Hotel ka Vaiter aur usaki Prem Kahaani - 12 in Hindi Love Stories by kalpita books and stories PDF | होटल का वेटर और उसकी प्रेम कहानी - 12

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होटल का वेटर और उसकी प्रेम कहानी - 12

(कपूर ज्वेलर्स की बेटी वेटर को दो दिन का बॉयफ़्रेंड बनाती है। ओबेरॉय होटल में इंतजार करती है अपने पापा और दीदी का तभी वहां वेदांत ओबेरॉय आ जाता है वो वेटर को काम्या का बॉयफ़्रेंड बना देख कर गुस्सा हो जाता है)
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काम्या अब एक कदम आगे बढ़ी—
"किसके साथ रहना है… ये मेरा फैसला है।"
"ठीक है…" वेदांत ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,
"जैसा तुम चाहो।"
फिर वो थोड़ा झुककर काम्या की आँखों में देखते हुए बोले—
"बस एक बात याद रखना…
पूरी दुनिया एक तरफ… और मेरा जान से प्यारा भाई एक तरफ।"
उन्होंने हल्की हँसी हँसी—
"अगर तुम उससे एक बार मिल गई ना… तो उसकी दीवानी हो जाओगी।
फिर ऐसे… वेटर तुम्हें दिखेंगे भी नहीं।"
उनकी नजरें तिरस्कार से ऋतिक पर टिक गईं।
"भइया… प्लीज!" काम्या अब खुद को रोक नहीं पाई,
"इसकी और इंसल्ट मत कीजिए।"
उसकी आवाज़ में गुस्सा था… और एक अजीब सा अपनापन भी।
वेदांत ने भौंहें उठाईं,
"ओह… तो अब तुम इसके लिए आवाज़ भी उठाने लगी हो?"
काम्या ने बिना नजरें झुकाए जवाब दिया—
"हाँ… क्योंकि ये डिज़र्व करता है।"
ऋतिक अब तक चुप खड़ा था…
लेकिन इस बार उसने धीरे से सिर उठाया।
उसकी आँखों में अब डर नहीं था—
कुछ और था…
एक ठहरी हुई आग।
उसने वेदांत की तरफ देखा—
जैसे अब वो सिर्फ एक वेटर नहीं…
खुद के सम्मान के लिए खड़ा इंसान था।
माहौल फिर से खामोश हो गया—
लेकिन ये खामोशी तूफान से पहले वाली थी।

"ठीक है…" वेदांत ने जाते-जाते कहा,
"मैनेजर, इसके दो दिन की तनख्वाह काट लेना।"
इतना कहकर वो मुड़ गए और पार्किंग की तरफ बढ़ गए।
ऋतिक कुछ पल वहीं खड़ा रह गया…
जैसे उसे समझ ही नहीं आया कि अभी हुआ क्या है।
"मेरी तनख्वाह… क्यों काटेंगे…?" उसने खुद से ही बुदबुदाया।
उसकी मुट्ठियाँ धीरे-धीरे भींचने लगीं।
पाँच सेकंड…
दस सेकंड…
फिर अचानक—
उसकी आँखों में एक अलग सा जज़्बा उभरा।
"नहीं… ये गलत है," उसने धीमे लेकिन ठोस स्वर में कहा।
और अगले ही पल—
वो तेज़ कदमों से वेदांत के पीछे पार्किंग की तरफ बढ़ गया।
पार्किंग एरिया में हल्की रोशनी थी…
गाड़ियों के बीच वेदांत अपनी कार की तरफ बढ़ रहे थे।
"सर… एक मिनट!" ऋतिक की आवाज़ गूंज उठी।
वेदांत रुके… धीरे से मुड़े…
उनकी आँखों में वही चमक थी।
ऋतिक उनके सामने आकर खड़ा हो गया—
सांसें तेज़ थीं, लेकिन आवाज़ अब स्थिर थी।
"मेरी गलती क्या है… जो आप मेरी तनख्वाह काट रहे हैं?"
वेदांत ने हल्की हँसी के साथ कहा—
"गलती?"
"तेरी सबसे बड़ी गलती ये है… कि तू अपनी औकात भूल गए।"
ये शब्द सीधे दिल में चुभे—
लेकिन इस बार ऋतिक पीछे नहीं हटा।
"औकात…" उसने दोहराया,
"काम छोटा हो सकता है, सर…
पर इंसान छोटा नहीं होता।"
पूरे दस मिनट बाद ऋतिक वापस लौटा।
काम्या पहले से ही इंतज़ार में बैठी थी—चेहरे पर झुंझलाहट साफ दिख रही थी।
"इतनी देर क्यों लगा दी?" उसने आते ही सवाल दाग दिया।
ऋतिक कुर्सी खींचकर बैठ गया, चेहरे पर हल्की सी विजयी मुस्कान थी—
"बस… उस वेदांत ओबेरॉय को थोड़ा समझाकर आया हूँ।"
काम्या ने भौंहें सिकोड़ लीं,
"तुम दो दिन की तनख्वाह के लिए इतना ड्रामा कर रहे हो?
मैं तुम्हें उससे ज़्यादा पैसे दे रही हूँ।"
ऋतिक की मुस्कान धीरे-धीरे फीकी पड़ गई।
वो बिना कुछ कहे चुपचाप बैठ गया।
कुछ पल के लिए दोनों के बीच खामोशी छा गई।
फिर ऋतिक ने ही चुप्पी तोड़ी—
"काम्या… एक बात बताओ…
तुम्हें शौर्य ओबेरॉय पसंद क्यों नहीं है?"
काम्या ने गहरी सांस ली… जैसे ये सवाल आसान नहीं था।
"ऐसा नहीं है कि वो पसंद नहीं है…" उसने धीरे से कहा,
"लेकिन… मुझे कोई ऐसा नहीं चाहिए जो पहले से बने-बनाए साम्राज्य का राजा हो।"
ऋतिक ध्यान से सुन रहा था।
"मुझे वो चाहिए…" काम्या की आवाज़ अब थोड़ी मुलायम हो गई,
"जो खुद कुछ बनकर दिखाए…
जो मेरे दिल पर राज करे, सिर्फ नाम या पैसे से नहीं।"
ऋतिक ने हल्के से पूछा,
"तो अपने पापा का बिज़नेस आगे बढ़ाना… मेहनत नहीं है?"
काम्या कुछ पल चुप रही… फिर बोली—
"मेहनत तो है… लेकिन…"
उसने नजरें घुमा लीं,
"शौर्य ने खुद को दुनिया से छुपा रखा है।
उसे लाइमलाइट में रहना पसंद नहीं…
और सच कहूं तो… मुझे लगता है वो थोड़ा बिगड़ा हुआ है।"
"ऐसा कैसे कह सकती हो तुम…?"
इस बार ऋतिक की आवाज़ में हल्का सा बदलाव था—
जैसे ये बात उसे कहीं अंदर तक लगी हो।
काम्या ने उसकी तरफ देखा—
और पहली बार उसे महसूस हुआ…
कि शायद उसने कुछ ऐसा कह दिया है…
जो उसे नहीं कहना चाहिए था।
मुझे पता है जोसफ ने उसके बारे में पता लगाया था...उसने शौर्य की अय्याश जिन्दगी के बारे में बताया।
...to be continued