💓हम फिर से मिले मगर इस तरह💓
🌹ऐपिसोड़ - 26🌹
अरुण इस वक्त रूपाली से उसकी अवस्था के बारे में कुछ नहीं पूछता। वह भली-भांति समझ चुका था कि उसके साथ होने वाली सभी घटनाएँ रूपाली से ही जुड़ी हैं। जो रूपाली उसके सामने खड़ी थी, वह केवल उसकी आत्मा थी। हालांकि, उसे अभी भी इस बात पर पूरी तरह विश्वास नहीं हो रहा था। कुछ तो ऐसा था, जो उससे अभी तक छिपाया गया था। रूपाली इस वक्त भी उससे उतना ही प्यार करती थी, जितना पहले करती थी।
अब अरुण को अपने सवालों के जवाब नहीं चाहिए थे, उसे बस यह पता लगाना था कि रूपाली के साथ ऐसा क्या हुआ था? वह इस अवस्था में कैसे पहुँची? इस सब का जिम्मेदार कौन है, जिसने उसे इस हाल में पहुँचाया? और क्या वह वाकई इस दुनिया को छोड़कर जा चुकी है, या फिर यह सब उसकी कल्पना से परे की कोई चीज़ है!
वह रूपाली से अपने किए की माफ़ी मांग रहा था, जो अब एक प्रेत आत्मा बन चुकी थी। रूपाली, जो अभी थोड़ी देर पहले की उथल-पुथल से बहुत दुखी और निराश थी, खुद अभी तक यह पता नहीं लगा पाई थी कि उस दुर्घटना के बाद क्या हुआ था। वह इस हालत में कैसे पहुँची और इस जगह क्यों फंसी है? क्या वह सच में मर चुकी है, या फिर अब भी ज़िंदा है?
उसकी अब तक की सभी कोशिशें व्यर्थ गई थीं। वह उस मोड़ तक नहीं पहुँच पा रही थी, जहाँ से यह सब शुरू हुआ था—वह एक्सीडेंट और उसके बाद का यह सफर। इस अनजान जगह पर उसके साथ उसका पहला प्यार अरुण भी मौजूद था, जो अभी तक पूरी सच्चाई से अनजान था। लेकिन वह कभी भी सच से रूबरू हो सकता था, क्योंकि उसके साथ हो रही घटनाएँ उसे सच के करीब ले जा रही थीं। पर रूपाली चाहती थी कि अरुण के सच जानने से पहले, वह खुद उस सच का पता लगा ले जिसकी वजह से वे दोनों यहाँ फंसे हैं।
जब अरुण ने उससे थोड़ी देर पहले की घटना के बारे में कुछ नहीं पूछा, तो उसने राहत की सांस ली। वह अरुण को माफ़ करने के बदले उससे एक वादा चाहती थी।
रूपाली ने अपने चेहरे पर एक मुस्कान लाई और कहा…. "मैं तुम्हें माफ़ कर सकती हूँ, अगर तुम वादा करो कि आज के बाद तुम सिगरेट और शराब को हाथ तक नहीं लगाओगे। अपने गुस्से पर काबू रखोगे और किसी पर बेवजह हाथ नहीं उठाओगे। मेरे सर पर हाथ रखकर कसम खाओ कि आज के बाद तुम वह सारे काम छोड़ दोगे, जो तुम्हें और तुम्हारी वजह से दूसरों को तकलीफ पहुँचाते हैं। वादा करो अरुण!"
फिर रूपाली ने अरुण का हाथ पकड़कर खुद ही अपने सर पर रख लिया और उसके शब्दों का इंतज़ार करने लगी। अरुण, जो अब रूपाली की इस बात से हैरत में था, सोच रहा था कि जो रूपाली शायद अब ज़िंदा भी नहीं है, वह कैसे अपने सर पर हाथ रखकर कसम लेने को कह सकती है? मगर फिर भी, उसने उसके सर पर हाथ रखकर सच्चे मन से कसम खाई ।
अरुण ने कहा….. "रूपाली, मैं तुम्हारे सर की कसम खाता हूँ कि आज के बाद मैं सिगरेट-शराब को हाथ तक नहीं लगाऊँगा। मैं कसम खाता हूँ कि आज के बाद अपने गुस्से पर काबू रखूँगा और बेवजह किसी पर हाथ नहीं उठाऊँगा। मैं वादा करता हूँ कि आज के बाद मेरी वजह से खुद को या किसी दूसरे को कोई तकलीफ नहीं होगी। यह मेरा तुमसे वादा है।"
"और एक वादा मैं तुमसे और करना चाहता हूँ। जो प्यार तुमने मुझे दिया, जिस तरह तुमने मुझे चाहा, मेरी परवाह की और मुझसे बेइंतहा मोहब्बत की—जिसका मैं हकदार भी नहीं था—मैं वादा करता हूँ कि मैं तुम्हें उससे कहीं ज़्यादा चाहूँगा, तुम्हारी परवाह करूँगा और उतना प्यार दूँगा जिसकी तुम सच में हकदार हो!"
वह रूपाली के और करीब गया और उसकी आँखों में देखते हुए बोला, "मैं तुम्हें बहुत प्यार करूँगा, चाहे तुम कोई भूत ही क्यों न बन जाओ!" और यह कहकर वह हंस पड़ा, ताकि रूपाली को यह भनक न लगे कि वह जान चुका है कि वह अब एक आत्मा है।
रूपाली, अरुण द्वारा अपने प्यार को कबूल किए जाने और उसके इस इज़हार से बेहद खुश हो गई। आज उसे वह मिल गया था, जिसका वह कई वर्षों से इंतज़ार कर रही थी। उसकी बरसों की मनोकामना आज पूरी हुई थी। वह फूली नहीं समा रही थी। वह खुद को उस भटकते हुए मुसाफिर की तरह महसूस कर रही थी, जिसने एक लंबा रास्ता तय करके आखिरकार अपनी मंज़िल को पा लिया हो। उसकी खुशी का ठिकाना नहीं था, उसका दिल नाच उठा था और आँखें खुशी से झूम उठी थीं। उसके चेहरे की वह खूबसूरत मुस्कान सामने खड़े अरुण के दिल को सुकून और एक नई ताज़गी का अहसास करा रही थी।
अरुण ने मुस्कुराकर पूछा….. "तो क्या कहती हो रूपाली, मेरा प्यार कबूल है? क्या मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी?"
रूपाली ने एक पल भी नहीं गंवाया। उसने तुरंत 'हाँ' कहा और भागकर उसके सीने से लग गई। बरसों का इंतज़ार पल भर में खत्म हो गया और फिर दोनों के होंठ कब एक-दूसरे से मिल गए, उन्हें पता ही नहीं चला। जब दोनों अलग हुए, तो अरुण ने उसका हाथ पकड़ा और उसे घर से बाहर ले आया।
बाहर का मौसम बिल्कुल बदल चुका था। ठंडी हवाओं के साथ अब हल्की-हल्की बर्फबारी होने लगी थी। दोनों इस खुशनुमा मौसम का लुत्फ़ उठाते हुए, एक-दूसरे का हाथ थामे सैर पर निकल पड़े। इस बीच रूपाली के बातों का पिटारा खुल गया और वह ढेर सारी बातें करने लगी। अरुण हमेशा की तरह चुपचाप, उसका हाथ पकड़े, चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान लिए उसकी बातें सुनता हुआ चल रहा था। उसे इस वक्त किसी भी चीज़ की परवाह नहीं थी—रूपाली ज़िंदा है या उसकी आत्मा, वह बस उसे खुश देखकर खुद भी खुश था। यह अहसास उसके दिल को सुकून पहुँचा रहा था।
फिर वे दोनों उस गाँव से बाहर निकल आए और ऊपर पहाड़ों पर बर्फबारी का मज़ा लेने के लिए आगे बढ़ गए। ऊपर पहाड़ों की ओर जाने वाला यह रास्ता, जो अरुण को कल तक नज़र नहीं आ रहा था, वह अब बर्फ की सफेद चादर से ढका हुआ बेहद खूबसूरत लग रहा था। धीरे-धीरे दोनों पहाड़ों की ऊंचाई पर पहुँच गए, जहाँ नीचे की तुलना में बर्फबारी बहुत तेज़ थी और ज़मीन पर करीब दो फीट तक बर्फ जम चुकी थी।
दोनों इस गिरती हुई बर्फ का आनंद ले रहे थे। रूपाली तो अरुण का हाथ छोड़कर, अपने हाथों को आसमान की तरफ फैलाकर बर्फ के बीच इधर-उधर भागने लगी। वह ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाकर कह रही थी, "आई लव यू अरुण! आई लव यू अरुण! देखो ना अरुण, कितना खूबसूरत मौसम है! मानो स्वर्ग ने अपने दरवाज़े खोल दिए हों और इस जगह को खुद में समेट लिया हो।"
रूपाली सही कह रही थी। वह जगह चारों ओर से ऊंचे पहाड़ों से घिरी हुई थी, जहाँ की हवा का हर एक झोंका मन को मोह लेने वाला अहसास करा रहा था। अब जब हल्की ठंडी हवाओं के साथ गिरते हुए बर्फ के कणों ने हर वादी को एक सफेद चादर में लपेट लिया था, तो उस जगह की खूबसूरती कई गुना बढ़ गई थी।
रूपाली इस बर्फबारी का मज़ा किसी छोटे बच्चे की तरह ले रही थी। वह बहुत खुश, उल्लास से भरी और किसी आज़ाद परिंदे की तरह दिख रही थी, जो हर फिक्र से बेखबर जिंदगी का लुत्फ़ उठाता हुआ आसमान की ऊंचाइयों में उड़ान भरता है। वह हंसते, मुस्कुराते और नाचते हुए न जाने कितने ही गाने गुनगुना चुकी थी। इस बीच उसने कई बार दोहराया कि वह अरुण से कितना प्यार करती है।
वह इस वक्त इतनी खुश थी, मानो उसने जिंदगी की हर नियामत पा ली हो। इसका कारण यहाँ का हसीन मौसम था या अरुण का प्यार, पर जो भी था, रूपाली को इस हाल में देखकर अरुण बेहद खुश था। रूपाली की उदासी और परेशानियों से परे, यह पल अरुण के दिल के हर कोने में जिंदगी जीने का एक नया मकसद जगा रहा था।
तभी रूपाली ने बर्फ का एक गोला बनाकर अरुण की तरफ उछाला, जो सीधे उसके चेहरे पर लगा। अरुण ने मुस्कुराते हुए अपने चेहरे से बर्फ हटाई और पास जमी हुई बर्फ को इकट्ठा करके रूपाली की तरफ दौड़ा। रूपाली भी हंसती हुई पीछे की ओर भागने लगी…
कहानी जारी है..........✍️