अस्पताल के बेड पर लेटे अयान के सिर में तेज दर्द उठ रहा था। जैसे-जैसे वह पिछली बातों को याद करने लगा, उसके दिमाग की नसें तड़कने लगीं।
उसने दर्द से कराहते हुए अपना हाथ माथे की तरफ बढ़ाया और जैसे ही पट्टी को छुआ, उसकी उंगलियों पर गर्म खून के निशान उभर आए। उस लाल रंग को देखते ही उसका दिल बैठ गया—तनाव और बेचैनी से उसकी साँसें भारी होने लगीं।
माहिरा...!
अयान के मुँह से बस यही एक नाम निकला। उसे अचानक ख्याल आया कि मछुआरा बस्ती की उस अंधेरी झोपड़ी में माहिरा इस वक्त अकेली और कितनी सहमी होगी।
जिस करीम चाचा को वो सब कुछ मानती थी, जब वही भेड़िया बनकर उसके सामने आ चुका है, तो उस बेचारी पर क्या बीत रही होगी!
अयान बेचैनी से तड़प उठा। उसकी आँखें नम हो गईं और उसने बेड की सफेद चादर को अपनी मुट्ठियों में कसकर भींच लिया। उसके सीने में एक अजीब सा डर और तड़प उठ रही थी—
"हे भगवान... माहिरा अकेली उस राक्षस के चंगुल में है! मुझे किसी भी हाल में उसका पता लगाना होगा।"
उधर, मछुआरा बस्ती की उस घुटन भरी झोपड़ी के अंदर, सन्नाटे को चीरता हुआ जर्जर दरवाजा 'धड़ाम' से खुला। बाहर गहरी रात का अंधेरा था और अंदर माहिरा थर-थर कांप रही थी।
करीम चाचा का वो खूंखार गुंडा अंदर घुसा। उसने एक गंदी सी मुस्कान के साथ माहिरा के सामने कागज़ फेंका और दहाड़ा—
"रो मत, माहिरा!
तेरे उस अयान का चैप्टर हमेशा के लिए बंद हो चुका है। अब करीम चाचा ने तेरे रहने की दूसरी जगह तय की है। चुपचाप उठ और चल हमारे साथ, वरना इस बस्ती में तेरी सुध लेने वाला भी कोई नहीं बचेगा!"
माहिरा का दम घुटने लगा। उसे समझ आ गया कि वह इन भेड़ियों के जाल में पूरी तरह फंस चुकी है। उसने कांपते हुए स्वर में पूछा, "मुझसे क्या चाहते हो... और करीम चाचा आखिर ऐसा क्यों कर रहे हैं?"
गुंडा जोर से हँसा और बोला, "ज्यादा सवाल मत पूछ। जो कहा जा रहा है, चुपचाप वो कर, वरना तेरा हस्र भी तेरे अपनों जैसा ही होगा।"
माहिरा ने पीछे हटने की कोशिश की, लेकिन उस झोपड़ी के बाहर दो और गुंडे खड़े हो चुके थे। रास्ते पूरी तरह बंद थे। उसकी आँखों से अनगिनत आँसू बह निकले, और उसने मन ही मन अयान को पुकारा—
"अयान... तुम कहाँ हो?"
उधर शहर के एक आलीशान और गुप्त कमरे में, करीम चाचा अपने दोनों हाथों में शराब का गिलास थामे खिड़की के बाहर देख रहा था। उसके चेहरे पर जीत की एक मक्कार मुस्कान थी।
तभी उसके मोबाइल की घंटी बजी। फोन उठाते ही दूसरी तरफ से उसके खास आदमी ने घबराते हुए कहा— "चाचा... बड़ी गड़बड़ हो गई!
अस्पताल में जिस लड़के (अयान) को हमने अधमरा करके छोड़ा था, वह... वह अपने बेड पर नहीं है! आईसीयू का कमरा खाली पड़ा है!"
करीम चाचा के हाथ से शराब का गिलास छूटकर फर्श पर बिखर गया। उसके चेहरे की वो मक्कार मुस्कान एक पल में उड़ गई और उसकी जगह माथे पर गहरी चिंता की लकीरें उभर आईं।
उसने गुस्से से दहाड़ते हुए कहा— "क्या बकवास कर रहा है बे? मरा हुआ चूहा भी बिल से बाहर आ गया क्या! ढूँढो उसे... पूरे शहर में, हर गली में छान मारो! अगर वो ज़िंदा बच गया, तो वह सीधा हमारी बर्बादी का दरवाजा खटखटाएगा!"
करीम चाचा ने तुरंत अपने बाकी सारे गुंडों को शहर के चप्पे-चप्पे पर दौड़ा दिया। उसने हुक्म दिया कि सबसे पहले उस लड़की माहिरा को पूरी हिफाजत से उठाकर किसी अनजान ठिकाने पर ले जाया जाए, क्योंकि वही अयान तक पहुँचने का इकलौता रास्ता है।
और इधर अस्पताल के उस खाली कमरे में, अयान अपनी जान की बाजी लगाकर चुपचाप खिड़की के रास्ते बाहर निकल चुका था। उसके जिस्म का हर एक जोड़ दर्द से चीख रहा था, लेकिन उसके भीतर सुलगती नफरत की आग उसे रोक नहीं रही थी।
उसे पता था कि करीम चाचा के गुंडे अब पूरे शहर में माहिरा को तलाश रहे होंगे।
अयान ने अंधेरे में खुद को संभालते हुए एक पुरानी दीवार का सहारा लिया। उसने गहरी साँस ली और मन ही मन ठान लिया— "इससे पहले कि करीम चाचा के ये भेड़िए माहिरा तक पहुँचें, मुझे ही सबसे पहले उस तक पहुँचना होगा!”
लेखक की कलम से (पाठकों के लिए कुछ खास सवाल):
इस चैप्टर को पढ़ते हुए क्या तुम्हारे भीतर भी वही बेचैनी उतरी, जो इस वक्त अस्पताल के बिस्तर से निकले अयान के सीने में सुलग रही है? सोचकर जवाब देना, दोस्त—
पहला सवाल: जब अपनों के ही चेहरे पर नकाब उतर जाते हैं और भरोसे की नींव हिल जाती है, तब इंसान के अंदर का दर्द नफरत में कैसे बदलता है? क्या अयान का यह खामोश कदम उसके अपनों के खून का बदला लेने के लिए काफी है?
दूसरा सवाल: अस्पताल से चकमा देकर निकलना और करीम चाचा के बिछाए हुए जालों से पहले माहिरा तक पहुँचना—क्या तुम्हें लगता है कि अयान का यह सफर बिना किसी और बड़े धोखे के पूरा हो पाएगा?
तीसरा सवाल: करीम चाचा का यह डर कि "अयान जिंदा बच गया तो वह हमारी बर्बादी का दरवाजा खटखटाएगा"—क्या यह इस बात का सबूत है कि अब असली तबाही की शुरुआत हो चुकी है?
अपने दिल पर हाथ रखकर सोचो और बताओ, इस खौफनाक खेल में अगला मोहरा कौन चलेगा—अयान या करीम चाचा?