रात के दो बजे थे।
सराय के कमरे की खिड़की अपने-आप खुल गई। बाहर तेज़ हवा चल रही थी, लेकिन कमरे के भीतर एक अजीब-सी शांति थी।
अचानक मेज़ पर रखा नक्शा नीली रोशनी से चमकने लगा।
नक्शे पर एक नया निशान उभरा—
"देवगढ़ मंदिर – पहली चाबी"
"देवगढ़?" कबीर ने हैरानी से पूछा। "लेकिन यह जगह तो वर्षों से वीरान बताई जाती है।"
मीरा ने तुरंत अपना लैपटॉप खोला। इंटरनेट पर देवगढ़ मंदिर के बारे में बहुत कम जानकारी थी। बस एक बात हर जगह लिखी थी—
"जो मंदिर के तहखाने में गया, वह कभी वापस नहीं लौटा।"
आर्यन ने दृढ़ आवाज़ में कहा, "यही हमारी अगली मंज़िल है।"
अगली सुबह
चारों एक पुरानी जीप से जंगल की ओर निकल पड़े।
जंगल जितना घना होता गया, रास्ता उतना ही सुनसान होता गया।
कुछ घंटों बाद उन्हें पत्थरों से बना एक विशाल मंदिर दिखाई दिया।
उसके मुख्य द्वार पर एक वाक्य लिखा था—
"लालच करने वाला यहीं मर जाएगा।"
जैसे ही वे अंदर गए, मंदिर का विशाल दरवाज़ा अपने-आप बंद हो गया।
धड़ाम!
पूरा मंदिर अँधेरे में डूब गया।
मीरा ने टॉर्च जलाई।
सामने सात विशाल मूर्तियाँ खड़ी थीं।
हर मूर्ति के हाथ में अलग-अलग प्रतीक बने थे।
नीचे एक पहेली लिखी थी—
"सात रक्षक, एक सत्य।
गलत चुनाव... और मृत्यु निश्चित।"
सिया ने पहली मूर्ति को छूने की कोशिश की।
"रुको!" आर्यन चिल्लाया।
लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
पूरे मंदिर में ज़ोरदार कंपन शुरू हो गया।
छत से विशाल पत्थर गिरने लगे।
"भागो!"
चारों अलग-अलग दिशाओं में दौड़ पड़े।
उसी समय आर्यन की नज़र दीवार पर बने एक छोटे-से सूर्य के चिन्ह पर पड़ी।
उसे नक्शे पर बना वही चिन्ह याद आया।
उसने उस चिन्ह को दबाया।
अचानक कंपन रुक गया।
दीवार धीरे-धीरे खुली।
उसके पीछे एक गुप्त कक्ष था।
कक्ष के बीचों-बीच सुनहरी रोशनी में एक छोटी-सी धातु की चाबी रखी थी।
आर्यन ने जैसे ही चाबी उठाई—
पूरे मंदिर में एक भारी आवाज़ गूँजी—
"पहली चाबी प्राप्त हो चुकी है..."
लेकिन उसी क्षण मंदिर के बाहर हेलिकॉप्टर की आवाज़ सुनाई दी।
कई हथियारबंद लोग मंदिर को चारों ओर से घेर चुके थे।
उनका नेता मुस्कुराया।
"बहुत अच्छा, बच्चों..."
"अब दूसरी चाबी भी तुम ही हमारे लिए ढूँढ़ोगे।"
चारों दोस्तों ने पहली बार महसूस किया कि वे सिर्फ़ एक खजाने की खोज में नहीं हैं...
वे अब एक ऐसे खेल का हिस्सा बन चुके थे, जहाँ हारने वालों को दूसरा मौका नहींहेलिकॉप्टर के पंखों की गड़गड़ाहट पूरे जंगल में गूँज रही थी।
मंदिर के चारों ओर लगभग बीस हथियारबंद लोग फैल चुके थे। सभी ने काले रंग की वर्दी पहन रखी थी और उनके सीने पर चाँदी का एक निशान बना था—एक काला द्वीप, जिसके बीचों-बीच लाल आँख वाला साँप उकेरा गया था।
आर्यन ने धीमी आवाज़ में कहा, "यही है... ब्लैक आइल।"
उन लोगों के बीच से एक लंबा-सा आदमी आगे बढ़ा। उसके सफेद बाल, काला लंबा कोट और हाथ में चाँदी की छड़ी थी। उसके चेहरे पर आत्मविश्वास और आँखों में अजीब-सी ठंडक थी।
"मैं हूँ... विक्टर क्रो।"
उसने मुस्कुराते हुए कहा, "पिछले तीस सालों से मैं उस द्वीप की तलाश कर रहा हूँ... और तुम चारों ने मेरा काम आसान कर दिया।"
कबीर गुस्से से बोला, "हम तुम्हारी कोई मदद नहीं करेंगे।"
विक्टर हँसा।
"मदद? तुम करोगे भी... और तुम्हें पता भी नहीं चलेगा।"
उसने उँगलियाँ चटकाईं।
दो लोग एक बूढ़े व्यक्ति को पकड़कर लाए। उसके कपड़े फटे हुए थे, चेहरा धूल से भरा था, लेकिन आँखों में डर नहीं था।
"इसे पहचानते हो?"
चारों ने सिर हिला दिया।
बूढ़े ने आर्यन को देखते ही कहा—
"चाबी किसी को मत देना... चाहे कुछ भी हो जाए!"
अगले ही पल विक्टर ने उसे ज़ोर से धक्का दिया।
बूढ़ा मंदिर की सीढ़ियों से लुढ़कता हुआ नीचे जा गिरा।
"तुम पागल हो!" मीरा चीखी।
विक्टर का चेहरा बिल्कुल शांत था।
"जो मेरे रास्ते में आता है... उसका यही अंजाम होता है।"
तभी जंगल के भीतर से अचानक कई धुएँ के गोले फटे।
पूरा इलाका सफेद धुएँ से भर गया।
"सर! हमला!" किसी सैनिक ने चिल्लाकर कहा।
अफरा-तफरी मच गई।
आर्यन ने मौका देखकर अपने दोस्तों का हाथ पकड़ा।
"भागो!"
चारों जंगल की ओर दौड़ पड़े।
पीछे गोलियों की आवाज़ें गूँज रही थीं।
लगभग आधे घंटे बाद वे एक झरने के पास पहुँचे। सबकी साँसें तेज़ चल रही थीं।
तभी वही घायल बूढ़ा व्यक्ति झाड़ियों के पीछे से बाहर आया।
चारों चौंक गए।
"आप... ज़िंदा हैं?"
बूढ़ा मुस्कुराया।
"मेरा नाम ईशान राणा है।"
"मैं उस अभियान का आख़िरी जीवित सदस्य हूँ, जो पच्चीस साल पहले मृत द्वीप तक पहुँचा था।"
चारों की आँखें फैल गईं।
ईशान ने अपनी जेब से एक पुरानी, जंग लगी धातु की पट्टी निकाली।
उस पर वही प्रतीक बना था जो पहली चाबी पर था।
"तुम लोग जिस यात्रा पर निकले हो..."
"...उससे वापस लौटने वाले लोग दुनिया में उँगलियों पर गिने जा सकते हैं।"
आर्यन ने धीरे से पूछा,
"क्या सच में उस द्वीप पर कोई खजाना है?"
ईशान ने गहरी साँस ली।
"खजाना..."
"काश बात सिर्फ़ खजाने की होती।"
उसने काँपते हुए कहा—
"उस द्वीप पर कुछ ऐसा जागने का इंतज़ार कर रहा है... जिसे इंसानों ने सदियों पहले हमेशा के लिए कैद कर दिया था।"
अचानक दूर पहाड़ी पर एक लाल लेज़र की किरण आर्यन के सीने पर आकर रुकी।
ईशान चीखा—
"नीचे झुको!"
धाँय...!
गोली की आवाज़ पूरे जंगल में गूँज उठी।