The promise of seven rounds in Hindi Spiritual Stories by kanta books and stories PDF | सात फेरो का वादा

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सात फेरो का वादा



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*Chapter 1: कीचड़ और किस्मत ~ 900 शब्द*

जयपुर में सावन की पहली बारिश थी। सड़कें तालाब बन गई थीं। 

अनाया शर्मा, 24 साल। एक MNC में HR Executive। सैलरी 25 हजार। घर में पापा टीचर, मम्मी, छोटा भाई। हर महीने EMI, फीस, दवाइयां... जिम्मेदारी का बोझ।

शाम 7:30। ऑफिस से निकली तो ऑटो नहीं मिला। सफेद सूट और काला दुपट्टा संभालते हुए वो चल पड़ी।

तभी एक काली Royal Enfield ने फुल स्पीड में पानी उछाला। *छपाक!* पूरा कीचड़ सूट पर।

"अंधे हो क्या??" अनाया चिल्लाई।

बाइक रुकी। हेलमेट उतरा। 6 फुट, तीखे नैन-नक्श, आंखों में थकान पर रौब। उम्र 28।

"सॉरी मैडम। गलती हो गई।" आवाज भारी पर सॉफ्ट।

"सॉरी? 4000 का सूट खराब कर दिया।"  
लड़के ने पर्स निकाला: "कितना हुआ?"

"पैसे नहीं चाहिए। अक्ल चाहिए।" कहकर अनाया चली गई।

पीछे से आवाज आई: "मैं आरव सिंह हूं। अगली बार मिले तो गुलाब दूंगा, कीचड़ नहीं।"

अनाया ने मुड़कर भी नहीं देखा।

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अगली सुबह। बोर्ड रूम।  
CEO: "Meet our new GM - Mr. आरव सिंह। London से MBA। अब North India की जिम्मेदारी इनकी।"

दरवाजा खुला। वही आरव। अब 3-piece सूट में।

आरव की नजर अनाया पर रुकी: "तो मैडम, कीचड़ का हिसाब यहीं होगा?"

पूरा ऑफिस सन्न। अनाया शर्म से लाल।

मीटिंग बाद आरव केबिन में आया। हाथ में Dryclean का बिल + 1 गुलाब।  
"वादा निभा दिया। डिनर?"

"GM साहब, प्रोफेशनल रहिए।"  
"मैं प्रोफेशनल ही हूं। गलती की जिम्मेदारी लेना भी प्रोफेशनलिज्म है।" आरव मुस्कुराया।

अनाया मना नहीं कर पाई।

पहले हफ्ते दोस्ती। दूसरे हफ्ते हंसी। तीसरे हफ्ते... दिल।

आरव अलग था। करोड़पति बाप का बेटा होकर भी घमंड नहीं। अनाया को हर मीटिंग में बोलने का मौका देता। "तुम कर सकती हो" कहता।

एक दिन गाड़ी में बारिश।  
आरव: "पापा कहते हैं बिजनेस में दिल मत लगाना।"  
अनाया: "तो?"  
आरव ने उसका हाथ पकड़ा: "मैंने दिल लगा लिया। तुम में।"

अनाया चुप। पर दिल ने हां कह दिया।

*Chapter 2: राजपूत की जिद और टीचर की बेटी ~ 1000 शब्द*

2 महीने बाद। आरव ने घर पर बात की।

जोधपुर हाउस। संगमरमर, नौकर, 3 गाड़ियां।

आरव: "मां, पापा... मैं अनाया से शादी करना चाहता हूं।"  
मां ने चाय का कप रख दिया: "कौन अनाया?"  
"HR में है। शर्मा जी की बेटी। बहुत संस्कारी है।"

पापा का चेहरा लाल: "शर्मा? टीचर की बेटी? हमारी बराबरी की नहीं।"  
मां: "हम ठाकुर हैं आरव। खानदान की इज्जत का क्या होगा?"

आरव: "इज्जत दिल से होती है पापा। सरनेम से नहीं।"

पापा टेबल पर हाथ मारा: "या तो ये बिजनेस, ये नाम, ये करोड़ों... या वो लड़की।"

आरव 10 सेकंड खामोश रहा। फिर उठा: "मैंने चुन लिया।"  
और घर से निकल गया। सिर्फ कपड़े और लैपटॉप।

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अनाया का 1BHK। 8 हजार किराया।

अनाया रोई: "क्यों मेरी वजह से सब छोड़ा?"  
आरव ने आंसू पोंछे: "क्योंकि तुम करोड़ों से कीमती हो।"  
"छोटा घर, पुरानी गाड़ी, पर अपना प्यार। चलेगा?"

अनाया ने गले लगा लिया: "तुम्हारे साथ झोपड़ी भी महल है।"

संघर्ष शुरू। आरव ने Export का छोटा बिजनेस शुरू किया। अनाया दिन में जॉब, रात को Account। 
पहले 3 महीने एक भी ऑर्डर नहीं। कर्ज। किराया लेट।

एक रात अनाया बुखार में तप रही थी। पैसे नहीं थे दवाई के।  
आरव रात 2 बजे दोस्त से उधार मांगकर दवाई लाया। सिर पर पट्टी रखी।

सुबह अनाया: "तुम रोए थे?"  
आरव: "शेर भी रोते हैं... जब अपना दर्द में हो।"

धीरे-धीरे मेहनत रंग लाई। 6 महीने में कंपनी खड़ी हो गई। 15 लोग की टीम। Dubai से पहला बड़ा ऑर्डर।

उसी खुशी के दिन... किस्मत ने पलटी मारी।

*Chapter 3: साजिश, खून और बदला ~ 1100 शब्द*

आरव के बिजनेस पार्टनर का नाम था विक्रम। बचपन का दोस्त। पर जलनखोर।

विक्रम: "तेरे बाप ने मुझे कंपनी से निकाला। अब तू भी बड़ा बन गया?"  
आरव: "मेहनत से बना हूं विक्रम।"

विक्रम ने प्लान बनाया। आरव को तोड़ना है तो उसकी कमजोरी - अनाया।

शुक्रवार रात। अनाया ऑफिस से लेट निकली। आरव मीटिंग में था।  
सूनी सड़क। एक ट्रक ने जानबूझकर टक्कर मारी।

हॉस्पिटल। ICU। डॉक्टर: "Head injury। 20% chance। 72 घंटे क्रिटिकल।"

आरव 3 दिन, 3 रात वहीं। खाना नहीं, नींद नहीं। बस अनाया का हाथ।

चौथे दिन पुलिस आई: "CCTV में ट्रक का नंबर फर्जी है। ये Accident नहीं, Murder Attempt है।"

आरव टूटा नहीं। वो शेर बना।

उसने खुद Investigation की। विक्रम के आदमी को पकड़ा। मार नहीं खाई। कानून से लड़ाई लड़ी।  
 सबूत, Call Recording, Bank Transaction... सब कोर्ट में।

6 महीने बाद। फैसला: विक्रम को 10 साल।

उसी दिन अनाया को होश आया।  
पहला शब्द: "तुम... बूढ़े लग रहे हो।"  
आरव हंसा और रोया एक साथ: "तुम्हारे बिना जवान रहकर भी क्या करता?"

अनाया: "मुझे लगा मैं मर गई।"  
आरव: "मरने नहीं दूंगा। वादा किया था ना... सात जन्मों का।"

रिकवरी में 4 महीने। आरव ने ऑफिस घर शिफ्ट कर लिया। हर दवाई, हर इंजेक्शन खुद।

अनाया ठीक हुई तो पहली डिमांड: "काम पर चलना है।"  
आरव: "पहले ठीक हो जाओ।"  
अनाया: "तुम्हारे साथ हूं तो ठीक हूं।"

*Chapter 4: सात फेरों का वादा ~ 1000 शब्द*

1 साल बाद।

आरव के पापा खुद आए। आंखों में शर्म।  
"बेटा... गलती हो गई। बहू से मिलना है।"

मां ने अनाया के पैर छुए: "माफ कर दो।"

अनाया ने उठाया: "मां, गलती इंसान से ही होती है।"

शादी की तारीख निकली। जयपुर का सबसे बड़ा पैलेस बुक।

शादी वाले दिन। मंडप। पंडित जी:  
"क्या आप अनाया शर्मा को धर्मपत्नी स्वीकार करते हैं?"

आरव: "सात फेरों का नहीं पंडित जी... सात जन्मों का वादा करता हूं। हर सुख में, हर दुख में, हर सांस में।"

अनाया की बारी:  
"मैं अनाथ थी प्यार में। तुमने घर दिया। जब दुनिया ने ठुकराया, तुमने थामा। आज वादा करती हूं - तुम्हारा हाथ आखिरी सांस तक नहीं छोडूंगी।"

फेरे हुए। बारिश शुरू। वही पहली वाली बारिश।

विदाई में अनाया के पापा रोए: "बेटा, ख्याल रखना।"  
आरव: "पापा, ये अब मेरी जिम्मेदारी है।"

रात को कमरे में।  
आरव: "डर लग रहा था। कहीं खो न दो।"  
अनाया ने उसका हाथ पकड़ा: "मैं भी डरती थी। पर अब नहीं। क्योंकि तुम हो।"

खिड़की से चांद दिख रहा था।  
आरव: "पता है, कीचड़ से शुरू हुई थी हमारी कहानी।"  
अनाया: "और गुलाब पर खत्म होगी।"

Last Line:  
_"कुछ रिश्ते कीचड़ से शुरू होकर सात फेरों तक जाते हैं... और फिर सात जन्मों तक निभते हैं।"_

*THE END*

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