The mystery of the last letter in Hindi Children Stories by HARPALSINH VAGHELA books and stories PDF | आख़िरी चिट्ठी का रहस्य

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आख़िरी चिट्ठी का रहस्य

आख़िरी चिट्ठी का रहस्य

बारिश की हल्की बूंदें गाँव की कच्ची गलियों को भिगो रही थीं। रवि बरामदे में बैठा पुराने फोटो देख रहा था। अचानक उसकी नज़र एक तस्वीर पर रुकी।

तस्वीर में दो लड़के मुस्कुरा रहे थे—एक रवि... दूसरा हैप्पी।

रवि के होंठों पर मुस्कान आई, लेकिन आँखें नम हो गईं।

"यार... तू कहाँ चला गया?"

यह सवाल उसने पिछले सात सालों में न जाने कितनी बार खुद से पूछा था।

हैप्पी शहर चला गया था। शुरुआत में दो-तीन चिट्ठियाँ आईं, फिर अचानक सब बंद हो गया।

एक रात, ठीक 12 बजे, रवि के दरवाज़े पर दस्तक हुई।

इतनी रात को कौन हो सकता है?

दरवाज़ा खोला तो बाहर कोई नहीं था।

लेकिन ज़मीन पर एक पुराना लिफाफा रखा था।

उस पर सिर्फ दो शब्द लिखे थे—

"रवि के लिए..."

लिखावट बिल्कुल हैप्पी जैसी थी।

रवि के हाथ काँपने लगे।

उसने लिफाफा खोला।

अंदर सिर्फ एक लाइन लिखी थी—

"अगर दोस्ती अब भी ज़िंदा है... तो कल शाम पुराने बरगद के पास आना। अकेले।"

अगले दिन पूरा दिन जैसे रुका हुआ था।

शाम होते ही रवि बरगद के पास पहुँचा।

वहाँ कोई नहीं था...

लेकिन पेड़ पर एक लाल धागा बँधा हुआ था।

धागे के साथ एक छोटी-सी चाबी लटक रही थी।

चाबी के पीछे लिखा था—

"जहाँ हमारी पहली जीत हुई थी..."

रवि समझ गया।

वह दौड़ता हुआ उस पुराने मैदान पहुँचा जहाँ बचपन में क्रिकेट खेला करता था।

मैदान के कोने में एक टूटी हुई सीमेंट की बेंच थी।

उसके नीचे मिट्टी थोड़ी उभरी हुई थी।

रवि ने हाथों से मिट्टी हटाई।

अंदर एक छोटा लोहे का डिब्बा था।

डिब्बे में एक डायरी, एक पुरानी क्रिकेट बॉल और एक फोटो थी।

फोटो के पीछे लिखा था—

"दोस्ती कभी तस्वीरों में नहीं रहती... उसे दिल में ज़िंदा रखना पड़ता है।"

रवि की आँखें भर आईं।

डायरी खोली।

पहले पन्ने पर लिखा था—

"अगर तुम यह पढ़ रहे हो, तो समझ लेना कि ज़िंदगी ने मुझे बहुत दूर भेज दिया। लेकिन दोस्ती कभी दूर नहीं हुई।"

हर पन्ने में बचपन की यादें थीं—

पाँच-पाँच रुपये जोड़कर गेंद खरीदना...

दो पत्थरों को विकेट बनाना...

आउट होने पर झगड़ा...

और फिर पाँच मिनट बाद उसी दोस्त के साथ हँसना...

डायरी के आख़िरी पन्ने पर सिर्फ एक पता लिखा था।

रवि बिना देर किए उस पते पर पहुँच गया।

वह एक छोटा-सा अनाथ आश्रम था।

वहाँ के मैनेजर ने पूछा—

"क्या तुम रवि हो?"

रवि हैरान रह गया।

"हाँ..."

मैनेजर मुस्कुराए।

"हैप्पी अक्सर तुम्हारा ज़िक्र करता था। उसने कई साल पहले यहाँ के बच्चों की पढ़ाई और खेल का खर्च उठाना शुरू किया था। उसने कहा था कि अगर एक दिन रवि आए, तो उसे यह दे देना।"

उन्होंने एक लिफाफा रवि के हाथ में रखा।

रवि ने काँपते हाथों से उसे खोला।

उसमें लिखा था—

"रवि... लोग समझते हैं कि अमीर वो होता है जिसके पास बहुत पैसा हो। लेकिन मेरी नज़र में सबसे अमीर इंसान वो है जिसके पास एक सच्चा दोस्त हो। अगर मैं कभी लौटकर न आ सकूँ... तो इन बच्चों का साथ मत छोड़ना। यही मेरी आख़िरी ख़्वाहिश है।"

रवि की आँखों से आँसू गिर पड़े।

उसने उसी दिन फैसला किया...

अब हर रविवार वह उन बच्चों के साथ क्रिकेट खेलेगा।

उन्हें पढ़ाएगा।

उनके साथ हँसेगा।

कुछ महीनों बाद...

एक छोटा बच्चा रवि के पास आया और बोला—

"भैया... क्या मैं आपको अपना सबसे अच्छा दोस्त कह सकता हूँ?"

रवि मुस्कुराया।

उसने आसमान की ओर देखा।

ऐसा लगा जैसे बादलों के पीछे से हैप्पी मुस्कुरा रहा हो।

उसी पल रवि समझ गया...

कुछ लोग ज़िंदगी से चले जाते हैं... लेकिन उनकी दोस्ती किसी और की मुस्कान बनकर हमेशा ज़िंदा रहती है।

और शायद...

यही दुनिया का सबसे खूबसूरत रहस्य है।