Barish Ki Woh Pehli Mulaqaat - 3 in Hindi Love Stories by July Writes books and stories PDF | बारिश की वो पहली मुलाक़ात - पार्ट 3

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बारिश की वो पहली मुलाक़ात - पार्ट 3

(एक अनदेखा सच) ☔💔❤️


शादी को छह महीने हो चुके थे।
पहली बारिश की शाम थी।
आईशा बालकनी में खड़ी भीगती सड़कों को देख रही थी। उसके चेहरे पर मुस्कान थी… लेकिन आँखों में हल्की सी बेचैनी।


पीछे से आरिफ़ ने आकर उसके कंधों पर हाथ रखा।
“क्या सोच रही हो?” उसने आईशा से पुछा---
“बस… ये कि हमारी हर कहानी की शुरुआत बारिश से ही क्यों होती है?” उसने धीमी आवाज़ में जवाब दिया ।


आरिफ़ मुस्कुराया, “क्योंकि बारिश ने ही हमें मिलाया था…”
लेकिन इस बार आईशा की मुस्कान बहुत ही फिकी लग रही थी।


पिछले कुछ दिनों से आरिफ़ बदला बदला सा नजर आ रहा  था। वो आईशा से ठीक से बातें भी नहीं कर रहा था।
फोन पर देर रात तक किसी और से बातें करना… , बार बार फोन चेक करना और अचानक मुस्कुराना…


और पूछने पर टाल देना। ये सब आईशा को जैसे अन्दर ही अन्दर खाए जा रहा था...!


आईशा के मन में सवालों के तुफान उठने  लगी थीं।
उसी रात फिर से तेज़ बारिश शुरू हो गई।
आरिफ़ का फोन टेबल पर पड़ा था। स्क्रीन पर एक नाम बार बार चमक रहा था— “रिया ❤️”


आईशा के हाथ ठिठक गए। उसका दिल बेचैन हो गया। दिल की धड़कन बारिश से भी तेज़ होने लगी ।
क्या यही था वो डर… जो हर खूबसूरत कहानी के पीछे छिपा होता है?


आरिफ़ कमरे में आया तो उसने फोन उसकी तरफ बढ़ा दिया। उसने हिम्मत करते हुए पुछा--
“कौन है ये रिया?”
आरिफ़ के जैसे होंस उड़ गए...!


कुछ पल के लिए कमरे में सन्नाटा छा गया।
सिर्फ़ बारिश की ही आवाज़ आ रही थी ।
आईशा की आंखों में बारिश की बुंदे आंसू बनकर चमक रही थी...!


आरिफ़ ने गहरी सांस ली… आईशा की आंखों में देखा और अचानक मुस्कुरा दिया।
“तुम सच जानना चाहती हो?” उसने आईशा से पुछा ----
“हाँ,” आईशा की आवाज़ कांप रही थी।


आरिफ़ उसे नीचे लिविंग रूम में ले गया और 
दरवाज़ा खोला।
वहां बाहर कुछ लोग खड़े थे — फूलों के साथ।
और बीच में एक लड़की… जो बिल्कुल आईशा जैसी लग रही थी।


आईशा हैरान रह गई। "ये कौन है...?" उसने हैरानी से पूछा----
“ये रिया है… तुम्हारी जुड़वां बहन,” आरिफ़ ने धीरे से कहा।


“क्या?” उसकी आवाज़ टूटने लगी ।
लेकिन सच सामने था —
बचपन में अस्पताल की एक गलती की वजह से वो दोनों बहनें अलग हो गई थीं। आरिफ़ को ये बात आईशा ने ही बताई थीं !


आरिफ़ उसकि तालाश काफी दिनों से कर रहा था। रिया के बारे में उसे  कुछ महीने पहले ही पता चली थी।
वो DNA रिपोर्ट और पुरानी फाइल्स लेकर खड़ा था।


“मैं तुम्हें सरप्राइज़ देना चाहता था… पहली शादी की बारिश पर,” उसने उसकी हथेलियाँ थामते  हुए कहा....


आईशा की आँखों से आँसू बह निकले —
इस बार दर्द के नहीं…
खुशी और हैरानी के।


रिया आगे बढ़ी।
“दीदी…”
वो शब्द सुनते ही आईशा ने उसे अपने गले से लगा लिया।


बाहर बारिश  अब भी हो रही थी।
लेकिन इस बार वो सिर्फ़ मोहब्बत की गवाही नहीं दे रही थी…
वो एक खोए हुए रिश्ते की वापसी की भी गवाह बन गई थी।


आरिफ़ ने दोनों को देखते हुए सोचा —
पहली बारिश ने उसे प्यार दिया था…
और शादी की पहली बारिश ने उसे एक परिवार।


कभी-कभी किस्मत कहानी में ऐसा मोड़ लाती है,
जहाँ शक की बूंदें
यकीन की धूप बन जाती हैं। ☔✨


(आज तो यहां आईशा का शक मिट चुका है लेकिन आने वाले समय में इनकी मुहब्बत क्या रंग लाने वाली है जानने के लिए अगला पार्ट जरूर पढ़ें)