Mitalika - Ek Adhuri Prem Kahani - Part 2 in Hindi Horror Stories by fiza saifi books and stories PDF | Mitalika - Ek Adhuri Prem Kahani - Part 2

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Mitalika - Ek Adhuri Prem Kahani - Part 2

कागज उसके हाथों में काँप रहा था.

या शायद काँप तो उसके हाथ रहे थे.

क्योंकि पहली बार उसे महसूस हुआ कि यह सिर्फ कोई सपना या भ्रम नहीं था.

कोई शक्ति उसे प्रतापगढ बुला रही थी.

और वह शक्ति सदियों से उसका इंतजार कर रही थी.


अक्षय और समीर साथ ही ऑफिस पहुँचे.

रात भर की घटनाओं ने अक्षय को भीतर तक झकझोर दिया था, लेकिन उसने तय कर लिया था कि अब वह अपने डर को अपने ऊपर हावी नहीं होने देगा.

ऑफिस के मुख्य गेट से अंदर प्रवेश करते हुए उसने एक गहरी साँस ली और सामान्य दिखने की कोशिश की.

समीर भी उसके साथ था.

दोनों लिफ्ट से अपने फ्लोर पर पहुँचे.

जैसे ही अक्षय अपने केबिन की तरफ बढा, उसके कदम अचानक रुक गए.

क्योंकि उसके केबिन का दरवाजा पहले से खुला हुआ था.

और अंदर.

रिया उसकी कुर्सी के सामने वाली सीट पर बैठी उसका इंतजार कर रही थी.

उसके चेहरे पर नाराजगी साफ दिखाई दे रही थी.

दोनों हाथ सीने पर बंधे हुए थे और आँखों में शिकायत भरी हुई थी.

समीर ने रिया को देखा

पिछले एक महीने से मैं तुम्हें देख रही हूँ।

तुम बदल गए हो, अक्षय।

तुम हर समय किसी चिंता में डूबे रहते हो।

नहीं, मैं बिल्कुल ठीक हूँ. अक्षय ने अपने चेहरे पर एक बनावटी मुस्कान लाते हुए कहा. तुम बताओ, क्या चल रहा है?

रिया ने उसे कुछ पल गौर से देखा, मानो उसके चेहरे पर छिपे भाव पढने की कोशिश कर रही हो. फिर वह अपनी कुर्सी पर थोडा आगे खिसक आई.

तुमने सुना नहीं?

क्या?

ऑफिस की तरफ से अगले महीने टूर होने वाला है.

अच्छा? अक्षय ने सामान्य बनने की कोशिश की.

और इस बार शायद प्रतापगढ हवेली जाने की प्लानिंग है.

रिया के मुँह से प्रतापगढ का नाम सुनते ही अक्षय का दिल जैसे एक पल के लिए रुक गया. क्या. उसके मुँह से अनायास निकल गया. हाँ, प्रतापगढ हवेली.

अक्षय ने तुरंत खुद को संभाला. क. क्यों? प्रतापगढ में ऐसा क्या खास है कि ऑफिस टूर के लिए वही जगह चुनी गई?

रिया की आँखें चमक उठीं. अरे, तुम्हें नहीं पता?

नहीं.

वो बहुत मशहूर ऐतिहासिक महल है. दूर- दूर से लोग उसे देखने आते हैं. लेकिन. रिया अचानक थोडा झुककर उसके करीब आ गई. उसकी आवाज धीमी हो गई. कहते हैं, शाम छह बजे के बाद वहाँ जाना मना है.

अक्षय की उँगलियाँ मेज पर कस गईं.

क्यों? उसने सामान्य स्वर बनाए रखने की कोशिश की. छह बजे के बाद वहाँ क्या होता है?

रिया की बडी- बडी आँखें और फैल गईं. लोग कहते हैं कि उस महल की रानी की आत्मा आज भी वहाँ भटकती है.

अक्षय के सीने में बेचैनी बढने लगी. और जो भी रात में उस महल के अंदर रुकता है.

रिया ने फुसफुसाकर कहा. वो कभी वापस नहीं लौटता.

कुछ पल के लिए दोनों के बीच खामोशी छा गई.

कहते हैं, उसकी मौत भी साधारण नहीं होती.

रिया ने अपनी आवाज को और रहस्यमयी बनाते हुए कहा.

लाश ऐसी हालत में मिलती है कि देखने वालों की रूह काँप जाए.

अक्षय ने जबरन हँसने की कोशिश की.

ओह प्लीज, रिया! वह कुर्सी से उठ खडा हुआ. ये सब बकवास है. दुनिया में भूत- प्रेत जैसी कोई चीज नहीं होती.

रिया ने भौंहें चढाईं. सच?

बिल्कुल. अक्षय ने आत्मविश्वास दिखाने की कोशिश की.

ये सब लोगों को डराकर पैसे कमाने के तरीके हैं. ऐसी कहानियाँ फैलाई जाती हैं ताकि लोग रोमांच के चक्कर में वहाँ घूमने जाएँ और जगह की पब्लिसिटी हो. रिया अभी भी उसे गौर से देख रही थी. तो तुम इन सब बातों पर बिल्कुल विश्वास नहीं करते?

नॉट एट ऑल. अक्षय ने मुस्कुराते हुए कहा. भूत, चुडैल, आत्मा. ये सब सिर्फ कहानियाँ हैं.

उसी वक्त पीछे से एक आवाज आई—" क्या बात है भाई? अक्षय और रिया दोनों ने पलटकर देखा.

समीर हाथ में कॉफी का मग लिए उनके पीछे खडा था. बडा गंभीर डिस्कशन चल रहा है.

रिया हँस दी. कुछ नहीं, ऑफिस ट्रिप की बात हो रही थी.

और? और Mister अक्षय का कहना है कि प्रतापगढ हवेली के बारे में जो भी कहानियाँ हैं, सब अफवाह हैं.

समीर ने पहले रिया को देखा. फिर अक्षय को. कुछ सेकंड तक वह दोनों को घूरता रहा. और फिर अचानक जोर से हँस पडा.

हाहाहाहा! उसकी हँसी इतनी तेज थी कि पास बैठे कुछ कर्मचारी भी उनकी तरफ देखने लगे.

क्या हुआ? अक्षय ने झुंझलाकर पूछा. समीर ने हँसी रोकते हुए कहा—

क्या सच में तुम इन बातों को नहीं मानते? समीर ने कॉफी का मग मेज पर रखते हुए पूछा.

अक्षय ने मुँह बनाया और कुर्सी की बैक पर टिक गया.

क्या लिखकर दूँ? वह हँसते हुए बोला. ये भूत- प्रेत, आत्मा, चुडैल. सब बकवास है. कुछ नहीं होता.

समीर कुछ पल चुपचाप उसे देखता रहा.

फिर वह धीरे से बोला—" अच्छा. तो कल रात जो हुआ, वो क्या था?

अक्षय का दिल एक पल को धडकना भूल गया.

उसने तुरंत समीर की तरफ देखा और आँखों ही आँखों में उसे चुप रहने का इशारा किया. रिया अभी भी वहीं खडी थी.

अक्षय नहीं चाहता था कि उसके सामने कल रात की बात छिडे. तेरी कॉफी ठंडी हो रही है. अक्षय ने जबरन मुस्कुराते हुए कहा. चल, निकल यहाँ से. लेकिन रिया ने तुरंत बीच में टोका. नहीं, एक मिनट रुको.

उसने समीर की तरफ देखा. क्या हुआ था कल रात? रिया की आवाज में अब मजाक नहीं, बल्कि चिंता थी.

समीर ने अक्षय की तरफ देखा. फिर रिया की तरफ.

वो कल रात. वह कुछ कहने ही वाला था कि अक्षय ने फौरन उसका कंधा पकड लिया और उसे हल्का- सा धक्का देते हुए उसके केबिन की तरफ बढाने लगा. कुछ नहीं हुआ था! अक्षय जल्दी से बोला. बस जनाब रात को मुझे डराने की कोशिश कर रहे थे और खुद ही फेल हो गए. समीर ने भौंह उठाई.

अरे. लेकिन अक्षय ने उसे फिर घूरकर देखा.

इस बार चेतावनी साफ थी. समीर चुप हो गया. रिया ने दोनों को गौर से देखा.

फिर उसकी नजर अक्षय के चेहरे पर ठहर गई.

क्या बस यही बात है? उसकी आवाज धीमी थी.

लेकिन उसमें सवाल कम और शक ज्यादा था.

अक्षय की मुस्कान कुछ पल के लिए डगमगा गई.

हाँ, बस यही बात है.

पक्का? रिया कुछ सेकंड तक उसकी आँखों में देखती रही जैसे सच तलाश रही हो.

बिल्कुल. फिर उसने हल्का- सा सिर हिलाया.

ठीक है. लेकिन उसके चेहरे से साफ लग रहा था कि उसे अक्षय की बात पर बिल्कुल भरोसा नहीं हुआ. वह अपने केबिन की तरफ मुड गई. जाते- जाते भी उसने एक बार पीछे पलटकर अक्षय को देखा.

और फिर चली गई. जैसे ही रिया नजर से ओझल हुई.

समीर का चेहरा गंभीर हो गया. कब तक छिपाएगा? उसने धीमी आवाज में पूछा.

अक्षय ने लंबी साँस ली. जब तक खुद नहीं समझ जाता कि मेरे साथ हो क्या रहा है.

बहुत जल्द समझ जाओगे. अचानक किसी स्त्री की बर्फ जैसी ठंडी फुसफुसाहट अक्षय के कानों में गूँजी.

और सब कुछ जान जाओगे. जब तुम्हें सब याद आ जाएगा.

बस. प्रतापगढ आ जाओ, रणविजय.

आवाज इतनी करीब थी कि अक्षय को लगा जैसे कोई उसके कान से अपने होंठ सटाकर बोल रहा हो.

उसके पूरे शरीर में सिहरन दौड गई. हाथों के रोंगटे खडे हो गए. नसों में बहता खून मानो एक पल के लिए जम गया.

उसकी साँसें अटक गईं. लेकिन हैरानी की बात यह थी कि समीर सामान्य खडा था.

मानो उसने कुछ सुना ही न हो. अक्षय ने काँपती नजरों से इधर- उधर देखा.

ऑफिस में सब अपने- अपने काम में व्यस्त थे. किसी के चेहरे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं थी.

जैसे वह आवाज सिर्फ उसी तक पहुँची हो. अक्षय? समीर ने उसके चेहरे पर उभरता डर देख लिया.

क्या हुआ? अक्षय ने तुरंत खुद को संभालने की कोशिश की.

उसने एक गहरी साँस ली और चेहरे पर बनावटी मुस्कान ले आया.

क. कुछ नहीं.

पक्का?

हाँ. अक्षय ने नजरें चुराते हुए कहा.

मुझे एक जरूरी काम याद आ गया है. हम बाद में बात करते हैं.

समीर उसे ध्यान से देखता रहा उसे साफ महसूस हो रहा था कि अक्षय कुछ छिपा रहा है.

लेकिन उसने ज्यादा जोर नहीं दिया" ठीक है. लेकिन भाई. समीर की आवाज गंभीर हो गई. अगर कोई परेशानी है तो अकेले मत झेलना. अक्षय ने बस सिर हिला दिया. फिर वह जल्दी- जल्दी कदमों से वहाँ से निकल गया.

ऑफिस के कॉरिडोर में पहुँचते ही उसने राहत की साँस लेने की कोशिश की.

लेकिन उसका दिल अभी भी बुरी तरह धडक रहा था उस आवाज का असर उसके दिमाग से जा ही नहीं रहा था.

जब तुम्हें सब याद आ जाएगा. ये शब्द बार- बार उसके कानों में गूँज रहे थे.

वह चलते- चलते ऑफिस के सबसे सुनसान हिस्से में पहुँच गया वहाँ पुराने रिकॉर्ड्स रखने का एक कमरा था, जहाँ शायद ही कोई आता हो. अक्षय ने दीवार का सहारा लिया उसके माथे पर पसीना चमक रहा था.

आखिर तुम चाहती क्या हो? वह बुदबुदाया. कौन हो तुम? कुछ क्षण तक सन्नाटा छाया रहा.

फिर. कमरे का तापमान अचानक गिरने लगा. ए. सी. बंद था फिर भी ठंडी हवा का एक झोंका उसके आसपास घूम गया.

कमरे के कोने में रखी पुरानी फाइलों के पन्ने अपने आप फडफडाने लगे.

अक्षय की धडकन तेज हो गई. और तभी. सामने रखे धूल भरे शीशे पर धीरे- धीरे उँगलियों के निशान उभरने लगे.

जैसे कोई अदृश्य हाथ उस पर कुछ लिख रहा हो. अक्षय की आँखें फैल गईं.

एक- एक अक्षर बनता गया. मितालिका"

नाम पूरा होते ही शीशे पर अचानक खून जैसी लाल लकीरें फैल गईं. और उनके बीच एक नया संदेश उभर आया—

तीन रातें.
फिर पूर्णिमा.