लडकी बेड पर बैठी हुई उस लडके को ऊपर से नीचे तक गौर से देखती है. उसने एक साफ- सुथरी व्हाइट शर्ट, ब्लैक पैंट और पैरों में महंगे जूते पहने हुए थे. उसके घने बाल ब्लैक Color के थे और उसकी आँखें कँजी थीं.
उसे देखते ही लडकी के मुँह से अचानक निकला, आदित्य.
आदित्य उसकी तरफ बढते हुए परेशान और रूखे लहजे में कहता है, मैं जानता हूँ तू मुझसे नाराज होगी कि मैं यहाँ क्यों आया हूँ, तुझसे मिलने. जिस लडके को तू पसंद करती है, उसे मेरा और तेरा साथ देखना अच्छा नहीं लगता. पर उसकी खातिर तूने अपनी यह क्या हालत बना ली है? बस. तू थोडा खाना खा ले, फिर मैं यहाँ से चला जाऊँगा. अब कुछ बोलेगी भी?
मानवी हैरान होकर अपने मन में सोचती है, मेरे मुँह से अचानक इस लडके का नाम अपने आप कैसे निकल गया? और इसकी बातें सुनकर मुझे जहाँ तक समझ आ रहा है. मैंने जो इस शरीर यानी मायरा की यादें देखी थीं, यह तो उस समय की बात है जब यह लडकी उस दूसरे लडके के लिए पतली होने की कोशिश कर रही थी. यह भूखी- प्यासी रहती थी, जिसकी वजह से इसकी हालत इतनी खराब हो गई और यह अस्पताल पहुँच गई. अगर मैं हिसाब लगाऊँ, तो मैं मायरा की मौत वाले वक्त से पूरे पाँच साल पीछे आ चुकी हूँ! मतलब मैं वक्त के पीछे.
आदित्य उसे खामोश देखकर झुंझलाते हुए बीच में ही बोल पडता है, चुप क्यों है? बोलना. नाराज है तो नाराज ही रह, पर कम से कम खाना तो खा ले!
मानवी उसकी तरफ देखती है और झिडकते हुए कहती है, तू चुप रहेगा तब तो मैं कुछ बोलूँगी! और चिल्लाने के बजाय मेरी थोडी उठने में हेल्प कर, मुझसे अकेले उठते नहीं बन रहा है।
आदित्य हैरान होकर कहता है, तुम. तुम मुझसे कह रही हो?
मानवी चिढकर कहती है, तो और किससे कहूँगी? यहाँ तुम्हारे अलावा और कोई दिख रहा है क्या?
आदित्य अविश्वास से उसे देखता है और कहता है, हाँ, मेरे अलावा यहाँ कोई नहीं है. चल ठीक है, तूने बहुत जिद कर ली, अब चुपचाप खाना खा ले।
मानवी बिस्तर पर थोडा पीछे होते हुए कहती है, मुझसे अपने हाथों से खाते नहीं बनेगा, तुम ही खिला दो।
आदित्य बिना कुछ कहे खाना निकालता है और अपने हाथों से उसे खिलाने लगता है. मानवी खाना तो खा रही थी, लेकिन उसका दिमाग कहीं और ही दौड रहा था.
मानवी खाना खाते हुए आदित्य की तरफ देखती है, लेकिन उसका दिमाग कहीं और ही चल रहा था. वह अपने मन में सोचती है, आज से मैं मानवी नहीं हूँ. इसी वक्त से. अब मेरा नाम मायरा है. मायरा. तुमने शायद इस दुनिया की क्रूरता मरते समय देखी होगी. पर हकीकत तो यह है कि यह दुनिया पहले से ही ऐसी थी, बस तुमने इसे समझने में देर कर दी. यहाँ इंसान जब तक कोई फायदा नहीं देखता, तब तक किसी से कोई रिश्ता नहीं रखता. न प्यार, न दोस्ती. अगर अपना फायदा न हो, तो ये लोग किसी को मरते हुए भी न देखें और न ही किसी को बचाएं।
मायरा खाना खाते हुए अचानक रुकती है और आदित्य की तरफ देखकर पूछती है, डॉक्टर ने क्या कहा है? मैं कब डिस्चार्ज होऊँगी?
आदित्य उसे समझाते हुए प्यार से कहता है, अभी कुछ नहीं कह सकते, तू अभी आराम कर. अगर अच्छे से खाना खाएगी, तो हो सकता है आज ही डिस्चार्ज हो जाए, नहीं तो थोडा टाइम भी लग सकता है।
मायरा के चेहरे पर अचानक एक शिकन उभर आती है, वह घबराकर पूछती है, मम्मी- पापा. क्या तुमने उन्हें बताया? उन्हें इसके बारे में कुछ पता है?
आदित्य तुरंत उसे दिलासा देते हुए कहता है, नहीं, मैंने उन्हें अभी कुछ नहीं बताया है. तू जब Collage से घर जा रही थी, तब रास्ते में बेहोश हो गई थी. मैं वहीं पास में था, इसलिए तुझे तुरंत यहाँ लेकर आया. मैं अंकल- आंटी को फोन करने ही वाला था, लेकिन तभी डॉक्टर ने बताया कि तू सिर्फ कमजोरी की वजह से बेहोश हुई है. यह सुनकर मैंने अंकल- आंटी को फोन नहीं किया, क्योंकि मैं जानता हूँ अगर उन्हें पता चलता तो वो तुझे बहुत डांटते. तू बस अभी अपनी तबियत ठीक करने पर ध्यान दे, अंकल- आंटी को मैं खुद संभाल लूँगा।
तभी मायरा कमरे में चारों तरफ नजर दौडाते हुए पूछती है, आदित्य, मेरा मोबाइल किधर है?
आदित्य का चेहरा थोडा सख्त हो जाता है. वह खाने की प्लेट एक तरफ रखता है और रूखे लहजे में पूछता है, क्यों? तुझे क्या उसे Call करना है? हाँ, तू Call कर भी सकती है उसे! पर मन्नू, मुझे पूरा यकीन है कि वह यहाँ नहीं आने वाला।
यह सुनते ही मायरा अपनी आँखों से आदित्य को बुरी तरह घूरने लगती है. उसकी आँखों में ऐसा गुस्सा देख आदित्य थोडा झेंप जाता है और तुरंत हाथ उठाते हुए कहता है, ठीक है, बाबा! मैं उसे कुछ नहीं कहूँगा।
मायरा अपनी आवाज को शांत करते हुए कहती है, मैं ऐसा कुछ नहीं कह रही हूँ कि मुझे उसे Call करना है. मुझे बस मेरा मोबाइल चाहिए क्योंकि तेरे जाने के बाद मैं बोर हो जाऊँगी, इसलिए मोबाइल देखकर अपना टाइम पास करूँगी।
आदित्य के होंठों पर एक शरारती मुस्कान आ जाती है. आदित्य मायरा की तरफ एक कदम बढाता है और थोडा गंभीर होकर कहता है, तुझे सच में ऐसा लग रहा है कि मैं मजाक कर रहा हूँ? तुझे किसने कहा कि मैं यहाँ से जाने वाला हूँ?
मायरा अपनी तरफ से बनावटी चिढ लाते हुए कहती है, अच्छा? और तू यहाँ बैठे- बैठे क्या करेगा? मुझे चौबीसों घंटे घूरेगा? वैसे भी मैं तेरी शक्ल देख- देखकर ही बोर हो जाऊँगी. इससे बेहतर तो यह है कि मैं सो जाऊँगी।
आदित्य तुरंत अपने हाथ हवा में लहराता है और बडे ही नाटकीय अंदाज में कहता है, अरे, मैं तुझे बोर बिल्कुल नहीं होने दूँगा! तेरे मनोरंजन के लिए. मैं यहाँ अस्पताल के कमरे में डांस भी कर सकता हूँ!
यह सुनते ही मायरा अपनी आँखें बडी करके आदित्य को बिना कुछ बोले बस घूरने लगती है. आदित्य उसकी ऐसी गंभीर शक्ल देखकर अंदर से बुरी तरह घबरा जाता है. वह तुरंत अपने कान पकडता है और हकलाते हुए कहता है, आई. आई एम सॉरी! वो मैंने तो बस ऐसे ही कह दिया था.
मायरा अब और ज्यादा अपनी हँसी पर काबू नहीं रख पाती. वह तुरंत अपने चेहरे पर अपना हाथ रखती है और जोर- जोर से हँसने लगती है. कमरे का भारी और उदास माहौल पल भर में उसकी खिलखिलाहट से गूँज उठता है.
मायरा हँस ही रही थी कि अचानक उसकी नजर आदित्य पर पडी. वह हँसना बंद करके देखती है कि आदित्य बिना पलक झपकाए बस उसे ही देखे जा रहा है.
मायरा थोडा असहज होकर आदित्य से पूछती है, तुम मुझे ऐसे क्यों देख रहा है?
आदित्य एक गहरी साँस लेता है और बेहद संजीदगी से कहता है, तुझे बहुत समय बाद ऐसे खुलकर हँसते हुए देख रहा हूँ, मायरा।
मायरा के चेहरे पर एक कोमल मुस्कान आ जाती है, वह कहती है, तू अगर ऐसी हरकतें करेगा ना, तो मैं हर रोज हँसूंगी।
आदित्य तुरंत पूरे हक से कहता है, ठीक है, फिर मैं आज से और अभी से ऐसी ही हरकतें करूँगा।
मायरा फिर से थोडा हँसती है और कहती है, तुझे लोग पागल समझने लगेंगे।
आदित्य उसकी आँखों में देखते हुए कहता है, तो लोगों से मुझे क्या फर्क पडता है? तेरे चेहरे पर हँसी लाने के लिए कुछ भी कर सकता हूँ।
मायरा बेड के खाली हिस्से पर हाथ थपथपाते हुए आदित्य को बोलती है, यहाँ. यहाँ बैठ।
आदित्य मायरा के बाजू में पलंग पर बैठते हुए पूछता है, बोल, क्या कह रही है?
मायरा बिना कुछ सोचे- समझे आगे बढती है और आदित्य को कसकर गले लगा लेती है. वह भावुक होकर बोलती है, तू सच में मेरा बेस्ट Friend है. अरे, कुछ बोल तो सही!
आदित्य अपनी भावनाओं को छुपाने के लिए तुरंत कहता है, अच्छा बाबा! बहुत हो गई तेरी ये इमोशनल नौटंकी. मोबाइल चाहिए ना तुझे? मैं अभी लेकर आता हूँ। यह कहकर आदित्य तुरंत मुडता है और कमरे का गेट खोलकर बाहर चला जाता है.
मायरा दरवाजे की तरफ देखती रह जाती है और अपने मन में सोचती है, अभी तो कह रहा था कि दिन- भर यहीं बैठा रहेगा, और इतनी जल्दी चला गया? यह सच में लडकों को समझना मेरे बस की बात नहीं है!
थोडी देर बाद कमरे का गेट खुलता है. मायरा बिना देखे ही, सिर्फ दरवाजे की आवाज सुनकर तुरंत शिकायत भरे लहजे में कहती है, आदित्य! तूने कितनी देर लगा दी.
लेकिन जैसे ही मायरा सामने देखती है, उसके शब्द मुँह में ही रह जाते हैं. सामने आदित्य नहीं, बल्कि अस्पताल की एक नर्स खडी थी.
नर्स मुस्कुराते हुए मायरा के बेड के पास आती है और उसके हाथ में मोबाइल देते हुए कहती है, आपके Friend को एक बहुत ही अर्जेंट Call करना था, इसलिए उन्होंने यह मोबाइल मुझे दे दिया ताकि मैं आपको लाकर दे दूँ।
मायरा नर्स से मोबाइल लेती है और कहती है, थैंक यू.
नर्स टेबल पर दवाइयों की कुछ गोलियाँ रखती है और कहती है, मैम, अगर आपने खाना खा लिया हो तो यह गोलियाँ खा लीजिएगा. वैसे, इन्हें अभी मत खाइएगा, आधे घंटे बाद लीजिएगा. या फिर आप यह बेड के पास लगी बेल (घंटी) दबा दीजिएगा, मैं खुद आ जाऊँगी आपको दवा खिलाने के लिए।
मायरा उस नर्स की तरफ देखकर दोबारा थैंक्स बोलती है, थैंक You सो मच, नर्स।
नर्स कमरे से बाहर जाते- जाते मुडती है और कहती है, मैम, मोबाइल ज्यादा मत देखिएगा, अभी आपको आराम की जरूरत है।
मायरा मुस्कुराते हुए हाँ में अपनी गर्दन हिला देती है.
जैसे ही नर्स बाहर जाती है, मायरा जैसे ही मोबाइल को अपने चेहरे के सामने लाती है, फेस लॉक के जरिए मोबाइल तुरंत अनलॉक हो जाता है.
वह मोबाइल स्क्रीन को देखते हुए अपने मन में सोचती है, अगर मैं इस वक्त मायरा के शरीर में पाँच साल पीछे आ चुकी हूँ, तो इस हिसाब से पाँच साल पहले का ही वक्त चल रहा है. और उस समय तक मेरे बारे में दुनिया को ज्यादा जानकारी नहीं थी. मैं तो बस एक गुमनाम राइटर थी, जिसका पेन- नेम (Pen Name)' एम. एस. था. मुझे बस यह पता लगाना है कि क्या इस वक्त' एम. एस. के बारे में कोई जानकारी इंटरनेट पर है या नहीं।
मायरा तुरंत इंटरनेट खोलती है और सर्च बार में टाइप करती है—' एम. एस. राइटर'
लेकिन स्क्रीन पर जो रिजल्ट आता है, उसे देखकर उसके होश उड जाते हैं. मोबाइल में दूर- दूर तक' एम. एस. नाम की किसी लडकी या राइटर का कोई जिक्र नहीं था. मायरा हैरान होते हुए बुदबुदाती है, इसका क्या मतलब है? क्या मेरे बारे में भी किसी को कुछ नहीं पता होगा?
वह घबराकर जल्दी से अपने परिवार के बारे में सर्च करती है, लेकिन हैरानी की बात थी कि इंटरनेट पर उसे अपने परिवार के बारे में भी कुछ नहीं मिलता. वह कुछ और खास चीजों के बारे में सर्च करती है, पर हर बार स्क्रीन पर' नो रिजल्ट' (No Result) लिखा आता है.
आखिरकार, मायरा मोबाइल को एक तरफ रखती है और रखते ही उसके मन में यह बात कौंधती है. वह सोचते हुए खुद से कहती है, इसका मतलब. यह दुनिया मेरी दुनिया से अलग है. यहाँ सब कुछ चेंज है. ठीक वैसे ही, जैसे मैंने किताबों में पढा था कि दो दुनिया एक जैसी होती हैं, बस उनमें छोटे- mote चेंजेस होते हैं. मैंने हर उस इंसान को सर्च करके देख लिया जो' एम. एस. को जानता था, हर उस चीज को ढूँढ लिया जिससे' एम. एस. का गहरा रिश्ता था. पर मुझे कुछ नहीं मिला. मुझे लग रहा था कि' एम. एस. के लिए सब कुछ मिट गया है, पर जब मैंने और सर्च किया, तो मुझे समझ में आया कि यह दुनिया ही अलग है।
वह एक लंबी और थकी हुई साँस छोडती है और बेड पर सीधे लेटते हुए कहती है, अभी तो मुझे सो जाना चाहिए, क्योंकि मुझे आराम की सख्त जरूरत है. जब मैं ठीक हो जाऊँगी, तभी इन सब चीजों को अच्छे से समझ पाऊँगी. मुझे अभी शांति की जरूरत है।
यह सोचते ही मायरा अपनी आँखें बंद कर लेती है.
थोडी देर बाद कमरे का गेट धीरे से खुलता है और आदित्य अंदर आता है. आदित्य मायरा से कुछ बोलने ही वाला था, लेकिन तभी उसकी नजर बेड पर पडती है. वह देखता है कि मायरा गहरी नींद में सो रही है.
आदित्य वहीं ठिठक जाता है. वह दबे पाँव, बिल्कुल आराम से मायरा के बेड के पास आता है ताकि उसकी नींद खराब न हो. वह झुककर मायरा के ऊपर कंबल ओढाता है और धीरे से उसके सिर के नीचे लगे तकिए को सही करता है. सोते हुए मायरा के चेहरे पर एक अजीब सा सुकून था, जिसे देखकर आदित्य के होंठों पर एक कोमल मुस्कान आ जाती है.
आदित्य मायरा को सोते हुए देखता रहता है और उसके मन का दर्द उसकी आँखों में साफ छलक आता है. वह मन ही मन कहता है, सोती हुई कितनी मासूम लगती है ना. यह पहले कितनी अच्छी थी, अपनी जिंदगी कितनी खुलकर जीती थी. वह मुझसे दूर रहती थी. सिर्फ उस लडके की वजह से. क्योंकि हम दोनों का साथ देखना उस लडके को बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था. इसीलिए यह हमेशा मुझसे दूर रहती थी, यहाँ तक कि इसने मुझसे मिलना भी बहुत कम कर दिया था. उस लडके के चक्कर में मेरी वो पुरानी हंसती- खेलती दोस्त कहीं खो सी गई थी।
आदित्य एक गहरी और भारी साँस लेता है, फिर मायरा के चेहरे पर आई उस हल्की सी मुस्कान को देखकर सोचता है, पर आज. आज मेरी वो पुरानी दोस्त वापस आ चुकी है. लेकिन क्या यह बदलाव सिर्फ कुछ पल के लिए ही है? जब उसे होश आएगा, क्या वह दोबारा वैसी ही हो जाएगी? मुझे नहीं पता इन सब सवालों के जवाब.
आदित्य का दिल भर आता है. वह धीरे से मायरा के हाथ के पास अपना हाथ रखता है, लेकिन उसे छूता नहीं है. वह बेहद भावुक होकर मन ही मन गुहार लगाता है, प्लीज मायरा. मुझसे दोबारा दूर मत जाना. हम दोनों एक दूसरे को कितनी अच्छी तरह से जानते हैं, हम बचपन के दोस्त हैं मायरा. बचपन के दोस्त!
सुबह जब उठकर मायरा देखती है, तो आदित्य उसके ठीक बाजू में सो रहा था. वह रात भर वहीं बैठा- बैठा शायद थककर सो गया था. मायरा बेड से थोडा उठने की कोशिश करती है, लेकिन जैसे ही वह आगे झुकती है, आदित्य का हाथ भी उसके साथ खिंचा चला आता है.
मायरा को समझ नहीं आता कि क्या हुआ, लेकिन उस खिंचाव की वजह से आदित्य की नींद खुल जाती है. वह अपनी भारी आँखें मलता है और हडबडाकर पूछता है, मायरा. क्या हुआ? सब ठीक तो है ना?
मायरा थोडा दर्द में अपनी आँखें सिकोडते हुए कहती है, अरे. वो तुम्हारी घडी मेरे बालों में बुरी तरह फंस गई है।
कमरे का दरवाजा खुलते ही मायरा की माँ हैरान होकर पूछती हैं, आदित्य. ये क्या कर रहा है?
आदित्य घबराकर आंटी की तरफ मुडता है और कुछ कह पाता, उससे पहले ही मायरा की दर्द से चिल्लाने की आवाज आती है, आह!
मायरा अपनी तकलीफ में बिना सोचे- समझे आदित्य का हाथ पकडकर अपनी तरफ खींच लेती है. आदित्य इस अचानक लगे झटके से अपने आप को संभाल नहीं पाता और उसका बैलेंस पूरी तरह बिगड जाता है. वह सीधे मायरा के ऊपर जा गिरता है. मायरा की माँ सामने का यह नजारा देखकर वहीं की वहीं खडी रह जाती हैं.
तभी दोबारा दरवाजा खुलता है और एक प्यारी सी, फिक्रमंद आवाज आती है, हनी. हमारी बेटी कैसी है?
वह मायरा के पापा थे. लेकिन वह उसके आगे कुछ और बोल पाते, उससे पहले ही उनकी नजर बेड पर पडती है. सामने का नजारा देखकर वह चौंक जाते हैं और अपनी पत्नी से पूछते हैं, हनी. यह सब क्या है?
मायरा की माँ अभी कुछ जवाब दे ही पातीं कि तभी पीछे से एक शांत, धीमी और भारी आवाज आती है, मॉम- डैड, आप यहाँ बाहर क्या कर रहे हैं? अंदर चलिए.
वह लडका जैसे ही आगे आता है, मॉम- डैड उसे कुछ समझाने के बजाय बस सामने की तरफ इशारा करके दिखाते हैं. वह लडका जैसे ही सामने देखता है, उसकी आँखें भी फटी की फटी रह जाती हैं. मामला बढता देख मायरा की माँ तुरंत सिचुएशन को संभालने की कोशिश करती हैं और उस लडके से कहती हैं, रोहन बेटा. चलो, हम सब बाहर चलते हैं।
इसी बीच, बेड पर फंसी मायरा आदित्य की तरफ देखकर दबी आवाज में कहती है, आदित्य. मेरे ऊपर से उठ!
आदित्य बेहद शर्मिंदा और हडबडाया हुआ सा धीरे से उठता है, और सबसे पहले बहुत ही आराम से मायरा के बालों में से अपनी घडी निकालता है. वह बेड से अलग होकर खडा होता है और नजरें झुकाकर सामने खडे अंकल, आंटी और रोहन की तरफ देखता है.
आदित्य घबराते हुए अपनी नजरें उठाता है और हाथ जोडकर कहता है, अंकल, आंटी, रोहन. प्लीज मेरी बात सुनिए, मैं समझाता हूँ कि यह सब क्या था. आप जो सोच रहे हैं वैसा कुछ नहीं.
आदित्य की बात बीच में ही काटते हुए मायरा की माँ मुस्कुरा देती हैं और कहती हैं, अरे आदित्य बेटा, शांत हो जाओ. मैंने जो देखा वो गलत नहीं है, मुझे सब समझ आ रहा है।
फिर वह तुरंत आगे बढकर बेड के पास आती हैं और मायरा का हाथ अपने हाथों में लेकर बडे लाड से कहती हैं, मेरी बच्ची, तुम ठीक तो हो ना? हम तो कल ही यहाँ आना चाहते थे, लेकिन आदित्य ने ही हमें मना कर दिया कि तुम सो रही हो और तुम्हें आराम की जरूरत है।
तभी पीछे खडा रोहन थोडा अलग अंदाज में, हल्के गुस्से और प्यार से कहता है, मॉम, मुझे तो किसी ने बताया ही नहीं था, नहीं तो मैं तो कल रात को ही यहाँ आ जाता! मैं अपनी प्यारी सी बहन को यहाँ अस्पताल में अकेला थोडी छोड सकता था।
यह सब सुनकर पापा आगे आते हैं और दोनों को चुप कराते हुए कहते हैं, अरे बाबा, अब मायरा ठीक है ना? तुम दोनों बस करो. और वैसे भी, जब तक आदित्य यहाँ इसके साथ था, मुझे इस बात की कोई चिंता ही नहीं थी. अगर आदित्य नहीं होता, तो क्या मैं अपनी बेटी को यहाँ अकेला रहने देता?
पापा मुस्कुराते हुए मायरा के सिर पर हाथ रखते हैं और प्यार से पूछते हैं, मेरी प्रिंसेस. अब कैसा लग रहा है तुम्हें?
मायरा पापा के इस बेपनाह प्यार को देखकर भावुक हो जाती है और उनके हाथ को थामकर मुस्कुराते हुए कहती है, अब मैं बिल्कुल ठीक हूँ पापा।