From billionaire heiress to a nobody in Hindi Love Stories by Shanaya khan books and stories PDF | अरबपति वारिस से गुमनाम लड़की तक - भाग 15

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अरबपति वारिस से गुमनाम लड़की तक - भाग 15

उसके होंठ मेरे कान के पास आकर ठहर गए।
फिर उसने धीमी, लेकिन बेहद स्पष्ट आवाज़ में कहा,
"मेरे बारे में जानने के लिए..."
"...बहुत कुछ है।"
मैं बिना पलक झपकाए उसकी बात सुनती रही।
"और वो..."
"...तुम एक दिन में नहीं जान पाओगी।"
उसने अपनी कोट की जेब में हाथ डाला।
एक साधारण-सा काला रबर बैंड निकाला।
मैं कुछ समझ पाती, उससे पहले ही उसने बड़ी सहजता से मेरे सारे बाल पीछे इकट्ठा किए।
फिर बड़ी सफाई से उन्हें बांध दिया।
मैं बस उसे देखती रह गई।
उसने जैसे ही मेरे बाल बांधकर हाथ पीछे किए, उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई।
"इसके लिए..."
"...तुम्हें अपनी पूरी ज़िंदगी मेरे साथ बितानी पड़ेगी।"
उसकी आंखों में एक अजीब-सी चमक थी।
मैं कुछ सेकंड तक उसे देखती रही।
फिर...
मेरे होंठों पर भी मुस्कान आ गई।
अच्छा...
तो जनाब ऐसे खेल खेलना चाहते हैं।
मैं पलक झपकते उसकी ओर तेजी से झुकी।
इतना कि अब हमारे बीच मुश्किल से कुछ इंच का फासला रह गया था।
लियो पहली बार थोड़ा असहज दिखाई दिया।
मैंने उसकी आंखों में देखते हुए बिल्कुल शांत आवाज़ में कहा,
"ठीक है।"
लियो ने भौंहें उठाईं।
"क्या ठीक है?"
मैंने उसके कोट के कॉलर की सिलवटें ठीक करनी शुरू कर दीं।
"चलो..."
"...फिर शादी कर लेते हैं।"
"क्या?!"
लियो की आंखें आश्चर्य से फैल गईं।
मैंने पूरी गंभीरता से सिर हिलाया।
"अभी तो तुमने ही कहा था..."
"...कि तुम्हें जानने के लिए मुझे पूरी ज़िंदगी तुम्हारे साथ बितानी पड़ेगी।"
मैंने कॉलर सीधा करते हुए मुस्कुराकर कहा,
"और पूरी ज़िंदगी साथ बिताने का सबसे आसान तरीका शादी ही तो है।"
कुछ पल के लिए कमरे में सन्नाटा छा गया।
फिर...
लियो हल्के से हंस पड़ा।
मैंने उंगली उठाकर उसे रोका।
"इतनी जल्दी खुश मत हो।"
मैं उसके और करीब आई।
"तुम्हें क्या लगता है?"
"इतनी कम उम्र में मैंने इतना बड़ा बिज़नेस कैसे खड़ा किया?"
"मैं बहुत बड़ी खिलाड़ी हूं, मिस्टर लियो।"
मैंने उसके कॉलर पर हाथ फेरते हुए कहा,
"आज नहीं तो कल..."
"...तुम्हारे सारे राज़ मेरे सामने होंगे।"
"और जिस दिन ऐसा हुआ..."
"...उस दिन तुम्हारे पास मुझसे कुछ भी छिपाने के लिए नहीं बचेगा।"
मैं एक कदम पीछे हटी।
फिर उसे ऊपर से नीचे तक देखा।
"और हां..."
"...आइंदा मेरे बालों को छूने की कोशिश भी मत करना।"
मैंने सख्ती से कहा,
"मैं उन लड़कियों में से नहीं हूं..."
"...जो तुम्हारी इन हरकतों पर मर- मिटें।"
लियो कुछ पल मुझे देखता रहा।
फिर उसके चेहरे पर वैसी ही धीमी मुस्कान लौट आई।
"लेकिन..."
उसने शांत स्वर में कहा,
"...तुम पहली लड़की हो..."
"...जिसके बाल मैंने अपने हाथों से बांधे हैं।"
मैं एक पल के लिए चुप हो गई।
इस जवाब की मुझे उम्मीद नहीं थी।
लियो ने फिर अपनी जेब में हाथ डाला।
इस बार उसने एक छोटी-सी टॉफी निकाली।
वह मुस्कुराते हुए मेरी हथेली खोलकर उसमें रख दी।
"वैसे..."
उसने मेरी आंखों में देखते हुए कहा,
"...शादी का आइडिया बुरा नहीं है।"
मैंने भौंहें उठाईं।
"क्या?"
"हम्म..."
वह हल्का-सा हंसा।
"लेकिन फिलहाल..."
"...मैं अपने ही शरीर में नहीं हूं।"
उसकी मुस्कान इस बार थोड़ी फीकी थी।
"तो..."
"...क्या तुम मेरा थोड़ा इंतज़ार करोगी?"
मैं उसे देखती रह गई।
वह आगे झुका और धीमे स्वर में बोला,
"क्या करूं..."
"...मैं थोड़ा-सा पज़ेसिव इंसान हूं।"
उसके होंठों पर वही कातिलाना मुस्कान थी...
जिसे देखकर पहली बार...
मेरे चेहरे के भाव सचमुच बदल गए।
कुछ पल के लिए मैं बिल्कुल चुप रह गई।
मेरे हाथ में अब भी वह छोटी-सी टॉफी थी।
मैं उसे देख रही थी...
लेकिन मेरा ध्यान कहीं और था।
ये आदमी आखिर चाहता क्या है?
हर बार...
जब मुझे लगता है कि मैं इसके करीब पहुंच रही हूं...
ये एक नई पहेली बनकर मेरे सामने खड़ा हो जाता है।
मैंने गहरी सांस ली और अपने चेहरे पर उभरते भावों को तुरंत सामान्य कर लिया।
"हम्म..."
मैंने हल्की मुस्कान के साथ कहा,
"तुम्हारी बातें सुनकर तो लगता है कि तुम्हें लड़कियों से फ्लर्ट करने का काफी अनुभव है।"
लियो मुस्कुराया।
"सिर्फ तुमसे।"
"सच में?।"
मैंने तुरंत जवाब दिया।
"तुम जैसे लड़के पर तो पता नहीं कितनी लड़कियां मरती होंगी।"
"लेकिन अफ़सोस..."
मैंने टॉफी उसकी ओर वापस बढ़ाते हुए कहा,
"...मैं उनमें से नहीं हूं।"
लियो ने टॉफी वापस नहीं ली।
"रख लो।"
"क्यों?"
"क्योंकि मुझे पता है..."
"...जब भी तुम बहुत ज़्यादा सोचती हो..."
"...तो मीठा खाती हो।"
मैं कुछ सेकंड तक उसे देखती रह गई।
फिर झुंझलाकर बोली,
"देखा!"
"फिर वही।"
"तुम्हें मेरे बारे में सब कुछ पता है।"
"ये सच में डरावना है।"
मैंने टॉफी अपनी मुट्ठी में बंद कर ली।
"अब मुझे यहां एक मिनट भी नहीं रुकना।"
मैं धीरे-धीरे बिस्तर से नीचे उतर गई।
मेरे पैरों में अभी भी हल्की कमजोरी थी, लेकिन अब मैं पहले से काफी बेहतर महसूस कर रही थी।
मैंने ड्रिप स्टैंड की ओर देखा।
ड्रिप पहले ही हटाई जा चुकी थी।
"अच्छा..."
मैंने अपने कपड़े ठीक करते हुए कहा,
"अब मुझे घर जाना चाहिए।"
"क्या?"
लियो के चेहरे की मुस्कान एक पल में गायब हो गई।
"तुम अभी कहीं नहीं जाओगी।"
मैंने उसकी ओर मुड़कर देखा।
"क्यों?"
"क्योंकि अभी तुम्हारा यहां रहना सुरक्षित है।"
"सुरक्षित?"
मैं हल्का-सा हंसी।
"मेरे लिए सबसे सुरक्षित जगह मेरा अपना घर है।"
मैं दरवाज़े की ओर बढ़ने लगी।
तभी...
लियो ने आगे बढ़कर मेरी कलाई पकड़ ली।
उसकी पकड़ मज़बूत थी...
लेकिन दर्द देने वाली नहीं।
मैं रुक गई।
धीरे-धीरे उसकी ओर मुड़ी।
"हाथ छोड़ो।"
मैंने शांत लेकिन ठंडी आवाज़ में कहा।
लियो ने मेरी आंखों में देखते हुए कहा,
"तुम अभी अपने घर नहीं जा सकती।"
"लेकिन क्यों?"
"क्योंकि..."
उसने गहरी सांस ली।
"...इस वक्त तुम सियरा नहीं हो।"
मैंने भौंहें सिकोड़ लीं।
"मतलब?"
"इस दुनिया के लिए..."
"...तुम सिंथिया हो।"
"और अगर तुम अपने घर गईं..."
"...तो तुम उस लड़की के सामने आ जाओगी..."
"...जो इस समय तुम्हारे असली शरीर में है।"
मैं कुछ क्षण तक उसे देखती रही।
फिर हंस पड़ी।
"बस?"
"इतनी-सी बात?"
"यही तो मैं चाहती हूं।"
मैंने अपनी कलाई छुड़ाने की कोशिश की।
"मुझे उसी लड़की से मिलना है।"
"मैं जानना चाहती हूं कि आखिर वो कौन है..."
"...जो मेरे शरीर में मेरी आलीशान ज़िंदगी जी रही है।"
"मैं उससे अभी मिलूंगी।"
"नहीं।"
इस बार लियो की आवाज़ पहले से कहीं ज़्यादा गंभीर थी।
उसने मेरी कलाई छोड़ दी।
लेकिन उसके चेहरे पर पहली बार डर साफ दिखाई दे रहा था।
"तुम दोनों आमने-सामने नहीं आ सकतीं।"
मैंने चिढ़कर कहा,
"और अगर आ गई तो?"
कुछ पल तक वह चुप रहा।
फिर धीरे-धीरे बोला,
"अगर एक बार..."
"...शरीर बदलने के बाद..."
"...दोनों आत्माएं एक-दूसरे के सामने आ जाएं..."
"...तो वे कभी भी अपने असली शरीर में वापस नहीं लौट पाएंगी।"
मेरे चेहरे की मुस्कान धीरे-धीरे गायब हो गई।
"क्या?"
"तुम हमेशा के लिए..."
"...एक-दूसरे के शरीर में कैद हो जाओगी।"
कमरे में अचानक सन्नाटा छा गया।
मैं बिना पलक झपकाए उसकी ओर देखती रह गई।
मेरे दिमाग में जैसे एक साथ सौ सवाल घूमने लगे।
"ये..."
मैंने धीरे से अपने माथे पर हाथ रखा।
"अब ये कैसी नई बकवास है?"
मैं बेचैनी से कमरे में टहलने लगी।
"पहले दूसरी दुनिया..."
"फिर आत्माओं का बदलना..."
"अब ये नया नियम!"
मैंने सिर पकड़ लिया।
"मेरा दिमाग सच में खराब हो जाएगा।"
लियो ने मेरी ओर देखा।
उसकी आंखों में मज़ाक नहीं था।
सिर्फ चिंता थी।
"सियरा..."
उसने धीमी आवाज़ में कहा,
"मिस वेंस बहुत परेशान हैं।"
मैं वहीं रुक गई।
"वो अपनी बेटी को हर जगह ढूंढ रही हैं।"
"उन्होंने पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज करा दी है।"
मेरे चेहरे से आखिरी मुस्कान भी गायब हो गई।
मैंने धीरे से नीचे देखा।
मुझे अचानक उस दिन की हर बात याद आने लगी...
मिस वेंस का मेरे लिए खाना बनाना...
मुझे डांटना...
मेरे लिए चिंता करना...
जबकि...
मैं उनकी असली बेटी थी ही नहीं।
मेरे होंठों पर एक फीकी, दर्द भरी मुस्कान आ गई।
"बेचारी..."
मैंने बुद बुदाया।
"उन्हें तो ये भी नहीं पता..."
"...कि उनकी बेटी इस समय..."
"...मेरी दुनिया में है।"
कुछ क्षण बाद मैंने गहरी सांस ली।
फिर लियो की ओर देखा।
"ठीक है।"
मैंने शांत स्वर में कहा।
"मैं वापस सिंथिया की ज़िंदगी में जाने के लिए तैयार हूं।"
"लेकिन..."
मैंने उसकी आंखों में देखते हुए कहा,
"...उससे पहले तुम्हें मेरी एक शर्त माननी होगी।"
लियो ने बिना देर किए पूछा,
"कैसी शर्त?"
मैंने एक-एक शब्द पर ज़ोर देते हुए कहा—
"मुझे ये जानना है..."
"...कि मुझे किडनैप किसने किया था।"
"और..."
"...तुम्हें मुझे सच बताना होगा।"
मेरे सवाल के बाद पूरे कमरे में एक अजीब-सी खामोशी फैल गई।
लियो कुछ क्षण तक बिना कुछ बोले मुझे देखता रहा।
उसके चेहरे पर वही गंभीरता लौट आई थी।
मानो वह सोच रहा हो...
क्या अब इसे सच बता देना चाहिए?
मैंने अपनी बाहें सीने पर बांध लीं।
"फिर वही?"
मैंने हल्की नाराज़गी से कहा।
"तुम अब भी चुप रहोगे?"
"या इस बार मुझे जवाब भी मिलेगा?"
लियो ने गहरी सांस ली।
फिर पहली बार बिना बात टाले बोला,
"एंड्रयू।"
मैं कुछ सेकंड तक उसे देखती रही।
"क्या?"
"जिसने तुम्हारा किडनैप करवाया..."
"...उनका नाम एंड्रयू है।"
मैंने भौंहें सिकोड़ लीं।
"अब ये एंड्रयू कौन है?"
लियो की आंखों में एक पल के लिए झिझक दिखाई दी।
फिर उसने कहा,
"ज़ेन स्टर्लिंग के नाना।"
"क्या?!"
मेरे मुंह से अनायास ही निकल गया।
"ज़ेन के... नाना?"
मैं पूरी तरह उलझ चुकी थी।
"लेकिन..."
"वो मुझे किडनैप क्यों करवाएंगे?"
"मेरा उनसे क्या लेना-देना?"
लियो खिड़की की ओर देखने लगा।
कुछ क्षण बाद उसने धीमी लेकिन गंभीर आवाज़ में कहा,
"क्योंकि..."
"...वो अपने एम्पायर का अगला उत्तराधिकारी चुन चुके हैं।"
"और उसके लिए..."
"...वो किसी भी हद तक जा सकते हैं।"
मैंने तुरंत पूछा,
"तो इसमें मैं कहां से आ गई?"
"एक मिनट..."
मैंने सोचते हुए कहा,
"ज़ेन स्टर्लिंग तो पहले से ही स्टर्लिंग परिवार का उत्तराधिकारी है।"
"मैंने कब उसे उसकी गद्दी पर बैठने से रोका?"
"फिर वो मुझे क्यों नुकसान पहुंचाना चाहेंगे?"
लियो धीरे-धीरे मेरी ओर मुड़ा।
उसकी आंखों में इस बार एक अलग ही गंभीरता थी।
उसने साफ शब्दों में कहा,
"क्योंकि..."
"...वो ज़ेन को अपना उत्तराधिकारी नहीं बनाना चाहते।"
मैं कुछ पल के लिए बिल्कुल शांत हो गई।
"तो..."
"...फिर किसे?"
कमरे में कुछ सेकंड तक सन्नाटा छाया रहा।
फिर लियो ने मेरी आंखों में देखते हुए कहा,
"मुझे।"
मेरे हाथ से टॉफी छूटकर बिस्तर पर गिर गई।
"क्या?!"
मैं लगभग चिल्ला पड़ी।
"क्या मतलब—तुम्हें?"
"तुम्हें उनका उत्तराधिकारी क्यों बनना है?"
"और..."
"...तुम्हारा उनसे क्या रिश्ता है?"
लियो ने धीरे से आंखें बंद कीं।
जैसे वह इस पल से बहुत समय से बचता आ रहा हो।
लेकिन अब...
छिपाने के लिए कुछ बचा नहीं था।
उसने धीरे से कहा,
"सियरा..."
"...मैं और ज़ेन..."
"...सगे भाई हैं।"
कुछ सेकंड तक मुझे लगा...
मैंने शायद गलत सुना है।
"क्या?"
"हम दोनों..."
"...जुड़वां भाई हैं।"
मैं अविश्वास से उसे घूरती रह गई।
फिर अचानक मेरे दिमाग में कई बातें एक साथ घूमने लगीं।
ज़ेन और लियो का बिल्कुल एक जैसा चेहरा...
उनकी आंखें...
उनकी मुस्कान...
उनकी आवाज़...
मैंने अपने माथे पर हाथ मार लिया।
"ओह, गॉड!"
"अब समझ आया!"
मैंने गहरी सांस छोड़ी।
"मैंने ये पहले क्यों नहीं सोचा?"
"तुम दोनों की शक्ल इतनी एक जैसी थी..."
"...फिर भी मेरे दिमाग में ये बात आई ही नहीं!"
मैं कुछ देर तक खुद पर ही झुंझलाती रही।
फिर अचानक मुझे एक और बात याद आई।
मैंने तुरंत उसकी ओर देखा।
"रुको।"
"अगर तुम दोनों जुड़वां भाई हो..."
"...तो मैंने आज तक तुम्हारे बारे में कभी क्यों नहीं सुना?"
"स्टर्लिंग परिवार पूरे देश का सबसे मशहूर परिवार है।"
"उनके बारे में छोटी-सी छोटी खबर भी मीडिया की हेडलाइन बन जाती है।"
"फिर..."
"...कभी किसी ने ये क्यों नहीं बताया कि उनके दो बेटे हैं?"
"और..."
"...मैंने ज़ेन के नाना के बारे में भी कभी कुछ क्यों नहीं सुना?"
कमरे में एक बार फिर खामोशी छा गई।
लियो कुछ पल तक मेरी आंखों में देखता रहा।
फिर उसने बेहद शांत स्वर में कहा,
"क्योंकि..."
"...वो इस दुनिया के नहीं हैं।"
मैं जैसे पत्थर की मूर्ति बन गई।
लियो आगे बोला,
"वे उस दूसरे यूनिवर्स से हैं..."
"...जहां से मेरी मां आई थीं।"
"और..."
"...वहां की दुनिया..."
उसने हल्की सांस ली।
"...उतनी सरल नहीं है..."
"...जितनी तुम समझ रही हो।"
मेरी धड़कनें अपने आप तेज़ हो गईं।
लियो की आंखों में पहली बार मुझे ऐसा अंधेरा दिखाई दिया...
जिसे देखकर महसूस हो रहा था कि वह सिर्फ कोई राज़ नहीं छिपा रहा...
बल्कि एक पूरी दुनिया छिपाए बैठा है।
उसने धीमी आवाज़ में कहा,
"वहां..."
"...एक बहुत बड़ा एम्पायर है।"
"और उस एम्पायर में..."
"...एक आम इंसान की कोई जगह नहीं होती।"
उसकी आख़िरी बात सुनकर मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई।
मुझे अचानक एहसास हुआ...
जिस खेल को मैं अब तक सिर्फ शरीर बदलने और दो दुनियाओं की अजीब घटना समझ रही थी...
असल में उसकी शुरुआत भी अभी नहीं हुई थी।
"एक आम इंसान की... कोई जगह नहीं होती?"
मैंने धीमे स्वर में उसके आख़िरी शब्द दोहराए।
कमरे का माहौल अचानक भारी हो गया था।
कुछ मिनट पहले तक हम दोनों शादी का मज़ाक कर रहे थे...
और अब...
बात एक ऐसे एम्पायर तक पहुँच चुकी थी जिसके बारे में मैंने कभी सुना तक नहीं था।
मैंने धीरे-धीरे बिस्तर पर वापस बैठते हुए कहा,
"ठीक है..."
"अब तुम कहीं नहीं जाओगे।"
मैंने उसकी ओर उंगली उठाई।
"आज तुम मुझे सब कुछ बताओगे।"
लियो हल्का-सा मुस्कुराया।
"मैं कोशिश करूंगा।"
"कोशिश नहीं..."
मैंने तुरंत उसे टोका।
"सच।"
"मुझे आधा सच मत बताना।"
"मेरे पास पहले ही इतने सवाल हैं कि मेरा दिमाग फटने वाला है।"
लियो कुछ क्षण चुप रहा।
फिर सामने रखी कुर्सी खींचकर मेरे सामने बैठ गया।
उसने अपनी उंगलियाँ आपस में फँसा लीं।
"जिस दुनिया में मेरी मां पैदा हुई थीं..."
"...वहां ताकत का मतलब सिर्फ पैसा नहीं होता।"
"वहां..."
"...जन्म ही इंसान की कीमत तय कर देता है।"
मैं बिना कुछ बोले उसकी बात सुनती रही।
"जो लोग उस एम्पायर का हिस्सा हैं..."
"...वे खुद को आम इंसानों से अलग समझते हैं।"
"उनके अपने कानून हैं..."
"अपनी राजनीति..."
"और अपनी सत्ता।"
मैंने बीच में ही पूछ लिया,
"और एंड्रयू?"
लियो की आंखों में ठंडापन उतर आया।
"वह उस पूरे एम्पायर के लीडर है।"
"उनका एक फैसला..."
"...हजारों लोगों की किस्मत बदल सकता है।"
मेरे होंठ सूखने लगे।
"तो..."
"इतना बड़ा आदमी..."
"...मुझे किडनैप क्यों करवाएगा?"
"मैं तो उन्हें जानती भी नहीं।"
लियो ने मेरी ओर देखा।
"क्योंकि..."
"तुम अब सिर्फ सियरा नहीं रहीं।"
"तुम उस खेल का हिस्सा बन चुकी हो..."
"...जिससे दूर रहने की मैंने बहुत कोशिश की थी।"
मैंने भौंहें सिकोड़ लीं।
"मतलब?"
उन्हें लगता है उनके एम्पायर के और मेरे बीच तुम एक खतरा हो।
"...कि तुम मेरे लिए सबसे बड़ी कमजोरी हो।"
मेरे चेहरे पर हैरानी साफ दिखाई देने लगी।
"कमजोरी?"
मैं हल्का-सा हंस पड़ी।
"तुम मुझे मुश्किल से जानते हो।"
"फिर मैं तुम्हारी कमजोरी कैसे हो गई?"
लियो ने बिना पलक झपकाए मेरी आंखों में देखा।
उसकी आवाज़ बेहद शांत थी।
"क्योंकि..."
"...मैंने तुम्हें बचाने के लिए वह किया..."
"...जो मैं अपने लिए भी कभी नहीं करता।"
मैं चुप हो गई।
मुझे वे सारे पल याद आने लगे—
उसका मुझे वेयरहाउस से बचाना...
मेरे बेहोश होने तक मेरा साथ न छोड़ना...
मेरे लिए अस्पताल लाना...
मेरी हर छोटी-बड़ी बात याद रखना...
और हर बार बिना किसी शिकायत के मेरी डांट सुनना।
मैंने तुरंत नज़रें फेर लीं।
"तुम..."
"फिर से भावुक बातें करके मुझे बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहे हो।"
लियो हल्का-सा मुस्कुराया।
"अगर तुम सच में इतनी आसानी से बेवकूफ बन जाती..."
"...तो आज मुझसे इतने सवाल नहीं पूछ रही होती।"
उसकी मुस्कान और गहरी हो गई।
कुछ पल बाद...
वह फिर गंभीर हो गया।
"सियरा..."
"अब तुम्हें बहुत संभलकर रहना होगा।"
"एंड्रयू पहली बार असफल हुआ हैं।"
"लेकिन..."
"...वह दूसरी बार गलती नहीं करेंगें।"
मेरी मुस्कान भी गायब हो गई।
"मतलब..."
"वो फिर से मुझे मारने की कोशिश करेगा?"
"अगर ज़रूरत पड़ी..."
"...तो हाँ।"
उसके इस जवाब से पूरे कमरे में फिर सन्नाटा छा गया।
मैंने खिड़की से बाहर देखा।
अचानक मुझे अपनी पुरानी ज़िंदगी बहुत दूर लगने लगी।
जहाँ मेरी सबसे बड़ी चिंता बिज़नेस डील्स हुआ करती थीं...
आज...
मेरी जान पर बनी हुई थी।
मैंने धीमे स्वर में पूछा,
"तो अब मैं क्या करूँ?"
लियो बिना एक पल गंवाए बोला,
"फिलहाल..."
"...तुम्हें सिंथिया बनकर ही जीना होगा।"
"जब तक हमें इस शरीर बदलने का हल नहीं मिल जाता..."
"...तुम्हें अपनी असली पहचान किसी के सामने नहीं आने देनी है।"
मैंने गहरी सांस ली।
"और अगर मैं गलती से..."
"...उस लड़की के सामने आ गई..."
"...जो मेरे शरीर में है?"
लियो ने मेरी ओर देखा।
उसके चेहरे पर पहले जैसी कठोर गंभीरता लौट आई।
"तो..."
"...तुम हमेशा के लिए सिंथिया बन जाओगी।"
"और..."
"...वो हमेशा के लिए सियरा।"
मेरे शरीर में एक ठंडी सिहरन दौड़ गई।
अब मुझे पहली बार एहसास हुआ...
मैं सिर्फ किसी और का चेहरा नहीं पहन रही थी।
मैं...
अपनी पूरी ज़िंदगी खो भी सकती थी।