Mother, sister, daughter and wife in Hindi Women Focused by कमल चोपड़ा books and stories PDF | मां-बहन-बेटी और बीवी

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मां-बहन-बेटी और बीवी

मां - बहन - बेटी और बीवी

कमल चोपड़ा​

उसके चेहरे पर उतरा हुआ चिंता की मकड़ी का जाला बीवी से छिपा नहीं रह सका था। ऑफिस से टूटा-थका-हारा लौटा देखकर बीवी ने पूछा, "क्या हुआ? इतने डिप्रेस्ड क्यों लग रहे हो? खैर तो है?" वह खींझ गया और बीवी को बुरा-भला कहने लगा। जवाब में पत्नी कुछ नहीं बोली, थोड़ा मुस्कुराई फिर चुपचाप रसोई में चली गई।​कुछ क्षण बाद हाथ में एक पर्चा लिए हुए मां कमरे में दाखिल हुई और पर्चा उसे थमाते हुए बोली, "बेटा, ये कुछ दवाइयां मंगवानी हैं! जब मौका मिले लेते आना।"​खींझ गया वह, "मां, वैसे तुम कहती हो मुझे दवाइयों से कुछ फायदा नहीं होता फिर क्यों मंगवा रही हो? क्या फायदा?"​"मैं अपने लिए नहीं मंगवा रही हूं। कल बहू बता रही थी तेरी बाईं टांग में दर्द है। इधर-उधर कई दवाइयां खा चुके हो पर... एक बार ऐसा ही दर्द तेरे बाबूजी को भी हुआ था, बहुत इलाज कराया, आखिर में एक बहुत बड़े वैद्य को दिखाया। उसने देसी दवाइयां लिखकर दीं उससे आराम आया। वो दवाइयां मुझे याद थीं मैंने लिख दी हैं ले आना, कूट पीस-कर बना दूंगी। इससे तेरा दर्द भी ठीक हो जाएगा स्वस्थ रहोगे तभी तो दुनिया से लड़ पाओगे?"​उसने चुपचाप पर्चा मोड़कर अपनी जेब रख लिया। पत्नी कमरे में आकर उसके लिए खाना रख गई। लेकिन उसने खाना खाया नहीं, वह चुपचाप लेटा ही रहा। उसकी सात वर्षीय बेटी ने कमरे में आकर देखा तो बोली, "पापा, आप खाना क्यों नहीं खा रहे हो? आपको बुखार है क्या? मैं खिला दूं?" बेटी ने रोटी का टुकड़ा तोड़कर उसे खिलाने के लिए उसके मुंह के आगे किया तो वह उठकर चुपचाप खुद ही खाने लगा? बिटिया खुश हो गई। उसकी मासूम हरकतों देखकर उसके चेहरे पर क्षणिक मुस्कान आ गई। कुछ देर बाद उनकी बहन आई और बोली, "भैया, एक खुशखबरी सुनाऊं? कंप्यूटर पर मेरे बनाए आर्टीफीशियल ज्वैलरी के डिजाइन एक बहुत बड़ी कंपनी ने ऑन लाइन खरीद लिए हैं। उन्होंने मेरे खाते में पैसे भी ट्रांसफर कर दिए हैं और उन्होंने आगे भी और डिजाइन मांगे ​हैं। अब आपको मेरी शादी के खर्च की चिंता करने की जरूरत नहीं है। अगर आपको पैसों की जरूरत हो तो मेरे खाते में लाख रुपए हैं दे दूंगी!"​सोने से पहले पत्नी ने कई बार पूछा इतने परेशान क्यों हो? तबीयत खराब है? वह कुछ नहीं बोला चुप्पी साधे रहा। माथे पर पड़ी तनाव की लकीरें कम नहीं हुई थीं। रातभर वह ठीक से सो नहीं पाया।​सुबह तैयार होकर ऑफिस के लिए निकलने लगा तो पत्नी बोली, "मुझे चिंता लगी रहेगी... बताओ क्या बात है, तुम्हें मेरी कसम!"​रुंधे गले से वह बोला, "आज मेरी नौकरी छूट सकती है। मुझसे कंपनी की दो इंपोर्टेंट फाइलें गुम हो गई हैं। एक में परचेज बिल्स की डिटेल थी और दूसरी में प्रॉपर्टी के ओरिजनल डॉक्यूमेंट्स थे। बिलों का टोटल करके अकाउंट्स तैयार करने थे। आज हमारे सी.ए. को आई.टी.ओ. के सामने फाइल्स पेश करनी थीं। मालिक मुझ पर केस भी कर सकते हैं। मुझे जेल भी हो सकती है!"​पत्नी अंदर की तरफ लपकी, दो फाइलें उठाकर लाई, "यही हैं न? तुम खुद ही तो इन्हें ऑफिस से घर लाए थे? भूल गए क्या? तुमने बताया भी था। ऑफिस में समय नहीं मिलता। मैंने बिलों के टोटल्स वगैरह कर दिए हैं। मैं बी.कॉम. पास हूं। अकाउंट्स बनाने मुझे आते हैं। तुम्हारी बहन ने कंप्यूटर से प्रिंट्स भी निकाल दिए हैं। फाइलें कंप्लीट हैं।"​फाइलें अपने सामने पाकर मृतक में जैसे प्राण लौट आए थे, उसकी आंखें गीली हो आई थीं। मां, बहन, बेटी और बीवी से मिली शक्ति ने उसके चेहरे से चिंता की मकड़ी का जाला पोंछ दिया था। वह फिर से जीवन के अखाड़े में उतर गया था।