the song of rain in Hindi Poems by Vandna Sharma books and stories PDF | सावन के गीत

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सावन के गीत


आया जन्मदिन आया,  
सबने लड्डू खाया  
नंद लाला का जन्मदिन आया  

झूम रही है मथुरा, झूम रहा वृंदावन  
गा रही है गोकुल नगरी  

बरसाना नृत्य करे होकर मगन  
मेरे कान्हा का जन्मदिन आया  

मुरलीवाले का जन्मदिन आया  
प्रभु ने अमृत बरसाया  

सज रहे मंदिर, सज रहे चौबारे  
सज रही गलियां, सज रहे द्वारे  
बन रही मिठाइयां,  
बज रही बधाइयां,  
जन्माष्टमी का शुभ दिन आया  
कान्हा ने प्यार लुटाया  

आया जन्मदिन आया  
मेरे कान्हा का जन्मदिन आया  

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डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली 
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ये हरी कांच की हरी-हरी चूड़ियां
मन को भाय ये हरी हरी चूड़ियां

आया सावन, बड़ा मनभावन  
रिमझिम बूंदे बरस रही हैं  
डाली-डाली झूम रही है  
काले-काले बदरा छाए रे  
मन होकर मगन, झूमे गगन  
गीत कोई प्रेम का गाए रे  

हरी-हरी चूड़ियां देख  
गौरी का मन ललचाए रे  
हरी साड़ी, हरी चूड़ियां  
हरी बिंदी, हरी चुनरिया  
धरती हरी, काली बदरिया  
झूम-झूम देखो ये  
सारी बगिया शोर मचाए रे  

सर-सर पत्ते झूम रहे  
कू-कू पपीहा गूंज रहे  
मन भी बहका-बहका जाए रे  

चूड़ी हरी मन को भाने लगी  
याद पिता की आने लगी  
रिमझिम रिमझिम ये बारिश 
मुझे यूं चिढ़ाने लगी  
झर-झर झरता 
ये सावन सखी झरता जाए रे  
चूड़ी हरी मन को भाए रे  

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सावन दस्तक देने लगा है

सावन दस्तक देने लगा है  
मौसम अब बरसने लगा है  

कितनी ही आंखें राह देखती  
सावन में ही मायके की देहरी मिलती  

अपनों से मिलन की आस में  
आंखों से सावन झरने लगा है  

महादेव की मस्ती में दीवाने  
भक्त कावर सजाने लगे हैं  

फसलों को लहराता देख  
किसान भी सपने सजाने लगे हैं  

धरती हरा-हरा श्रृंगार किए बैठी है  
दूर देश से पंछी भी अब आने लगे हैं  

सावन अब दस्तक देने लगा है  

जिंदगी की तपिश में, उम्र की दुपहरी में  
बारिश की बूंदें, जख्म सहलाने लगी हैं  

सबकी आस अपनी है सावन से  
सावन सबको भाने लगा है  

सावन की मस्ती संग है लाती  
तीज का मनुहार, राखी का प्यार  
अमिया के झूले, मन करे बेक़रार  
सबको रहता इसका इंतज़ार  

सावन दस्तक देने लगा है  
रिमझिम सावन बरसने लगा है

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डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर नई दिल्ली 
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सावन का आना जैसे  
धरती का श्रृंगार करना  
नारी का खुद से प्यार करना  
मायके से मिलन की  
आस जगाना  

झूले की पेंगें बढ़ाना  
घेवर की खुशबू से  
बाजार का महकना  

सावन का आना जैसे  
गर्मी से राहत मिल जाना  
बगिया में फूलों का आना  
कोयल का मीठा गाना  
हरी चूड़ियां, हरी चुन्नरियां  
पहन गौरी का इतराना  
प्रेम की लहरों का ईठलाना  

सावन का आना जैसे  
बादल का घिर आना  
बारिश का संगीत बजाना  
मन की तपिश घुल जाना  
कितना सुंदर है देखो  
सावन का आना  

कांवर की मस्ती भोले की भक्ति  
बम भोले सबका गाना  
मनोहारी है सावन का आना  

डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली 
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हरीयाली तीज

सावन का महीना, बारिश की फुहार  
सखियों का संग, ठण्डी-ठण्डी चले बयार  
वो रिमझिम बूंदों की झड़ी में पड़े झूले  
वो लोकगीतों की नटखट मस्ती  
घेवर की महक, गुझियों का स्वाद  
वो मेहंदी भरे हाथ, वो सोलह श्रृंगार  
हरी चूड़ियों की खन-खन  
पायलिया की छन-छन, उस पर  
पीहर में बरसता बाबुल का प्यार  
कुछ ऐसा था बरसो पहले  
हमारा प्यारा तीज का त्यौहार  
वक्त ने ली ऐसी अंगड़ाई  
कैसी चली हाय पुरवाई  
ये कहाँ आ गए हम  
ना सखियों का संग  
ना रिमझिम सावन के झूले  
इस आधुनिकता ने तो सारे सुख छीन लिये  
माई तेरा आँगन बहुत याद आता है  
बाबुल तेरा दुलार बहुत याद आता है  
पीहर तेरी गलियाँ बहुत याद आती हैं  
वो मायके की नटखट तीज बहुत याद आती है  
सखियों का चिढ़ाना हरीयाली गाना  
जिंदगी की दौड़ में छूट गया  
बहुत कुछ पीछे  
वो बरसात, वो सावन  
माँ तेरा आँचल  
बहुत याद आता है ।
डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर नई दिल्ली 



प्रिय पाठकों सावन आते ही चारों तरफ हरियाली तीज रक्षाबंधन और स्वतंत्रता दिवस की भावनाओं में मन झूमने लगता है। देश प्रेम की लहरें उमड़ती है और हरियाली तीज रक्षाबंधन मायके की याद दिलाता है। आप सभी को बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएं सावन की।