाई! क्या किस्मत लेकर आए हो! एक तो कुछ दिन गायब रहे और ऊपर से पगार भी नहीं कटी।

और वो लड़की... भाई, कौन थी वो? इतनी खूबसूरत कि उसके परफ्यूम की खुशबू से पूरा होटल महक गया था। हमें तो लगा आज कोई परी उतर आई है।"

नितिन, अयान के माथे के  निशान को देखते हुए बोला” पर सच कहूँ भाई, उस दिन जिस तरह तुम पर हमला हुआ था। उसे देख कर तो मेरी रूह ही काप गई थी। मुझे तो लगा था कि तुम बच नहीं पाओगे, पर शुक्र है उस मेमसाहब का, जो तुम्हें सही वक्त पर ले गईं।

नितिन की बात सुनकर अयान के हाथ एक पल के लिए रुक गए। उसने सिंक से अपनी नज़रें हटाईं और नितिन की तरफ देखा। उसकी आँखों में उस दिन का खौफ अभी भी साफ़ झलक रहा था, वह सच में अपने दोस्त के लिए डर गया था।

अयान ने एक लंबी साँस ली और नितिन के कंधे पर हाथ रखते हुए धीमी मगर पक्की आवाज़ में बोला, "देख नितिन, भाई हूँ तेरा, इतनी जल्दी कहीं नहीं जाने वाला। उस दिन मौत सामने खड़ी थी, पर शायद मेरा वक्त अभी खत्म नहीं हुआ था। 

और वो लड़की... उसने जो किया, उसका एहसान मैं कभी नहीं भूलूँगा, पर अभी उसके बारे में बात न करना ही हम दोनों के लिए अच्छा है।"

नितिन ने अयान की आँखों में वह गहराई देखी और समझ गया कि अयान उस हादसे को याद तो कर रहा है, पर उसे कमज़ोरी नहीं बनने देना चाहता। उसने धीरे से सिर हिलाया और अयान के हाथ पर अपना हाथ रखा, जैसे कह रहा हो—'मैं तेरे साथ हूँ भाई।’

अयान ने अपनी बात खत्म की और फिर से बर्तनों के उस ढेर की तरफ मुड़ गया। जैसे ही उसने आखिरी कुछ बर्तन माँजकर खत्म किए, वह अपने हाथ पोंछते हुए कैंटीन के उस हिस्से की तरफ बढ़ा जहाँ से ऑर्डर पास होते थे।

अभी उसने कैंटीन की दहलीज पर कदम रखा ही था कि उसकी पैंट की जेब में रखे फोन ने थरथराहट की। अयान ने फोन बाहर निकाला, तो दिया का मैसेज सामने था।

दिया ने लिखा था! सर, पेनड्राइव का डेटा रिकवर हो गया है। आर्यन वाला हिस्सा तो पूरा मिल गया है, जिसमें वो आपको इंजेक्शन दे रहा है... उसका चेहरा बिल्कुल साफ़ है। 

लेकिन सर, उसके पिता वाला हिस्सा रिकवर नहीं हो पा रहा है। आर्यन के बाद का वीडियो पूरी तरह करप्ट हो चुका है, लाख कोशिश के बाद भी उसके पिता का चेहरा सामने नहीं आ पा रहा है।”

अयान अभी उस मैसेज को देख ही रहा था कि उसके कानों में भारी जूतों की आहट गूँजी। उसने जैसे ही फोन को जेब में डाला और सिर उठाया, उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई।

सामने होटल का मैनेजर खड़ा था, पर उसकी आँखों में वो पुरानी चिड़चिड़ाहट नहीं, बल्कि एक अजीब सी घबराहट थी। और उसके ठीक पीछे खाकी वर्दी में दो पुलिस वाले खड़े थे जिनकी ठंडी और सख्त नज़रें सीधा अयान के चेहरे पर जमी थीं।

मैनेजर ने कांपती उंगली से अयान की तरफ इशारा किया और धीमी आवाज़ में बोला, "साहब... यही है वो।”

(लेखक के कलम से..)
हाथों में जूठे बर्तन थे और जेब में बेगुनाही का सबूत, पर सामने खड़ी खाकी वर्दी ने ये साफ कर दिया था कि खेल अभी खत्म नहीं हुआ है। अयान के चेहरे पर सन्नाटा था, पर सीने में वो नफ़रत की आग सुलग रही थी, जो अब बुझने वाली नहीं थी।

उसे नहीं पता था कि ये पुलिस उसे सलाखों के पीछे ले जाएगी या उसके असली वजूद के और करीब। पर एक बात तय थी... जिस तूफान का आगाज़ मैनेजर के उस एक इशारे से हुआ था, उसकी तबाही अभी बाकी थी।"

मेरे प्यारे दोस्तों, अब सवाल आप सबके लिए..

आपको क्या लगता है, पुलिस होटल में क्यों आई है? क्या अयान को गिरफ्तार करने या उसे उसकी असलियत बताने?

मैनेजर ने अयान की तरफ इशारा क्यों किया? क्या मैनेजर किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है या वह सिर्फ डर गया है?

क्या दिया का वो अधूरा वीडियो अयान को बचा पाएगा या उसे और बड़ी मुसीबत में डाल देगा?

अपनी राय और थ्योरी कमेंट सेक्शन में ज़रूर बताएं! आपकी एक टिप्पणी कहानी का रुख बदल सकती है। और बने रहिए अगले पार्ट 30 में।