Darwaza: Curse of the Black Mansion - 4 in Hindi Horror Stories by Piyu soul books and stories PDF | दरवाजा: काली हवेली का श्राप - 4

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दरवाजा: काली हवेली का श्राप - 4

एपिसोड 4 — “दरवाज़े के उस पार”

धड़ाम!!!दरवाज़ा अर्विका के पीछे बंद हो गया।पूरी तरह अंधेरा।इतना गहरा…कि उसे अपने हाथ तक दिखाई नहीं दे रहे थे।उसकी सांसें तेज़ थीं।दिल… जैसे सीने से बाहर निकल आएगा।“कोई है…?”उसने धीरे से कहा।कोई जवाब नहीं।बस…टप… टप…कहीं से पानी गिरने की आवाज़।अर्विका ने एक कदम आगे बढ़ाया।छपाक…उसका पैर किसी गीली चीज़ में पड़ा।उसने नीचे हाथ लगाया…और तुरंत पीछे हट गई।वो… पानी नहीं था।खून था।उसकी उंगलियों पर गर्म… चिपचिपा खून।“ये… क्या जगह है…”उसकी आवाज़ काँप गई।अचानक—दूर कहीं हल्की सी रोशनी जली।अर्विका ने ऊपर देखा।एक लंबा, अंतहीन कॉरिडोर।दीवारें… काली।और उन पर…हाथों के निशान।खून से बने हुए।जैसे किसी ने…बाहर निकलने की कोशिश की हो।अर्विका धीरे-धीरे आगे बढ़ी।हर कदम के साथ…उसे महसूस हो रहा था…कि कोई उसे देख रहा है।अचानक—पीछे से आवाज़ आई—“तू आ ही गई…”अर्विका पलटी।वो औरत।लाल साड़ी में।लेकिन इस बार…वो पहले से भी ज्यादा डरावनी थी।उसका चेहरा आधा जला हुआ…आँखों से खून बह रहा था…“तू चाहती थी ना… सच जानना?”उसने मुस्कुराते हुए कहा।अर्विका ने खुद को संभाला—“तू… मुझे यहाँ क्यों लाई है?”वो औरत धीरे-धीरे उसके करीब आई—“क्योंकि अब तू भाग नहीं सकती…”अचानक—उसने अपना हाथ उठाया।और पूरा कॉरिडोर बदल गया।

🕳अर्विका ने खुद को एक बड़े हॉल में पाया।चारों तरफ…लाशें।कुछ सड़ी हुई…कुछ ताज़ा…उनकी आँखें खुली हुई थीं।और सब…उसे देख रही थीं।“ये…”अर्विका की सांस अटक गई,“ये सब कौन हैं…?”वो औरत हँसी—“जो भी यहाँ आया… वो यहीं रह गया…”अचानक—एक लाश हिली।फिर दूसरी।फिर…सभी।

लाशें धीरे-धीरे उठने लगीं।उनके शरीर टूटे हुए…हड्डियाँ बाहर निकली हुई…लेकिन वो चल रही थीं।अर्विका पीछे हट गई—“नहीं… ये possible नहीं है…”वो औरत उसके कान के पास आकर फुसफुसाई—“ये सब तेरी वजह से है…”“नहीं!!”“हर जन्म में…”उसकी आवाज़ गूंजने लगी,“तू मुझे मारती है…और हर बार… ये सब मरते हैं…”अचानक—एक लाश अर्विका के सामने आकर रुकी।उसने उसका चेहरा देखा—वो पलक थी।“नहीं…”अर्विका के होंठ कांप गए।

पलक की आँखें खुलीं।और उसने धीरे से कहा—“तू मुझे बचा सकती थी…”अर्विका की आँखों से आँसू बहने लगे—“पलक… प्लीज… मैं—”लेकिन पलक का चेहरा अचानक बदल गया।वो हँसी—“अब तू भी यहीं रहेगी…”और उसने अर्विका की गर्दन पकड़ ली।

अर्विका ने खुद को छुड़ाने की कोशिश की—“छोड़!!!”लेकिन तभी—“बस!!!”एक तेज़ आवाज़ गूंजी।सारी लाशें freeze हो गईं।अर्विका ने देखा—अद्विक।वो वहाँ खड़ा था।लेकिन…कुछ अलग था।उसकी आँखें…पूरी काली।“तू भी…?

”अर्विका की आवाज़ टूट गई।अद्विक धीरे-धीरे मुस्कुराया—“मैं हमेशा से यहीं था…”अर्विका के पैरों तले जमीन खिसक गई।“तूने… झूठ बोला…”“नहीं…”अद्विक बोला,“मैंने सिर्फ सच छुपाया…”अचानक—वो औरत उसके पास आई।और उसके कंधे पर हाथ रखा।

जैसे… वो दोनों एक साथ हों।“ये…”अर्विका समझ गई,“तुम दोनों…”अद्विक ने सिर हिलाया—“हम दोनों…”“हर जन्म में…”वो औरत बोली,“ये मुझे मारता है…और तू उसे बचाती है…”अर्विका के दिमाग में सब connect होने लगा।“तो ये… सब एक cycle है…”उसने फुसफुसाया।“हाँ…”अद्विक मुस्कुराया,“और इस बार… ये खत्म होगा…”“कैसे?”अर्विका चिल्लाई।अद्विक उसकी तरफ बढ़ा—“तेरे मरने से…”अचानक—पूरी हवेली काँपने लगी।

दीवारें टूटने लगीं।लाशें फिर से हिलने लगीं।“ये जगह… टूट रही है…”अर्विका ने महसूस किया।वो औरत चिल्लाई—“नहीं!!! अभी नहीं!!!”अद्विक ने उसकी तरफ देखा—“ये उसे बाहर खींच रही है…”“कौन?”अर्विका ने पूछा।अचानक—अंधेरे से एक और आवाज़ आई—“मैं…”पूरी जगह freeze हो गई।एक औरत सामने आई।लेकिन…वो लाल साड़ी वाली नहीं थी।वो…अर्विका जैसी दिख रही थी।“ये…”अर्विका की सांस रुक गई।“तेरी असली पहचान…”उसने मुस्कुराते हुए कहा।“तू…”अर्विका पीछे हटी,“मैं…?”वो औरत हँसी—“तू ही तो है… जिसने ये सब शुरू किया…”

💀 FINAL CLIFFHANGER

अर्विका का दिमाग घूम गया—“नहीं… ये झूठ है…”“सच…”उसने फुसफुसाया,“ये हवेली… ये श्राप…सब तेरी वजह से है…”अद्विक और लाल साड़ी वाली औरत…दोनों उसकी तरफ देखने लगे।और एक साथ बोले—“अब फैसला तेरा है…”अचानक—अर्विका के सामने दो रास्ते खुल गए—

👉 एक… जहाँ पलक जिंदा थी

👉 दूसरा… जहाँ सब खत्म हो जाता“चुन…

”वो आवाज़ गूंजी,“या तो तू बचेगी…या ये दुनिया…”अर्विका की आँखों से आँसू बहने लगे।और जैसे ही उसने कदम बढ़ाया—पूरी हवेली में एक साथ आवाज़ गूंजी—“गलत फैसला…सब कुछ खत्म कर देगा…”

Hello' buddies agla chepter bahut jald ayega tab tak me liye follow Kar lijiye 

Jay shree Krishna 🙏

 Piyu7soul ✍️❤️