Ayan: A Fire of Hate or a Search for Existence - 39 in Hindi Thriller by Irfan ayan Khan books and stories PDF | अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 39

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अयान एक नफ़रत की आग या वजूद की तलाश - 39

अयान ने बिना एक शब्द कहे सीधे खिड़की की तरफ कदम बढ़ाए। बाहर सुबह की पहली सुनहरी धूप रॉयल पैलेस के विशाल बगीचे और ओस से भीगी घास पर फैल रही थी।

उसने खिड़की के ठंडे कांच पर अपना हाथ रखा। कांच में उभरते अपने अक्स को देखते हुए उसकी लाल और अंगारे जैसी आँखों में एक खौफनाक ठहराव था—माथे पर कसी सफेद पट्टी साफ झलक रही थी, और उसके भीतर सुलगता गुस्सा अब एक खतरनाक खामोशी में बदल चुका था।

तभी माहिरा उसके बेहद करीब आ गई।
उसने बिना किसी झिझक के खिड़की के कांच पर रखे अयान के हाथ को अपने दोनों हाथों से मजबूती से थाम लिया। उस ठंडी सतह पर माहिरा के हाथों की गर्माहट और उसका यह बेखौफ साथ सीधे अयान की नसों में उतर गया।

माहिरा ने अपनी पलकें उठाकर सीधा अयान की उन लाल आंखों में देखा। उसकी अपनी आँखों में कोई डर नहीं था, बल्कि अयान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने की एक अटूट जिद साफ झलक रही थी।

माहिरा का गला थोड़ा भर आया, लेकिन उसकी आवाज में एक गहरी कसक और अपनापन था—

"इस लड़ाई में मैं तुम्हारे साथ हूँ, अयान... हर कदम पर, हर मोर्चे पर। तुम अकेले नहीं हो।"

माहिरा का यह साथ, उसकी वो एक लाइन और उसकी आँखों का भरोसा... सीधे अयान के सीने में उतर गया। पिछले कुछ सालों में उसने अपनों को खोया था, धोखे सहे थे—उसके पास इस दुनिया में अपना कहने के लिए सचमुच कोई नहीं बचा था, सिवाय माहिरा के।

उसके भीतर वो मर्द वाला डर एकदम से जाग उठा—अपनी जान का कोई खौफ नहीं था, लेकिन अपनी माहिरा को हमेशा के लिए खो देने का ख्याल ही उसकी रूह कंपा रहा था। उसे लगा कि अगर माहिरा को कुछ हो गया, तो वह अंदर से पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

अयान ने अपना दूसरा हाथ उठाया और माहिरा के चेहरे को अपने दोनों हाथों के प्याले में थाम लिया। उसकी उंगलियाँ हल्की सी कांप रही थीं—वो माहिरा को खोने के उसी भयानक डर से थीं, जो पहली बार उसकी आँखों में इस शिद्दत से उभर आया था।

अयान की आँखें नम हो गईं और उसने बेहद तड़पते हुए, रूह को चीर देने वाले लहजे में कहा—

"तुम साथ हो तो इस नफरत की आग में भी सुकून है, माहिरा...
वरना इस खाली दुनिया में तो अयान कब का दम तोड़ चुका होता।"
अयान ने माहिरा के माथे पर अपनी उंगलियों का हल्का सा दबाव दिया और उसकी आँखों में झांकते हुए कसम खाने वाले लहजे में बोला—

"अब इस दुनिया की कोई ताकत तुम्हें मुझसे दूर नहीं कर सकती। चाहे सालम सिंह हो या विवेक रॉय, अगर वे तुम्हारी तरफ आँख उठाकर भी देखेंगे, तो उनकी सांसें उखाड़ दूंगा मैं। तुम्हारी हिफाजत... मेरी इस सांस से भी ज्यादा जरूरी है। इस लड़ाई में तुम मेरे साथ खड़ी हो, यही मेरे लिए सबसे बड़ी ताकत है।"

माहिरा की आँखों से एक आंसू छलक कर अयान के हाथ पर गिर पड़ा। उसने अपने हाथ से अयान के हाथ को और कसकर थाम लिया, मानो वह यकीन दिला रही हो कि वह कहीं नहीं जाने वाली।
वे दोनों काफी देर तक उस खिड़की के पास एक-दूसरे के सहारे चुपचाप खड़े रहे—जैसे दुनिया के हर तूफान के बीच वे दोनों एक-दूसरे की इकलौती पनाहगाह हों।

वह जज्बाती पल जब थोड़ा ठहरा और दोनों ने एक लंबी सांस लेकर खुद को संभाला, तब जाकर अयान ने अपने चेहरे के उस भाव को एक खतरनाक और ठंडे संकल्प में बदला। उसने अपनी नजरें खिड़की के कांच से हटाईं और सामने खड़ी दिया की तरफ देखा।

अयान की भारी और कड़क आवाज गूँजी—
"दिया... अब हिसाब का वक्त है। यह बताओ, हमारे खानदान का कितना हिस्सा वापस खींच लिया है तुमने, और कितना अभी भी उन गद्दारों के पंजे में है? और हाँ... वो सालम सिंह जिस 'राज' का बार-बार जिक्र कर रहा था, क्या उस राज के बारे में तुम्हें कुछ पता है?"

दिया ने थोड़ा संभलते हुए और पेशेवर लहजे में सिर झुकाकर जवाब दिया—

"सर, हमारे खानदान की कुल संपत्ति और तहखानों का करीब साठ प्रतिशत हिस्सा मैंने अपनी रणनीतियों से उन गद्दारों के चंगुल से वापस खींच लिया है, लेकिन बाकी का चालीस प्रतिशत हिस्सा अभी भी सालम सिंह और विवेक रॉय के नापाक पंजे में कैद है। उसे निकालने के लिए हमें सीधे उनके सबसे सुरक्षित ठिकानों पर वार करना होगा।"

दिया ने अपनी नजरें झुकाते हुए आगे कहा—
"और जहाँ तक उस 'राज' की बात है सर... तो सच कहूँ तो, वो राज क्या है, इसके बारे में मुझे कुछ नहीं पता। ऐसे खानदानी और गहरे राज घर के चंदेरी लोगों या सीधे आप जैसे वारिसों को ही पता होते हैं, हम जैसे PA को इन अंदरूनी गहराइयों की भनक नहीं लग पाती। सालम सिंह किस राज की आड़ में खेल रहा है, यह तो वही जानता है।”

दिया की बात खत्म होने के बाद, हॉल में मौजूद दीवान साहब खुद आगे बढ़े। उनके चेहरे पर किसी गहरी चिंता और फिक्र की लकीरें साफ झलक रही थीं। उन्होंने अपनी नजरें सीधे अयान और माहिरा पर टिका दीं और गंभीर लहजे में बोले—

"छोटे साहब... हिसाब-किताब अपनी जगह है, लेकिन जब तक आप उस असली पहेली तक नहीं पहुँचेंगे, तब तक इस जीत का कोई मतलब नहीं है।"

अयान की मन्नत-सी ठंडी और सुन्न पड़ चुकी नसें अचानक सुलग उठीं। उसने अपनी उन सर्द और पैनी नजरों को दीवान साहब पर गड़ा दिया, जिनमें इस वक्त किसी भी दुश्मन को जिंदा दफन कर देने की जिद साफ नजर आ रही थी। अयान के उस खौफनाक और खामोश तेवर को भांपते हुए दीवान साहब ने बिना वक्त गंवाए अपनी बात आगे बढ़ाई—

"आप उस 'राज' की तलाश में हैं ना? सच कहूँ तो... उस भयानक हादसे और बड़े साहब-बड़ी मालकिन के इस तरह अचानक दुनिया से ओझल होने के पीछे एक बहुत बड़ा राज छिपा है। हादसे से कुछ दिन पहले ही वो दोनों चुपचाप गोवा गए थे।

मुझे अच्छी तरह याद है, उस दुर्घटना से ठीक पहले मैंने ही बड़े साहब को फोन किया था। उन्होंने बेहद घबराते हुए मुझे बताया था कि कुछ अनजान गाड़ियां लगातार उनका पीछा कर रही हैं...

और साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि उन्होंने अयान के लिए एक बहुत जरूरी बात या राज पीछे छोड़ दिया है, जो हरदम तुम्हारे पास ही है। लेकिन इससे पहले कि वो पूरी बात बता पाते, फोन कट गया और उसके बाद वो दुर्घटना हो गई।

मुझे पूरा यकीन है कि उस राज का और उनके इस तरह अचानक गायब होने का कोई बहुत गहरा कनेक्शन है। गोवा में बड़े साहब के एक बहुत पुराने और पक्के दोस्त हुआ करते थे जो एक मशहूर बिजनेसमैन थे। अगर इस पहेली का और उस राज का कोई भी सुराग इस दुनिया में बचा है, तो वो सिर्फ वही गोवा वाला शख्स दे सकता है।"

दीवान साहब की इन बातों ने हॉल के माहौल को पूरी तरह गरमा दिया। अयान ने एक पल के लिए अपनी नजरें झुकाकर अपने हाथ की तरफ देखा—उसके भीतर एक अजीब सी बेचैनी और सुलगती हुई कशिश उठ रही थी, मानो जवाब उसके बहुत करीब ही कहीं मौजूद हो, पर कोहरे के पीछे छिपा हो।

मुंबई के इस रॉयल पैलेस के हॉल में खड़े अयान के जबड़े कस चुके थे और सांसें भारी हो चली थीं—खेल का अगला और सबसे खतरनाक पड़ाव अब मुंबई से सीधे गोवा के समंदर किनारे की तरफ बढ़ने वाला था!

( लेखक की कलम से )
पहला सवाल: क्या दीवान साहब द्वारा बताया गया गोवा का वह मशहूर बिजनेसमैन सच में उस पुराने और खौफनाक 'राज' से पर्दा उठा पाएगा, या फिर यह अयान को एक और जाल में फंसाने की साजिश है?

दूसरा सवाल: बड़े साहब द्वारा अयान के पास छोड़ी गई वह जरूरी चीज या 'राज' आखिर क्या है, जो हर वक्त अयान के पास ही रहता है?

तीसरा सवाल: मुंबई के इस रॉयल पैलेस को पीछे छोड़कर जब अयान और माहिरा गोवा की तरफ कदम बढ़ाएंगे, तो वहां उनका स्वागत करने कौन सी नई मुसीबतें और दुश्मन इंतजार कर रहे हैं?