A New Beginning of Love - 4 in Hindi Drama by Leela nagetiya books and stories PDF | प्यार की एक नई शुरुआत - 4

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प्यार की एक नई शुरुआत - 4

दरवाजे का हैंडल घूमा और जैसे ही रोहन ने कमरे के भीतर कदम रखा, वहाँ पसरा सन्नाटा उसकी आँखों में खटक गया. मायरा और आदित्य, दोनों ही बुत बने खडे थे—एकदम खामोश. रोहन की नजर पहले मायरा पर पडी. अपनी छोटी बहन को देखते ही उसकी आँखों की सख्ती पल भर में पिघल गई और होंठों पर एक गहरी, सलोनी सी मुस्कान तैर गई.

पर यह सुकून महज चंद सेकंड का था.

जैसे ही रोहन का रुख आदित्य की तरफ हुआ, उसके चेहरे के रंग बदल गए. मुस्कान की जगह आँखों में एक अजीब सी तल्खी और कडवाहट आ गई. उसने अपनी आँखें सिकोडकर आदित्य को ऊपर से नीचे तक इस तरह घूरा, मानो उसकी मौजूदगी उसे बर्दाश्त न हो रही हो.

तुम्हें अपने घर नहीं जाना, आदित्य? रोहन की आवाज में एक अजीब सी ठंडी कडकडाहट थी.

आदित्य के गले में जैसे शब्द फंस गए. वह खुद को संभालते हुए रोहन के इस तीखे सवाल का जवाब देने के लिए अभी अपने होंठ हिला ही रहा था कि मायरा बीच में आ गई. वह आदित्य से पहले ही बेहद हडबडाहट में बोल पडी, भाई! आदित्य को. मैंने ही रोका है।

कमरे में एक भारी खामोशी छा गई. रोहन ने कुछ नहीं कहा. वह बस चुपचाप, अपनी गहरी आँखों से उन दोनों के चेहरों को पढता रहा. मायरा की सांसें अटकी हुई थीं और आदित्य की नजरें झुकी हुई थीं.

कुछ पलों की उस घुटन के बाद रोहन ने एक ठंडी सांस ली और दोनों की तरफ देखते हुए कहा, तो क्या तुम दोनों का यहीं रहने का इरादा है? चलो अब, चेकअप के लिए डॉक्टर इंतजार कर रहे हैं।

मायरा और आदित्य ने बिना कोई पलटवार किए, चुपचाप सहमी हुई सी गर्दन हिला दी. इसके बाद, बिना एक भी लफ्ज जुबान पर लाए, वो तीनों भारी कदमों से उस कमरे से बाहर निकल गए.

अस्पताल के गलियारे में फैली फिनाइल की गंध और मशीनों की बीप- बीप के बीच तीनों भारी कदमों से आगे बढ रहे थे. सन्नाटे को तोडते हुए आदित्य सबसे पहले रिसेप्शन काउंटर की तरफ बढा. उसके पीछे मायरा और कुछ दूरी पर रोहन चल रहा था, जिसकी संजीदा नजरें लगातार आदित्य की हर हरकत पर टिकी थीं.

आदित्य ने काउंटर पर खडी नर्स की तरफ देखा और अपनी आवाज को जितना हो सके सामान्य रखते हुए कहा, एक्सक्यूज मी. मायरा का फुल बॉडी चेकअप होना है. क्या आप प्लीज प्रोसीजर समझाएंगी कि शुरुआत कहाँ से करनी है?

नर्स ने अपने कंप्यूटर स्क्रीन से नजरें हटाईं, एक पल के लिए तीनों को देखा और फिर पेशेवर मुस्कान के साथ बोली, आप प्लीज पाँच मिनट वेटिंग एरिया में बैठिए. मैं अभी किसी को भेजती हूँ, वो आपको गाइड कर देंगे।

आदित्य ने सहमति में बस धीरे से अपनी गर्दन हिला दी.

अभी पाँच मिनट भी पूरे नहीं हुए थे कि एक दूसरी नर्स उनकी तरफ आती हुई दिखी. उसने बिना कोई वक्त गंवाए उन्हें अपने पीछे आने का इशारा किया. मायरा, आदित्य और रोहन—तीनों के तीनों बिना कुछ बोले चुपचाप उसके पीछे- पीखे चल पडे. अस्पताल की उस सफेद, ठंडी दीवारों वाली भूलभुलैया में एक अजीब सी खामोशी तैर रही थी.

सबसे पहले मायरा को एक केबिन में ले जाया गया, जहाँ उसके खून के सैंपल लिए गए. सुई चुभते ही मायरा ने हलके से अपनी आँखें बंद कर लीं. इसके बाद उसका ब्लड प्रेशर नापा गया, फिर वजन और एक- एक करके कई सारे टेस्ट. वक्त जैसे अस्पताल की उस रफ्तार में थम सा गया था. देखते ही देखते सुइयों की चुभन, मशीनों की जाँच और एक कमरे से दूसरे कमरे के चक्कर काटते हुए पूरे तीन घंटे बीत गए. इस पूरे वक्त में रोहन और आदित्य के बीच एक लफ्ज की भी बात नहीं हुई थी, पर दोनों की खामोशी में एक अलग ही जंग चल रही थी.

आखिरकार, तीन घंटे की इस थका देने वाली कशमकश के बाद नर्स फाइलों को समेटती हुई उनके पास आई. उसने मायरा की तरफ देखा और फिर आदित्य और रोहन को मुखातिब करते हुए कहा, इनका पूरा बॉडी चेकअप हो चुका है. आप लोग थोडा सा यहीं रुकिए, हम बस कुछ ही देर में इनकी रिपोर्ट्स लेकर आते हैं. उसके बाद आप सीधे डॉक्टर से मिल लीजिएगा।

नर्स के जाते ही एक बार फिर वहाँ वही भारी सन्नाटा लौट आया, जहाँ अब सबकी निगाहें आने वाली रिपोर्ट पर टिकी थीं.

अस्पताल की उस ठंडी प्लास्टिक की कुर्सी पर टिकते ही मायरा ने एक गहरी और थकी हुई सांस छोडी. उसने अपनी आँखें मूंद लीं और लगभग हार मानते हुए बुदबुदाई, यार. मैं तो बहुत बुरी तरह थक गई हूँ. अब मुझसे एक कदम भी नहीं चला जाएगा।

उसकी इस मासूम सी बेबसी पर आदित्य के होंठों पर एक सलोनी सी मुस्कान तैर गई. उसने मायरा की तरफ झुकते हुए दबी आवाज में कहा, ज्यादा मत सोच. तू बोले तो मैं तुझे अपनी गोद में उठा लूँ?

आदित्य! मायरा ने झेंपते हुए उसके कंधे पर एक हलकी सी चपत लगाई और आँखें तरेरते हुए बोली, मैं बिल्कुल मजाक के मूड में नहीं हूँ, समझे?

दोनों एक- दूसरे को देखकर दबी- दबी हंसी हंस ही रहे थे कि तभी उनके पीछे खडे रोहन की भारी आवाज गूंजी, आदित्य, तुम अपनी यह बकवास बंद करो।

रोहन का कडक अंदाज सुनकर दोनों पल भर के लिए सहम गए. रोहन मायरा की तरफ बढा और बहुत ही संजीदगी से बोला, प्रिंसेस, अगर तुम इतनी थक गई हो. तो मैं व्हीलचेयर ले आता हूँ. तुम आराम से उस पर बैठ जाना, धक्का मैं लगा दूँगा।

आदित्य और मायरा ने फटी आँखों से रोहन को देखा. रोहन का चेहरा इतना संजीदा था कि उसकी बात सुनकर दोनों को अंदर ही अंदर जोर की हंसी आ रही थी, लेकिन रोहन के खौफ की वजह से दोनों ने बडी मुश्किल से अपने होंठ भींचे और हंसी को गले में ही रोक लिया.

मायरा ने अपनी हंसी को दबाते हुए कहा, नहीं. नहीं भाई! मैं इतनी भी नहीं थकी हूँ, सच में।

मायरा का जवाब सुनकर रोहन ने अजीब सी नजरों से पहले उसे और फिर आदित्य को देखा. उसके चेहरे पर एक अजीब सी कशमकश थी. उसने बडी संजीदगी से पूछा, क्यों? क्या मेरा मजाक इतना बुरा था कि तुम दोनों को हंसी भी नहीं आई?

मायरा और आदित्य ने चौंककर एक- दूसरे को देखा और फिर एक साथ, एक ही आवाज में बोले, क्या? आप मजाक कर रहे थे?

रोहन ने बिल्कुल सपाट चेहरे के साथ गर्दन हिलाकर कहा, हाँ. यहाँ का माहौल थोडा सीरियस हो गया था, तो मैंने सोचा माहौल हल्का कर दूँ।

रोहन का यह रूप देखना उन दोनों के लिए इतना अप्रत्याशित था कि अब उनसे अपनी हंसी रोकी नहीं गई. दोनों के सब्र का बांध टूट गया और वे अस्पताल के उस सन्नाटे में खिलखिलाकर हंस पडे. उन्हें इस तरह हंसता देख रोहन ने पहले तो उन्हें घूरा, जिससे दोनों ने डरकर तुरंत अपने मुँह पर हाथ रख लिया और शांत हो गए. पर अगले ही पल, खुद रोहन के चेहरे पर भी एक चौडी मुस्कान आ गई और वह भी उनके साथ हंसने लगा.

तीनों के बीच का वह हफ्तों पुराना तनाव जैसे उस एक पल की हंसी में बह गया था. वे तीनों खुलकर हंस ही रहे थे कि तभी सामने से वही नर्स फाइलें हाथ में लिए आती दिखी.

नर्स ने मुस्कुराते हुए कहा, चलिए, रिपोर्ट्स आ गई हैं. आप लोग डॉक्टर से मिल लीजिए।

नर्स की आवाज पडते ही, जैसे कोई जादू हुआ हो. तीनों के चेहरों से हंसी पल भर में गायब हो गई और वे वापस उसी गंभीर और खामोश अंदाज में आ गए, मानो कुछ हुआ ही न हो.

केबिन के दरवाजे पर लगा शीशा सरका और तीनों भीतर दाखिल हुए. कमरे में डॉक्टर की मेज पर रखी सफेद रोशनी सीधे फाइलों पर पड रही थी. मायरा डॉक्टर के ठीक सामने रखी कुर्सी पर बैठ गई, जबकि रोहन और आदित्य उसके आजू- बाजू की कुर्सियों पर आ टिके. केबिन में सिर्फ डॉक्टर के पेन चलने की सरसराहट गूंज रही थी.

डॉक्टर ने चश्मा नाक पर टिकाया, रिपोर्ट्स पर एक आखिरी नजर डाली और फिर अपनी कुर्सी से थोडा आगे झुकते हुए मुस्कुराए, रिपोर्ट्स वैसे तो बिल्कुल नॉर्मल हैं, घबराने की कोई बात नहीं है।

यह सुनते ही रोहन और आदित्य के कंधों का तनाव जैसे थोडा कम हुआ.

डॉक्टर ने मायरा की तरफ देखते हुए अपनी बात आगे बढाई, बस थोडी सी कमजोरी है, और सच कहूँ तो शरीर में खून की कमी हो गई है. बाकी यह बिल्कुल ठीक हैं. बस अब से आप दोनों को इनके खाने- पीने का खास ख्याल रखना होगा. यह अच्छे से डाइट लें, यह बहुत जरूरी है।

डॉक्टर ने एक पर्चे पर तेजी से कुछ दवाइयाँ लिखीं और उसे रोहन की तरफ बढाते हुए कहा, ये कुछ गोलियाँ हैं जो इन्हें बिल्कुल वक्त पर लेनी हैं. मैंने सब कुछ इस पर्चे पर साफ- साफ लिख दिया है, आप एक बार तसल्ली से पढ लीजिएगा. इन्हें ताजे फल खिलाइए और याद रहे—तीनों वक्त का खाना बिल्कुल Miss नहीं होना चाहिए. और हाँ, एक से दो हफ्ते बाद इन्हें एक बार दोबारा रूटीन चेकअप के लिए ले आइएगा।

रोहन और आदित्य ने राहत की सांस लेते हुए एक साथ' हाँ' में सिर हिलाया.

थैंक यू, डॉक्टर, रोहन और आदित्य के मुंह से एक साथ निकला. मायरा ने भी अपनी कमजोर आवाज में डॉक्टर को धन्यवाद कहा.

तीनों डॉक्टर के केबिन से बाहर निकल आए. अस्पताल के कॉरिडोर की ठंडी हवा अब उतनी भारी नहीं लग रही थी जितनी तीन घंटे पहले लग रही थी. मायरा और रोहन धीरे- धीरे एग्जिट गेट की तरफ बढने ही वाले थे कि आदित्य अचानक अपनी जगह पर रुक गया.

उसने रोहन और मायरा की तरफ देखा और बेहद सहज लहजे में कहा, आप लोग गाडी की तरफ चलिए. मैं बस अभी एक मिनट में आता हूँ।

रोहन के साथ गाडी की तरफ बढते हुए मायरा के दिमाग में कुछ चल रहा था. उसने रोहन की तरफ देखा और गहरी सांस लेते हुए कहा, भाई. आपने वहाँ सच में मजाक नहीं किया था ना? आप बस मुझसे ऐसे ही कह रहे थे।

रोहन ने चौंककर उसकी तरफ देखा और अपनी आवाज को सहज बनाने की कोशिश करते हुए बोला, तुम यह क्या कह रही हो? मैं भला ऐसा क्यों करूँगा?

क्योंकि. मायरा ने उसकी आँखों में झांकते हुए कहा, क्योंकि मैं आदित्य के साथ बहुत हंस- हंसकर बात कर रही थी, और आपके साथ नहीं. इसलिए आपने सोचा कि अगर आप ऐसा कुछ कहेंगे, तो मैं आपसे बहुत खुश हो जाऊँगी. लेकिन मैं सच कह रही हूँ भाई, आपने बहुत ही बकवास बात की थी. और जिस संजीदा चेहरे के साथ आपने वो बात कही थी ना, उसमें तो वो और भी ज्यादा बकवास लग रही थी।

मायरा की बात सुनकर रोहन झेंप गया. उसने तुरंत अपनी नजरें चुराईं और दूसरी तरफ देखते हुए बनावटी गुस्से में कहा, तुम अपनी यह बकवास बंद करो, समझे? ऐसा कुछ नहीं है जैसा तुम समझ रही हो।

दूसरी तरफ, अस्पताल के भीतर का नजारा बदलता है. आदित्य वापस डॉक्टर के केबिन में खडा था. वह डॉक्टर से किसी बेहद जरूरी और संजीदा विषय पर बात कर रहा था. डॉक्टर की बात सुनने के बाद आदित्य ने संजीदगी से सिर हिलाया और कहा, ठीक है डॉक्टर, मैं चलता हूँ।

इधर बाहर, रोहन और मायरा बातें करते हुए पार्किंग एरिया की तरफ बढ ही रहे थे कि तभी अचानक सामने से आते एक शख्स से मायरा की टक्कर हो गई. वह आदमी चिडचिडाया और मायरा पर बरस पडा, देखकर नहीं चल सकती क्या तुम?

मायरा ने तुरंत अपने कदम पीछे खींचे और शालीनता से कहा, आई एम सॉरी।

लेकिन वह आदमी इतने पर भी शांत नहीं हुआ. उसने मायरा को ऊपर से नीचे तक देखा और बडबडाया, आई एम सॉरी. आजकल के बच्चे भी ना!

अपनी बहन के लिए ऐसा लहजा सुनकर रोहन का खून उबल गया. वह तुरंत आगे आया और उस आदमी के सामने तनकर खडा हो गया. रोहन ने कडक आवाज में कहा, उसने माफी मांग ली है ना? फिर क्यों बदतमीजी कर रहे हो?

वह आदमी भी पीछे हटने को तैयार नहीं था. उसने रोहन को घूरते हुए कहा, क्यों रे? तुझे मुझसे पंगा लेना है क्या, बच्चे?

रोहन गुस्से में आगे कुछ कहता, उससे पहले ही मायरा ने उसका हाथ पकडकर पीछे खींचा और मिन्नत करते हुए बोली, भाई, प्लीज रहने दीजिए ना! चलिए यहाँ से।

उस आदमी ने जोर से हंसते हुए कहा, चले जाओ यहाँ से. तुम लोग बच्चे हो और आज मेरा मूड अच्छा है, नहीं तो तुम दोनों को मैं यहीं सबक सिखा देता।

मायरा ने रोहन को खींचकर गाडी में बैठाया और खुद भी अंदर आ गई. गाडी का दरवाजा बंद होते ही रोहन ने स्टीयरिंग व्हील पर हाथ मारते हुए गुस्से में कहा, मायरा, तुमने मुझे क्यों रोका? उसे तो आज मैं सबक सिखाकर ही दम लेता!

मायरा ने उसे शांत कराते हुए कहा, भाई, रहने दीजिए ना. हमें ऐसे ऐरे- गैरे लोगों के मुँह नहीं लगना चाहिए।

उसकी यह परिपक्व बात सुनकर रोहन के चेहरे का गुस्सा थोडा कम हुआ. उसने मुस्कुराकर मायरा की तरफ देखा और कहा, मानना पडेगा, मेरी बहन अब बहुत समझदार हो गई है।

मायरा उसके मुँह से अपनी तारीफ सुनकर धीरे से मुस्कुरा दी. तभी रोहन का चेहरा अचानक गंभीर हुआ और उसने मायरा की तरफ देखकर कहा, सुनो, यह बात आदित्य को बिल्कुल पता नहीं चलनी चाहिए।

मायरा ने हैरानी से पूछा, क्यों भाई? ऐसा क्यों?

रोहन ने थोडा झेंपते हुए कहा, क्योंकि मैं नहीं चाहता कि उसके सामने मेरा मजाक बने. मैं हमेशा उसके सामने रौब जमाता हूँ और उससे झगडता रहता हूँ. अब अगर उसे पता चला कि मैं किसी और से झगड रहा था और वहाँ से बिना कुछ किए वापस आ गया, तो वह सुनकर मुझ पर बहुत हँसेगा. इसलिए मुझसे प्रॉमिस करो कि आदित्य को इस बारे में कुछ पता नहीं चलेगा।

मायरा ने हामी भर दी. लेकिन यह कहने के तुरंत बाद, रोहन का चेहरा अचानक बहुत ज्यादा सीरियस हो गया. वह खिडकी से बाहर देखते हुए गहरी सोच में डूब गया, मानो उसके दिमाग में कोई बहुत बडी उलझन चल रही हो.