An Unfinished Book - Season 2 - Episode 14 in Hindi Horror Stories by kajal jha books and stories PDF | अधूरी किताब - सीजन 2 - एपिसोड 14

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अधूरी किताब - सीजन 2 - एपिसोड 14

अधूरी किताब – सीजन 2
एपिसोड 14 : आरंभ की किताब
फड़...
किसी किताब का पहला पन्ना खुलने की आवाज पूरे अंधेरे में गूँज उठी।
अनन्या ने धीरे-धीरे अपनी आँखें खोलीं।
उसके चारों ओर घना अंधकार फैला हुआ था।
न कोई पुस्तकालय।
न कोई दीवार।
न कोई छत।
बस अंतहीन अंधेरा।
और उसके सामने हवा में तैर रही थी—
"आरंभ"
वही रहस्यमयी किताब।
जिसे उसने अनंत पुस्तकालय की सबसे ऊँची शेल्फ पर देखा था।
अनन्या का दिल तेज़ी से धड़क रहा था।
"मैं कहाँ हूँ?"
उसकी आवाज अंधेरे में खो गई।
कोई जवाब नहीं मिला।
लेकिन अगले ही पल आरंभ की किताब अपने आप खुल गई।
उसके पन्ने चमकने लगे।
और उन पर शब्द उभरने लगे—
"जहाँ हर कहानी जन्म लेती है..."
"तुम वहाँ खड़ी हो।"
अनन्या की साँस रुक गई।
"कहानियों का जन्मस्थान?"
अचानक उसके चारों ओर रोशनी फैलने लगी।
धीरे-धीरे अंधेरा हटने लगा।
और जो दृश्य सामने आया...
उसे देखकर उसके होश उड़ गए।
उसके सामने एक पूरा शहर था।
लेकिन वह कोई साधारण शहर नहीं था।
उस शहर की इमारतें किताबों से बनी थीं।
सड़कें पन्नों से बनी थीं।
आकाश में शब्द तैर रहे थे।
और वहाँ घूमने वाले लोग...
मानो कहानियों के पात्र थे।
एक योद्धा तलवार लेकर जा रहा था।
एक राजा अपने घोड़े पर सवार था।
एक जादूगर हवा में मंत्र लिख रहा था।
एक बूढ़ी औरत अपने हाथ में कोई अधूरी कहानी लिए बैठी थी।
अनन्या स्तब्ध रह गई।
"यह जगह क्या है?"
अचानक पीछे से एक आवाज आई—
"स्वागत है।"
अनन्या पलटी।
उसके पीछे लगभग सत्तर वर्ष का एक वृद्ध खड़ा था।
लंबी सफेद दाढ़ी।
काले वस्त्र।
और हाथ में एक विशाल पुस्तक।
"आप कौन हैं?"
अनन्या ने पूछा।
वृद्ध मुस्कुराया।
"मैं संरक्षक हूँ।"
"किसका?"
"आरंभ का।"
अनन्या कुछ समझ नहीं पा रही थी।
वृद्ध ने आगे कहा—
"जिस पुस्तकालय को तुमने देखा था..."
"वह केवल कहानियों का संग्रह था।"
"लेकिन यह..."
उसने पूरे शहर की ओर इशारा किया।
"यह कहानियों का जन्मस्थान है।"
अचानक अनन्या को कुछ याद आया।
"वह परछाईं कौन थी?"
"जिसने कहा था कि आदित्य पहला लेखक नहीं था?"
वृद्ध का चेहरा गंभीर हो गया।
"तुमने उसे देख लिया?"
"हाँ।"
कुछ क्षण तक वृद्ध चुप रहा।
फिर उसने धीरे से कहा—
"तो समय सचमुच आ गया है।"
"किस बात का समय?"
अनन्या ने पूछा।
वृद्ध ने जवाब नहीं दिया।
उसने अपनी विशाल पुस्तक खोली।
और एक पन्ने पर उँगली रखी।
अचानक हवा में एक दृश्य उभर आया।
बहुत पुराना दृश्य।
इतना पुराना कि समय भी शायद उसे भूल चुका था।
दृश्य में एक विशाल कक्ष दिखाई दिया।
उस कक्ष के बीचोंबीच एक आदमी बैठा था।
उसका चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था।
लेकिन उसके सामने एक चमकती हुई किताब रखी थी।
वह आदमी लिख रहा था।
और जैसे-जैसे वह लिखता...
पूरी दुनियाएँ जन्म ले रही थीं।
नदियाँ।
पहाड़।
आसमान।
मनुष्य।
कहानियाँ।
सब कुछ।
अनन्या की आँखें फैल गईं।
"यह कौन है?"
वृद्ध की आवाज धीमी हो गई।
"पहला लेखक।"
पूरा वातावरण शांत हो गया।
"पहला लेखक?"
"हाँ।"
"वह जिसने पहली कहानी लिखी।"
"वह जिसने शब्दों को जीवन दिया।"
"क्या वह इंसान था?"
अनन्या ने पूछा।
वृद्ध ने सिर हिलाया।
"नहीं।"
"तो फिर?"
वृद्ध ने कहा—
"कोई नहीं जानता।"
अचानक दृश्य बदल गया।
पहला लेखक अब गुस्से में दिखाई दे रहा था।
उसकी किताब के पन्ने फट रहे थे।
आकाश काला हो रहा था।
और उसके सामने एक दूसरी आकृति खड़ी थी।
उस आकृति ने पहली किताब छीन ली।
और भाग गई।
दृश्य गायब हो गया।
अनन्या का दिल तेजी से धड़कने लगा।
"वह कौन था?"
वृद्ध की आँखों में चिंता दिखाई दी।
"यही समस्या है।"
"कोई नहीं जानता।"
"लेकिन उसी चोरी के बाद..."
वृद्ध बोला।
"दुनिया में पहली बार अधूरी कहानियाँ पैदा हुईं।"
अनन्या के रोंगटे खड़े हो गए।
"क्या मतलब?"
"जिस किताब को चुराया गया..."
"उसी के फटे हुए टुकड़ों से बाद में कई किताबें बनीं।"
"उनमें से एक थी—"
वृद्ध ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा—
"अधूरी किताब।"
अनन्या का सिर घूमने लगा।
तो इसका मतलब...
अधूरी किताब असली किताब नहीं थी।
वह किसी और चीज़ का एक टुकड़ा थी।
उसी समय पूरे शहर में अचानक अलार्म जैसी आवाज गूँज उठी।
भोंऽऽऽऽऽ...
भोंऽऽऽऽऽ...
भोंऽऽऽऽऽ...
लोग भागने लगे।
कहानियों के पात्र घबराकर इधर-उधर दौड़ने लगे।
आकाश में तैरते शब्द टूटने लगे।
"क्या हुआ?"
अनन्या ने पूछा।
वृद्ध का चेहरा पीला पड़ गया।
"असंभव..."
"वह यहाँ नहीं आ सकता।"
अचानक आकाश फट गया।
एक विशाल दरार उभर आई।
और उस दरार से काला धुआँ निकलने लगा।
पूरे शहर पर अंधेरा छा गया।
हवा भारी हो गई।
और फिर...
दरार के भीतर दो चमकती हुई आँखें दिखाई दीं।
लेकिन वे सफेद नहीं थीं।
वे सुनहरी थीं।
भयानक सुनहरी।
एक गूँजती हुई आवाज पूरे आकाश में फैल गई—
"मैं अपनी किताब लेने आया हूँ..."
वृद्ध काँप उठा।
उसके हाथ से पुस्तक गिर गई।
अनन्या ने घबराकर पूछा—
"यह कौन है?"
वृद्ध ने भयभीत स्वर में कहा—
"पहला लेखक..."
आकाश में मौजूद विशाल आकृति धीरे-धीरे मुस्कुराई।
और फिर उसने एक ऐसी बात कही जिसने अनन्या के पैरों तले जमीन खिसका दी—
"और तुम..."
"मेरी खोई हुई उत्तराधिकारी हो।"
पूरा शहर अंधेरे में डूब गया।
और आरंभ की किताब अपने आप खुल गई।
उसके पहले पन्ने पर नए शब्द उभरने लगे—
"कहानी अभी शुरू हुई है..."