शाम का समय था। चौहान हवेली का मुख्य दरवाज़ा खुला।
शादी से लौटकर पूरा परिवार घर में दाखिल हुआ। सबसे आगे अर्जुन चौहान और गंगा जी थे। उनके पीछे ऋषभ और वर्षा, फिर प्रेम और काजल। सभी शादी की बातें करते हुए अंदर आ रहे थे। तभी काजल की नजर बैठक में बैठे विवान पर पड़ी।
काजल बोली -
अरे मेरा विवान!
विवान दौड़कर अपनी चाची से लिपट गया।
विवान बोला -
चाची! आप आ गईं!
काजल ने उसे प्यार से गले लगा लिया।
तभी विवान ने पीछे मुड़कर कहा—
चाची, देखो ना… मम्मा भी आई हैं!
सबकी नजर एक साथ उसी दिशा में गई। संयोगिता सोफे के पास खड़ी थी। सफेद सूट में, शांत चेहरा और बिल्कुल स्थिर नजरें। एक पल के लिए…पूरे कमरे में सन्नाटा छा गया। किसी के मुँह से आवाज़ नहीं निकली। गंगा जी की आँखें अचानक फैल गईं। उनके हाथ में पकड़ा बैग नीचे गिरते-गिरते बचा।
उन्होंने संयोगिता को देखा। फिर दो कदम आगे बढ़ीं। उनकी आँखों में आँसू आ गए।
गंगा जी बोलीं -
संपूर्णा…?
संयोगिता का दिल जोर से धड़क उठा। वो कुछ बोल नहीं पाई।
विराट तुरंत आगे आया।
विराट बोला -
माँ…
गंगा जी ने उसकी तरफ देखा।
गंगा जी बोली -
ये… संपूर्णा नहीं है?
विराट ने धीरे से सिर हिलाया।
विराट बोला -
नहीं माँ। इनका नाम संयोगिता सिंह है।
वर्षा की आँखें नम थीं। वो संयोगिता को लगातार देख रही थी।
वर्षा बोली -
चेहरा… बिल्कुल वही…
ऋषभ ने गहरी साँस ली।
ऋषभ बोला -
ऐसा लग रहा है जैसे संपूर्णा हमारे सामने खड़ी हो।
प्रेम भी कुछ बोल नहीं पाया। काजल की आँखों से आँसू निकल आए। वो संयोगिता के पास गई, लेकिन कुछ दूरी पर रुक गई। जैसे उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि सामने खड़ी लड़की से क्या कहे। संयोगिता ने सबको हाथ जोड़कर नमस्ते किया।
संयोगिता बोली -
नमस्ते।
गंगा जी ने काँपती आवाज़ में पूछा—
बेटी… तुम यहाँ?
संयोगिता ने शांत स्वर में कहा—
विराट जी और मेरी कंपनी अब साथ काम करती हैं। आज विवान से मिलने आई थी।
विवान तुरंत बीच में बोल पड़ा—
मम्मा मुझे बहुत प्यार करती हैं!
सबकी नजर विवान पर चली गई। संयोगिता कुछ पल के लिए बिल्कुल चुप हो गई । अर्जुन चौहान अब तक चुप थे। उन्होंने संयोगिता को ध्यान से देखा। फिर उनकी नजर विराट पर गई।
उन्हें अपने बेटे की आँखों में कई दिनों बाद एक अलग तरह की शांति दिखाई दी। अर्जुन ने कुछ नहीं पूछा।
बस धीरे से बोले—
बेटी, घर में आई हो तो मेहमान बनकर मत खड़ी रहो।
संयोगिता ने उनकी तरफ देखा।
अर्जुन बोले -
बैठो।
संयोगिता धीरे से बैठ गई। और उसी पल उसे महसूस हुआ—जिस घर में आने से वो डर रही थी…वही घर अब धीरे-धीरे उसे अपने अंदर जगह देने लगा था। लेकिन उसे नहीं पता था कि इस घर की हर आँख में उसे देखकर संपूर्णा की याद जाग चुकी थी।
संयोगिता चुपचाप सोफे पर बैठी थी। परिवार के सभी सदस्य उससे बातचीत करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन संयोगिता बहुत कम बोल रही थी।
काजल ने मुस्कुराकर पूछा—
आप हमेशा इतनी शांत रहती हैं?
संयोगिता ने हल्की मुस्कान दी।
संयोगिता बोली -
जी… मुझे ज्यादा बोलने की आदत नहीं है।
वर्षा ने उसे ध्यान से देखा।
वर्षा बोली -
बहुत सुलझी हुई लगती हो।
संयोगिता ने सिर्फ सिर झुका दिया। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि इस शांत चेहरे के पीछे शहर का सबसे रहस्यमय साइको किलर छिपा हुआ है।
उसी समय अर्जुन जी ने पास रखा अखबार उठा लिया। उन्होंने पहला पन्ना खोला। अचानक उनकी नजर एक बड़ी खबर पर पड़ी।
उन्होंने चश्मा ठीक किया और पढ़ने लगे—
शहर में बढ़ रही हैं अपराधियों की मौतें…
कमरे में सबका ध्यान उनकी तरफ चला गया।
अर्जुन जी ने आगे पढ़ा—
पुलिस का कहना है कि पिछले कुछ समय से कई ऐसे अपराधी मारे गए हैं, जिन्हें कानून लंबे समय से सजा नहीं दिला पाया था।
ऋषभ ने अखबार की तरफ देखा।
ऋषभ बोला -
वही रहस्यमयी किलर?
अर्जुन जी ने सिर हिलाया।
अर्जुन जी बोले -
हाँ। पुलिस का मानना है कि इसके पीछे एक साइको किलर हो सकता है।
ये शब्द सुनते ही संयोगिता की उंगलियाँ हल्के से रुक गईं। उसने चुपचाप पानी का गिलास उठाया। लेकिन उसकी आँखों में एक पल के लिए वही पुरानी चमक दिखाई दी। फिर उसने तुरंत अपना चेहरा सामान्य कर लिया। किसी ने ध्यान नहीं दिया। सिर्फ विराट ने उसकी तरफ देखा।
गंगा जी चिंतित होकर बोलीं—
हे भगवान… आजकल किसी पर भरोसा ही नहीं किया जा सकता।
काजल ने कहा -
लेकिन अगर वो सिर्फ अपराधियों को मारता है तो?
अर्जुन जी ने अखबार नीचे किया।
अर्जुन जी बोले -
कानून अपने हाथ में लेना कभी सही नहीं होता।
संयोगिता चुपचाप सुन रही थी।
उसके मन में एक सवाल उठा—
अगर कानून किसी मासूम को न्याय न दे… तो?
लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। विवान खेलते-खेलते संयोगिता के पास आ गया। उसने उसकी गोद में सिर रख दिया।
विवान बोला -
मम्मा, वो किलर बहुत बुरा है क्या?
संयोगिता एक पल के लिए ठहर गई। उसने विवान के बालों पर हाथ फेरा।
संयोगिता बोली -
तुम्हें उससे दूर रहना चाहिए।
विवान ने मासूमियत से पूछा—
लेकिन अगर वो बुरे लोगों को पकड़ता है तो?
संयोगिता के होंठों पर बहुत हल्की मुस्कान आई।
संयोगिता बोली -
फिर भी… तुम्हें उसके पास नहीं जाना चाहिए।
विवान ने सिर हिला दिया।
अर्जुन जी ने खबर का आखिरी हिस्सा पढ़ा—
पुलिस ने जनता से अपील की है कि अगर किसी को इस साइको किलर के बारे में कोई जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
कमरे में फिर सन्नाटा छा गया। संयोगिता ने धीरे से अपनी नजरें नीचे कर लीं। उसका राज पूरे शहर के सामने था…लेकिन उसी कमरे में बैठा कोई भी इंसान नहीं जानता था कि जिस साइको किलर को पुलिस ढूँढ रही है…वो इस वक्त उनके बिल्कुल सामने बैठी है।