Roshni, what a struggle of life in Hindi Drama by RAAHULL SHARMA books and stories PDF | रोशनी जिंदगी की कैसी कशमकश - 7

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रोशनी जिंदगी की कैसी कशमकश - 7

कमरे का माहौल अभी गंभीर ही था कि तभी दरवाज़े पर फिर से चहल-पहल हुई। मुन्ना मामा की पत्नी, कोमल मामी, अपने दोनों बच्चों के साथ अंदर दाखिल हुईं। उनके चेहरे पर वही ममतामयी मुस्कान थी जो रश्मि के चेहरे पर थी।
उनके साथ दो नौजवान भी थे—आदर्श और पिंकी। ये दोनों रोशनी के हमउम्र थे और जैसे ही उन्होंने रोशनी को देखा, उनकी आँखों में सहानुभूति और दोस्ती के भाव उभर आए।
परिवार का विस्तार
कोमल मामी ने आते ही रोशनी के पास जाकर उसका माथा चूमा। उन्होंने रश्मि की ओर देखकर कहा:
"रश्मि दीदी, मुन्ना ने मुझे सब बता दिया। बेचारी बच्ची ने कितना दुख सहा है। पर अब और नहीं! रोशनी, आज से तू इस घर की मेहमान नहीं, बल्कि इस परिवार का हिस्सा है। और ये देख, ये तेरे भाई-बहन हैं, आदर्श और पिंकी।"
दोस्ती की नई किरण
आदर्श और पिंकी रोशनी की तरफ बढ़े। आदर्श का स्वभाव थोड़ा शांत और गंभीर था, जबकि पिंकी बेहद चुलबुली और ऊर्जा से भरी थी।
पिंकी: "हाय रोशनी! डरना बिलकुल मत। अब हम साथ में पढ़ाई करेंगे और मस्ती भी। और हाँ, अगर कोई तुझे परेशान करे, तो बस भाई (आदर्श) का नाम ले देना, यह सबको सीधा कर देगा!"
आदर्श: "पिंकी, उसे आराम करने दो। रोशनी, पापा और फूफा जी (आदित्य) जो कह रहे हैं, वो सही है। अब तुम सुरक्षित हो। तुम्हें जो भी मदद चाहिए हो, चाहे पढ़ाई में या किसी और चीज़ में, तुम बेझिझक हमसे कह सकती हो।"
रोशनी का नया हौसला
रोशनी, जो अब तक खुद को इस आलीशान महल में अकेला और अजनबी महसूस कर रही थी, इन बच्चों और कोमल मामी के अपनेपन को देखकर भावुक हो गई। उसे पहली बार लगा कि ईश्वर ने उससे उसका भाई और माता-पिता छीने, तो बदले में उसे एक इतना बड़ा और प्यार करने वाला परिवार दे दिया।
उसने धीमी आवाज़ में कहा, "शुक्रिया मामी... शुक्रिया आदर्श भाई, पिंकी।"
आदित्य सिंघानिया ने इस पूरे दृश्य को देखकर संतोष की सांस ली। उन्होंने मुन्ना की तरफ देखते हुए कहा, "देखा मुन्ना, अब रोशनी अकेली नहीं है। इसके साथ इसके भाई-बहन खड़े हैं। अब इसकी ताकत दोगुनी हो गई है।"
उस रात रोशनी को बरसों बाद एक ऐसी नींद आई जिसमें डर के साये नहीं थे। जैसे ही सुबह की पहली किरण सिंघानिया हवेली के आलीशान कमरों में फैली, रोशनी की आँखें खुल गईं। आज उसके जीवन का एक नया अध्याय शुरू होने वाला था।
एक नई सुबह, एक नया सपना
रोशनी बहुत जल्दी तैयार हो गई। जब उसने आइने में खुद को देखा, तो उसे अपनी आँखों में एक अलग ही चमक नज़र आई। उसने वह कीमती लिबास पहना था जो रश्मि ने उसके लिए पसंद किया था। उसके चेहरे पर जो मुस्कान थी, वह जीत की पहली सीढ़ी चढ़ने की खुशी थी। आज उसके डॉक्टर बनने के सपने की ओर उसका पहला कदम बढ़ने वाला था।
वह नीचे हॉल में पहुँची जहाँ पूरा परिवार नाश्ते की मेज़ पर इकट्ठा था।
हवेली में उत्सव का माहौल
रोशनी को इतना तैयार और खुश देखकर पूरे परिवार के चेहरे खिल उठे:
रश्मि और कोमल मामी: दोनों ने मिलकर रोशनी की नज़र उतारी। रश्मि ने प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, "मेरी बेटी आज कितनी सुंदर लग रही है! बिल्कुल एक डॉक्टर की तरह तेज़ और समझदार।"
आदित्य सिंघानिया: उन्होंने अपनी फाइलें एक तरफ रखीं और मुस्कुराते हुए कहा, "तैयार हो रोशनी? आज से तुम्हारी कलम तुम्हारी सबसे बड़ी तलवार बनेगी। स्कूल की सारी तैयारियाँ हो चुकी हैं।"
आदर्श और पिंकी: पिंकी तो खुशी के मारे उछल रही थी। "चलो रोशनी! अब हम साथ में स्कूल जाएंगे। तुम्हें पता है, मैंने तुम्हारे लिए पहले से ही सबसे अच्छी सीट सोच रखी है!" आदर्श ने भी मुस्कुराकर रोशनी का हौसला बढ़ाया।
दाखिले की ओर बढ़ते कदम
नाश्ते के बाद, आदित्य सिंघानिया खुद अपनी चमचमाती कार में रोशनी को स्कूल छोड़ने के लिए तैयार हुए। मुन्ना मामा भी अपनी गाड़ी के साथ सुरक्षा के लिए पीछे तैनात थे।
जैसे ही गाड़ी हवेली के बड़े गेट से बाहर निकली, रोशनी ने खिड़की से बाहर देखा। उसे अपने बापू की बात याद आई— "किताबों की खुशबू इंसान की तक़दीर बदल देती है।"
रोशनी का संकल्प: "बापू, माँ... देखिए, मैं आपके सपने को टूटने नहीं दूँगी। मैं इतनी बड़ी डॉक्टर बनूँगी कि हमारा नाम रौशन होगा। और मेहूल... जहाँ भी होगा, अपनी दीदी को देखकर फख्र करेगा।"
चमचमाती हुई गाड़ियाँ जब शहर के सबसे बड़े और मशहूर 'सिंघानिया इंटरनेशनल स्कूल' के भव्य मुख्य द्वार पर रुकीं, तो वहाँ खड़े सुरक्षा गार्डों ने झुककर सलाम किया। यह स्कूल किसी राजमहल जैसा लग रहा था—ऊँची इमारत, बड़े-बड़े खेल के मैदान और चारों तरफ हरियाली।
आदर्श और पिंकी पहले से ही इसी स्कूल में पढ़ते थे, इसलिए उनके लिए यह सब सामान्य था, लेकिन रोशनी के लिए यह किसी जादुई दुनिया जैसा था।
स्कूल का वह पहला कदम
गाड़ी से उतरते ही रोशनी ने अपनी आँखों में एक अजीब सी चमक महसूस की। आदर्श और पिंकी उसके दोनों तरफ खड़े हो गए।
पिंकी: "रोशनी, देखो! यह हमारा स्कूल है। यहाँ का लाइब्रेरी और साइंस लैब शहर में सबसे बेस्ट है। अब हम रोज़ साथ में यहाँ आएंगे!"
आदर्श: "घबराओ मत रोशनी, यहाँ सब तुम्हारा सम्मान करेंगे। चलो, प्रिंसिपल ऑफिस चलते हैं।"
आदित्य सिंघानिया और रश्मि भी उनके साथ थे। जैसे ही वे अंदर दाखिल हुए, स्कूल के प्रिंसिपल खुद उनका स्वागत करने के लिए बाहर आए। उन्हें पता था कि सिंघानिया परिवार की बेटी का दाखिला उनके स्कूल के लिए बड़े सम्मान की बात है।
दाखिले की प्रक्रिया और एक नया नाम
प्रिंसीपल के ऑफिस में कागज़ात तैयार थे। जब नाम भरने की बारी आई, तो आदित्य सिंघानिया ने बड़े गर्व से कहा:
"इसका नाम लिखिए— रोशनी सिंघानिया।"
रोशनी ने जब अपना नया नाम सुना, तो उसकी आँखों में आँसू आ गए। 'सिंघानिया' सिर्फ एक सरनेम नहीं था, बल्कि वह ढाल थी जिसने उसे एक नया जीवन दिया था। उसने मन ही मन अपने बापू और माँ को याद किया और वादा किया कि वह इस नाम की इज़्ज़त कभी कम नहीं होने देगी।
सफर की शुरुआत
दाखिले की सारी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद, रश्मि ने रोशनी को उसके नए बैग और किताबों के साथ देखा।
"जाओ रोशनी, अपनी क्लास देखो। आज से तुम्हारा डॉक्टर बनने का सफर वाकई शुरू हो गया है," रश्मि ने भावुक होकर कहा।
रोशनी, आदर्श और पिंकी के साथ अपनी क्लास की ओर बढ़ी। गलियारे में चलते हुए उसे लगा जैसे वह हवा में उड़ रही हो। वह गाँव की धूल, वह ज़मींदार का डर और वह काली नदी अब बहुत पीछे छूट चुके थे। अब उसके सामने सिर्फ सुनहरी धूप और किताबों का ढेर था।
स्कूल का अनुभव रोशनी के लिए किसी खूबसूरत सपने जैसा रहा। उसे डर था कि शायद गाँव से आने के कारण बच्चे उसका मज़ाक उड़ाएंगे, लेकिन 'सिंघानिया' नाम की गरिमा और उसके साथ आदर्श और पिंकी की मौजूदगी ने एक ऐसी ढाल बनाई कि किसी की हिम्मत नहीं हुई कि उसे टेढ़ी नज़र से भी देख सके।
दोस्ती और सम्मान का नया सफर
स्कूल में रोशनी को वह सम्मान मिला जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी:
शिक्षकों का सहारा: जब शिक्षकों को पता चला कि रोशनी पढ़ाई में बहुत तेज़ है और उसका लक्ष्य डॉक्टर बनना है, तो उन्होंने उसे विशेष मार्गदर्शन देना शुरू किया।
नए दोस्त: रोशनी का सरल स्वभाव और उसकी बुद्धिमानी देखकर जल्द ही उसके बहुत सारे दोस्त बन गए। बच्चे उसके पास अपनी पढ़ाई में मदद लेने आने लगे।
सिंघानिया परिवार का नाम: स्कूल के हर कोने में आदित्य सिंघानिया का सम्मान था, इसलिए हर कोई रोशनी से बहुत अच्छे से और तमीज से बात करता था।
पिंकी उसे हर ब्रेक में नए दोस्तों से मिलवाती और कहती, "यह मेरी बहन रोशनी है, और यह बहुत जल्द इस शहर की सबसे बड़ी डॉक्टर बनेगी!"
स्कूल में रोशनी का दाखिला हो चुका था। सब कुछ बहुत ही शानदार चल रहा था। आदित्य और रश्मि के प्यार, और आदर्श-पिंकी की दोस्ती ने उसे एक नई ज़िंदगी दी थी। वह स्कूल में सबसे होनहार छात्रा बन गई थी और हर दिन अपने 'डॉक्टर' बनने के सपने की ओर एक कदम बढ़ा रही थी। लेकिन इसी सुख-चैन के बीच, उसके साथ कुछ ऐसा होने लगा जिसने उसकी रातों की नींद उड़ा दी।
वह रहस्यमयी स्पर्श
रोशनी जब रात को अपने कमरे में सोती, तो आधी रात के सन्नाटे में उसे अचानक महसूस होता कि कोई उसके पास आया है। उसे ऐसा लगता जैसे कोई बहुत ही कोमल हाथों से उसके सिर को सहला रहा है या उसके हाथ को धीरे से छू रहा है।