My Part of Life - Chapter 2 in Hindi Biography by sapna books and stories PDF | मेरे हिस्से की ज़िंदगी - अध्याय 2

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मेरे हिस्से की ज़िंदगी - अध्याय 2

मेरे हिस्से की ज़िंदगी
भाग 2: अधूरा प्यार... पर मेरा था!

"यार, तुम्हें लाइफ में कैसा पार्टनर चाहिए?"
लंच ब्रेक में पेड़ की छांव में बैठकर हम पाँचों सहेलियाँ अक्सर इस टॉपिक पर बात करती थीं। कोई कहती उसे हैंडसम लड़का चाहिए, तो कोई अमीर शहज़ादे के सपने देखती। सब अपनी-अपनी पसंद बताकर ज़ोर-ज़ोर से हंसतीं, और मैं? मैं बस चुपचाप मुस्कुराते हुए उनकी बातें सुनती रहती।

जब मेरी बारी आई, तो सबने मुझे कोहनी मारकर पूछा— "ओए ज़िद्दी! तू भी तो बता, तेरी पसंद क्या है?"

मैनें आसमान की तरफ देखा और गहरी सांस लेकर कहा— "मुझे कोई दिखावा नहीं चाहिए। मुझे बस ऐसा पार्टनर चाहिए जो मुझसे रूह से प्यार करे... बिल्कुल सोलमेट जैसा। और अगर ऐसा कोई मुझे मिल गया, तो मैं उस पर अपनी पूरी दुनिया लुटा दूँगी।"

तब मुझे कहाँ पता था कि किस्मत मेरी इस बात पर चुपके से मुस्कुरा रही थी। मुझे मेरा वो 'सोलमेट' मिला तो सही... पर सिर्फ अधूरा।

🌸 छज्जे का वो इंतज़ार और STD की वो आवाज़
वह प्यार नहीं, मेरा पहला और आखिरी जुनून था। लेकिन दर्द यह था कि वो सिर्फ एकतरफा था। एक ऐसा गहरा राज़, जो सिर्फ मेरे दिल के एक कोने में दफ़न था।

मेरा दिन स्कूल की पढ़ाई से नहीं, बल्कि अपने घर की छत पर जाने से शुरू होता था। हर दिन सिर्फ उसकी एक झलक पाने के लिए मैं तपती धूप में भी छत पर खड़ी रहती। दूर से उसे आते देखना, मेरे दिल की धड़कनों का बढ़ जाना... वह एहसास इतना जादुई था कि मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती।

कभी स्कूल से जल्दी छुट्टी होती, तो मैं सहेलियों से छुपकर दौड़ती हुई पास के STD बूथ पर जाती थी। कांपते हाथों से सिक्का डालती, नंबर मिलाती और जैसे ही दूसरी तरफ से उसकी आवाज़ आती—मेरा दिल गले को आ जाता। कभी-कभी मैं कुछ नहीं बोलती थी, बस चुपचाप उसकी सांसों की आहट सुनती। मुझे किसी नाम या पहचान की ज़रूरत नहीं थी, मैं सिर्फ उसकी एक हल्की सी आहट से पहचान लेती थी कि लाइन पर वही है।

उसकी वो हल्की सी मुस्कान, उसकी वो बिना मतलब की छोटी-छोटी बातें... मेरी पूरी दुनिया को एक साथ रोशनी भी देती थीं और एक अजीब सा मीठा दर्द भी।

दोस्ती का मुखौटा और तड़पता दिल

हम दोनों दोस्त थे। अक्सर साथ बैठते, हंसी-मज़ाक करते, दुनिया जहान की बातें करते। जब वो हंसता, तो मैं पलकें झपकाना भूल जाती और चुपके से उसकी तरफ देखती रहती।

कई बार मेरा दिल करता कि चिल्लाकर कह दूँ— "तुम क्यों नहीं समझते कि मैं तुमसे कितना प्यार करती हूँ?"

पर मैं डर जाती। मुझे डर था कि अपनी इस ज़िद के चक्कर में, मैं उसकी दोस्ती भी न खो दूँ। किसी को अंदाज़ा भी नहीं था कि उस हंसते हुए चेहरे के पीछे मेरे दिल में कितना बड़ा तूफ़ान चल रहा था। मेरा प्यार सिर्फ एक तरफा था, एक ऐसा ख़ामोश सच जो कभी पूरा नहीं हो सकता था।

लेकिन इस अधूरे प्यार ने मुझे एक बहुत बड़ी बात सिखाई— ज़िंदगी में हर चीज़ पूरी नहीं होती, फिर भी हम दिल से प्यार करते हैं, बिना किसी शर्त के। प्यार का मतलब सिर्फ उसे पा लेना नहीं होता, उसे महसूस करना भी होता है।

मैं फिर भी खुश थी, क्योंकि इस एहसास ने मुझे अपनी भावनाओं की इज़्ज़त करना सिखाया। यह अधूरा प्यार ही मेरी सबसे बड़ी ताकत बन चुका था। मुझे लगता था कि एक दिन, जब वक्त सही होगा, मेरी ये अधूरी दास्तान भी मुकम्मल होगी...

🚨 कहानी का नया मोड़ (The Twist)

दिन गुज़र रहे थे, और मेरा यह एकतरफा प्यार गहरा होता जा रहा था। मैं अपनी ही धुन में जी रही थी। पर तभी... एक शाम कुछ ऐसा हुआ जिसने मेरे इस खूबसूरत ख़्वाब को कांच की तरह चकनाचूर कर दिया।

मेरी छत से दिखने वाले उस रास्ते पर, आज वो अकेला नहीं था। उसके साथ कोई और भी था... और उसे देखकर मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई।

अगले भाग में देखिए (Promo):
"कौन थी वो लड़की जिसके साथ मैंने उसे देखा? क्या मेरी पहली मोहब्बत शुरू होने से पहले ही खत्म हो गई? जानने के लिए पढ़िए भाग 3: