The mysterious world of room number 404: a long and scary story in Hindi Horror Stories by mahendr Kachariya books and stories PDF | रहस्यमयी दुनिया कमरा नंबर 404 एक लंबी और खौफनाक कहानी

Featured Books
Categories
Share

रहस्यमयी दुनिया कमरा नंबर 404 एक लंबी और खौफनाक कहानी


सूना गलियारा और वह पुरानी हवेली
सूरज डूब चुका था और आसमान पर काले बादलों ने ऐसा पहरा बिठा रखा था मानो कोई बहुत भारी आपदा आने वाली हो। हवा में अजीब सी सिहरन थी, और पेड़ों की सूखी पत्तियाँ आपस में टकराकर ऐसी आवाजें निकाल रही थीं जैसे कोई फुसफुसा रहा हो।
राघव, जो एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट (खोजी पत्रकार) था, अपनी पुरानी जीप को एक सुनसान सड़क के किनारे रोक चुका था। उसके सामने खड़ी थी "दार्जीलिंग मैनर"—एक ऐसी पुरानी औपनिवेशिक (colonial) शैली की हवेली, जिसके बारे में पिछले तीस सालों से यह अफवाह थी कि वहाँ जाने वाला कोई भी इंसान कभी जिंदा वापस नहीं लौटता।
राघव का मकसद उस हवेली के पीछे की सच्चाई का पता लगाना था। उसने अपनी जैकेट की ज़िप ऊपर की, टॉर्च निकाली और लोहे के उस बड़े और जंग खाए गेट को धकेला। गेट खुला तो एक चीखती हुई आवाज ने सन्नाटे को चीर दिया। वह अंदर दाखिल हुआ। हवेली के चारों ओर जंगली झाड़ियाँ फैली हुई थीं और कांच की टूटी खिड़कियाँ ऐसी लग रही थीं मानो हवेली का कोई चेहरा हो जो उसे घूर रहा हो।

 हवेली के अंदर का काला साया
लकड़ी के पुराने मुख्य दरवाज़े पर ताला नहीं था, वह बस एक हल्के धक्के से खुल गया। अंदर कदम रखते ही राघव की नाक से सड़े हुए मांस और पुरानी धूल की भारी गंध टकराई। टॉर्च की रोशनी में उसने देखा कि दीवारों का प्लास्टर उखड़ चुका था और पुरानी तस्वीरें धूल की मोटी चादर में ढकी थीं। उन तस्वीरों के चेहरे वक्त के साथ धुंधले या खरोंचे हुए थे।
जैसे ही उसने सीढ़ियाँ चढ़नी शुरू कीं, लकड़ी के हर एक डंडे (स्टेप) के चटकने की आवाज गूंज उठी। हवेली के अंदर ऐसा महसूस हो रहा था मानो तापमान अचानक दस डिग्री नीचे गिर गया हो। उसकी साँसें भाप बनकर हवा में घुलने लगीं।
तभी उसे ऊपर की मंजिल से किसी के चलने की आवाज़ सुनाई दी—थप... थप... थप...
"कौन है वहाँ?" राघव ने अपनी आवाज़ को मजबूत करने की कोशिश करते हुए चिल्लाया। उसकी आवाज़ खाली कमरों में गूँजकर वापस लौट आई। कोई जवाब नहीं मिला, सिवाय एक ठंडी हवा के झोंके के जो उसकी गर्दन को छूकर निकल गया 

 कमरा नंबर 404 और डायरी का रहस्य
राघव दूसरी मंजिल पर आ पहुँचा। वहाँ एक लंबा और डरावना गलियारा था, जिसके दोनों तरफ कमरों के बंद दरवाजे थे। हर दरवाजे पर पीतल के नंबर प्लेट लगे थे—301, 302, 303... और अंत में आता था कमरा नंबर 404।
बाकी सारे दरवाजे कसकर बंद थे, लेकिन कमरा नंबर 404 का दरवाजा थोड़ा सा खुला हुआ था। अंदर से एक हल्की नीली रोशनी टिमटिमा रही थी, जैसे कोई मोमबत्ती जल रही हो।
राघव ने अपने दिल की धड़कनों को काबू में करते हुए धीरे से दरवाजा धकेला।
कमरे के अंदर का नजारा किसी भयानक सपने जैसा था। कमरा अंदर से पूरी तरह साफ था, लेकिन दीवारों पर अजीबोगरीब आकृतियाँ खून या किसी लाल रंग से बनी हुई थीं। कमरे के बीचों-बीच एक पुरानी लकड़ी की मेज रखी थी, जिस पर एक खुली हुई चमड़े की डायरी और एक पुरानी मोमबत्ती रखी थी।
राघव आगे बढ़ा और उसने कांपते हाथों से डायरी का पन्ना पलटा। उस पर लिखा हुआ आखिरी वाक्य खून से लिखा गया था—
"वह आ गया है। वह दरवाजे पर खड़ा है। अब भागने का कोई रास्ता नहीं है।"
तभी—धड़म!
कमरे का भारी दरवाजा अपने आप पूरी ताकत से बंद हो गया।
भाग चार: खौफ का क्लाइमेक्स
"नहीं!" राघव चीख पड़ा। उसने दरवाजे की कुंडी को झकझोरा, लेकिन वह अंदर से ऐसे जाम हो चुका था मानो लोहे में ढल गया हो।
उसने मुड़कर कमरे में देखा। मोमबत्ती की लौ नीली से बदलकर पूरी तरह हरी हो चुकी थी। दीवारों पर बनी वे लाल आकृतियाँ अब हिलने लगी थीं। ऐसा लग रहा था मानो दीवारों के भीतर सैकड़ों लोग कैद हों और बाहर निकलने के लिए संघर्ष कर रहे हों।
कमरे के कोने में जहाँ अंधेरा सबसे ज्यादा घना था, एक परछाई आकार लेने लगी। वह परछाई धीरे-धीरे लंबी और विकृत होती जा रही थी। उसके हाथ बहुत लंबे थे और उसकी उंगलियाँ नुकीली थीं।
राघव की आँखें डर से फटी की फटी रह गईं। वह पीछे हटते-हटते दीवार से जा लगा। वह परछाई उसके बिल्कुल करीब आ गई और उसके कान के पास एक ठंडी, डरावनी और गूंजती हुई आवाज में फुसफुसायी—
"तुमने मेरी डायरी खोली... अब तुम इस हवेली से बाहर कभी नहीं जाओगे। तुम यहीं रहोगे... हमेशा के लिए।"
अगले ही पल, कमरे की एकमात्र जलती हुई मोमबत्ती बुझ गई और पूरा कमरा और हवेली एक गहरी, अंतहीन कालकोठरी के अंधेरे में डूब गई।
सुबह होते ही "दार्जीलिंग मैनर" के बाहर सिर्फ राघव की सूखी जीप खड़ी थी। अंदर न तो राघव का कोई निशान था और न ही कोई सुराग... बस कमरा नंबर 404 का दरवाजा अंदर से बंद था और उस पर एक नया खून का निशान उभर आया था