Amavasya ki Kali Raat ek Kouff ya Shraap - 1 in Hindi Spiritual Stories by RAAHULL SHARMA books and stories PDF | अमावस्या की काली रात एक खोफ या श्राप - 1

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अमावस्या की काली रात एक खोफ या श्राप - 1

अध्याय: देवक़ेड़ा का रहस्य
छत्तीसगढ़ के भिलाई शहर की चकाचौंध से लगभग 200 किलोमीटर दूर, जहाँ मोबाइल के सिग्नल साथ छोड़ देते हैं और सड़कों की जगह ऊबड़-खाबड़ पगडंडियाँ ले लेती हैं, वहाँ बसा है—देवक़ेड़ा।
चारों तरफ ऊँचे पहाड़ और इतने घने जंगल कि सूरज की रोशनी भी ज़मीन को छूने के लिए तरस जाए। दिन में तो यह गाँव किसी जन्नत जैसा खूबसूरत दिखता है, लेकिन जैसे-जैसे सूरज ढलता है, यहाँ की हवाएँ कुछ अजीब सी सरसराहट पैदा करने लगती हैं।
गाँव के मुहाने पर एक पुराना बरगद का पेड़ है, जिसे गाँव वाले 'रक्षक' भी कहते हैं और 'यमदूत' भी। देवक़ेड़ा के लोगों का मानना है कि इस गाँव की सीमा के भीतर पैर रखते ही वक्त बदल जाता है। यहाँ के नियम शहर जैसे नहीं हैं, यहाँ के नियम पूर्वजों के खौफ और मान्यताओं से बँधे हैं।
खासकर तब, जब अमावस की काली रात करीब होती है।
गाँव के बुज़ुर्ग कहते हैं, "भिलाई की सड़कों पर दौड़ती गाड़ियाँ तुम्हें रफ्तार दे सकती हैं, लेकिन देवक़ेड़ा के जंगलों में तुम्हारी रफ्तार ही तुम्हारी जान की दुश्मन बन सकती है। यहाँ अंधेरा बोलता है, और जो उसे सुन लेता है, वो कभी वापस नहीं लौटता।"
अध्याय: श्रापित चौखट और खौफनाक परंपरा
देवक़ेड़ा गाँव की सीमा जहाँ खत्म होती है और घने जंगलों की काली छाया शुरू होती है, वहीं खड़ी है वह विशाल और जर्जर इमारत—जिसे इलाक़े के लोग सिर्फ 'भूतिया हवेली' के नाम से जानते हैं।
कहा जाता है कि उस हवेली की दीवारों को इंसानी खून और आंसुओं से सींचा गया है। गाँव का सबसे बड़ा डर यह है कि अगर कोई नया शादीशुदा जोड़ा भूलकर भी उस हवेली की परछाईं में कदम रख दे, तो वह कभी वापस नहीं लौटता। लोग दबी ज़ुबान में कहते हैं कि उस हवेली को किसी सुहागन का श्राप मिला हुआ है, जिसे उसकी शादी की रात ही वहाँ मार दिया गया था। तब से, वह रूह आज भी अपने अधूरे प्यार या इंतकाम के लिए हर नए जोड़े को अपना शिकार बनाती है।
हवेली के ऊंचे दरवाज़े, टूटी हुई खिड़कियाँ और वहां से आने वाली पायल की आवाज़ें चीख-चीख कर कहती हैं—"यहाँ आना मना है।" शहर से आए नए जोड़े अक्सर इसे 'अंधविश्वास' मानकर चुनौती देने की गलती कर बैठते हैं, लेकिन देवक़ेड़ा का इतिहास गवाह है कि जिसने भी उस हवेली की चौखट लांघी, उसका नाम सिर्फ गाँव के मंदिर के पीछे बने पत्थरों (स्मार्कों) पर ही मिला।
अध्याय: देवक़ेड़ा की रस्में और 'भूखी दुल्हन' का खौफ
देवक़ेड़ा में कदम रखते ही हवा का रुख बदल जाता है। यहाँ का सबसे बड़ा नियम है—"मान्यता को मत चुनौती देना।" गाँव के लोग कहते हैं कि इस जंगल और हवेली के बीच एक ऐसी रूह भटकती है जिसे लोग 'भूखी दुल्हन' कहते हैं।
वह भूख खाने की नहीं, बल्कि सुहाग और ज़िंदगी की है।
गाँव की अजीब मान्यताएँ:
शाम ढलने के बाद कोई भी नवविवाहित स्त्री अपने बालों में चमेली का फूल नहीं लगाती, क्योंकि उसकी महक उस 'भूखी दुल्हन' को बुला लेती है।
हवेली की तरफ मुख करके कभी सिंदूर नहीं लगाया जाता।
कहा जाता है कि अगर कोई जोड़ा इन नियमों को तोड़ता है, तो रात के सन्नाटे में उन्हें घुंघरुओं की आवाज़ सुनाई देने लगती है। यह इस बात का संकेत है कि 'भूखी दुल्हन' ने अपना अगला शिकार चुन लिया है।
खौफनाक मंज़र:
गाँव के लोग बताते हैं कि जो जोड़ा हवेली की मान्यताओं का अपमान करता है, उसे वह दुल्हन पहले सम्मोहित करती है। वह हवेली की खिड़की पर लाल जोड़े में सजी बैठी दिखाई देती है। लेकिन जैसे ही कोई पास जाता है, उसका चेहरा किसी राख की तरह काला और आँखें जलते हुए अंगारे जैसी दिखने लगती हैं। वह उन्हें अपनी भूख का निवाला बना लेती है और फिर वह जोड़ा कभी गाँव की सीमा से बाहर नहीं जा पाता।
अध्याय: सन्नाटे वाली शादियाँ
देवक़ेड़ा में शादियाँ वैसी नहीं होतीं जैसी बाकी दुनिया में होती हैं। जहाँ शहरों में ढोल-नगाड़े, बैंड-बाजा और रात भर रोशनी का जश्न होता है, वहीं देवक़ेड़ा की शादियाँ किसी मातम जैसी खामोश होती हैं।
यहाँ का नियम पत्थर की लकीर है—शादी सिर्फ दिन के उजाले में होगी और सूरज ढलने से पहले दुल्हन की विदाई होकर वह घर के भीतर पहुँच जानी चाहिए। न कोई शहनाई बजती है, न कोई पटाखा फोड़ा जाता है। यहाँ तक कि बाराती भी आपस में ऊँची आवाज़ में बात नहीं करते।
गाँव वालों का मानना है कि अगर शोर हुआ, तो वह 'भूखी दुल्हन' जाग जाएगी। उसे संगीत और जश्न की आवाज़ से नफरत है, क्योंकि उसकी अपनी शादी की रात चीखों और सन्नाटे में बदल गई थी। वह किसी और की खुशियों की आवाज़ बर्दाश्त नहीं कर सकती।
एक बार एक रईस परिवार ने इन नियमों को मानने से इनकार कर दिया था। उन्होंने रात में बारात निकाली और बैंड-बाजा बजवाया। कहते हैं कि जैसे ही पहली शहनाई गूँजी, पूरे गाँव की मशालें एक साथ बुझ गईं। अगले दिन सुबह जब सूरज निकला, तो पूरी बारात हवेली के सामने बेसुध पड़ी थी और दूल्हा-दुल्हन का कहीं पता नहीं था। तब से, देवक़ेड़ा की शादियों में सिर्फ सन्नाटा बोलता है।
अध्याय: राजसी शादी और आने वाला तूफान
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर आज रोशनी से नहाई हुई थी। शहर के सबसे महंगे रिसॉर्ट में एक ऐसी शादी हो रही थी, जिसकी भव्यता ने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। यह शादी थी—छत्तीसगढ़ के 'स्टील किंग' अमन भाटिया के इकलौते वारिस कृष्ण भाटिया और प्रदेश के ताकतवर वन संसाधन मंत्री विजय नारायण खुराना की लाडली बेटी रश्मि खुराना की।
भव्यता का नज़ारा:
हज़ारों की भीड़, देश-विदेश से आए मेहमान, और फूलों से सजा ऐसा मंडप जो किसी स्वर्ग के महल जैसा लग रहा था। स्टील किंग ने अपने बेटे की शादी में पानी की तरह पैसा बहाया था। चारों तरफ ढोल-नगाड़ों की गूँज थी, आतिशबाज़ी से आसमान रंगीन हो रहा था और संगीत ऐसा था कि मील दूर तक उसकी आवाज़ सुनाई दे रही थी।
किरदारों का परिचय:
कृष्ण भाटिया: एक मॉडर्न, निडर और तर्क पर विश्वास करने वाला नौजवान, जिसे पुरानी कहानियों और अंधविश्वासों पर ज़रा भी यकीन नहीं।
रश्मि खुराना: बला की खूबसूरत और पढ़ी-लिखी लड़की, जिसके पिता का प्रभाव पूरे राज्य के जंगलों और ज़मीनों पर है।
अध्याय: वदियों का बुलावा और एक अनजाना सफर
रायपुर की वह आलीशान शादी पूरी कुशलता के साथ संपन्न हो गई थी। चारों तरफ खुशियों का माहौल था। विदाई की रस्में पूरी हुईं और रश्मि ने भारी मन से लेकिन नई उम्मीदों के साथ भाटिया खानदान की बहू के रूप में कदम रखा।

 जब कृष्ण और रश्मि को एक मॉडर्न और हाई-प्रोफाइल कपल के तौर पर दिखाया गया है, तो आखिर ऐसी क्या परिस्थिति बनती है कि उन्हें रायपुर की चकाचौंध छोड़ देवक़ेड़ा के इन बीहड़ जंगलों और कच्चे रास्तों की तरफ जाना पड़ता है?


 रश्मि के पिता विजय नारायण खुराना वन संसाधन मंत्री हैं, जिनका प्रभाव राज्य के जंगलों पर है। क्या देवक़ेड़ा के जंगलों या उस 'भूतिया हवेली' से उनका कोई पुराना व्यावसायिक या व्यक्तिगत इतिहास जुड़ा है?


 देवक़ेड़ा की सीमा में कदम रखते ही क्या कृष्ण अपनी तार्किक सोच (Logical Thinking) के कारण गाँव के उन अजीबो-गरीब नियमों (जैसे—चमेली का फूल न लगाना, सिंदूर न लगाना) का मज़ाक उड़ाएगा? और क्या रश्मि अपने परिवार के प्रभाव के घमंड में उस 'भूतिया हवेली' की चौखट लांघने की गलती कर बैठेगी?
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