Holy Love or Curse Season 2 in Hindi Women Focused by Sonam Brijwasi books and stories PDF | पवित्र प्रेम या अभिशाप Season 2 - 20

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पवित्र प्रेम या अभिशाप Season 2 - 20

आज अग्निहोत्री हाउस पूरी तरह रोशनी से जगमगा रहा था।रितांशी का जन्मदिन था। पूरा घर फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजा हुआ था। रितांशी गुलाबी ड्रेस में बेहद प्यारी लग रही थी। उसके कॉलेज के कुछ दोस्त भी आए हुए थे। रितांश के क्लास के कुछ छात्र भी पार्टी में मौजूद थे। सब हँस-बोल रहे थे। संगीत चल रहा था। घर में खुशी का माहौल था।

उधर...सिद्धिदात्री सफेद और हल्के नीले रंग के सूट में थी। उसके लंबे खुले बाल और मासूम चेहरा उसे सबसे अलग बना रहे थे।
तभी रितांश के क्लास का एक लड़का—
प्रवीण—
उसके पास आया।

वो बोला - 
हाय सिद्धिदात्री।
तुम आज बहुत अच्छी लग रही हो।

सिद्धिदात्री मुस्कुराई और बोली - 
धन्यवाद।

बस फिर क्या था। प्रवीण बार-बार किसी न किसी बहाने से उसके पास आने लगा। कभी जूस लाकर देता। कभी उससे बातें करने लगता। कभी उसके साथ फोटो खिंचवाने की बात करता। दूर खड़ा रितांश यह सब देख रहा था। उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था।
लेकिन...उसकी आँखें धीरे-धीरे लाल होने लगी थीं। हल्की सी।बहुत हल्की। रितांशी ने यह देख लिया। वह तुरंत अपने भाई के पास आई।

बोली - 
भैया...आपको क्या हुआ?

रितांश ने नज़रें हटाईं और बोला - 
कुछ नहीं।

रितांशी शरारती मुस्कान के साथ बोली—
अच्छा! तो फिर आप पिछले दस मिनट से प्रवीण और सिद्धिदात्री को क्यों घूर रहे हो?

रितांश तुरंत बोला—
मैं किसी को नहीं घूर रहा।
और मुझे क्या फर्क पड़ता है कि वो किससे बात कर रही है?

रितांशी हँसी रोक नहीं पाई।

बोली - 
हाँ, बिल्कुल फर्क नहीं पड़ता।

उधर प्रवीण ने सिद्धिदात्री से पूछा—
क्या तुम मेरे साथ डांस करोगी?

सिद्धिदात्री कुछ बोल पाती उससे पहले—

एक आवाज आई—
सिद्धिदात्री।

दोनों ने मुड़कर देखा। सामने रितांश खड़ा था। उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी।वोलेकिन आँखों में कुछ और ही था।

बोला - 
मम्मी तुम्हें बुला रही हैं।

सिद्धिदात्री तुरंत बोली—
अच्छा, मैं अभी आती हूँ।

और वह रितांश के साथ चली गई। प्रवीण बस उन्हें जाता हुआ देखता रह गया।

थोड़ी दूर आने के बाद सिद्धिदात्री ने पूछा—
आंटी कहाँ हैं?

रितांश कुछ सेकंड चुप रहा।

फिर बोला—
मम्मी ने नहीं बुलाया था।

सिद्धिदात्री हैरान रह गई बोली - 
तो फिर?

रितांश ने दूसरी तरफ देखते हुए कहा—
मुझे बस... तुम्हें वहाँ से ले जाना था।
वो लड़का मुझे बिल्कुल पसंद नहीं है।

सिद्धिदात्री कुछ पल उसे देखती रही। फिर उसके चेहरे पर धीमी मुस्कान आ गई।

वो बोली - 
ओह...तो आपको जलन हो रही थी?

रितांश तुरंत बोला—
नहीं!

सिद्धिदात्री हँस पड़ी और बोली - 
झूठ।

और पहली बार...रितांश के पास इसका कोई जवाब नहीं था।सिद्धिदात्री की बात सुनकर रितांश कुछ पल तक उसे देखता रहा।
वो धीरे से उसके करीब आया। सिद्धिदात्री का दिल तेजी से धड़कने लगा। वह पीछे हटी, लेकिन पीछे दीवार थी। रितांश ने अपने एक हाथ से दीवार का सहारा लिया और दूसरी ओर खड़ा होकर उसकी तरफ देखने लगा।

वो बोला - 
तुम्हें उस प्रवीण से इतनी बातें करने की क्या जरूरत थी?

सिद्धिदात्री हल्का सा मुस्कुराई।

बोली - 
तो सच में आपको जलन हो रही थी।

रितांश ने नजरें फेर लीं और बोला - 
मुझे बस वह लड़का पसंद नहीं है।

सिद्धिदात्री हँस पड़ी और बोली - 
या फिर आपको यह पसंद नहीं कि मैं किसी और से बात करूँ?

रितांश कुछ क्षण चुप रहा।

फिर बोला—
शायद...

सिद्धिदात्री का चेहरा शर्म से लाल हो गया। दोनों कुछ देर तक एक-दूसरे को देखते रहे।

तभी पीछे से रितांशी की आवाज आई—
अरे! आप दोनों यहाँ छिपकर क्या कर रहे हो?

दोनों तुरंत अलग हो गए। रितांशी शरारती मुस्कान के साथ उन्हें देख रही थी।

वो बोली - 
मैं तो कब से आप दोनों को ढूँढ रही हूँ। केक काटने का समय हो गया है!

सिद्धिदात्री तुरंत वहाँ से चली गई। जबकि रितांश ने अपनी छोटी बहन को घूरकर देखा।

रितांशी हँसते हुए बोली—
भैया, मैं मम्मा को सब बता दूँ क्या?

रितांश बोला - 
रितांशी!

और अगले ही पल, दोनों भाई-बहन हँसते हुए हॉल की ओर भाग गए। हॉल रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा रहा था। संगीत धीमे-धीमे बज रहा था। रितांशी अपना जन्मदिन केक काट चुकी थी और अब सभी मस्ती कर रहे थे।वोतभी डांस फ्लोर पर कपल डांस शुरू हुआ। रितांश कुछ क्षण चुपचाप खड़ा रहा। फिर उसने सामने खड़ी सिद्धिदात्री की ओर देखा। वह अपने दुपट्टे का किनारा उंगलियों में घुमाते हुए बाकी लोगों को देख रही थी। रितांश उसके सामने आकर रुक गया। उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया।

और हल्की मुस्कान के साथ बोला—
क्या तुम मुझे अपना डांस पार्टनर बनाओगी?

सिद्धिदात्री एकदम चौंक गई। उसकी बड़ी-बड़ी आँखें रितांश पर टिक गईं।

बोली - 
मैं...?

रितांश मुस्कुराया और बोला - 
हाँ, तुम।

सिद्धिदात्री के गाल हल्के गुलाबी हो गए। आखिर वह अभी भी सोलह साल की एक शर्मीली लड़की ही तो थी। उसने धीरे से अपना हाथ रितांश के हाथ में रख दिया।

वो बोली - 
ठीक है...

रितांश उसे लेकर डांस फ्लोर पर आ गया। धीमा संगीत बज रहा था। रितांश ने बहुत सावधानी से अपना एक हाथ उसके कंधे के पास रखा, जबकि सिद्धिदात्री ने झिझकते हुए अपना हाथ उसके कंधे पर रखा। दोनों धीरे-धीरे संगीत की धुन पर चलने लगे। लेकिन दोनों का ध्यान डांस पर कम और एक-दूसरे पर ज्यादा था।सिद्धिदात्री बार-बार नज़रें झुका लेती। और हर बार रितांश उसे देखकर मुस्कुरा देता।

दूर खड़ी रितांशी उत्साह से बोली—
मम्मी! देखो ना, भैया आखिर मान ही गए!

सिद्धिका हँस पड़ी।

वहीं कृष्णा मुस्कुराते हुए बोला—
लगता है इतिहास सच में खुद को दोहरा रहा है।

सिद्धिदात्री ने यह सुन लिया। वह शर्म से और भी लाल हो गई।

रितांश धीरे से उसके कान के पास झुककर फुसफुसाया—
अगर तुम ऐसे ही शर्माती रहीं, तो सबको सब समझ आ जाएगा।

सिद्धिदात्री ने तुरंत उसे देखा।

बोली - 
और अगर आपको देखकर मुझे शर्म आए तो मैं क्या करूँ?

यह सुनकर इस बार रितांश चुप हो गया। और पहली बार...रितांश के चेहरे पर भी हल्की लाली आ गई।