सूनापन
सूनेपन को समेटना सीख लो l
अकेलापन धकेलना सीख लो ll
जो है वो बदलने का सोचो l
ग़म को बिखेरना सीख लो ll
खुद की खुशी की ख़ातिर तो l
लम्हों को लिपेटना सीख लो ll
उल्फ़त में दौड़ना छोड़कर अब l
उर्मिओ को संकेलना सीख लो ll
जीगर को बहला फुसलाकर l
परिस्थिति सहेजना सीख लो ll
दिल में आशा का दीप जलाकर l
जीने के लिए उत्तेजना सीख लो ll
भीतर में झांखकर खुद ही को l
पहचान कर संवेदना सीख लो ll
१-८-२०२६
रात काटी गई दिन गुज़ारा गया l
बोझ दिल से यूँ फ़िर उतारा गया ll
मायुसी में कदम डगमगा से गये l
और समजा बुझाकर संभाला गया ll
जिंदगी खूबसूरत हैं इस खातिरी l
सोये अरमान को फ़िर जगाया गया ll
चुपकिदी कब तलक रहती कायम भला l
अब रूठे यार को तो मनाया गया ll
खुशियो ने दस्तके देना चालू किया l
घर बड़े चाव से फ़िर सजाया गया ll
२-८-२०२६
तमाशा
तमाशा होने से जिंदगी दुश्वार हो जाती हैं l
तमाशा देखनेआलों की भरमार हो जाती हैं ll
अपनों तक सीमित रहे तब तो ठीक बात है l
मसले ज़ाहिर हो जाने से बेकार हो जाती हैं ll
मसले भीतर ही भीतर सुलझा लेने चाहिए l
सभी सलाहकार तक इसरार हो जाती हैं ll
छोटे से छोटी सी बात भी बड़ी बन जाने से l
बात आम बन जाने से दमदार हो जाती हैं ll
लोग इश्तिहार ही तरह खबर फेला देते है l
जिंदगी नाखुश दुख से बीमार हो जाती हैं ll
३-८-२०२६
आसमान तक जाना हैं
हौसला बढ़ाके आसमान तक जाना हैं l
दूर क़ायनात से भी दूर निकलना हैं ll
सुबह शाम आगे बढ़ते हुए रुके बिना l
सूरज और चांद के साथ चलना हैं ll
कायनात की खूबसूरती के साथ ओ l
प्राकृति की गोद में यूँही पलना हैं ll
डगमगाने के कई मकाम ऐसे आएँगे l
टेड़े मेढे राश्तों पर खुद संभलना हैं ll
जोश और हिम्मत बरकरार रखके l
उड़ान सभालके करनी समझना हैं ll
४-८-२०२६
रिश्तों के रंग
रिश्तों के रंग कभी बदलने नहीं चाहिए l
अपनों के मन कभी भटकने नहीं चाहिए ll
कभी राग कभी अनुराग तो होते रह्ते है l
खट्टी मीठी बातों से अटकने नहीं चाहिए ll
अपनों से ही जिंदगी में रंगीनियाँ कभी l
अपनी जिम्मेदारी से छटकने नहीं चाहिए ll
जीवन प्यार से ही सुन्दर बनता है तो l
विश्वास के रिश्ते मचलने नहीं चाहिए ll
फूल सी ममता खिलाकर निभाते रहना l
आपसी तकरार से गरजने नहीं चाहिए ll
५-८-२०२६
चौराहे पर मुलाकात
हौसला से चौराहे पर मुलाकात हो सकती हैं l
दुनिया देख जाए तो बहुत सी बातें करती हैं ll
प्यार करने वालों को देख ज़माना जलता है l
खुशी के दुश्मन घरवालों के कान भरती हैं ll
बात को बढ़ा चढ़ाकर अफवाहये फैला के l
प्रेमियो के चैन और सुकून को हरती हैं ll
मुलाकात का मकसद जाने बगैर खामख्वाह l
किसीके खुश होने से बेकार ही जलती हैं ll
दुसरों की चिता में आधे हो जाते है और l
फालतू में रोज उनकी घड़ियां बितती हैं ll
६-८-२०२६
सावन के गीत
रिमझिम-रिमझिम बूंदों ने मिलकर सावन के गीत सुनाएँ ।
क़ायनात में सभी बारिस प्रेमियो ने मधुर
प्यारे गाएँ ll
भीगी मिट्टी, हरियाली ओ सजा हुआ
वातावरण l
हवाओ की सरगम पंछियों की चहचहाहट
संदेशा लाएँ ll
शजर पर डाली डाली झूमकर खुशियाँ
मनाये l
ठंडी पुरवैया में नचाने गाने और झूमने के
दिन आएँ ll
सावन बहका, बूँदों पर है खुमार, मन भी
बहका है।
सभी सावन प्रेमियों को बारिस का मौसम
खूब भाएँ ll
कोयलिया टेर रही, मोर की आँखों को
आशाएँ घेरे l
धरती हरियाली की चुनरियाँ की सुंदरता
नीली पाएँ ll
७-६-२०२६
बदली में चाँद
अंधेरो से उजाला मिट गया हैं ll
बदली में चाँद कहाँ छुप गया हैं?
तारों को अकेले मुस्कुराने दो l
वक्त साथ बिताने लुट गया हैं ll
शरारतों की झिलमिल होगी तो l
आनंद तो पीछे ही छुट गया हैं ll
चाँद को थोड़ी रंजिश रहेगी कि l
कुछ पाकर कुछ टुट गया हैं ll
मन भर कर उसे खेल खेलने l
आकाश संग मिल फुट गया हैं ll
८-८-२०२६
इश्क
इश्क को सरे आम जताया ना कर l
अपने अपनों को यूँ बताया ना कर ll
दुनियावाले कातिल नजरों से देखते हैं l
नजर लगेगी ख़ुद को सजाया ना कर ll
खुद को खुद की नजर लगती है तो l
खुशी से छलक के मुस्कुराया ना कर ll
वैसे ही ईद का चाँद नजर आते हो l
माथे पर बिंदिया को लगाया ना कर ll
धूप से रंग काला पड सकता है तो l
चहेरे से दुपट्टे को हटाया ना कर ll
९-८-२०२६
एक ही नजर
बरसों हुए आप से मुलाकात नहीं हुई l
मन को संतोष देने वाली बात नहीं हुई ll
काश दूर से ही दीदार ए यार हो जाता l
एक ही नजर देख सके सौगात नहीं हुई ll
खुद ही मिलने आ जाते तो अच्छा होता l
कुछ आप की तरफ़ से इनायत नहीं हुई ll
हम दौनों के बीच कभी कुछ तय नहीं था l
मिलने मिलाने की कोई रवायत नहीं हुई ll
दुनिया के डर से सदा दूर ही रहे और l
बेबसी देखो हमसे भी बगावत नहीं हुई ll
१०-८-२०२६
सजा है माँ का दरबार
सजा है माँ का दरबार आओ भक्ति के रंग में
जाए l
हर्षोल्लास की लहर चारो ओर मन प्रफुल्लित पाए ll
भक्त जन पूर्ण रूप से भक्ति के रंग में रंगीन हो
कर l
सजता दरबार बेहद शुभ देवी का सदा रहता
साए ll
भक्ति रस में डूबकर नर्तन करता मन का मोर है।
शक्तियों की अराधना करते माँ के आशीर्वाद
लाए ll
११-८-२०२६
पुरानी यादें
पुरानी यादें भुलाओ तो जानू l
भूत से बाहिर आओ तो जानू ll
यूँ चुपकीदी ना रखा करो जरा l
हाल ए दिल बताओ तो जानू ll
सब भूलकर आगे बढ़ जाने को l
खुद को फ़िर सजाओ तो जानू ll
दर्द में डूबे रहने से क्या मिलेगा l
मुख पर रोनक लाओ तो जानू ll
मुस्कराकर नई जिन्दगी बनाने l
आज हौसला दिखाओ तो जानू ll
यादों की जंजीर को तोड़कर भी l
खुद से खुद को चुराओ तो जानू ll
उजालों में आकर अपनेआप को l
अनजाने डर से बचाओ तो जानू ll
इक हद तक छुपा सकोगे फ़िर l
सुलगाता दिल छुपाओ तो जानू ll
बहुत वक़्त ले लिया भुलाने को l
यादों से मन चुराओ तो जानू ll
१२-८-२०२६
गणपति बप्पा
गणपति बप्पा कृपा निधान
सुख कर्ता दुःख हर्ता
सदा साथ रहना l
रिद्धि सिद्धि के दाता
खुशियाँ देना अनमोल
गलतियां माफ करना l
बुद्धि के दाता
विद्या कला आपसे मिले
उसे गौरी नंदन कहना l
संकट मोचन विघ्न हर्ता
विपदा आन पड़े हैं जब
भक्तों के पास सरना l
मंगलमूर्ति मंगलकारी
शुभ लाभ के स्वामी
झोली खुशी से भरना l
१३-८-२०२६
गमकता
रूह के अंदर गमकता क्या हैं?
चहरे पर ये चमकता क्या हैं?
दिल का दिल से लगाव देख l
मुलाकात से दमकता क्या हैं?
जिद पकड़कर बैठे है तो यूँ l
भीतर पहुंच धड़कता क्या हैं?
आपकी नजर में कोई बात है l
चुपके चुपके लपकता क्या हैं?
जानते है अकेले काफी हो पर l
सहारे से झिझकता क्या हैं?
१४ -८-२०२६
शहीदों को नमन
देश के लिए कुर्बानी देनेवाले शहीदों को नमन करता हूँ l
पावन चरणों में शीश झुकाकर उसको आशीष
भरता हूँ ll
उनके जीवन के कुछ पल को अपनी कविता
में लिखने l
गाथा पढ़ने को इतिहासों की अमर कहानी में
सरता हूँ ll
हम बैठे होते है घर में वो सीने में झेल रहे होते है गोली l
उनके बलिदान के सामने अभिमान से ख़ुद
झुकता हूँ ll
१५-८-२०२६