रहस्यमयी जंगल का दरवाज़ा — भाग 2
लेखक: संदीप बिन्द
आर्यन कुछ क्षण तक उस पत्थर के दरवाज़े के सामने खड़ा रहा। उसके कानों में अभी भी वही आवाज गूँज रही थी—
“आर्यन... दरवाज़ा मत खोलना।”
उसका दिल तेजी से धड़क रहा था।
“अगर अंदर मेरे पिता हैं, तो मैं उन्हें छोड़कर नहीं जा सकता।”
आर्यन ने दरवाज़े को फिर से छूने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया।
तभी उसके साथ आया रहस्यमयी आदमी अचानक चिल्लाया—
“रुको!”
आर्यन ने पीछे मुड़कर देखा।
“आप मुझे रोक क्यों रहे हैं?”
आदमी ने धीमी आवाज में कहा—
“क्योंकि तुम्हारे पिता ने मुझे यही जिम्मेदारी दी थी कि मैं तुम्हें उस दरवाज़े से दूर रखूँ।”
आर्यन हैरान रह गया।
“आप मेरे पिता को जानते थे?”
आदमी कुछ देर चुप रहा।
फिर बोला—
“मैं उन्हें केवल जानता नहीं था... मैं उनके साथ इस रहस्य की तलाश में था।”
आर्यन की आँखों में सवाल थे।
“तो मेरे पिता के साथ हुआ क्या था?”
आदमी ने जवाब देने के बजाय अपनी जेब से एक पुरानी तस्वीर निकाली।
तस्वीर में तीन लोग खड़े थे।
एक आर्यन के पिता थे।
दूसरा वही रहस्यमयी आदमी।
लेकिन तीसरे व्यक्ति का चेहरा काला कर दिया गया था।
आर्यन ने तस्वीर हाथ में लेकर पूछा—
“इस तीसरे आदमी का चेहरा क्यों मिटाया गया है?”
आदमी ने कहा—
“क्योंकि अगर उसका नाम लिया गया, तो वह जान जाएगा कि हम उसे खोज रहे हैं।”
“कौन है वह?”
आदमी ने धीरे से कहा—
“कालसाया।”
अचानक सुरंग में तेज हवा चलने लगी।
मशालें एक-एक करके बुझने लगीं।
आर्यन ने घबराकर पूछा—
“यह क्या हो रहा है?”
आदमी ने कहा—
“वह जाग गया है।”
अगले ही पल पत्थर के दरवाज़े पर बने तीनों तारों से नीली रोशनी निकलने लगी।
धड़ाम!
दरवाज़ा थोड़ा-सा खुल गया।
अंदर घना अंधेरा था।
लेकिन उस अंधेरे में किसी इंसान की परछाईं दिखाई दे रही थी।
आर्यन ने ध्यान से देखा।
परछाईं धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ रही थी।
फिर आवाज आई—
“बेटा...”
आर्यन की आँखों में आँसू आ गए।
“पिताजी!”
वह दरवाज़े की ओर दौड़ा।
लेकिन रहस्यमयी आदमी ने उसे पकड़ लिया।
“नहीं!”
“मुझे जाने दीजिए!”
“वह तुम्हारे पिता हो सकते हैं... लेकिन यह भी संभव है कि वह तुम्हें अंदर बुलाने के लिए तुम्हारे पिता की आवाज का इस्तेमाल कर रहा हो।”
आर्यन रुक गया।
तभी अंदर से फिर आवाज आई—
“आर्यन, मेरी बात सुनो। जंगल के नीचे एक प्राचीन राज्य छिपा है। वहाँ एक ऐसा रहस्य है जिसे तुम्हारे पूर्वजों ने सदियों से सुरक्षित रखा था।”
आर्यन ने काँपते हुए पूछा—
“कौन-सा रहस्य?”
कुछ पल तक कोई आवाज नहीं आई।
फिर जवाब मिला—
“अमृत शिला।”
आर्यन और रहस्यमयी आदमी दोनों चौंक गए।
आदमी ने फुसफुसाकर कहा—
“नहीं... यह नाम उसे कैसे पता चला?”
आर्यन ने पूछा—
“अमृत शिला क्या है?”
आदमी ने गंभीर होकर कहा—
“एक ऐसी प्राचीन शिला जिसके बारे में कहा जाता है कि वह जिस भूमि पर स्थापित हो, वहाँ की सूखी धरती फिर से उपजाऊ हो सकती है।”
आर्यन ने आश्चर्य से पूछा—
“तो यही वह खजाना है?”
“हाँ। लेकिन वह केवल खजाना नहीं है।”
“फिर?”
आदमी ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा—
“उस शिला की रक्षा करने वाले को अपनी सबसे बड़ी इच्छा का त्याग करना पड़ता है।”
आर्यन कुछ समझ पाता, उससे पहले जंगल के बाहर से घोड़ों की आवाज सुनाई दी।
ठक... ठक... ठक...
कई लोग जंगल की ओर बढ़ रहे थे।
मशालों की रोशनी पेड़ों के बीच दिखाई देने लगी।
रहस्यमयी आदमी ने घबराकर कहा—
“वे आ गए।”
“कौन?”
“कालसाया के लोग।”
आर्यन ने पहली बार डर को अपने ऊपर हावी होने दिया।
लेकिन तभी उसके पिता की आवाज फिर सुनाई दी—
“आर्यन... अगर तुम सच जानना चाहते हो, तो दरवाज़े के सामने बने तीन तारों को छुओ।”
आर्यन ने दरवाज़े की ओर देखा।
तीनों तारे चमक रहे थे।
उसने धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाया।
जैसे ही उसकी उँगलियाँ पहले तारे को छूती हैं—
पूरी सुरंग रोशनी से भर जाती है।
दूसरे तारे को छूते ही दीवारों पर बने पुराने चित्र जीवित होने लगते हैं।
और तीसरे तारे को छूते ही जमीन के नीचे से भयानक कंपन शुरू हो जाता है।
पत्थर का दरवाज़ा अपने आप खुलने लगता है।
अंदर से तेज सुनहरी रोशनी बाहर आती है।
आर्यन की आँखें चौंधिया जाती हैं।
रोशनी के बीच उसे एक व्यक्ति दिखाई देता है।
लंबे बाल...
सफेद कपड़े...
और हाथ में वही तीन तारों वाला निशान।
आर्यन धीरे से बोलता है—
“पिताजी...?”
वह व्यक्ति धीरे-धीरे उसकी ओर मुड़ता है।
लेकिन उसका चेहरा देखते ही आर्यन के पैरों तले जमीन खिसक जाती है।
वह उसके पिता नहीं थे।
वह कोई और था।
उसकी आँखें पूरी तरह काली थीं।
और उसके चेहरे पर एक भयानक मुस्कान थी।
उसने कहा—
“तुम्हारे पिता ने तुम्हें बचाने की बहुत कोशिश की, आर्यन... लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है।”
उसी क्षण जंगल के बाहर से एक भयानक चीख सुनाई दी।
रहस्यमयी आदमी ने आर्यन का हाथ पकड़ा और कहा—
“भागो!”
लेकिन पीछे से वह काली आँखों वाला व्यक्ति हँसते हुए बोला—
“भागकर कहाँ जाओगे? दूसरा दरवाज़ा तो तुम्हारे इंतज़ार में है...”
आर्यन ने पीछे मुड़कर देखा।
सुरंग की दूसरी दीवार अचानक खुल चुकी थी।
और उसके पीछे...
एक विशाल भूमिगत महल दिखाई दे रहा था।
महल के प्रवेश द्वार पर लिखा था—
“स्वागत है, अंतिम वारिस।”
आर्यन समझ चुका था कि अब वापस लौटने का रास्ता बंद हो चुका है।