Our luxury, the blood of the voiceless in Hindi Animals by Praveen Kumrawat books and stories PDF | हमारी विलासिता, बेजुबानों का लहू

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हमारी विलासिता, बेजुबानों का लहू

क्या आप जानते हैं कि आपकी थाली में सजा भोजन, वॉर्डरोब में टंगा कीमती लेदर जैकेट या सिल्क का स्कार्फ किसी बेज़ुबान की आख़िरी चीख की कीमत पर आया है? हम हर दिन अनजाने में एक ऐसे अपराध का हिस्सा बन रहे हैं, जिसकी खूनी पटकथा हमारे ही ऐशो-आराम के लिए लिखी जाती है। जिसे हम आज की ‘आधुनिक जीवनशैली’ और तरक्की मान रहे हैं, उसका एक ऐसा कड़वा सच है जिसे कंपनियाँ हमेशा आपसे छिपाकर रखती हैं। यह आर्टिकल केवल एक लेख नहीं, बल्कि हमारी सोई हुई इंसानियत के लिए एक ऐसा आईना है जिसे पढ़ने के बाद आप अपनी रोज़मर्रा की चीज़ों को दोबारा उस नज़र से कभी नहीं देख पाएंगे। क्या आप इस चमक-दमक के पीछे छिपे भयानक सच का सामना करने के लिए तैयार हैं? पूरा ज़रूर पढ़ें...


आज का मानव स्वयं को इतिहास का सबसे सभ्य और विकसित प्राणी मानता है। विज्ञान, तकनीक और कंक्रीट की ऊंची इमारतों को विकास का पैमाना मान लिया गया है। लेकिन इस तथाकथित आधुनिकता की नींव के नीचे एक भयावह सत्य छिपा है। मनुष्य अपनी सुख-सुविधा, विलासितापूर्ण जीवनशैली और आर्थिक लाभ के लिए प्रत्यक्ष (direct) या अप्रत्यक्ष (indirect) रूप से प्रकृति का क्रूरतापूर्वक दोहन कर रहा है। हमारी थाली के भोजन से लेकर हमारे पैरों के जूतों तक, हर जगह अन्य जीवों और वनस्पतियों का मूक शोषण और हिंसा शामिल है।

हमारी थाली में सजे भोजन और डेयरी उत्पादों की असीमित मांग को पूरा करने के लिए आज ‘फैक्टरी फार्मिंग’ का सहारा लिया जा रहा है। यहाँ गाय, भैंस और मुर्गियों को जीवित प्राणी नहीं, बल्कि महज मुनाफा कमाने का सामान समझा जाता है। इन्हें ताउम्र छोटे दमघोंटू पिंजरों में कैद रखा जाता है और कृत्रिम रूप से उत्पादन बढ़ाने के लिए दर्दनाक हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते हैं। जीवों के प्रति यह क्रूरता हमारे पहनावे में भी साफ दिखती है। सिल्क के कपड़ों के लिए लाखों कीड़ों को जिंदा उबलते पानी में फेंक दिया जाता है, जबकि स्टेटस सिंबल माने जाने वाले चमड़े और महंगे फर के लिए जानवरों की खाल को बेहद बेरहमी से जिंदा ही उतार लिया जाता है।

इस मानवीय लालच की बलि हमारे समृद्ध जंगल भी चढ़ रहे हैं। आलीशान मकानों, हाईवे, और कंक्रीट के शहरों को बसाने के लिए पूरे के पूरे जंगलों का सफाया किया जा रहा है। इस अंधाधुंध कटाई से शेर, हाथी और पक्षियों जैसे वन्यजीवों का प्राकृतिक आशियाना छिन चुका है, जिससे वे बेघर होकर इंसानी बस्तियों में आते हैं और मानव-पशु संघर्ष में मारे जाते हैं। वहीं दूसरी ओर, हमारी दवाओं और कॉस्मेटिक्स की जांच के नाम पर प्रयोगशालाओं के बंद कमरों में चूहों, बंदरों और कुत्तों पर दिल दहला देने वाले परीक्षण किए जाते हैं, जहाँ उनके शरीर में जबरन जहर इंजेक्ट करके उन्हें तड़पने के लिए छोड़ दिया जाता है। मनोरंजन के लिए भी सर्कस और चिड़ियाघरों में इन आज़ाद जीवों को उम्रकैद दे दी जाती है।

यह भयावह स्थिति प्रमाण है कि आधुनिक मानव सभ्यता नैतिक रूप से पूरी तरह विफल हो चुकी है। हम भूल चुके हैं कि इस धरती पर जितना अधिकार हमारा है, उतना ही हक अन्य जीवों का भी है। यदि हमने समय रहते अपनी हिंसक जीवनशैली को नहीं बदला और क्रूरता मुक्त विकल्पों को नहीं अपनाया, तो प्रकृति का यह असंतुलन अंततः स्वयं पूरी मानव जाति को विनाश की ओर ले जाएगा।

दैनिक जीवन की कई आम चीजों के पीछे छिपी जीव हिंसा और पशु क्रूरता (Cruelty) को गहराई से समझने के लिए, यहाँ प्रत्येक उद्योग की पूरी निर्माण प्रक्रिया (Process) का विस्तृत विवरण दिया गया है।

अक्सर हमें लगता है कि जो चीज़ मांस नहीं है, वह अहिंसक है। लेकिन आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में जानवरों के अंगों, हड्डियों और वसा का उपयोग एक सस्ते रॉ-मटेरियल (कच्चे माल) के रूप में किया जाता है।

1. सिल्क / रेशम उद्योग (Silk Industry) — जिंदा उबालने की प्रक्रिया
रेशम पूरी तरह से कीड़ों की जान लेकर ही बनता है। इसके पीछे की प्रक्रिया बेहद दर्दनाक है:

• ककून का निर्माण: रेशम का कीड़ा (Silkworm) अपने चारों ओर लार से एक सुरक्षा कवच बनाता है, जिसे ककून (Cocoon) कहते हैं। इस ककून के अंदर वह कीड़ा धीरे-धीरे तितली में बदलता है।

• जिंदा उबालना: अगर कीड़ा प्राकृतिक रूप से तितली बनकर बाहर निकलेगा, तो वह ककून को काट देगा, जिससे रेशम का लंबा धागा टूट जाएगा। लंबे और अटूट धागे को हासिल करने के लिए, कीड़े के बाहर निकलने से पहले ही लाखों ककूनों को खौलते हुए पानी में डाल दिया जाता है।

• नतीजा: ककून के अंदर मौजूद मासूम कीड़ा उबलकर तड़प-तड़प कर मर जाता है। सिर्फ 1 किलोग्राम शुद्ध रेशम बनाने के लिए लगभग 6,600 से 10,000 कीड़ों को जिंदा उबाला जाता है।

क्या करे? 
अहिंसा सिल्क: शुद्ध सिल्क की जगह ‘अहिंसा सिल्क’ (Eri Silk) खरीदें, जिसमें कीड़े के तितली बनकर ककून से बाहर निकलने के बाद ही धागा निकाला जाता है। आप रेयान, कॉटन या बनारसी कॉटन भी चुन सकते हैं।

2. चमड़ा उद्योग (Leather Industry)
सच: भारत चमड़े के जूते, बेल्ट, बैग और जैकेट का बहुत बड़ा केंद्र है.

हिंसा: हालांकि भारत के कई राज्यों में गोहत्या पर प्रतिबंध है, लेकिन भैंसों, बकरियों, भेड़ों और कानूनी रूप से स्वीकृत अन्य जानवरों को कत्लखानों (Slaughterhouses) में काटा जाता है. चमड़ा कोई उप-उत्पाद (by-product) नहीं है; पशुओं की व्यावसायिक हत्या का एक मुख्य कारण उनकी कीमती खाल (Hide) ही होती है.

क्या करे?
असली चमड़े की जगह PU लेदर (Polyurethane), जूट, कैनवास या आधुनिक ‘कैक्टस/पाइनएप्पल लेदर’ से बने जूते और बेल्ट का उपयोग करें।

3. चांदी का वर्क (Vark) की सच्चाई
ऐतिहासिक सच: शादियों, त्योहारों में मिठाइयों, काजू कतली और पान पर दिखने वाला चांदी का वर्क पारंपरिक रूप से भारी हिंसा से बनता है। पारंपरिक रूप से चांदी को बेहद महीन शीट में बदलने के लिए उसे बकरे या गाय की आंतों (Ox-gut) की परतों के बीच रखकर घंटों पीटा जाता था। पीटने के दौरान जानवरों के ऊतक (Tissues) वर्क में मिल जाते थे। जो अंततः मिठाइयों के माध्यम से इंसानों के पेट में जाते हैं।

• वर्तमान स्थिति (बदलाव): शुद्ध शाकाहारी और जैन समुदाय के विरोध के बाद, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने साल 2016 में चांदी के वर्क को बनाने में जानवरों के अंगों के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया। अब अधिकांश ब्रांडेड मिठाइयों पर मशीन से बना शाकाहारी वर्क इस्तेमाल होता है, लेकिन स्थानीय या असंगठित बाजारों में आज भी पुरानी क्रूर तकनीक का चोरी-छिपे इस्तेमाल देखने को मिल जाता है।

4. जिलेटिन (Gelatin) और कारमाइन (Carmine) की सच्चाई
कैप्सूल और जेली (100% प्रमाणित): दवाइयों के कैप्सूल का जो पारदर्शी कवर होता है और बच्चों की गमी कैंडीज होती हैं, वे जिलेटिन से ही बनती हैं। जिलेटिन पूरी तरह से बूचड़खाने में बचे जानवरों के अवशेषों (हड्डियों और खाल) को उबालकर ही निकाला जाता है। दवाइयों के मामले में इसका एकमात्र शाकाहारी विकल्प ‘HPMC’ (सेल्यूलोज) कैप्सूल है, जो अब धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रहा है।

क्या करे ?
डॉक्टर से हमेशा वेजिटेरियन कैप्सूल (HPMC / वेज कैप्सूल या टैबलेट रूप में दवा देने को कहें। यदि वेज कैप्सूल उपलब्ध न हो, तो उसी साल्ट (Salt) की साधारण टैबलेट (Tablet) या सिरप मांगें।]

5. लिपस्टिक का लाल रंग (100% प्रमाणित): भारत के कॉस्मेटिक और सौंदर्य बाजार (Beauty Market) में बिकने वाली कई प्रसिद्ध ब्रांड्स की लाल, गुलाबी या मैरून रंग की लिपस्टिक, ब्लश और आईशैडो में इस ‘Carmine’ (कारमाइन) रंग का उपयोग धड़ल्ले से किया जाता है। कॉस्मेटिक साइंस में गहरे लाल रंग के लिए ‘Carmine’ (कारमाइन या Cochineal Extract) का उपयोग वैश्विक स्तर पर स्वीकृत है। यह मादा कोचीनियल कीड़ों को सुखाकर और पीसकर ही बनाया जाता है। सौंदर्य उत्पादों के पीछे लिखे इंग्रीडिएंट्स की सूची में इसे ‘CI 75470’ या ‘Crimson Lake’ नाम से देखा जा सकता है। 

क्या करे ?
उत्पाद खरीदते समय पीछे सामग्री की सूची में CI 75470 (Carmine), Tallow, या Gelatin जैसे शब्द देखें और उन्हें न खरीदें।

प्रमाणित ब्रांड्स: भारत में मिलने वाले पूरी तरह शाकाहारी ब्रांड्स जैसे Iba Cosmetics, Plum Good Goodness, Just Herbs या Mamaearth के उत्पाद चुनें, जो 100% वीगन और क्रूरता-मुक्त होने का दावा करते हैं।

भारत सरकार की संस्था FSSAI ने खाद्य पदार्थों (जैसे मिठाई, जूस या आइसक्रीम) में कारमाइन (कोचीनियल कीड़ों से बने रंग) के सीधे उपयोग पर काफी हद तक रोक लगाई है, लेकिन कॉस्मेटिक्स और दवाइयों (Pharmaceuticals) में इसके उपयोग की पूरी कानूनी अनुमति है।

6. डेयरी उद्योग (Commercial Dairy Industry)
सच: भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है, लेकिन यहाँ का दूध उत्पादन अब घरेलू गायों की सेवा तक सीमित नहीं रहा।

हिंसा: बड़े कमर्शियल डेयरी फार्मों में गायों और भैंसों को कृत्रिम तरीकों से लगातार गर्भवती किया जाता है। दूध निकालने के लिए ऑक्सीटोसिन जैसे दर्दनाक हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते हैं। सबसे बड़ी हिंसा नर बछड़ों (Male Calves) के साथ होती है; चूंकि वे दूध नहीं दे सकते, इसलिए उन्हें भूखा मरने के लिए छोड़ दिया जाता है या अवैध रूप से कत्लखानों में बेच दिया जाता है

7. मुर्गियों और अंडों का उद्योग (Poultry & Egg Industry)
सच: अंडे को ‘शाकाहारी’ मानकर खाने का चलन भारत में बहुत बढ़ गया है, लेकिन इसकी बैकस्टेज प्रक्रिया बेहद हिंसक है.

हिंसा: अंडे देने वाली मुर्गियों (Layer Hens) को जीवनभर छोटे से पिंजरे (Battery Cages) में ठूंसकर रखा जाता है, जहाँ वे पंख भी नहीं फैला पातीं। सबसे क्रूर प्रक्रिया ‘मैसरेशन’ (Maceration) है—हैचरी में पैदा होने वाले नर चूजे (Male Chicks) जो अंडे नहीं दे सकते, उन्हें पैदा होते ही जीवित अवस्था में ग्राइंडर मशीनों में पीस दिया जाता है या बोरियों में भरकर दबा दिया जाता है.

8. मनोरंजन और पर्यटन (Entertainment & Tourism)
हिंसा कैसे की जाती है : छुट्टियों में हाथी की सवारी करना, ऊँट की सवारी करना, सर्कस देखना या चिड़ियाघर (Zoo) जाना सीधे तौर पर क्रूरता को बढ़ावा देता है। हाथियों को सवारी के योग्य बनाने के लिए बचपन में मां से अलग किया जाता है और ‘फिंडान’ (Phajaan) नामक प्रक्रिया से गुजारा जाता है, जिसमें उन्हें भूखा रखकर तब तक पीटा जाता है जब तक कि उनका आत्मबल टूट न जाए। डॉल्फिन शो में मछलियों को छोटे टैंकों में भूखा रखकर करतब सिखाए जाते हैं।

बचने का उपाय: जानवरों के मनोरंजन वाले स्थानों पर जाने से पूरी तरह बचें। सफारी के लिए राष्ट्रीय उद्यानों (National Parks/Reserves) में जाएं जहाँ जानवर पिंजरे में बंद होने के बजाय अपने प्राकृतिक आवास में स्वतंत्र रहते हैं।

9. प्लास्टिक बैग (प्लास्टिक की थैलियां (किराने की पन्नियां), दूध के पैकेट आदि) और टायर (Stearic Acid) की सच्चाई 

• वैज्ञानिक सच: टायर और प्लास्टिक निर्माण में स्टीयरिक एसिड (Stearic Acid) का उपयोग एक ‘लुब्रिकेंट’ या ‘स्टेबलाइजर’ के रूप में अनिवार्य रूप से किया जाता है। यह रसायन को आपस में चिपकने से रोकता है और टायर के रबर को लचीला व मजबूत बनाता है।

• स्रोत की दुविधा: स्टीयरिक एसिड दो स्रोतों से मिलता है—जानवरों की चर्बी (Tallow) या पाम ऑयल (ताड़ का तेल)। चूंकि जानवरों की चर्बी व्यावसायिक रूप से बहुत सस्ती मिलती है, इसलिए दुनिया भर के अधिकांश टायर निर्माता (जैसे मिशेलिन, एमआरएफ आदि) पारंपरिक रूप से पशु-आधारित स्टीयरिक एसिड का ही उपयोग करते हैं। इसलिए साधारण टायर या प्लास्टिक बैग्स को तकनीकी रूप से 100% ‘वेगन’ (Vegan) नहीं माना जाता हैं।

भारत के सभी बड़े टायर निर्माता (जैसे MRF, CEAT, Apollo Tyres, JK Tyre) टायर बनाने की प्रक्रिया में स्टीयरिक एसिड का भारी मात्रा में उपयोग करते हैं।

चर्बी का उपयोग क्यों?: 
भारत में कत्लखानों से निकलने वाली पशुओं की चर्बी (Animal Tallow) बेहद सस्ती मिलती है। इस चर्बी से निकाला गया स्टीयरिक एसिड पौधों (पाम ऑयल) से निकलने वाले एसिड की तुलना में काफी सस्ता पड़ता है। इसलिए भारत में बनने वाले 95% से अधिक टायर तकनीकी रूप से ‘वीगन’ (Vegan) नहीं होते। 

यद्यपि आप सड़कों पर चलने वाली गाड़ियों के टायरों को आसानी से नहीं बदल सकते, लेकिन प्लास्टिक के मामले में आप जीव हिंसा को पूरी तरह रोक सकते हैं: 

प्लास्टिक का पूर्ण त्याग : रोजमर्रा की प्लास्टिक थैलियों की जगह जूट (Jute) या सूती (Cotton) कपड़ों के थैलों का उपयोग करें। यह न केवल पर्यावरण को बचाएगा, बल्कि प्लास्टिक निर्माण में छिपी अनजानी जीव हिंसा को भी समाप्त करेगा।

प्रीमियम टायर कंपनियाँ : भारत में अब Michelin और Continental जैसी अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के कुछ चुनिंदा प्रीमियम टायरों की सीरीज उपलब्ध है, जो यह प्रमाणित करती हैं कि वे केवल पर्यावरण-अनुकूल और प्लांट-बेस्ड (Vegetable-sourced) स्टीयरिक एसिड का ही उपयोग करते हैं।

10. सॉफ्ट टॉयज और मखमली कंबल (Plush Toys & Soft Blankets)
हिंसा कैसे की जाती है : बच्चों के खेलने वाले टेडी बियर (Soft Toys) और बेहद मुलायम मखमली कंबलों को छूने पर जो अत्यधिक कोमलता (Velvety feel) महसूस होती है, वह अक्सर एक केमिकल फिनिशिंग के कारण होती है। कपड़ा मिलों में इन सिंथेटिक धागों को मुलायम बनाने के लिए पशु वसा से बने सॉफ्टनर्स से प्रोसेस किया जाता है।

बचने का उपाय : बच्चों के लिए खिलौने या कंबल खरीदते समय 100% ऑर्गेनिक कॉटन, लिनन या जूट से बने उत्पाद चुनें। केवल वही ब्रांड लें जिन पर ‘GOTS’ (Global Organic Textile Standard) या वीगन होने का प्रामाणिक प्रमाण हो।

11. परफ्यूम और डियोड्रेंट (Perfumes & Deodorants)
जीव हिंसा का कारण: महंगे और लंबे समय तक टिकने वाले परफ्यूम में खुशबू को बांधकर रखने के लिए ‘मस्क’ (Musk / कस्तूरी) और ‘सिवेट’ (Civet) का उपयोग किया जाता है। कस्तूरी मृग (Musk Deer) को इसके लिए मार दिया जाता है, और सिवेट बिल्ली (Civet Cat) को छोटे पिंजरों में कैद करके उनके जननांगों से कस्तूरी निकाली जाती है।

कैसे बचें? : हमेशा उन परफ्यूम्स को चुनें जिन पर स्पष्ट रूप से “100% Synthetic Musk” या “Vegan” लिखा हो। आज की आधुनिक कंपनियाँ रसायनों और पौधों (जैसे कस्तूरी के पौधे) से हूबहू वैसी ही खुशबू प्रयोगशाला में तैयार कर लेती हैं।

12. कंप्यूटर, स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स (Electronics & LCD Screens)
हिंसा कैसे की जाती है : मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर की LCD (लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले) स्क्रीन को बनाने में ‘कोलेस्ट्रॉल’ (Cholesterol) का उपयोग किया जाता है। यह कोलेस्ट्रॉल औद्योगिक रूप से भेड़ की ऊन से निकलने वाली चर्बी (Lanolin) या गाय-भैंस की चर्बी से निकाला जाता है। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स के पुर्जों को आपस में जोड़ने वाले कुछ विशेष गोंद (Adhesives) में जानवरों की हड्डियों और त्वचा से बना जिलेटिन या ग्लू होता है।

बचने का उपाय : इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में पशु अवयवों का पूरी तरह से बचना फिलहाल व्यावहारिक रूप से असंभव है क्योंकि इसके पूरी तरह वीगन विकल्प बाजार में मुख्यधारा में नहीं हैं। इसका एकमात्र उपाय है कि इलेक्ट्रॉनिक्स का कम से कम उपयोग करें, गैजेट्स को बार-बार न बदलें और पुराने उपकरणों को रीसायकल (E-waste recycling) के लिए दें ताकि नए उपकरणों की मांग कम हो।

13. पेंट और दीवार की पुट्टी (Paints & Distempers)
जीव हिंसा का कारण: घरों की दीवारों पर होने वाले पेंट और लकड़ी पर होने वाली पॉलिश (Varnish) में चमक और टिकाऊपन लाने के लिए ‘शेलैक’ (Shellac / लाख) का उपयोग किया जाता है। शेलैक ‘कैर Lack’ नाम के लाखों छोटे कीड़ों के मलमूत्र और उनके शरीर के अर्क से बनता है, जो पेड़ों की टहनियों पर जमा होते हैं। इन्हें निकालते समय लाखों कीड़े कुचलकर मर जाते हैं। इसके अलावा, कुछ पेंट्स में बाइंडर के रूप में कैसीन (Casein-दूध का प्रोटीन) भी मिलाया जाता है।

कैसे बचें? : भारत में अब कई बड़ी कंपनियाँ (जैसे Asian Paints, Berger Paints) पर्यावरण-अनुकूल और “Water-based Acrylic” पेंट्स बनाती हैं, जो पूरी तरह से सिंथेटिक (सिंथेटिक पॉलीमर) होते हैं और जिनमें पशु तत्वों का उपयोग नहीं होता।

14. माचिस और पटाखें (Matches & Firecrackers)
जीव हिंसा का कारण: माचिस की तीली के ऊपर जो मसाला (ज्वलनशील पदार्थ) लगा होता है, उसे तीली की लकड़ी पर मजबूती से चिपकाने के लिए “एनिमल ग्लू” (Animal Glue / जिलेटिन का एक रूप) का उपयोग बाइंडिंग एजेंट के रूप में किया जाता है। यह ग्लू जानवरों की हड्डियों और खुरों को उबालकर बनाया जाता है।

कैसे बचें? : माचिस की जगह घरों में खाना पकाने के लिए इलेक्ट्रिक या गैस लाइटर (Gas Lighters) का उपयोग करें। यह माचिस की तुलना में पूरी तरह से अहिंसक और सुरक्षित विकल्प है।

15. मोमबत्तियां और क्रेयॉन्स (Candles & Crayons)
जीव हिंसा का कारण: पारंपरिक मोमबत्तियों और बच्चों के रंगने वाले क्रेयॉन्स (Crayons) को ठोस और कड़ा बनाने के लिए उनमें स्टीयरिक एसिड (पशु वसा) या मधुमक्खी के मोम (Beeswax) का उपयोग किया जाता है। मधुमक्खी का मोम निकालते समय अक्सर उनके छत्ते और बच्चों को भारी नुकसान पहुँचता है।

कैसे बचें? : मोमबत्तियां खरीदते समय हमेशा “Soy Wax Candles” (सोयाबीन के मोम से बनी) या “Paraffin Wax Candles” (पेट्रोलियम से बनी) मोमबत्तियां ही खरीदें। बच्चों के लिए 100% प्लांट-बेस्ड या ऑर्गेनिक क्रेयॉन्स बाजार में उपलब्ध हैं।

16. हवन सामग्री और समिधा (Havan Samagri)
हिंसा कैसे की जाती है (प्रक्रिया) : बाज़ार में मिलने वाली रेडीमेड पैकेट वाली हवन सामग्री को कीड़ों और सीलन से बचाने के लिए अक्सर रासायनिक कीटनाशकों (Fumigants) से ट्रीट किया जाता है। इसके अलावा, हवन सामग्री के मिश्रण में खुशबू और चमक बढ़ाने के लिए कभी-कभी पशु वसा के अर्क (Stearic derivatives) या घटिया दर्जे के शेलक (Shellac/लाख) का लेप किया जाता है। हवन के दौरान जब यह सामग्री जलती है, तो ये अदृश्य तत्व भी वायु में मिल जाते हैं।

बचने का उपाय : रेडीमेड पैकेट खरीदने के बजाय पंसारी (आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी विक्रेता) की दुकान से अलग-अलग शुद्ध सामग्रियां लाएं। जैसे— जौ, काले तिल, शुद्ध चंदन का बुरादा, जटामांसी, गूगल, और लोबान। इन्हें घर पर लाकर खुद मिलाएं। यह पूरी तरह शुद्ध और प्रामाणिक तरीका है।

17. चमकीले आसन और वस्त्र (Silk & Leather-trimmed Mats)
हिंसा कैसे की जाती है (प्रक्रिया) : पूजा घर में देवताओं के विग्रह (मूर्तियों) को सजाने के लिए चमकीले वस्त्र या आपके बैठने के लिए जो सुंदर आसन इस्तेमाल होते हैं, वे अक्सर पारंपरिक रेशम (Silk) से बने होते हैं। जैसा कि पहले बताया गया है, रेशम के निर्माण में लाखों कीड़ों को जिंदा उबाला जाता है। इसके अलावा, कुछ महंगे और भारी आसनों के कोनों को सीधा रखने के लिए या बॉर्डर पर मजबूती देने के लिए चमड़े की बारीक पट्टियों (Leather trimmings) या पशु वसा आधारित गोंद का उपयोग किया जाता है।

बचने का उपाय : भगवान के वस्त्रों और अपने बैठने के आसन के लिए केवल 100% शुद्ध सूती (Cotton), लिनन (Linen), खादी, या जूट (Jute) के कपड़ों का ही चयन करें। ये वस्त्र पूरी तरह सात्विक, ठंडे और अहिंसक होते हैं।

18. कई लोगों को लगता है कि शंख समुद्र के किनारे पाए जाने वाले निर्जीव पत्थर या हड्डियाँ हैं। असल में, शंख ‘मॉलस्क’ (Mollusks / घोंघे की प्रजाति) नाम के एक जीवित समुद्री जीव का घर (बाहरी कवच) होता है। जब वह जीव जीवित होता है, तो व्यावसायिक तौर पर शंख प्राप्त करने के लिए इन जीवों को समुद्र से जाल में भरकर निकाला जाता है। इसके बाद इन्हें ज़िंदा ही उबलते हुए पानी में डाल दिया जाता है या तेज़ धूप में तड़पने के लिए छोड़ दिया जाता है, ताकि अंदर का जीव मरकर बाहर निकल जाए और अंदर से बिल्कुल साफ, चमकदार शंख मिल सके।

बचने का उपाय : यदि आपके घर में पीढ़ियों पुराना शंख पहले से मौजूद है, तो उसकी देखभाल करें। लेकिन नया शंख खरीदने से पूरी तरह बचें। पूजा की शुरुआत और आरती के समय ध्वनि करने के लिए पीतल, तांबे या कांस्य की घंटी या झांझ का उपयोग करें, जो धातुओं से बनती हैं और पूरी तरह अहिंसक हैं।

19. सस्ते सिंदूर और कुमकुम (Vermilion & Kumkum)
हिंसा कैसे की जाती है (प्रक्रिया) : पारंपरिक और सात्विक कुमकुम शुद्ध हल्दी और गीले चूने (Calcium Hydroxide) के रासायनिक मिलन से बनता है, जिससे हल्दी का पीला रंग प्राकृतिक रूप से गहरे लाल रंग में बदल जाता है। लेकिन बाज़ार के सस्ते सिंदूर को गाढ़ा लाल, चमकदार और जल-प्रतिरोधी (Waterproof) बनाने के लिए उसमें ‘कारमाइन’ (Carmine / नेचुरल रेड 4) मिलाया जाता है। कारमाइन बनाने के लिए ‘कोचिनियल’ (Cochineal) नामक लाखों छोटे मादा कीड़ों को इकट्ठा करके सुखाया जाता है और फिर उबलते पानी में कुचलकर उनका गाढ़ा लाल अर्क निकाला जाता है।

बचने का उपाय : ऐसा कुमकुम खरीदें जो स्पष्ट रूप से ‘100% हल्दी आधारित’ (हल्दी-based Kumkum) या 'हर्बल सिंदूर' होने का दावा करता हो। आप घर पर भी शुद्ध पिसी हल्दी में थोड़ा सा खाने वाला चूना और नींबू का रस मिलाकर शुद्ध, अहिंसक कुमकुम बना सकते हैं।

💡 सात्विक पूजा का मूल विचार
सनातन धर्म में कहा गया है— “पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति” (अर्थात: जो कोई मुझे भक्तिपूर्वक एक पत्ता, एक फूल, एक फल या थोड़ा सा जल भी अर्पित करता है, मैं उसे स्वीकार करता हूँ)। ईश्वर को महंगे, कृत्रिम और चमकीले उत्पादों की आवश्यकता नहीं है। आपकी पूजा जितनी सरल और प्रकृति के करीब होगी, वह उतनी ही अधिक अहिंसक और फलदायी होगी।

20. चीनी मिट्टी के बर्तन (Bone China Crockery)
जीव हिंसा का कारण: भारत के मध्यम और उच्च वर्गीय परिवारों में चाय पीने या मेहमानों को खाना परोसने के लिए जो सफ़ेद, हल्के और चमकदार बर्तनों का उपयोग होता है, उन्हें ‘बोन चाइना’ (Bone China) कहा जाता है। इसके नाम में ही इसका सच छिपा है। इन बर्तनों को अत्यधिक सफ़ेदी और मजबूती देने के लिए कत्लखानों से लाई गई जानवरों (मुख्यतः गाय और भैंस) की हड्डियों की राख (Bone Ash) को मिट्टी में मिलाया जाता है। बर्तन के कुल वजन का लगभग 30% से 50% हिस्सा पशुओं की हड्डियों का ही होता है।

कैसे बचें?: घर के बर्तनों के लिए हमेशा ओपलवेयर (Opalware), साधारण चीनी मिट्टी (Ceramic / Stoneware), कांच (Glass), या पारंपरिक स्टील और तांबे के बर्तनों का उपयोग करें। Borosil और La Opala जैसी कंपनियाँ भारत में 100% बोन-फ्री ओपलवेयर बर्तन बनाती हैं।

21. बेकिंग उत्पाद और ब्रेड (Commercial Bread & Buns)
जीव हिंसा का कारण: बेकरी में बनने वाले कमर्शियल ब्रेड, बर्गर बन्स, डोनट्स और टोस्ट को अत्यधिक सोफ़्ट (मुलायम) बनाने और उनकी शेल्फ-लाइफ बढ़ाने के लिए ‘एल-सिस्टीन’ (L-Cysteine / ई-नंबर E920) नाम का एक अमीनो एसिड मिलाया जाता है। व्यावसायिक रूप से इस तत्व का सबसे सस्ता स्रोत पशुओं के बाल, सुअर के बाल और बत्तखों के पंख होते हैं, जिन्हें रसायनों में घोलकर यह एसिड निकाला जाता है।

कैसे बचें?: स्थानीय या पैकेज्ड ब्रेड खरीदते समय पीछे की सामग्री में E920 की जांच करें। भारत में अब कई बड़ी कंपनियाँ (जैसे Harvest Gold, English Oven) अपने पैकेट पर ‘100% Veg’ का मार्क लगाती हैं, जिसका मतलब है कि वे सिंथेटिक या पौधों से प्राप्त एल-सिस्टीन का उपयोग करती हैं।

22. महंगे जूते और कपड़ों की पॉलिश (Shoe Polish & Leather Waxes)
जीव हिंसा का कारण : जूतों को चमकाने वाली पारंपरिक पॉलिश और लिक्विड वैक्स में पानी को रोकने और चमक बढ़ाने के लिए मधुमक्खी के मोम (Beeswax) का उपयोग किया जाता है। व्यावसायिक स्तर पर मधुमक्खी का मोम निकालते समय कंबोडियाई या भारतीय जंगलों/फार्मों में छत्तों को जला दिया जाता है, जिससे लाखों मधुमक्खियाँ और उनके अंडे जिंदा जल जाते हैं।

कैसे बचें? : ऐसी शू-पॉलिश या वैक्स चुनें जो पैराफिन वैक्स (Paraffin Wax) या कार्नौबा वैक्स (Carnauba Wax – जो पौधों की पत्तियों से मिलता है) पर आधारित हों।

23. वायलिन, सितार और गिटार के तार (Musical Instrument Strings & Bows)
जीव हिंसा का कारण : भारत के पारंपरिक संगीत वाद्यों जैसे कि वायलिन, सारंगी और सितार में दो तरह से जीव हिंसा जुड़ी होती है। पहला, वायलिन को बजाने वाली कमानी (Bow) के बाल घोड़े की पूंछ के असली बालों (Horsehair) से बनाए जाते हैं। दूसरा, शास्त्रीय वाद्यों के कुछ विशेष तार (Strings) पारंपरिक रूप से 'कैटगट' (Catgut) से बनते हैं, जो वास्तव में बिल्ली के नहीं बल्कि भेड़, बकरी या मवेशियों की आंतों (Animal Intestines) को सुखाकर और ऐंठकर बनाए जाते हैं।

कैसे बचें?: आधुनिक समय में भारत में भी सिंथेटिक तार (Nylon or Steel Strings) और सिंथेटिक कमानी (Synthetic Horsehair Bows) आसानी से उपलब्ध हैं। संगीत वाद्ययंत्र खरीदते समय दुकानदार से केवल सिंथेटिक या मेटल-आधारित गियर की ही मांग करें।

💡 औद्योगिक उत्पादों में यह छिपा हुआ पशु तत्व इसलिए होता है क्योंकि भारत में खाने की चीज़ों के अलावा अन्य चीज़ों पर ‘हरा बिंदु’ (Green Dot) लगाना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है। भारत का आम उपभोक्ता जब कोई सामान खरीदता है, तो वह केवल पैकेट पर ‘हरा बिंदु’ (Green Dot) देखता है। लेकिन कानूनन यह हरा बिंदु केवल खाने की चीज़ों के लिए अनिवार्य है, औद्योगिक उत्पादों (जैसे पेंट, माचिस, मोमबत्ती, डिटर्जेंट आदि) के लिए नहीं। इसी कमी के कारण भारत में अनजाने में यह जीव हिंसा हमारे घरों तक पहुँच जाती है।

शाकाहारी इंसान के लिए 3 अचूक नियम (Golden Rules):

1.. FSSAI वीगन लोगो देखें: भारत सरकार ने खाद्य पदार्थों और कुछ उत्पादों के लिए एक विशेष FSSAI Vegan Logo (एक हरे रंग का पत्ता जिसके नीचे ‘V’ लिखा होता है) जारी किया है। यह लोगो गारंटी देता है कि उत्पाद के निर्माण की किसी भी प्रक्रिया में जीव हिंसा नहीं हुई है।

2.. क्रूरता-मुक्त (Cruelty-Free) चिह्न: सौंदर्य प्रसाधनों पर छपा हुआ ‘Leaping Bunny’ (उछलते हुए खरगोश का निशान) यह प्रमाणित करता है कि इसे बनाने में किसी जानवर पर टेस्ट नहीं किया गया है।

3.. सचेत उपभोक्ता बनें: किसी भी नए उत्पाद को खरीदने से पहले उसके पीछे लिखे तत्वों (Ingredients) को पढ़ने की आदत डालें।

चूँकि हर सामग्री का नाम याद रखना मुश्किल है, इसलिए आप अपने मोबाइल का उपयोग कर सकते हैं:
• Barnivore वेबसाइट: यदि आप किसी जूस, कोल्ड ड्रिंक या अन्य पेय पदार्थ के बारे में जानना चाहते हैं, तो Barnivore.com पर उस ब्रांड का नाम सर्च करें। यह आपको तुरंत बता देगा कि वह शाकाहारी है या नहीं।

• सामग्री को तुरंत सर्च करें: यदि आपको किसी प्रोडक्ट के पीछे कोई अजीब केमिकल का नाम (जैसे Oleamide या Gelatin) दिखे, तो तुरंत गूगल पर “[केमिकल का नाम] source vegan or animal” लिखकर सर्च कर लें।