काली गाडी के अंदर पसरा सन्नाटा बाहर के अंधेरे से भी ज्यादा गहरा महसूस हो रहा था. मायरा और रोहन बेसब्री से बस बाहर की तरफ देख रहे थे, तभी अस्पताल के मुख्य दरवाजे से आदित्य बाहर आता हुआ दिखाई दिया. उसके चेहरे पर एक अजीब सी थकावट थी.
जैसे ही आदित्य गाडी के पास पहुँचा, रोहन ने तुरंत गाडी के लॉक खोल दिए. आदित्य ने पीछे का दरवाजा खोला और वो सीधे गाडी के अंदर बैठ गया.
गाडी के अंदर बैठते ही मायरा से और इंतजार नहीं हुआ. उसने पीछे की सीट से आगे झुकते हुए पूछा, आदित्य. तू अस्पताल में क्यों रुक गया था? सब ठीक तो है न?
आदित्य ने अपनी बगल में रखा हुआ बैग उठाया और उसे मायरा की तरफ बढाते हुए कहा, अरे कुछ नहीं मायरा, तुम अपना कुछ सामान अस्पताल में ही भूल गई थीं. ये लो, ये रहा तुम्हारा सामान. मैं बस यही लेने के लिए वापस रुक गया था।
मायरा ने वो बैग अपने हाथ में ले लिया. रोहन ने रियर- व्यू मिरर में आदित्य की तरफ एक नजर देखा, लेकिन कुछ कहा नहीं. उसने गाडी स्टार्ट की, गियर बदला और गाडी आगे बढा दी. रास्ते भर गाडी में पूरी तरह खामोशी छाई रही. न तो रोहन ने कुछ कहा, न मायरा ने और न ही आदित्य ने. हर कोई अपने- अलग ख्यालों में खोया हुआ था.
इसी तरह खामोशी का सफर तय करते हुए कुछ ही देर में गाडी मायरा और रोहन के घर पहुँच गई. सामने एक आलीशान और बडा सा बंगला खडा था.
बंगले के सामने एक विशाल लोहे का गेट था, जिसके दोनों तरफ दो मुस्तैद चौकीदार पहरा दे रहे थे. जैसे ही चौकीदारों ने रोहन की गाडी को देखा, उन्होंने तुरंत फुर्ती से भारी गेट को दोनों तरफ खोल दिया.
रोहन ने गाडी को अंदर पोर्टिको में लाकर रोका. गाडी रुकते ही बंगले के अंदर से एक पुराना वफादार नौकर दौडता हुआ बाहर आया. रोहन गाडी से नीचे उतरा और उसने गाडी की चाबी उस नौकर के हाथ में थमा दी ताकि वो गाडी को पार्किंग लॉट में पार्क कर दे. आदित्य भी गाडी से नीचे उतर चुका था.
उसने रोहन और मायरा की तरफ देखते हुए कहा, ठीक है. तो फिर मैं भी अब अपने घर चलता हूँ।
यह सुनते ही मायरा तुरंत बोली, अरे रुक न आदित्य. इतनी रात हो गई है, घर के अंदर तो चल।
आदित्य ने एक हल्की सी मुस्कान के साथ सिर हिलाया और मना करते हुए कहा, नहीं मायरा, फिर कभी आऊंगा. अभी काफी देर हो चुकी है, ठीक है. मैं अब घर जाता हूँ।
तभी रोहन आगे बढा और आदित्य से बोला, इतनी रात को कैसे जाएगा? एक काम कर, तू मेरी गाडी लेकर चला जा।
आदित्य ने जेब से अपना फोन निकालते हुए कहा, नहीं भाई, कोई बात नहीं. मैंने फोन करके ऑलरेडी अपनी गाडी मँगवा ली है, वो आती ही होगी।
मायरा और रोहन ने एक साथ हाथ हिलाकर आदित्य को विदा किया. आदित्य जाने के लिए मुडा, लेकिन मायरा लगातार उसे हाथ हिलाकर Bye कह रही थी.
यह देखकर रोहन ने मुस्कुराते हुए मायरा को थोडा चिढाने वाले अंदाज में कहा, अरे. कितना Bye करेगी उसे अब?
मायरा ने थोडा शर्माते हुए जवाब दिया, भाई. आप भी ना!
हद करते हैं. ठीक है, चलिए अब घर के अंदर।
आदित्य ने पलटकर भाई- बहन की इस प्यारी सी नोक- झोंक को देखा और उसके चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान आ गई. वह वहीं खडा रहा और दोनों भाई- बहन हंसते- बात करते हुए बंगले के अंदर चले गए.
जैसे ही रोहन और मायरा बंगले के अंदर दाखिल हुए, तभी सीढियों से उतरते हुए रोहित आया—जो रोहन से छोटा और मायरा से बडा भाई था. रोहित के चेहरे पर मायरा को देखते ही मुस्कान आ गई और वह उसे गले लगाने के लिए तेजी से भागा, मायरा.
लेकिन रोहन ने बीच में आकर रोहित को रोकते हुए कहा, रुको रोहित. वह अभी- अभी अस्पताल से आई है. बहुत थकी हुई है, पहले उसे ऊपर जाकर फ्रेश हो जाने दे।
रोहित का चेहरा बच्चों की तरह उदास हो गया, ठीक है भाई.
मायरा ने मुस्कुराते हुए रोहित के गाल को थपथपाया, रोहित भैया. बस थोडी सी देर. मैं अभी फ्रेश होकर आती हूँ, फिर बैठकर आपसे ढेर सारी बातें करूंगी. प्रॉमिस!
रोहित मान गया और मायरा सीढियों से ऊपर चली गई.
दूसरी तरफ, रात के सन्नाटे में सडक पर दौडती आदित्य की गाडी का सीन उभरता है.
आदित्य के चेहरे से मुस्कान पूरी तरह गायब हो चुकी थी और उसकी जगह गहरे गुस्से ने ले ली थी. उसने मोबाइल निकाला और एक नंबर डायल करके कान से लगाया.
जैसे ही सामने वाले ने फोन उठाया, आदित्य ने सख्त आवाज में कहा, मैं तुम्हें एक गाडी का नंबर दे रहा हूँ. इस नंबर की गाडी के मालिक के बारे में मुझे हर एक छोटी- से- छोटी जानकारी चाहिए. वह इस वक्त कहाँ है, क्या कर रहा है.
सब पता लगा कर दो. और याद रहे, जितना जल्दी हो सके करना. गाडी का नंबर है—दो हजार पाँच सौ पचास! मुझे जल्द से जल्द रिपोर्ट चाहिए। फोन cut करके आदित्य ने उसे बगल की सीट पर पटक दिया.
अब सीन मायरा के आलीशान कमरे में शिफ्ट होता है. मायरा अंदर आती है, जहाँ हर कोने में बस टेडी बेयर्स ही टेडी बेयर्स भरे पडे थे. वह कमरे के बीच में खडी होकर आईने के सामने गई. आईने में चेहरा मायरा का था, लेकिन आत्मा किसी और लडकी की थी.
उसने खुद को आईने में देखते हुए कहा, मायरा. तुम्हें पता है, मैं पहले कैसी लडकी थी? मैं एक ऐसी लडकी थी जो अपनी फैमिली के अलावा किसी से भी घुल- मिल नहीं पाती थी. मुझे किसी से ज्यादा बात ना करना पडे. इसीलिए मैं हमेशा सबसे बहुत ज्यादा दूर और अकेले में रहती थी.
पर सच कहूँ. जब से मैं तुम्हारी फैमिली से मिली हूँ, और तुम्हारे उस दोस्त आदित्य से. तो तुम लोगों से मुझे बहुत जल्दी एक जुडाव महसूस हुआ है. मुझे खुद यकीन नहीं हो रहा कि मैं इतनी जल्दी कैसे घुल- मिल रही हूँ।
तभी बेड पर रखे फोन पर आदित्य का मैसेज आया—' मैं घर पहुँच गया हूँ। उसने मुस्कुराते हुए टाइप किया—' ठीक है आदित्य। और फोन पलंग पर रख दिया.
फिर उसने कमरे के खाली कोने की तरफ देखकर कहा, तुम्हारा यह दोस्त आदित्य. सचमुच बहुत अच्छा लडका है.
मैं तुमसे बोल रही हूँ मायरा. पर मुझे नहीं पता कि तुम सुन भी रही हो या नहीं? क्या तुम भी मेरी तरह. जैसे मैं तुम्हारी बॉडी में आई हूँ, तुम मेरी बॉडी में गई होगी? मुझे नहीं पता.
मगर मायरा, अगर तुम मेरी बॉडी में गई हो, तो प्लीज मेरी फैमिली का ध्यान रखना. मैं यहाँ तुम्हारी फैमिली का पूरा ध्यान रखूंगी. और अपनी वो पागलों जैसी हरकतें मेरी फैमिली के सामने मत करना।
यह कहते हुए वह अलमारी के पास गई और कपडे देखकर मुंह बनाया, यह कैसे कपडे हैं मायरा? कपडों के मामले में तुम्हारी और मेरी पसंद बिल्कुल अलग है। काफी ढूंढने के बाद उसने एक ढीली टी- शर्ट और ट्राउजर निकाला और नहानी (वॉशरूम) में फ्रेश होने चली गई.
जब वह कपडे पहनकर नीचे डाइनिंग हॉल में पहुँची, तो उसके मॉम, डैड और दोनों भाई टेबल पर बैठे उसी का इंतजार कर रहे थे.
मायरा को देखकर मॉम ने प्यार से मुस्कुराते हुए कहा, आ जाओ मेरी बच्ची. बैठो. आज मैंने अपनी बेटी की पसंद का सबसे स्पेशल खाना बनाया है।
मॉम की बात सुनकर मायरा मुस्कुराती हुई डाइनिंग टेबल की तरफ बढी और खाली कुर्सी खींचकर बैठ गई. लेकिन जैसे ही उसकी नजर टेबल पर सजी डिशेज पर पडी, उसके चेहरे के एक्सप्रेशन्स पल भर के लिए बदल गए. मॉम ने बडे ही प्यार और चाव से उसके सामने करेले की सब्जी की प्लेट खिसकाई थी.
करेले के उन कडवे टुकडों को देखकर मायरा ने मन ही मन सोचा—' हे भगवान! करेले की सब्जी? इस दुनिया में भला किसी को करेले कैसे पसंद हो सकते हैं? मायरा. तुम्हारी पसंद सचमुच बहुत अजीब थी।
उसने अपनी इस घबराहट को छुपाया और मॉम की तरफ एक बेहद मासूम और नकली मुस्कान के साथ देखा. उसने चम्मच को प्लेट के किनारे टिकाते हुए कहा, मॉम. मैं यह करेले की सब्जी नहीं खा सकती।
यह सुनते ही मॉम के चेहरे पर चिंता की लकीरें उभर आईं. उन्होंने हैरानी से पूछा, क्या हुआ बेटा? तुम करेले क्यों नहीं खा सकती? यह तो तुम्हारी सबसे पसंदीदा सब्जी है ना?
मायरा ने स्थिति को संभालते हुए तुरंत एक बहाना बनाया और मुस्कुराकर बोली, मॉम. असल में बात यह है कि अभी मेरी दवाइयां चल रही हैं ना, तो डॉक्टर ने कहा है कि उन दवाइयों की वजह से मुझे कडवी चीजें नहीं खानी हैं.
दवाइयों के असर की वजह से मुझे करेले से परहेज करना होगा।
तभी टेबल के दूसरे छोर पर बैठे पापा ने बीच में टोकते हुए कहा, हाँ, मेरी बच्ची बिल्कुल सही कह रही है. दवाइयों की वजह से उसे करेला मत दो, बेटा और कुछ खा लो. देखो, टेबल पर कितना सारा खाना लगा हुआ है, तुम्हें इसमें से जो भी पसंद हो, वो खा लो।
मॉम ने भी पापा की बात सुनकर हामी भरी और तुरंत करेले की प्लेट को वहाँ से हटा दिया. मायरा ने एक तसल्ली भरी सांस ली और टेबल पर रखी दूसरी चीजों की तरफ हाथ बढाया.
टेबल पर खाने का दौर शुरू हो चुका था, लेकिन माहौल में अभी भी एक हल्की सी खामोशी थी. मायरा ने चारों तरफ देखा और मन ही मन सोचा—' अस्पताल से आने के बाद घर का माहौल थोडा गंभीर हो गया है.
मुझे इन सबका मूड ठीक करने के लिए कुछ न कुछ तो करना ही चाहिए।
उसने अपने चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान लाई और अचानक मॉम- डैड की तरफ देखते हुए पूछा, मम्मी, पापा. आप दोनों ने मेरा नाम पूरी फैमिली में सबसे अलग क्यों रखा है?
यह सवाल सुनते ही डाइनिंग टेबल पर बैठे मम्मी, पापा और दोनों भाई हैरान होकर उसे देखने लगे. मॉम ने हाथ में निवाला लिए हुए ही अचरज से पूछा, बेटा, सबसे अलग रखा है. मतलब? हम कुछ समझे नहीं।
मायरा ने अपनी थाली में देखते हुए हंसकर कहा, अरे, देखिए ना. बडे भैया का नाम' रोहन' है और छोटे भैया का नाम' रोहित' है. दोनों के नाम' र' से शुरू होते हैं. सिर्फ मेरा ही नाम' मायरा' है, जो सबसे अलग है. ऐसा क्यों?
पापा के चेहरे पर एक गहरी और खूबसूरत मुस्कान तैर गई. उन्होंने अपनी कुर्सी पर पीछे की ओर आराम से टिकते हुए जवाब दिया, बेटा. जब तुम पैदा हुई थी ना, तो हमारी जिंदगी में खुशियों की बहार आ गई थी. तुम हमारी उदास जिंदगी में मानों एक नया उजाला बनकर आई थी. इसलिए तुम्हारा नाम हम सबके लिए बहुत खास था।
पापा ने आगे समझाते हुए कहा, तुम्हारा नाम रखने के लिए हमने एक अनोखा तरीका निकाला था. मेरे नाम महेश से' म' (M) लिया, तुम्हारी मां योगेश्वरी के नाम से एक अक्षर' य' (Y) लिया, तुम्हारे बडे भाई रोहन के नाम से' र' (R) और. इस तरह हमने हम तीनों के नामों के अक्षरों को मिलाकर तुम्हारा नाम' मायरा' रखा था. हम तीनों का प्यार तो इस नाम में छुपा है, ये हमें पता है. मगर इस रोहित का हमें पता नहीं, कि यह अपनी छोटी बहन से जान से ज्यादा प्यार करता भी है या नहीं!
पापा की यह बात सुनते ही रोहित तुरंत अपनी जगह पर सीधा हो गया और बनावटी गुस्से के साथ अपनी छाती पर हाथ रखकर बोलने लगा, अरे पापा! यह आप क्या कह रहे हैं? मैं भी अपनी छोटी बहन से बहुत- बहुत ज्यादा प्यार करता हूँ!
रोहित के इस तरह अचानक बच्चों की तरह सफाई देने वाले अंदाज को देखकर डाइनिंग टेबल पर बैठा हर शख्स खिलखिलाकर हंस पडा.
डाइनिंग टेबल पर ऐसे ही हंसी- मजाक करते हुए सब लोग बात कर रहे थे. माहौल पूरी तरह से हल्का हो चुका था. तभी मायरा ने मौका देखा और थोडा झिझकते हुए कहा, मॉम. मुझे कुछ पैसों की जरूरत है।
यह सुनते ही मॉम ने प्यार से मुस्कुराते हुए कहा, बेटा, इसमें पूछने वाली क्या बात है? यह तिजोरी और पैसे सब तुम्हारे ही तो हैं. वैसे. अभी कुछ दिन पहले ही तो मैंने तुम्हें तुम्हारी इस महीने की पॉकेट मनी दी थी ना?
मॉम की बात सुनते ही मायरा के गले में मानों निवाला अटक गया. उसने मन ही मन सोचा—' ओह गॉड! मॉम, आपको कैसे बताऊँ कि आपकी उस प्यारी बेटी मायरा ने वो सारे पैसे किसी लडके के ऊपर उडा दिए! अब अपनी ये सच्चाई तो मैं आपको चाहकर भी नहीं बता सकती ना।
उसने तुरंत अपने चेहरे पर एक मासूम सा भाव लाया और बात को संभालते हुए बोली, वो. मॉम, असल में कल Collage में जब मैं बेहोश हो गई थी ना, आपको तो पता ही है. बस उसी हडबडी और आपाधापी में मेरा एटीएम कार्ड कहीं गिर गया. इसीलिए मुझे कुछ कैश चाहिए था।
जैसे ही मायरा ने कार्ड गुम होने की बात कही, टेबल पर बैठे दोनों भाई एक साथ बोल पडे, तू हमारा कार्ड ले ले!
दोनों भाइयों ने एक ही समय पर एक ही बात कही थी
रोहन ने तुरंत अपनी नजरें छोटे भाई रोहित की तरफ घुमाईं और उसे चिढाते हुए कहा, बडे आए कार्ड देने वाले! तुझे खुद तो इतनी सी पॉकेट मनी मिलती है, अगर तूने अपना कार्ड इसे दे दिया, तो पूरे महीने खुद क्या करेगा?
रोहन की बात सुनकर रोहित ने हार नहीं मानी. उसने बेहद नटखट अंदाज में अपने कंधे उचकाए, रोहन की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए बोला, अच्छा! तो ठीक है बडे भैया, अगर मेरी पॉकेट मनी कम है, तो आप ही अपना कार्ड दे दीजिए ना मायरा को!
रोहित का यह हाजिरजवाब सुनना था कि डाइनिंग टेबल पर एक बार फिर ठहाका गूंज उठा. पापा और मॉम दोनों रोहित की इस चतुराई पर हंसने लगे, और रोहन भी मुस्कुराते हुए रोहित को घूरने लगा.
मायरा भी अपने इन दोनों भाइयों की प्यारी सी नोंक- झोंक देखकर खुलकर हंस पडी.