The Girl Who Wasn't Remembered - 6 in Hindi Love Stories by priyanshi bhuva books and stories PDF | वो लड़की जो याद नहीं थी - 6

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वो लड़की जो याद नहीं थी - 6

Part 6 — बंद कमरे का सच

अनाया ने फोन पर आए आखिरी मैसेज को बार-बार पढ़ा।

“कमरा खोलना... लेकिन याद रखना, वहां जो मिलेगा, उसे देखने के बाद तुम अपने पिता को कभी माफ नहीं कर पाओगी।”

उसका हाथ कांप रहा था।

राघव ने पूछा—

“क्या लिखा है?”

अनाया ने फोन उसकी तरफ बढ़ा दिया।

मैसेज पढ़ते ही राघव कुछ सेकंड तक चुप रहा।

आर्या ने धीरे से पूछा—

“क्या हुआ?”

अनाया ने उसकी तरफ देखा।

“हमें उस कमरे में जाना होगा।”

राघव ने कहा—

“अभी?”

“हां।”

“अनाया, रात हो चुकी है।”

“जिसने ये मैसेज भेजा है, वह चाहता है कि हम डर जाएं। अगर हम अभी पीछे हटे, तो शायद हमें कभी पता नहीं चलेगा कि उस रात वास्तव में क्या हुआ था।”

आर्या ने उसका हाथ पकड़ लिया।

“दीदी, मैं भी चलूंगी।”

सिया ने तुरंत कहा—

“और मैं भी।”

राघव ने गहरी सांस ली।

“ठीक है। लेकिन इस बार हम चारों साथ जाएंगे।”

---

रात करीब ग्यारह बजे वे राघव के पिता के पुराने घर पहुंचे।

घर कई सालों से बंद था।

गेट खोलते ही लोहे की आवाज पूरे आंगन में गूंज गई।

अंदर अंधेरा था।

राघव ने मोबाइल की फ्लैशलाइट ऑन की।

“कमरा नीचे है।”

सीढ़ियां पुराने तहखाने की तरफ जाती थीं।

हर कदम के साथ धूल उड़ रही थी।

आर्या अचानक रुक गई।

उसने दीवार को छुआ।

“मैं यहां पहले आई हूं।”

अनाया ने उसकी तरफ देखा।

“तुम्हें कुछ याद आया?”

आर्या ने आंखें बंद कीं।

“बहुत धुंधला...”

वह कुछ सेकंड चुप रही।

“मैं रो रही थी।”

राघव ने पूछा—

“क्यों?”

आर्या ने सिर हिलाया।

“याद नहीं।”

वे नीचे पहुंचे।

सामने एक लोहे का दरवाजा था।

राघव ने जेब से वही पुरानी चाबी निकाली।

उसने चाबी ताले में डाली।

क्लिक।

दरवाजा खुल गया।

कमरे के अंदर पुरानी मेज, एक टूटी कुर्सी और दीवार पर कुछ तस्वीरें लगी थीं।

अनाया धीरे-धीरे अंदर गई।

फिर अचानक उसकी नजर एक तस्वीर पर पड़ी।

उसमें वह खुद थी।

बहुत छोटी।

उसके साथ आर्या खड़ी थी।

और पीछे...

उनके पिता।

अनाया ने तस्वीर हाथ में ले ली।

“ये तस्वीर यहां क्यों है?”

राघव ने कहा—

“शायद उस समय की है जब तुम दोनों यहां आती थीं।”

आर्या ने तस्वीर देखी।

उसका चेहरा अचानक बदल गया।

“नहीं।”

अनाया ने पूछा—

“क्या हुआ?”

आर्या ने तस्वीर की तरफ इशारा किया।

“उस दिन पापा हमारे साथ नहीं थे।”

अनाया चौंक गई।

“क्या?”

“मुझे याद है। उस दिन हम दोनों यहां अकेली थीं।”

राघव ने तस्वीर को ध्यान से देखा।

“तो फिर ये फोटो किसने ली?”

कमरे में सन्नाटा छा गया।

---

सिया को मेज के नीचे एक पुरानी फाइल मिली।

उस पर लिखा था—

“आर्या — मेडिकल रिकॉर्ड।”

आर्या पीछे हट गई।

“इसे मत खोलो।”

अनाया ने पूछा—

“क्यों?”

“मुझे डर लग रहा है।”

अनाया ने उसका हाथ पकड़ा।

“मैं हूं ना।”

फाइल खोली गई।

पहले पन्ने पर अस्पताल का रिकॉर्ड था।

दूसरे पन्ने पर डॉक्टर की रिपोर्ट।

लेकिन तीसरे पन्ने पर जो लिखा था, उसे देखकर चारों चुप हो गए।

“Patient's memory loss may have been deliberately induced.”

अनाया ने धीरे से पढ़ा—

“जानबूझकर?”

राघव ने कहा—

“इसका मतलब उसकी याददाश्त सिर्फ एक्सीडेंट की वजह से नहीं गई थी।”

आर्या की आंखों में डर उतर आया।

“तो किसी ने...”

अनाया ने उसका हाथ कसकर पकड़ लिया।

“किसी ने तुम्हारी याददाश्त के साथ कुछ किया।”

उसी समय कमरे की लाइट अचानक जल गई।

चारों चौंक गए।

राघव ने पीछे मुड़कर देखा।

कोई नहीं था।

लेकिन कमरे के कोने में एक पुराना टेप रिकॉर्डर पड़ा था।

उससे आवाज आ रही थी।

एक आदमी की आवाज।

“अगर आर्या को सब याद आ गया, तो हमारा खेल खत्म हो जाएगा।”

अनाया ने रिकॉर्डर की तरफ देखा।

आवाज फिर आई—

“उसे याद नहीं रहना चाहिए कि उस रात कार में कौन था।”

आर्या कांपने लगी।

“ये आवाज...”

अनाया ने पूछा—

“किसकी है?”

आर्या ने आंखें बंद कर लीं।

कुछ सेकंड बाद उसने कहा—

“ये मेरे पापा की आवाज है।”

अनाया का चेहरा सफेद पड़ गया।

“लेकिन पापा तो—”

राघव ने रिकॉर्डर बंद कर दिया।

“हमें पूरी रिकॉर्डिंग सुननी होगी।”

---

उन्होंने टेप फिर से चलाया।

आवाज आई—

“अगर अनाया को भी याद आया, तो दोनों लड़कियां खतरे में होंगी।”

दूसरी आवाज सुनाई दी।

“लेकिन उन्हें अलग रखना सही होगा?”

पहली आवाज—

“हां।”

दूसरी आवाज—

“और आर्या?”

पहली आवाज कुछ सेकंड चुप रही।

फिर बोली—

“आर्या को नया नाम देना होगा।”

आर्या ने अपना मुंह हाथ से ढक लिया।

“तो ये सब पहले से तय था।”

अनाया ने कहा—

“तुम्हें गायब करने का फैसला पहले ही हो चुका था।”

राघव ने टेप आगे बढ़ाया।

अचानक तीसरी आवाज सुनाई दी।

एक महिला की आवाज।

“अगर बच्चियों को पता चला तो?”

पहली आवाज—

“उन्हें कभी पता नहीं चलेगा।”

सिया अचानक खड़ी हो गई।

“ये आवाज...”

अनाया ने उसकी तरफ देखा।

“किसकी है?”

सिया की आंखों में डर था।

“मेरी मां की।”

कमरे में फिर सन्नाटा छा गया।

---

अनाया ने तुरंत पूछा—

“तुम्हारी मां को सब पता था?”

सिया ने कहा—

“शायद।”

“शायद?”

“मैं छोटी थी, अनाया। मुझे पूरी बात नहीं पता थी।”

आर्या ने कहा—

“लेकिन तुम्हारी मां इस कमरे में थीं।”

सिया ने सिर झुका लिया।

“हां।”

राघव ने टेप फिर चलाया।

अब आवाज साफ सुनाई दे रही थी।

सिया की मां कह रही थीं—

“अगर हम आर्या को छुपा देते हैं, तो अनाया को क्या बताएंगे?”

अनाया के पिता की आवाज आई—

“उसे बताएंगे कि आर्या हमें छोड़कर चली गई।”

अनाया की आंखों से आंसू निकल आए।

“उन्होंने मुझसे झूठ बोला।”

आर्या ने उसका हाथ पकड़ लिया।

“दीदी...”

अनाया ने कहा—

“मैंने इतने साल ये सोचा कि मैं अकेली थी।”

“तुम अकेली नहीं थीं।”

“लेकिन मुझे मेरी बहन से दूर कर दिया गया।”

आर्या ने उसे गले लगा लिया।

“मुझे भी तुमसे दूर किया गया।”

दोनों बहनें रोने लगीं।

---

राघव ने रिकॉर्डिंग आगे बढ़ाई।

अचानक आवाज बदल गई।

एक आदमी तेज आवाज में बोला—

“तुम लोग समझते हो कि आर्या को यहां छुपाकर सब खत्म हो जाएगा?”

अनाया ने तुरंत कहा—

“विक्रम।”

आवाज फिर आई—

“अगर लड़की ने फाइल देख ली है, तो उसे जिंदा रखना सबसे बड़ी गलती होगी।”

आर्या का चेहरा डर से सफेद पड़ गया।

राघव ने टेप बंद कर दिया।

“अब हमें समझ आ गया कि खतरा कितना बड़ा था।”

लेकिन अनाया की नजर मेज पर रखे एक छोटे बॉक्स पर पड़ गई।

उसने बॉक्स खोला।

अंदर एक पेन ड्राइव थी।

और उसके नीचे एक कागज।

कागज पर लिखा था—

“अगर तुम ये पढ़ रही हो, तो इसका मतलब है कि आर्या वापस आ चुकी है।”

अनाया का दिल तेजी से धड़कने लगा।

नीचे लिखा था—

“इस पेन ड्राइव में वह सच है जो मैंने अपनी बेटियों से छुपाया।”

हस्ताक्षर थे—

अनाया के पिता।

अनाया ने पेन ड्राइव उठाई।

“हमें इसे देखना होगा।”

राघव ने कहा—

“यहां कंप्यूटर नहीं है।”

सिया ने अपना लैपटॉप निकाला।

पेन ड्राइव लगाई गई।

उसमें सिर्फ एक वीडियो था।

फाइल का नाम था—

“Last Truth.”

वीडियो शुरू हुआ।

स्क्रीन पर अनाया के पिता दिखाई दिए।

उनका चेहरा थका हुआ था।

उन्होंने कैमरे की तरफ देखते हुए कहा—

“अगर मेरी बेटियां ये वीडियो देख रही हैं, तो शायद मैं उन्हें सच बताने की हिम्मत नहीं कर पाया।”

अनाया की आंखें भर आईं।

वीडियो में उनके पिता ने कहा—

“आर्या को मैंने गायब नहीं किया था।”

“मैंने उसे बचाया था।”

“लेकिन मैं ये नहीं कह सकता कि मैंने सब कुछ सही किया।”

वह कुछ सेकंड चुप रहे।

फिर बोले—

“क्योंकि उस रात कार में सिर्फ आर्या और राघव के पिता नहीं थे।”

अनाया ने सांस रोक ली।

उसके पिता ने आगे कहा—

“कार में मैं भी था।”

कमरे में सन्नाटा छा गया।

आर्या ने तुरंत स्क्रीन की तरफ देखा।

“नहीं...”

वीडियो में उनके पिता ने कहा—

“और एक्सीडेंट से ठीक पहले मुझे पता चला कि हमारे साथ जाने वाला चौथा व्यक्ति कौन था।”

अनाया ने फुसफुसाकर कहा—

“कौन?”

वीडियो अचानक रुक गया।

स्क्रीन काली हो गई।

नीचे सिर्फ एक लाइन दिखाई दी—

“बाकी सच जानने के लिए उस जगह जाओ जहां आर्या ने पहली बार ‘दीदी’ कहा था।”

अनाया ने स्क्रीन को देखा।

उसके चेहरे पर डर और उम्मीद दोनों थे।

आर्या ने धीरे से कहा—

“मुझे पता है वह जगह कौन-सी है।”

राघव ने पूछा—

“कहां?”

आर्या ने अनाया की तरफ देखा।

“हमारा पुराना घर।”

सिया ने कहा—

“लेकिन वो घर तो सालों पहले बेच दिया गया था।”

आर्या ने सिर हिलाया।

“घर बिक गया था।”

फिर उसने धीमे से कहा—

“लेकिन उसके पीछे वाला कमरा नहीं।”

अनाया ने पूछा—

“क्या मतलब?”

आर्या की आंखों में एक अजीब डर था।

“वह कमरा जमीन के नीचे था।”

और तभी बाहर से किसी ने जोर से दरवाजा पीटा।

एक आवाज आई—

“अनाया... आर्या...”

चारों जम गए।

वह आवाज...

अनाया के पिता की थी।

लेकिन उसके पिता वहां थे ही नहीं।

दरवाजे के बाहर से फिर आवाज आई—

“दरवाजा खोलो।”

आर्या ने अनाया का हाथ पकड़ लिया।

“दीदी...”

“क्या हुआ?”

आर्या कांपते हुए बोली—

“ये वही आवाज है।”

“किसकी?”

आर्या ने दरवाजे की तरफ देखते हुए कहा—

“जिसने उस रात कार में कहा था...”

उसकी आंखों से आंसू निकल आए।

“अगर ये लड़की बच गई, तो सब खत्म हो जाएगा।”

दरवाजे पर फिर जोर से दस्तक हुई।

और इस बार बाहर से आवाज आई—

“क्योंकि अब मुझे पता है कि आर्या वापस आ चुकी है।”