थाने के बाहर समंदर की लहरों की तरह उमड़ी भीड़ और media का शोर जब कालकोठरी की दीवारों को हिला रहा था, तब अंदर lock-up में एक दूसरा ही खौफनाक खेल शुरू हो चुका था।
विवेक रॉय ने अयान के थूके हुए खून को अपने महंगे जूते पर देखा, तो गुस्से से उसकी आँखें लाल हो गईं। उसने अपनी पिस्तौल की नाल को सीधे अयान के माथे के उस गहरे ज़ख्म पर टिका दिया जहाँ से लगातार खून बह रहा था।
"तेरी इस ज़बान को हमेशा के लिए बंद कर दूँगा अयान!" विवेक रॉय की आवाज़ में मौत जैसी ठंडक थी।
लेकिन अयान? अयान के दिमाग के भीतर इस वक्त बंदूकों का डर नहीं, बल्कि धमाकों का एक सिलसिला चल रहा था। सिर पर लगी वो गहरी चोट और सामने खड़े विवेक रॉय का यह शैतानी चेहरा...
इन दोनों ने मिलकर अयान के दिमाग के उस बंद दरवाज़े को झटके से खोल दिया था, जो महीनों से बंद था। जब वह इस बस्ती के लोगों को मिला था, तो उसे अपना अतीत, अपना नाम-पता कुछ भी याद नहीं था।
पर इस पल... उस ज़हरीली सिगार के धुएं और विवेक रॉय की आवाज़ ने अयान के दिमाग के भीतर यादों का एक तूफान उठा दिया।
अयान की आँखों के सामने अचानक कुछ धुंधली तस्वीरें कौंधने लगीं—एक बहुत बड़ा आलीशान बंगला... रात का सन्नाटा... किसी के चीखने की आवाज़... और कोई हाथ जो उसके सिर में कुछ फिट कर रहा था... एक अजीब सी लोहे के टकराने जैसी गूँज... और फिर चारों तरफ फैली हुई आग!
"अह्ह्ह..." अयान के मुँह से दर्द और पागलपन से भरी एक चीख निकली। वह अपनी यादों के उस भंवर में इस कदर उलझ गया कि उसे यह भी होश नहीं रहा कि उसके माथे पर पिस्तौल तनी है।
उसके दिमाग की नसें फटने को हो रही थीं। ऐसा लग रहा था मानो उसका खोया हुआ अतीत उसके भीतर दोबारा ज़िंदा होने के लिए छटपटा रहा हो।
करीम चाचा की ढाल और विवेक रॉय की मजबूरी
ठीक उसी वक्त केबिन का दरवाज़ा धड़ाम से खुला और कमिश्नर ने हांफते हुए अंदर कदम रखा, "रॉय साहब! रुकिए... आप इस वक्त इसे गोली नहीं मार सकते।
बाहर करीम चाचा और पूरी मछुआरा बस्ती ने थाने को चारों तरफ से घेर लिया है। वे दीवार बनकर खड़े हैं, एक कदम भी आगे बढ़े तो यहाँ लाशें बिछ जाएंगी और मीडिया सब लाइव दिखा रहा है!"
विवेक रॉय ने गहरी सांस ली, अपनी पिस्तौल को पीछे खोंसा और एक क्रूर मुस्कान के साथ बाहर की तरफ बढ़ गया।
अयान को उसी अधमरी हालत में सलाखों के पीछे छोड़, विवेक रॉय जब थाने के मुख्य दरवाज़े पर आया, तो सामने का नज़ारा वाकई किसी बड़े बवाल से कम नहीं था।
करीम चाचा अपनी लाठी सीने से ताने, चट्टान की तरह सबसे आगे खड़े थे। उनकी आँखों में वही पुरानी, ठंडी खामोशी थी जो विवेक रॉय को अच्छे से जानती थी।
चाचा ने अपनी लाठी ज़मीन पर पटकी और गरजकर बोले, "विवेक रॉय! अपनी हद में रह। ये मछुआरा बस्ती के लोग हैं, जब तक हम यहाँ खड़े हैं, तू अयान का बाल भी बांका नहीं कर सकता। कानूनन उसे तुरंत अस्पताल भेजना होगा, वरना आज इस थाने का घेराव खत्म नहीं होगा!"
करीम चाचा और बस्ती वालों की इस भारी ताकत को देखकर विवेक रॉय समझ गया कि यहाँ अयान पर हाथ डालना सीधे अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारना है।
वह चाहकर भी अयान को नुकसान नहीं पहुँचा सका। पुलिस को तुरंत झुकना पड़ा और कमिश्नर ने अयान को सरकारी अस्पताल भेजने के लिए एम्बुलेंस बुलाने का हुक्म दे दिया।करीम चाचा का दांव काम कर गया और अयान फ़िलहाल सुरक्षित हो गया।
पर खेल का दूसरा पासा अभी पलटना बाकी था। दिया अपने लैपटॉप को मीडिया के कैमरों के सामने घुमा रही थी, "यह देखिए विवेक रॉय का असली चेहरा!
इस वीडियो में साफ़ है कि अयान बेगुनाह है और साज़िश किसने रची है!"
सभी न्यूज़ चैनलों के कैमरे दिया के लैपटॉप की स्क्रीन पर टिक गए। स्क्रीन पर वीडियो प्ले हुआ—आर्यन का अयान को इंजेक्शन देना साफ़ दिख रहा था, और उसके बाद जैसे ही विवेक रॉय का हिस्सा आया...
वीडियो अचानक रुक गया। स्क्रीन पर एक अजीब सी गड़बड़ाहट हुई, कोडिंग फटने लगी और पूरी स्क्रीन पर लाल रंग से लिख कर आ गया—'DATA CORRUPTED - MALWARE ATTACK'।
"क्या?!" दिया की आँखें फटी की फटी रह गईं। उसकी उंगलियां कीबोर्ड पर पागलों की तरह चलने लगीं, लेकिन लैपटॉप पूरी तरह हैक हो चुका था और वो सबूत वहीं मिट गया।
दरअसल, विवेक रॉय का network इतना कमज़ोर नहीं था। जैसे ही दिया ने अपनी गाड़ी से उस फाइल को रिकवर करने की कोशिश की थी, विवेक रॉय के सायबर एक्सपर्ट्स ने उसके सिस्टम में एक ऐसा वायरस डाल दिया था जो फाइल के खुलते ही उसे पूरी तरह करप्ट कर दे।
सच्चाई सामने आने से पहले ही मिट गई, जिससे विवेक रॉय एक बार फिर साफ़ बचकर निकल गया। उसने मीडिया की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए कहा, "देखा आप सबने? फर्ज़ी वीडियो बनाकर मुझे फँसाने की कोशिश की जा रही थी। खैर, कानून अपनी कार्रवाई करेगा।"
थाने के भीतर से जब अयान को एक स्ट्रेचर पर डालकर एम्बुलेंस की तरफ ले जाया जा रहा था, तब उसकी आँखें आधी खुली थीं। बाहर मीडिया की लाइटें और बस्ती वालों की भीड़ दिख रही थी।
करीम चाचा और बस्ती की ताकत की वजह से अयान की जान तो बच गई थी और वह अस्पताल जा रहा था, लेकिन अयान का दिमाग इस वक्त किसी और ही दुनिया में था। उसके सिर का दर्द अब एक मीठे से नशे में बदल रहा था और उसके कानों में उसकी अपनी ही दबी हुई पुरानी यादें बार-बार गूँज रही थीं—
"उठो अयान... तुम्हें वापस आना होगा... तुम्हें अपना बदला पूरा करना है..."
अयान ने आसमान की तरफ देखा और उसके होंठों पर दर्द के बीच एक बेहद रहस्यमयी और डरावनी मुस्कान तैर गई। उसकी याददाश्त का वो आधा-अधूरा पन्ना अब एक ऐसे रास्ते पर मुड़ चुका था, जहाँ नफ़रत की ये आग पूरे शहर को जलाने वाली थी।
** (लेखक की कलम से...)**
"करीम चाचा और बस्ती वालों की ताकत के आगे विवेक रॉय को पीछे हटना पड़ा है और अयान फ़िलहाल मौत के मुँह से बचकर अस्पताल पहुँच रहा है। लेकिन दूसरी तरफ दिया का वीडियो करप्ट होने से विवेक रॉय भी साफ़ बच निकला है। दोनों तरफ से बिसात अब बराबर की हो चुकी है।
अब सवाल आप सबके लिए, जिसका जवाब आपको कमेंट में देना है दोस्त—
अस्पताल पहुँचने के बाद क्या अयान को अपना पूरा बीता हुआ कल याद आ जाएगा? और याद आने पर उसका अगला कदम क्या होगा?
दिया अब अपने वीडियो के बिना अयान को इस केस से कैसे बाहर निकालेगी?
और विवेक रॉय, जो इस बार मात खाते- खाते बचा है, अस्पताल के अंदर अयान पर क्या नया वार करेगा?
अपनी राय कमेंट सेक्शन में ज़रूर बताएं भाई, क्योंकि कहानी अब 100 चैप्टर के उस महा-रोमांच की तरफ बढ़ चुकी है जहाँ हर मोड़ पर एक नया सस्पेंस आपका इंतज़ार कर रहा है!
फॉलो करना न भूलें और बने रहिए अगले धमाकेदार पार्ट 35 में।"