प्रिया सार्थक की बात सुन के ...
—देखिए हमे सीधी तरीके से बता दीजिए 🙌🏻 आप श्री से आज भी प्रेम करते है या नहीं मुझे बार बार पूछना अच्छा नहीं लग रहा😤
सार्थक— मुझे तुम्हे कोई बात नहीं बतानी
(सार्थक वहां से चला गया 😑)
यहां प्रिया अपने मन में — हम अच्छे से जानते है सार्थक जी आप आज भी श्री से प्रेम करते है लेकिन ये सच आप कभी भी स्वीकार नहीं करेंगे वो भी भैया हरि और श्री की खुशी के लिए .. इसके लिए चाहे आपको कितने ही त्याग करने पड़े ... क्यों सार्थक जी इतना भी त्याग की मूर्त बनने ही जरूरत नहीं थी कि अपनी ही खुशी का गला घोट दे आप। 🥺काश भगवान जी आपके जीवन में भी कोई बहुत अच्छी लड़की ले आए और आप हमेशा खुश रहे 🫠🥹यही प्रार्थना है बस 🙌🏻
(प्रिया अपने मन में बात करते हुए सगाई वाले स्थान पे पहुंची...)
वहां श्री और हरि एक दूसरे को अँगूठी पहना रहे थे 🥰
हरि— प्रिय आज तो आप इतनी अच्छी लग रही है कि आपकी तारीफ के लिए शब्द ही नहीं बन रहे मेरे से🫶🏻
(श्री बस मुस्कुरा दी ☺️)
हरि— अरे , कुछ बोलिए भी प्रियतमा केवल मुस्कुराने से कैसे काम चलेगा 🤭
श्री— 🥲 क्या बोले ?
हरि— 😂 तुम, मेरी तारीफ कर सकती हो जैसे मैने तुम्हारी तारीफ अभी करी
श्री— आप तो .. ठीक ठाक ही लग रहे है 🙇🏻
हरि— क्या बस ठीक ठाक 🥲
श्री— जी 🤭
हरि— 😏 कोई बात नहीं प्रिय आप से तो
हम बात में निपटेंगे 🥲
श्री— 😐 😅 अरे बहुत अच्छे लग रहे है आप भी 🙇🏻
हरि— अच्छा 🫶🏻
श्री— जी🫠
(आपस में बात करते हुए श्री और हरि ने एक दूसरे को अँगूठी पहना देते है ..
उसके बाद श्री और हरि सभी बड़ों का आशीर्वाद लेते है 🙌🏻 गुरुदेव से सर्वप्रथम आशीर्वाद लिया जाता है 😌)
गुरुदेव— पुत्री, आप सदैव प्रसन्न रहे एवं आप अपने कर्तव्य की और कर्तव्यनिष्ठ रहे, यही आशीर्वाद देते है।
श्री— जी गुरुदेव 🙇🏻
गुरुदेव— और पुत्र हरि आप भी सदैव हमारी पुत्री का ध्यान रखे और आप दोनों का गृहस्थी जीवन मंगलकारी रहे यही आशीर्वाद है ...
हरि— जी गुरुदेव 🙇🏻 हम आपके इस आशीर्वाद का सम्पूर्ण ध्यान रखेंगे 🙌🏻🙏🏻
दूसरी तरफ....
सार्थक श्री की खुशी में खुश था 🙂 लेकिन अंदर ही अंदर उसे दुख भी हो रहा था (कभी कभी अपने मन की भावना को संयमित करना बहुत मुश्किल होता है .. वो भी तब जब विषय प्रेम का हो 🥹)
अनिरुद्ध सार्थक के पास आता है ,
अनिरुद्ध— मित्र सार्थक 😔 तुम दुखी हो मैं जानता हूँ।
सार्थक— हम भला क्यों दुखी होंगे 🙃 मेरी सखी प्रसन्न है हम भी खुश है 🥹
अनिरुद्ध— बस कर यार, मत कर स्वीकार कर अपने मन के हाल को ...
सार्थक— अच्छा 😑 और स्वीकार करने से क्या हो जाएगा जरा बताना तो
अनिरुद्ध—मन की शांति मिल जाएगी तेरे को ..
सार्थक— कर चुका हु सब कुछ स्वीकार ... हाँ करता हूं आज भी श्री से प्रेम 😔 , तो क्या ?? मिल जाएगी वो मेरेको नहीं
और पता है क्यों? क्यूंकि वो हरि जी से प्रेम करती है , और अब उन दोनों की शादी है ... बता क्या करूं अब स्वीकार कर के 😑😔🥺
प्रिया— ... धन्यवाद अनिरुद्ध जी .. कम से कम इन्होंने सच तो बोला मैं पूछ रही थी तब नखरे दिखा रहे थे 😑
(प्रिया की आवाज सुन के सार्थक की जुबान की रुक गई पीछे मुड़ के देखा वहां प्रिया ही थी ... प्रिया सार्थक के पास आ कर बोलती है )
प्रिया— चलिए मान लिया अब कुछ नहीं हो सकता , श्री और भैया हरि एक दूसरे से प्रेम करते है और अब उन दोनों का विवाह भी होने वाला है ... लेकिन आपको किसने बोला महान बनने के लिए , त्याग की मूर्ति बने के लिए ... क्या आपको अपनी खुशी की कोई चिंता है भी या नहीं
सार्थक अनिरुद्ध की तरफ देखते हुए — अनिरुद्ध तुम प्रिया जी के साथ मिले हुए थे मेरे मन की बात जानने के लिए ऐसी चाल चली तुम दोनों ने 😤
प्रिया— बस कीजिए सार्थक जी 🙎🏻 अनिरुद्ध जी से मैं अभी आपके सामने ही मिल रही हु हमारी अभी तक कोई बात नहीं हुई .. मैने अचानक ही अनिरुद्ध जी और आपकी बात सुन ली 😑 नहीं तो आप मुझे तो कभी सच बताते भी नहीं ...
सार्थक— मैं तुमसे बात नहीं कर रहा चुप रहा करो तुम ..
प्रिया— 😔 मुझे जो जानना था , जान लिया 🥺 अब आप बात नहीं करना चाहते .. मत कीजिए 🥺 बस अपनी खुशी के बारे में भी सोचिए सार्थक जी 😔 त्याग के चक्कर में खुद का जीवन खराब करने ही जरूरत नहीं है ...
(सार्थक की बात सुनकर प्रिया को बहुत बुरा लगा वो सुबकते सुबकते वहां से चली गई)
अनिरुद्ध— ये क्या किया तूने इतनी अच्छी लड़की को जो तेरा ही अच्छा सोच रही है, तेरी खुशी की चिंता कर रही है उसे ही इतना बुरा बोल रहा है तू क्या हो गया तेरे को दोस्त 🙎🏻
सार्थक— 😔 मैं.. ऐसा नहीं बोलना चाहता था एक दम से पता नहीं गुस्सा क्यों आ गया ... लेकिन प्रिया जी मेरी चिंता क्यों कर रही है इन्हें क्या हो गया 🥲
अनिरुद्ध— हो सकता है तेरे को पसंद करती हो 🫶🏻
सार्थक— 🤨 पागल वागल हो गया है क्या, कुछ भी प्रिया जी और मुझे पसंद करेंगी 😂😂
अनिरुद्ध— तो तू हँस क्यों रहा है दोस्त 😂
सार्थक— तेरी बकवास पे हँस रहा था , अब ज्यादा मत बोल 😑
(सार्थक वहां से चला तो गया लेकिन मन में उसने सोचा — अरे , ये मैं हँसने क्यों लगा एकदम से ये बात सुन के की प्रिया जी मुझे पसंद करती है , कही मैं पागल तो नहीं हो गया 🥲
वैसे अनिरुद्ध जो बोल रहा था ... प्रिया जी क्या सच में मुझे पसंद करती है वो आज कल मेरी बहुत ज्यादा ही चिंता करने लगी है वैसे😏 एक क्षण ये सब मैं क्या सोच रहा हु 🤦🏻 मैं सच्ची पागल हो गया हु 🥲)
क्या होगा अब आगे ... जानने के लिए बने रहे मेरी कहानी श्री में 🫶🏻