Flames of Passion and The Deadly Twist in Hindi Love Stories by Ritu kumari books and stories PDF | प्यार का जाल - 10

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प्यार का जाल - 10

पुराने वेयरहाउस में फैली सीलन और धूल की गंध के बीच सन्नाटा किसी गहरे तूफ़ान का अहसास करा रहा था। ज़ंग लगी पीली लाइट के नीचे खड़ा करण अपनी जेब में हाथ डाले शातिर मुस्कान के साथ आरव को देख रहा था। उसके पीछे खड़े दो खूंखार बाउंसरों के हाथों में लोहे की रॉड थी, और कोने में बंधा रिया का छोटा भाई साहिल बेबस आँखों से आरव की तरफ देख रहा था।
"डिफेंस नहीं, अटैक?" करण ठहाका मारकर हँसा। उसकी आवाज़ वेयरहाउस की ऊँची दीवारों से टकराकर गूँज उठी। "आरव, तुम अपनी कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठकर कोड लिख सकते हो, लेकिन यह असली दुनिया है। यहाँ कोड नहीं, गोलियाँ और ताक़त चलती है। पेन ड्राइव चुपचाप मेरे हवाले करो, वरना तुम्हारे इस छोटे साले की लाश गोमती नदी में तैरती मिलेगी।"
आरव ने अपने चेहरे पर रत्ती भर भी खौफ नहीं आने दिया। उसने अपनी जेब से वह काली पेन ड्राइव निकाली और उसे अपनी उंगलियों के बीच घुमाते हुए दो कदम आगे बढ़ाया।
"तुम्हें क्या लगता है करण, कि मैं यहाँ सिर्फ एक पेन ड्राइव लेकर आया हूँ?" आरव की आवाज़ इतनी ठंडी और स्थिर थी कि एक पल के लिए करण की मुस्कान फीकी पड़ गई। आरव ने अपनी घड़ी की तरफ देखा और कहा, "ठीक तीन मिनट पहले, मेरी कंपनी के सर्वर ने विक्रम मेहरा के सभी ऑफशोर अकाउंट्स, बेनामी संपत्तियों और तुम्हारी असली पहचान के सारे फॉरेंसिक सबूत सीबीआई और सेंट्रल साइबर क्राइम सेल को ऑटो-मेल कर दिए हैं।"
करण का चेहरा एकदम फक पड़ गया। "क्या बकवास कर रहे हो तुम?"
"बकवास नहीं, सच," आरव ने मुस्कुराते हुए कहा। "तुम्हें क्या लगा था कि तुम मेरी आईडी हैक कर रहे थे? करण, मैंने तुम्हें अपनी आईडी तक पहुँचने का रास्ता खुद दिया था। उस पेन ड्राइव में जो 'मास्टर की' है, वह तुम्हारी बनाई फर्जी शेल कंपनियों के सारे फॉरेंसिक लॉक खोल देगी, लेकिन साथ ही वह सीबीआई को तुम्हारी लाइव लोकेशन भी दे रही है।"
करण ने बौखलाकर अपने आदमियों से कहा, "खत्म करो इसे! पेन ड्राइव छीनो इससे!"
जैसे ही दोनों बाउंसर आरव की तरफ झपटे, वेयरहाउस का मुख्य दरवाज़ा एक ज़ोरदार धमाके के साथ खुला। तेज़ बारिश के बीच बाहर नीली-लाल बत्तियाँ जल-बुझ रही थीं और सायरन की भयानक आवाज़ें गूँजने लगीं। पुलिस और एसटीएफ (STF) के हथियाबंद जवानों ने पूरे वेयरहाउस को चारों तरफ से घेर लिया।
"कमिश्नर ऑफिस एसटीएफ! सब अपनी जगह पर रुक जाओ!" एक कड़क आवाज़ गूँजी।
करण की आँखें फटी की फटी रह गईं। उसने तुरंत अपनी जेब से पिस्टल निकाली और आरव पर तान दी। "तुमने सब बर्बाद कर दिया आरव! अगर मैं डूबूँगा, तो तुम्हें भी साथ ले जाऊँगा!"
करण ट्रिगर दबाने ही वाला था कि पीछे से किसी ने भारी लोहे की पाइप से करण के हाथ पर दे मारा। पिस्टल छूटकर दूर जा गिरी। करण दर्द से कराहते हुए नीचे गिरा। आरव ने चौंककर देखा—यह रिया थी! वह बाहर गाड़ी में रुकने के बजाय चुपके से पीछे के रास्ते से अंदर आ चुकी थी।
पुलिस ने तुरंत करण और उसके बाउंसरों को दबोच लिया। साहिल को रस्सियों से आज़ाद कराया गया।
माहौल शांत होते ही रिया दौड़कर आरव के गले से लग गई। वह ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी। "आई एम सो sorry आरव... मुझे माफ कर दो! मैंने तुम्हें बहुत दुख दिया..."
आरव ने कुछ सेकंड हिचकिचाने के बाद रिया को कसकर अपनी बाहों में भर लिया। उसने रिया की भीगी हुई ज़ुल्फ़ों में उंगलियाँ फेरते हुए उसकी गर्दन पर उठती तेज़ सांसों को महसूस किया। दोनों के दिल इतने करीब थे कि बारिश की बूँदों के बीच भी एक-दूसरे की धड़कनों की आँच साफ़ महसूस हो रही थी। आरव का सारा गुस्सा, सारा शक उस एक गर्म आगोश में पिघलकर बह गया। उसने रिया की ठोढ़ी को ऊपर उठाया और उसकी कांपती पलकों पर अपने होंठ रख दिए।
"सब ठीक है रिया... अब तुम्हें कुछ नहीं होगा," आरव ने उसकी आँखों में देखते हुए बेहद गहराई से कहा।
लेकिन जैसे ही पुलिस करण को घसीटते हुए बाहर ले जा रही थी, करण ने आरव की तरफ देखकर एक खौफनाक मुस्कान दी। उसने आरव के कान के पास झुककर धीरे से कहा, "तुम्हें लगता है खेल खत्म हो गया, आरव? विक्रम मेहरा सिर्फ एक मोहरा था... असली बॉस तो अभी तुम्हारे बहुत करीब है, और वह तुम्हारी रिया को कभी तुम्हारा नहीं होने देगा।"
करण की यह बात सुनकर आरव के रोंगटे खड़े हो गए। क्या यह साज़िश विक्रम मेहरा से भी आगे किसी और की थी?