Guru Govind Singh ka Sachitra Jivan - 4 in Hindi Motivational Stories by Sapna Badh books and stories PDF | गुरु गोविंद सिंह का सचित्र जीवन - 4

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गुरु गोविंद सिंह का सचित्र जीवन - 4

यहां का धनवान जौहरी चौधरी सारस राए गुरु गोबिंद सिंह जी का पहला सिख बना गुरू गोविन्द सिंह जी ने क‌इ महिने उस हवेली में ठहर कर सिख मत का प्रचार किया।इस कारण यह हवेली संगत का रूप धारण कर ग‌ई । चौधरी सालस राय की हवेली पहले संगत फिर धर्मशाला और नवें गुरू श्री तेगबहादुर के गुरू काल के समय गुरुद्वारा बन गई।

उस वक्त पटना पूर्वी भारत में सिखधर्म का प्रमुख केन्द्र बन चुका था। गुरू तेगबहादुर म‌ई 1666 ई,

में मत के प्रचार के लिए आसाम और बंगाल जाते हुए गुरु परिवार को यही छोड ग‌ए ।इस हवेली में माता गूजरी की कोख से बाल गोविन्द ने जन्म लिया ।

अपने पुत्र के जन्म की खबर उन्हें ढाके में मिली। ढाका वर्तमान बंगलादेश की राजधानी है ।

गुरू जी ने पुत्र प्राप्ति के लिए आकाल पुरुख को धन्यवाद दिया। पटना की संगत को बधाई और आशिर्वाद के हुक्मनामे में उन्होंने पटना को गुरू का घर कहा और नये पैदा हुए बालक का नाम गोबिंद रखने का आदेश दिया ।

संगत बाल गोविन्द को बड़ा लाड़ प्यार  करती थी। बहुत ही अच्छे कीमती वस्त्र और बढ़िया खिलौने बाल गोविन्द के लिए लाए जाते।

आस पास के इलाकों के सिख संगत के लोग दर्शन करने,बधाई देने और शुभ शगुन के लिए आते रहते थे।

इसलिए इस हवेली में हमेशा चहल पहल बनी रहती थी।

पीर भीखन शाह रियासत खुराम स्यान गुरु नगरी माखोवाले के नजदीक ही थी श्री गुरु तेगबहादुर 

के मित्र और श्रद्धालु थे 


(🌸अब गुरू गोविन्द सिंह जी दूसरी साखी पढते और 🌸)


गुरू गोविन्द सिंह जी ने मांस क्यों बनाया था ?

साध संगत जी आज की साखी गुरू गोविन्द सिंह महाराज के समय की है।जब गुरू गोविन्द सिंह जी बाबा बंदा सिंह बहादुर जिनका पूर्व नाम भाई माधो दास था बाबा बंदा सिंह बहादुर अपनी कुटिया में ध्यान लगाए बैठे थे। और उनके कुछ श्रद्धालु भी उनके आगे ध्यान में समस्त बैठे थे।

तब उनका एक श्रद्धालु भागकर उनके पास आया और कहने लगा,मंहत बाबा जी हमारे डेरे पर कोई आया है जिसने हमारे डेरे की मर्यादा को भंग किया है।उसने हमारे डेरे में खाना बना रहा है।

वह बकरे का मांस पका रहा है। और वह आपके पंलग पर भी बैठ गया है। जहां पर आप विराजमान होते हैं तो उन में से एक श्रद्धालु ने खड़े होकर बोला इतनी हिम्मत किसने की है।

जिसने भी ऐसा किया है उसे इसका नतीजा भुगतना पड़ेगा। और कहने लगा कि हमारे महंत बाबा जी उसे पंलगा से गिराकर नीचे  पटको और उसके बाद जाकर उससे उसका परिचय पूछना तो भाई माधो दास जी कहने लगे उससे पूछूंगा नहीं उसे ऐसे ही पंलग पर बैठे बैठे मै यहां लेकर आऊंगा।

अपनी शक्तियों से के साथ उसे पंलग समेत यहां अपने सामने लेकर आऊंगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ 

क्रमशः ✍️ 

श्री गुरु तेगबहादुर के मित्र तथा श्रद्धालु थे। उनी दिनों वे इस इलाके में मुरिदों के पास ठहरे हुए थे।

बाल गोविन्द के जन्म की खबर सुनकर वह अपने मुरिदों के साथ गुरू परिवार को बधाई देने आए थे।

उस वक्त की परम्पराओं के अनुसार उन्होंने बाल गोविन्द को शगुन स्वरूप कुछ स्वर्ण मुद्राएं और मिश्री से भरे हुए दो घड़े भेंट किए।


क्रमशः ✍️