Reshmai Shahzadon - Agni Pari - 4 in Hindi Magazine by kanta books and stories PDF | रेशमाई शहजादों - अग्नि परी - 4

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रेशमाई शहजादों - अग्नि परी - 4



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*Chapter 11: 3 दुनियाओं का दरवाजा ~  

जंग के 1 महीने बाद।

रेशमा और अर्जुन की शादी हो गई। पूरे राज्य में जश्न।  
रेशमा अब रानी थी। पर चेहरे पर सुकून नहीं।

रात को उसे सपना आया। 3 दरवाजे। लाल, नीला, सफेद।  
एक आवाज: "तेरी 4 शक्ति अधूरी है। 3 दुनिया बचानी है।"

सुबह बूढ़ी आई: "शहजादी, तुम्हारी वजह से 3 लोक का बैलेंस बिगड़ गया है।"  
"कौन से 3 लोक?"  
"अग्नि लोक, जल लोक, वायु लोक। वहां के राजा तुमसे बदला लेना चाहते हैं।"

तभी महल हिला। छत से आग गिरी।  
बाहर 3 राक्षस। 30 फीट लंबे।

पहला - *अग्नि दानव*। दूसरा - *जल दैत्य*। तीसरा - *वायु असुर*।

अर्जुन तलवार लेकर: "मैं संभालता हूं।"  
रेशमा: "नहीं। ये मेरी लड़ाई है।"

रेशमा उड़ी। 4 शक्तियां चलाईं।  
आधा घंटा लड़ाई। महल का आधा हिस्सा टूट गया।

आखिर में तीनों राक्षस हारे। पर मरने से पहले बोले:  
"हमारे राजा आ रहे हैं। 7 दिन में। तब देखेंगे।"

रेशमा: "7 दिन। फिर से 7 दिन।"

*End Hook:* रात को रेशमा के कमरे में काला धुआं आया। उसमें से एक परछाई: "तुम्हारा प्यार ही तुम्हारी मौत बनेगा रेशमाई।"

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*Chapter 12: अग्नि लोक का निमंत्रण ~ 1700 शब्द*

अगले दिन महल में चिट्ठी आई। खून से लिखी।  
"अग्नि लोक की महारानी चुनौती देती है। आओ और हराओ। वरना दुनिया जलेगी। - अग्नि महारानी"

अर्जुन: "जाल है। मत जाओ।"  
रेशमा: "नहीं गई तो लाखों मरेंगे।"

रेशमा अकेली गई। पोर्टल से।  
*अग्नि लोक* - चारों तरफ लावा। आसमान लाल।

बीच में सिंहासन। उस पर औरत। बाल आग के। आंखें अंगारे।  
"मैं हूं अग्नि महारानी। तेरी दुश्मन।"

"क्यों?" रेशमा: "मैंने क्या किया?"  
"तुमने बैलेंस बिगाड़ा। तुम्हारी वजह से मेरी शक्ति कम हो गई।"

लड़ाई। 2 घंटे।  
रेशमा जीती। पर आखिरी वार में महारानी ने अर्जुन का नाम लिया।

"तेरा राजकुमार मेरे कब्जे में है।"

रेशमा चौंकी। पीछे देखा। अर्जुन जंजीरों में।  
"कैसे?"  
"प्यार में अंधी हो।" महारानी हंसी।

रेशमा गुस्से में: "छोड़ो उसे।"  
"पहले घुटने टेको।"

रेशमा रुकी। 1 सेकंड। फिर...  
*बूम!* पूरी ताकत से हमला। जंजीर टूटी। अर्जुन को लेकर भागी।

*End Hook:* भागते वक्त महारानी चिल्लाई: "जल लोक और वायु लोक भी आ रहे हैं।"

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*Chapter 13: जल लोक का धोखा ~ 1600 शब्द*

रेशमा और अर्जुन वापस आए। दोनों घायल।

2 दिन बाद दूसरा संदेश। बोतल में। समंदर से।  
"जल लोक की रानी मिलना चाहती है। शांति से। - जल रानी"

अर्जुन: "मत जाओ।"  
रेशमा: "शायद बात बन जाए।"

वो गई। *जल लोक* - पानी के अंदर महल। सांस लेने में दिक्कत।

जल रानी बहुत सुंदर। आंसू मोती जैसे।  
"बैठो। बात करते हैं।"

बात करते-करते रानी ने पानी पिलाया।  
रेशमा पीते ही बेहोश।

आंख खुली तो जंजीर।  
"धोखा?"  
जल रानी: "हां। तुम बहुत ताकतवर हो। तुम्हें मारना पड़ेगा।"

रानी ने त्रिशूल उठाया।  
तभी पानी फटा। अर्जुन अंदर आया। "रेशमा!"

वो भी पकड़ा गया।

रानी: "अब दोनों मरोगे।"  
रेशमा: "प्यार को कमजोरी समझती हो?"

रेशमा ने खून से जमीन पर निशान बनाया। *चौथी शक्ति*।  
पानी में करंट दौड़ा। जंजीर पिघली।

दोनों ने मिलकर रानी को हराया।

*End Hook:* मरते वक्त जल रानी: "वायु राजा सबसे खतरनाक है। वो तुम्हारा अतीत जानता है।"

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*Chapter 14: अतीत का सच ~ 1900 शब्द*

वापस आते ही रेशमा को बुखार।  
अर्जुन सेवा कर रहा।

रात को रेशमा ने सच बताया:  
"मैं कोई परी नहीं। मैं इंसान और जादूगरनी की बेटी हूं। 
मेरी मां को वायु राजा ने मारा था। क्योंकि मां ने उससे प्यार नहीं किया।"

अर्जुन: "इसलिए वो तुमसे बदला लेना चाहता है?"

"हां।"

तीसरे दिन तूफान। *वायु लोक का राजा* आया।  
नाम - *वायुदेव*। 40 फीट। शरीर हवा का।

"रेशमा। तेरी मां से बदला लेना है।"

लड़ाई शुरू। ये सबसे खतरनाक थी।  
वायु राजा अदृश्य हो जाता। हमला करता।

रेशमा हार रही थी।  
अर्जुन बीच में आया। "मेरी बीवी को हाथ मत लगाना।"

वायु राजा हंसा: "प्यार। यही तुम्हारी कमजोरी है।"

उसने अर्जुन को हवा में उठाया। गला दबाया।

रेशमा चीखी: "छोड़ो!!!"  
उसकी चीख से 5वीं शक्ति जागी - *आकाश शक्ति*।

आसमान से बिजली गिरी। वायु राजा जला।

वो गिरते-गिरते बोला: "तुम जीत गई। पर... पर एक श्राप देकर जाता हूं। 
जिससे प्यार करोगी, वो 1 साल में मर जाएगा।"

*End Hook:* वायु राजा मरा। पर श्राप रह गया।

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*Chapter 15: श्राप और फैसला ~ 2000 शब्द*

महल में सन्नाटा।

बूढ़ी: "श्राप सच है बेटी। 1 साल।"  
रेशमा अर्जुन को देख रही। रो नहीं रही।

अर्जुन हंसा: "1 साल बहुत होता है।"  
रेशमा: "मेरे लिए नहीं।"

उस रात दोनों छत पर। चांद।  
अर्जुन: "क्या करें?"  
रेशमा: "1 साल जी भर कर जिएंगे।"

अगले 6 महीने। वो दोनों हर जगह गए। हर खुशी ली।  
राज्य चलाया। लोगों की मदद की।

6 महीने बाद रेशमा ने फैसला लिया।  
"मैं श्राप तोड़ूंगी।"

"कैसे?"  
"3 लोक की शक्तियों को एक करके। पर उसके लिए मेरी जान जा सकती है।"

अर्जुन: "मैं नहीं करने दूंगा।"  
रेशमा: "प्यार यही है। कुर्बानी।"

आखिरी दिन। पूर्णिमा।  
रेशमा ने 3 लोक की मिट्टी ली। अपना खून मिलाया।  
मंत्र पढ़ा।

आसमान फटा। 3 राजाओं की आत्मा आई।

"रुको!" वो बोले: "ये करोगी तो मर जाओगी।"  
रेशमा: "फर्क नहीं पड़ता।"

*बड़ी रोशनी*। धमाका।

जब धुआं हटा...  
रेशमा जमीन पर। बेहोश।  
अर्जुन ठीक।

बूढ़ी दौड़ी: "श्राप टूट गया। पर रेशमा..."

रेशमा ने आंख खोली। कमजोर आवाज: "जीत गई... ना?"  
अर्जुन: "हां। तुम जीत गई।"

रेशमा मुस्कुराई। और सो गई।

*Chapter 15 End*  
`1 साल बाद`  
`रेशमा वापस आएगी। नई शक्ति के साथ।`