मारकेश कहता है, " तुम्हें पता भी है तुम किस तलवार का नाम ले रहे हो, और वह तुम्हारे बुलाने से आ जाएगी। " उसने हँसते हुए आगे कहा, "लगता है अपनी मौत को सामने देखकर तुम सबके दिमाग ने काम करना ही बंद कर दिया।"
हालांकि राघव को भी उस तांत्रिक बंधन के कारण काफी जलन हो रही थी, लेकिन अपने दोस्तो को ऐसे दर्द में करहाते हुए देखकर अंदर से इतना टूट चुका था कि वो जलन भी उसे अपनी बेबसी के आगे कम लग रही थी। "मेरे दोस्त मरने की कगार पर है आज तो मै तुम्हे बुलाकर ही रहूँगा। राघव ने मन ही मन बड़बड़ाते हुए कहा।
उस तंत्र की शक्ति इतनी बढ़ चुकी थी कि, वे ठीक से खडे भी नहीं हो पा रहे थे।राघव ज़ोर से चिल्लाया और जैसे-तैसे अपनी बची हुई ऊर्जा को एकत्रित किया और जमीन से उठ खड़ा हुआ। और आखिर बार बुलाने का प्रयास करते हुए कहा,
"बँधा हुआ हूँ काली तांत्रिक विद्या से! आजा महिमा तलवार चीरती हुई बादलों और सितारों से...." राघव ने पूरी शक्ति और दृढ़ता से महिमा को आवाज़ लगाई थी, लेकिन उसे ये नहीं पता था कि वह कैसे और कहाँ से आएगी और आएगी भी या नहीं.....
मधु और बाज़ीगर तो जमीन से हिल भी नहीं पा रहे थे, तांत्रिक बंधन ने उन्हें इस तरह जकड़ लिया था कि दर्द में चिल्लाने के सिवाए और कुछ नहीं कर सकते थे।
अचानक बादलों मे तेज़ गरजना होने लगती है और बिजली कडकने लगती है।और एक जोरदार बिजली मारकेश के सुरक्षा कवच पर पड़ती है, जो उसने अपनी शक्ति से पूरे पहाड़ पर फैला रखा था, जैसे ही बिजली उसके कवच को छुती है, वह कवच किसी कांच की तरह टूट जाता है।
ऐसा लग रहा था कोई ऐसी शक्ति साक्षात् धरती पर आ रही है, जिसको रोक पाना इस कवच के तो क्या, इस कुदरत के बस में भी नहीं था।
तभी बादलों को चीरती हुई एक दिव्य और अलौकिक तेज के साथ महिमा तलवार राघव के हाथ मे आ जाती है. महिमा तलवार हाथ मे आते ही वह तांत्रिक बंधन भी टूट जाता है. उस तलवार मे इतनी शक्ति थी कि राघव से वह संभल भी नहीं रही थी।
उसे इस समय ऐसा लग रहा था मानों हजारों वोल्टेज का करंट उसके हाथ से होता हुआ पूरे शरीर में गुजर गया। जिस हाथ से उसने तलवार को पकड रखा था उस हाथ से खून निकलने लगा था. मधु दर्द मे कहती है, हमें जल्दी बचाओ राघव बहुत दर्द हो रहा है. राघव को खुद समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या और कैसे करे! उसके हाथ की पकड़ ढिली हो रही थी उसने ज़ोर से तलवार को पकड़ते हुए कहा, "हे जादुई तलवार! जादू दिखा ऐसा, मेरे दोस्तों पर किया गया तंत्र टूट जाए और इन दोनों का दर्द मिट जाए... "
राघव के ऐसा कहते ही तलवार से शक्ति निकलती है और वे दोनों उस तंत्र से आजाद हो जाते है, साथ ही उनकी सारी जलन और घाव भी भर जाते है। मधु खुशी के साथ कहती है, राघव तुमने बुला ही लिया जादुई तलवार को और हम दोनों को इस तंत्र से भी आजाद कर दिया.
बाजीगर ने कहा, हाँ! लेकिन ऐसा लग रहा है जैसे राघव इस जादुई तलवार की शक्ति को संभाल नहीं पा रहा है. "हाँ मुझे भी ऐसा ही लग रहा है और उसके हाथ से तो खून भी निकल रहा है, मधु ने कहा।
मारकेश एकटक महिमा तलवार को ही देखे जा रहा था, और सोचते हुए कहता है नहीं...नहीं ये नहीं हो सकता है। ये महिमा तलवार इसके बुलाने पर कैसे आ सकती है। लेकिन इस तलवार की शक्ति तो कम लग रही है। और इस लडके को भी देखकर लगता है कि इसको अभी इस तलवार की शक्तियों का पूरा ज्ञान नहीं है। ये अच्छा मौका है, इस लड़के को जान से मारने का, उसने चिल्लाते हुए कहा, अब मै तुम्हे जिन्दा नहीं छोडूगा लडके, मै तुम्हे शक्तिशाली तांत्रिक विद्या से मार दूंगा. ये कहकर मारकेश अपनी तांत्रिक शक्तियों को एकत्रित करने लग जाता है.
मधु कहती है, राघव जल्दी कुछ करो नहीं तो वह तुम्हे मार देगा.
राघव ने लंबी साँसे भरते हुए कहा, मैं... मैं अब कुछ नहीं कर सकता हूँ, मधु मेरा शरीर देखो कैसे काँप रहा है, मैं क्या ही कर सकता हूँ मैं इस तलवार को संभालने के लायक नहीं हूँ।
"नहीं-नहीं राघव तुम ऐसे हार नहीं सकते, ये इतनी दिव्य तेज़ की तलवार तुम्हें मिली है, ये कोई इंतफाक नहीं हो सकता, मेरी नज़र से देखो तो सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम ही इस तलवार के लायक हो और कोई नहीं, मधु ने कहा।
मारकेश अपनी पूरी शक्ति के साथ राघव पर वार कर देता है. मारकेश की शक्ति राघव की ओर बढ रही थी.
राघव ने कहा, मैं ऐसे बिना कोशिश करे तो नहीं मर सकता, और वो भी इस मारकेश से, राघव ने चिल्लाते हुए कहा, हे महिमा तलवार इसके जादू को चीर दे और अब उसे मार दे. ये कहकर राघव तलवार को मारकेश की ओर छोड देता है. जादुई तलवार उसके जादू को चीरते हुए मारकेश के शरीर के आर-पार निकल जाती है। और वापिस राघव के हाथ मे आ जाती है.
मारकेश मर जाता है. लेकिन राघव भी ये जादू करने के बाद बहुत ज्यादा कमजोर पड़ जाता है. मधु कहती है, राघव अब इस जादुई तलवार को वापिस भेज दो तुम इसकी शक्तियों को संभाल नहीं पा रहे हो, और अगर ये ऐसे ही तुम्हारे हाथ में रही तो, तुम्हें भी मार देगी इसका तेज़ बढ़ रहा है।
राघव कमजोरी के कारण घुटनो पर आ जाता है। उसके हाथों से खून बिना रुके बहता जा रहा था, उसने धीमी आवाज़ में कहा,हे महिमा तलवार मै तुम्हारी शक्तियों को संभाल नहीं पा रहा हूँ। तुम अभी वापिस चली जाओ. तुम्हारा आने के लिए धन्यवाद....
महिमा तलवार राघव के हाथ से गायब हो जाती है। राघव की आँखे बंद हो जाती है और वह गिर जाता है.
बाजीगर और मधु राघव की ओर दौड पडते है. मधु कहती है, उठो राघव उठो! बाजीगर कहता है, राघव के हाथ से तो खून भी बंद नहीं हो रहा है.
मधु राघव के सिर पर हाथ लगाती है और कहती है, बाजीगर राघव का शरीर तो आग के समान जलने लग रहा है. इसने हम दोनों की तो जान बचा ली लेकिन, अब इसकी जान खतरे मे है, हमें कुछ करना होगा? जल्दी से जल्दी राघव का इलाज करवाना होगा.
"मै राघव को बचाने के लिए कुछ भी कर सकता हूँ।" बाज़ीगर ने दृढ़ता भरी आवाज में कहा।
तभी मधु को महाबली कबिला याद आता है. वह बाजीगर से कहती है, काली पहाडी पर एक महाबली कबिला है जो राघव को बचाने मे हमारी मदद कर सकते है.
बाजीगर तुम जल्दी से विशालकाय बाज मे बदल जाओ! मैं राघव को तुम्हारे ऊपर लेकर बैठ जाउंगी। बाजीगर ने कहा, हाँ... में सिर हिलाया। बाजीगर विशालकाय बाज मे बदल जाता है।
मधु घायल राघव को उठाती है और जैसे-तैसे बाज पर बैठा देती है और जादुई कलश को लेकर खुद भी बाज पर बैठ जाती है, और कहती है बाजीगर जल्दी चलो! हमारे पास ज्यादा समय नहीं है। बाजीगर तेजी से उडान भर देता है.
और कुछ ही देर मे उनके कबिले मे पहुंच जाता है, विशालकाय बाज को देखकर कबिले के लोग डर जाते है.
महारत सरदार कहता है, सभी कबिले वाले सावधान हो जाए हमारे ऊपर एक विशाल बाज हमला करने वाला है. ये शोर सुनकर काशी और छाया भी बाहर आ जाती है.
मधु बाज से उतरती है और कहती है, सरदार! कोई हमला नहीं हुआ है. काशी ने कहा, तुम तो मधु हो ना. महारत कहता है, हाँ तुम तो उस लडके राघव की दोस्त हो ना?
"जी सरदार! मै वही हूँ, मुझे आपसे एक मदद चाहिए। महारत कहता है, बोलो हम क्या मदद कर सकते है।"राघव की जान खतरे मे है, उसको बचाने के लिए आपकी मदद चाहिए। मधु ने एक उम्मीद के साथ कहा।
छाया ने हैरानी के साथ कहा, क्या? कहाँ है राघव बेटा! "वह उस बाज के ऊपर है" मधु ने कहा।
महारत कबिले वालो से कहता है, जल्दी से राघव को उस बाज से नीचे उतारो.
कबिले के कुछ लोग जाकर राघव को नीचे उतारते है. काशी ने कहा, ये तो बहुत जख्मी है. इसके तो हाथो से भी काफी खून निकल रहा है। "जल्दी राघव को अंदर लेकर चलो.
और जल्द से जल्द वैध को बुलाया जाए" महारत ने आदेश दिया। बाजीगर भी इंसान के रूप मे बदल जाता है काशी कहती है, ये एक जादुई बाज है. "हाँ और अब ये हमारा दोस्त है, मधु ने कहा।
बाजीगर कहता है, जल्द से जल्द मेरे दोस्त को ठीक करवा दो. इसके जैसा इंसान मैंने आज तक नहीं देखा। महारत ने साथ देते हुए कहा, तुम ठीक बोल रहे हो, ये अपने से पहले दूसरो की मदद करता है.
कुछ ही देर मे वैध आ जाता है, और महारत से कहता है, क्या हुआ सरदार? आपकी बेटी काशी को कुछ हुआ है क्या ? नहीं मेरी बेटी तो ठीक है लेकिन राघव मेरे बेटे जैसा ही है जोकि बहुत घायल है. उसके हाथ से भी काफी खून निकल रहा है. आप जल्दी से चलो और एक बार उसे देख लो, महारत ने बताते हुए कहा।
अब आगे क्या होगा?
जानने के लिए पढ़ते रहिये....