Novel Kulhad Bhara Ishq - Review in Hindi Book Reviews by Vishwas Panday books and stories PDF | उपन्यास कुल्हड़ भरा इश्क़ - समीक्षा

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उपन्यास कुल्हड़ भरा इश्क़ - समीक्षा

समीक्षा : कुल्हड़ भरा इश्क़ by कौशलेन्द्र मिश्र

दवा और प्रसाद उतना ही लेना चाहिए जितना देने वाले देते है , अधिक लेने के लिए जबरदस्ती नहीं करी जाती । इश्क़ की खुराक इतना आतुर करती है के लोग खुद पर नियंत्रण नहीं रख पाते और अपनी तबीयत की औकात से ज्यादा ले लेते है फिर पढ़ाई पर गाज गिर जाती है। कुल्हड़ भरा इश्क़ प्यार पर मार्कर से गोला करके खुराक बताने वाला है जिससे ये पता चलता रहे कि कितना इश्क़ जीना है और कितनी पढ़ाई करनी है।

ये शुरुवात है कौशलेंद्र मिश्र का लिखे हुए उपन्यास कुल्हड़ भरा इश्क़ की जो कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्रों की कहानी के रूप में प्रस्तुत किया है जिसके मुख्य पात्र सुबोध चौबे है जो कि बीएचयू में बीएड के छात्र है और हॉस्टल में रख कर अपनी पढ़ाई कर रहे है  और जिनके प्यार में ये पड़ गए है वो इनकी क्लासमेट रोली सिंह है जो कि कॉलेज की बहुत बोल्ड, बिंदास और दबंग टाइप की छात्रा है !आपने कभी मिट्टी के कुहाड़ में चाय पी है ? जिस तरह मिट्टी का कुल्हड़ खुद अपने आप में चाय के स्वाद  में एक सोंधी से महक बड़ा देता है वैसे इस उपन्यास में आपको अपने छात्र जीवन की यादों की महक इस उपन्यास को मनोरंजक और रोचक बना देता है ...

सुबोध चौबे है सीधे साधे टाइप के व्यक्ति और इनकी मित्र मंडली में दो खास दोस्त है  ज्योतिप्रकाश और अष्टावक्र  जिनके साथ ये अपने दिल की बात कर लेते है ! वैसे इस कहानी में एक और रोचक पात्र है जिनका नाम है कैंची गुरु ..... वैस तो कैंची गुरु भी इन सबके सहपाठी है  पर उनको कैंची गुरु इसलिए कहा जाता है क्योंकि वो कॉलेज में लड़के लड़कियों की जोड़ी का टांका लगवा भी देते है बनी बनाई जोड़ी  पर कैंची चलवा भी देते है वैसे तो कहानी में और भी बहुत सारे पात्र है जिन्होंने कहानी को बंधे रखा है जिसमें रोली के भाई जो कि राजपूत होने के साथ साथ अपने भाई होने धर्म को बखूबी निभाते है साथ ही साथ सुबोध के माता पिता की खुली मानसिकता भी आज के दौर में काफी अच्छे से सुलझी हुई दिखाई दी । इस कहानी में वैसे तो मुख्य पात्र सुबोध का है पर रोली का बिंदास जीवन जीने का नजरिया और बेबाक और बिंदास कुछ भी बोल देने वाली दबंग लड़की का किरदार आपका मन मोह लेता है जो इस कहानी को और रोमांचक और मनोरंजक बना देती है ! 

कॉलेज और हॉस्टल लाइफ़ के बीच अपनी पढ़ाई और कैरियर के बीच हल्के फुल्के रोमांस को किस तरह जिया जाता है ये दिखाने की अच्छी कोशिश है कुल मिला कर आपको ये अपने छात्र जीवन की याद दिला देती है ....।

लेखन की भाषा बहुत ही सरल, सहज और दिल को छू लेने वाली है। संवाद इतने स्वाभाविक हैं कि पाठक आसानी से खुद को कहानी से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं।

कुल मिला कर अच्छी कहानी है जिसमें ना ज्यादा तामझाम है ना ही बोरियत महसूस होती है महसूस होती है तो कुल्हड़ की चाय की सोंधी महक ....!

समीक्षा by विश्‍वास