Avni ek Atut Vishwas - 1 in Hindi Love Stories by RAAHULL SHARMA books and stories PDF | अवनि एक अटूट विश्वास - 1

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अवनि एक अटूट विश्वास - 1

कानपुर की कड़कड़ाती ठंड में जब सूरज की पहली किरण गंगा के घाटों को छूती है, तब शहर के बीचों-बीच खड़ी 'गोयंका हवेली' अपनी भव्यता के साथ जागती है।



यह सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि कानपुर की रईसी का सबसे बड़ा प्रतीक है। 


शहर का बच्चा-बच्चा जानता है कि सेठ श्याम सुंदर गोयंका के पास जितना सोना है, उससे कहीं अधिक उनका सम्मान है। गोयंका ज्वेलर्स का नाम कानपुर ही नहीं, बल्कि लखनऊ और बनारस तक एक भरोसे का नाम है।



हवेली के ऊंचे दरवाजों पर आज मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में ताजे गेंदे के फूलों के तोरण सजे हैं। आंगन में तिल और गुड़ की भीनी-भीनी खुशबू तैर रही है। हवेली का हर कोना चहल-पहल से भरा है। चाचा-चाची, ताऊ-ताई और भाई-बहनों की हंसी-ठिठोली से हवेली गूंज रही है।




अवनि: सादगी और भक्ति की प्रतिमूर्ति


इसी शोर-शराबे के बीच, हवेली के अपने निजी मंदिर में, मोहन गोयंका की इकलौती बेटी अवनि भगवान कृष्ण की प्रतिमा के सामने बैठी है। 


केसरिया रंग की साड़ी, माथे पर छोटा सा तिलक और आंखों में गजब की शांति। अवनि की सुंदरता किसी गहने की मोहताज नहीं है। 


जब वह भजन गाती है, तो ऐसा लगता है जैसे स्वयं कान्हा उसकी भक्ति सुन रहे हों। वह जितनी आधुनिक शिक्षा पा चुकी है, उतनी ही उसकी जड़ें संस्कारों में गहरी जमी हैं।


सेठ जी का विचार और नया प्रस्ताव


आंगन में धूप सेंकते हुए सेठ श्याम सुंदर गोयंका की नजर अचानक अपनी लाडली पोती अवनि पर पड़ी। अवनि सबको दान-पुण्य और खिचड़ी बांटने में व्यस्त थी। 


सेठ जी के चेहरे पर एक संतोष भरी मुस्कान आई, पर अगले ही पल उनकी आंखों में एक जिम्मेदारी की चमक उभरी।



उन्होंने अपने बेटे मोहन गोयंका को पास बुलाया और भारी आवाज में कहा, "मोहन, समय का पता ही नहीं चला।


देखते-देखते हमारी अवनि कितनी बड़ी और सयानी हो गई है। इसकी सादगी और संस्कार ही इस हवेली की असली रौनक हैं।

अब मुझे लगता है कि इसके लिए हमें कोई सुयोग्य और संस्कारी घर देखना चाहिए। मैं चाहता हूं कि मेरी पोती जिस घर में जाए, वहां खुशियों की वर्षा हो।"



दिल्ली से आया रिश्ता: आर्यमन का परिचय


तभी सेठ जी की छोटी बहू (अवनि की चाची) जो पास ही बैठी थीं, मुस्कुराते हुए आगे आईं। उन्होंने इस चर्चा को एक नई दिशा दी।


चाची बोलीं, "बाबूजी, अगर आप आज्ञा दें तो मेरे संज्ञान में एक बहुत ही काबिल लड़का है। मेरे ममेरे भाई का बेटा, आर्यमन। दिल्ली में उनका कपड़ों का बहुत बड़ा और प्रतिष्ठित व्यापार है। 


लड़का न केवल सुंदर और पढ़ा-लिखा है, बल्कि बड़े शहर में रहने के बावजूद अपने संस्कारों को नहीं भूला है। वह सादगी को पसंद करता है और अपने काम के प्रति बहुत समर्पित है।"


सेठ श्याम सुंदर गोयंका ने गहरी सोच में डूबते हुए सिर हिलाया। दिल्ली के बड़े व्यापारी और कानपुर की संस्कारी बेटी—यह मेल सुनने में ही प्रभावशाली लग रहा था। उन्होंने तय किया कि इस रिश्ते की बात को आगे बढ़ाया जाए।


अध्याय २: न्योता और तैयारी


सेठ श्याम सुंदर गोयंका ने अपने हाथ में पकड़ी हुई माला को रोका और कुछ देर मौन रहकर विचार किया। हवेली के उस विशाल दालान में जैसे सब सांसें रोककर उनके फैसले का इंतज़ार कर रहे थे।


अंततः, उन्होंने अपनी छोटी बहू (चाची) की ओर देखा और गंभीर स्वर में बोले:


ठीक है बहू, अगर तुमने इस लड़के को परख रखा है और हमारे खानदान के लायक समझती हो, तो क्यों न एक बार हम भी देख लें? आखिर अवनि के सुख से बढ़कर मेरे लिए और कुछ नहीं है।"



सेठ जी ने अपने कुर्ते की जेब से चश्मा निकालते हुए आगे कहा, "तुम आज ही अपने भाई से बात करो और उन्हें सपरिवार कानपुर आने का न्योता दो। 


उनसे कहना कि गोयंका हवेली उनका इंतज़ार कर रही है। और हाँ, उस लड़के... क्या नाम बताया तुमने? आर्यमन... हाँ, आर्यमन को भी साथ लाएँ। हम चाहते हैं कि बच्चे एक-दूसरे को देख लें और समझ लें।"



हवेली में उत्साह का माहौल


सेठ जी का आदेश पाते ही चाची के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई।

उन्होंने तुरंत अपने कमरे में जाकर दिल्ली फोन मिलाया। उधर दिल्ली में भी गोयंका परिवार का नाम सुनकर आर्यमन के माता-पिता ने सहर्ष इस निमंत्रण को स्वीकार कर लिया।



अगले ही दिन से हवेली की रौनक बदल गई:


साफ-सफाई और सजावट: हवेली के उन कमरों को फिर से खुलवाया गया जो मेहमानों के लिए आरक्षित थे। भारी मखमली परदे झाड़े गए और चांदी के बर्तनों को पॉलिश के लिए निकाला गया।



पकवानों की चर्चा: सेठ जी ने खास तौर पर रसोइयों को हिदायत दी कि दिल्ली के मेहमानों के लिए कानपुर के मशहूर ज़ायके तैयार होने चाहिए। बेड़ई-कचौड़ी से लेकर मलाई मक्खन तक, सब कुछ शाही अंदाज़ में।



अवनि की स्थिति: इन सब तैयारियों के बीच अवनि शांत थी। उसने अपने कान्हा की मूर्ति के सामने दीया जलाया और मन ही मन प्रार्थना की, "प्रभु, जो मेरे और इस परिवार के लिए सही हो, वही करना।" 


उसके चेहरे पर कोई घबराहट नहीं थी, बस एक गहरी सादगी थी।


अध्याय ३: दिल्ली में हर्ष और उल्लास



जैसे ही कानपुर की हवेली से बुलावा आया, दिल्ली के 'कपूर निवास' (आर्यमन का परिवार) में खुशियों का ठिकाना न रहा। आर्यमन के पिता, जो खुद एक बहुत बड़े कपड़ा व्यापारी थे, इस रिश्ते की खबर सुनकर भावुक हो गए।




गोयंका परिवार का सम्मान


दिल्ली का यह परिवार संपन्न तो बहुत था, लेकिन उनके मन में गोयंका परिवार के लिए एक विशेष आदर था।


उन्होंने वर्षों से सुन रखा था कि कानपुर के सेठ श्याम सुंदर गोयंका केवल धन से ही अमीर नहीं हैं, बल्कि उनका दिल और उनके संस्कार भी सोने की तरह शुद्ध हैं।


दिल्ली के बाज़ारों में भी गोयंका परिवार की 'मानवता' के किस्से मशहूर थे—कैसे वे अपनी ज्वेलरी के कारीगरों को परिवार की तरह रखते हैं और कैसे उनका पूरा शहर सम्मान करता है।



आर्यमन की माता जी ने तुरंत अपनी अलमारी से सबसे कीमती साड़ियाँ निकालीं और बोलीं, "हमें बहुत ही अदब के साथ वहाँ जाना होगा।


गोयंका जी की पोती अवनि के बारे में सुना है कि वह साक्षात लक्ष्मी का रूप है। ऐसे खानदान से जुड़ना हमारे लिए सौभाग्य की बात होगी।"



अध्याय ४: दिल्ली के परिवार का आंतरिक द्वंद्व


जैसे ही गोयंका परिवार के न्योते की बात घर में फैली, आर्यमन के बड़े भाई सोहन और उनकी पत्नी नीलम के बीच के वैचारिक मतभेद उभर कर सामने आ गए।



सोहन: परंपराओं का रक्षक


सोहन घर का बड़ा बेटा है और अपने पिता की तरह ही पुराने उसूलों पर चलने वाला इंसान है। वह सादगी और परिवार की एकता में विश्वास रखता है।


उसने जब सुना कि रिश्ता कानपुर के गोयंका परिवार से है, तो वह बहुत प्रसन्न हुआ। सोहन ने कहा, "पिताजी, आपने सही चुनाव किया है। 


गोयंका परिवार की मर्यादा और उनके संस्कारों की मिसाल दी जाती है। हमारे आर्यमन के लिए अवनि जैसी लड़की मिलना बड़े भाग्य की बात होगी।"


सोहन चाहता है कि आर्यमन का विवाह एक ऐसे परिवार में हो जो व्यापार के साथ-साथ रिश्तों की भी कद्र करे।


नीलम: आधुनिकता और चकाचौंध


वहीं दूसरी ओर, सोहन की पत्नी नीलम, जो बहुत ही 'हाई-सोसायटी' और मॉडर्न लाइफस्टाइल जीने वाली महिला है, उसे यह रिश्ता कुछ खास पसंद नहीं आया।


नीलम के लिए कानपुर एक 'पिछड़ा और छोटा शहर' था। उसने नाक सिकोड़ते हुए कहा, "कानपुर? 


क्या दिल्ली में लड़कियों की कमी थी? वहाँ की गलियां, वो पुरानी हवेली... मुझे नहीं लगता कि हमारे स्टैंडर्ड के हिसाब से वो जगह ठीक होगी। और वैसे भी, आजकल ऐसी 'संस्कारी' लड़कियां सिर्फ़ दिखावा होती हैं।"



तैयारी का तनाव


नीलम की मॉडर्न सोच और सोहन के संस्कारी स्वभाव के बीच एक हल्का सा तनाव पैदा हो गया। नीलम ने तय किया कि वह भी कानपुर जाएगी, लेकिन सिर्फ़ इसलिए ताकि वह यह देख सके कि गोयंका परिवार वाकई उतना अमीर है जितना सुना जाता है, या फिर यह सिर्फ़ नाम का रसूख है।



रवानगी का समय


अंततः, पूरी कपूर फैमिली ने कानपुर जाने की तैयारी पूरी कर ली। सोहन ने छोटे भाई आर्यमन को समझाया कि वह मन को शांत रखे और सिर्फ़ चेहरे की सुंदरता नहीं, बल्कि मन की सुंदरता देखे।


वहीं नीलम ने अपने सबसे महंगे डिज़ाइनर कपड़े पैक किए ताकि वह कानपुर की उस पुरानी हवेली में अपनी आधुनिकता की धाक जमा सके