"40 प्लस की कहानी मेरी जुबानी"
40 की उम्र में आते ही औरत बहुत कुछ भूल जाती है. उनमें से एक है उसकी "खुद की आवाज "जिसे वह ना तो पहचान पाती है और ना ही महसूस कर पाती है.
सुनना चाहती है तो बस अपने चारों ओर उपस्थित लोगों की फरमाइशे. जिन्हें पूरा करते-करते अपनी चाहते है, अपनी फरमाइशों का कहीं दम घोट देती है.
आज हमारे समाज में 40 प्लस घरेलू महिलाओं की यही हालत है. यह वही महिलाएं हैं जो अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में शायद अपने आप को कहीं खो बैठी है.
25 की उम्र में शादी 30 की उम्र में दो बच्चों की मां का टैग लगना यह आम बात है फिर उन बच्चों का बड़ा होना और पति का ऑफिस में बिजी होना सबको यही लगता है अब हमारी लाइफ सेट है हम तो यही चाहती थी पर कोई उस मां उस पत्नी उस बहू की ख्वाहिश जानना ही नहीं चाहता कि उसके भीतर क्या चल रहा है।क्या वह उस जीवन से संतुष्ट भी है........,,?
यह सवाल आज भी उसी तरह प्रत्येक पत्नी प्रत्येक मां और प्रत्येक बहू के मन में उठता है जैसे उस समय उठता था जब रूढ़िवादी प्रथाएं चलती थी जैसे बाल विवाह,भ्रूण हत्या आदि गला आज भी घोटा जाता है घूटन वैसे ही महसूस होती है सब कुछ होते हुए भी कुछ न होने का एहसास हर पल होता है.
समाज कहता है कि 40 के बाद औरत का नया सपना देखने का हक नहीं होता। 40 प्लस ऐसी आयु है जिसमें हमें पंख फैला कर उड़ने का कोई अधिकार नहीं है।लेकिन फिर भी दिल के किसी कोने से एक दबी आवाज सुनाई देती है कि हां मुझे भी कुछ करना है आगे बढ़ना है मुझे भी हक है अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियौ से बाहर निकलकर अपनी नई और एक ऐसी पहचान बनाने का जिससे मुझे समाज में एक अलग रुतबा मिले। बस इन्हीं नए हौसलों के साथ आगे बढ़कर नई पहचान बनाने की चाह में चल पड़ती हूं घर की चार दीवार से बाहर की दुनिया में कदम रखने भले ही रहा कठिन है डगर मुश्किल है फिर भी छोटे सपनों के साथ मंजिल हासिल करनी है और कर दिखाना है कि "40 प्लस का मतलब अब बस नहीं अब शुरू है" और मेरे सपनों की उड़ान अभी लंबी है।
मेरी पड़ोसन सीमा आंटी 42 की है दोनों बच्चे बड़े हो गए पति का बिजनेस सेट है सब कहते हैं अब तो आराम करो पर पिछले साल उन्होंने घर से ही बकरी शुरू की पहले लोग हंसे इस उम्र मे.......? आज उनके केक शहर में जाते हैं वह कहती हैं अब डर नहीं लगता क्योंकि अब खोने का डर नहीं पाने की ख्वाहिश है।
लोग क्या कहेंगे यह सबसे बड़ा डर है साड़ी छोड़कर जींस पहनो तो सवाल कोई कोर्स करो तो ताने दोस्तों से मिलो तो उम्र हो गई..... पर सच यह है जो आज ताना दे रहे हैं कल वही तारीफ करेंगे।औरत का सपना किसी उम्र का मोहताज नहीं है 40 प्लस का मतलब-अनुभव है संजीदगी है। और बड़ी बात जीने की आजादी है।40 प्लस का मतलब ख्वाहिशों के साथ चार दिवारी तोड़ कर उस पार मंजिल हासिल करने की है।40 प्लस कोई फुलस्टॉप नहीं यह कोमा है।आधी जिंदगी जिम्मेदारियो के नाम आधी खुद के नाम।तो आओ मिलकर कुछ नया सीखें,लिखे नया बिजनेस शुरू करें क्योंकि 40 प्लस में गिरेंगे तो पता है कैसे संभलना है।
मैं नारी! समझो मुझको।
ख्वाइशें क्या है मेरी कह दो मुझको।
मैं जब उड़ना चाहूं उडने दो मुझको।
कैद में ना रखो कैदी न समझो मुझको।
पाना चाहूं मंजिलों को मैं।
ना रोको ना टोको मुझको।
पंख दिए हैं तो आसमान भी मेरा है।
बस हौसला दो और आगे बढ़ने दो मुझको।
"दीप की कलम से"