श्रेया घोषाल भारत की उच्च निंदा गई गांव में से एक है जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत टूट लगन और अपनी जादुई आवाज के दम पर बिना किसी फिल्मी पृष्ठभूमि (without godfather ) के संगीत की दुनिया में एक बहुत बड़ी मुकाम हासिल किया है उनकी यह कहानी संघर्ष और सफलता की एक बेहतरीन मिसाल है।
जन्म और शुरूआती जीवन श्रेया घोषाल का जन्म 12 मार्च 1984 को पश्चिम बंगाल की एक बंगाली परिवार में हुआ था। उनका बचपन राजस्थान के कोटा के पास रावतभाटा में बीता जहां उनके पिता एक परमाणु संयंत्र में इंजीनियर थे। संगीत से पहले नाता संगीत के प्रति उनका प्यार बहुत कम उम्र में ही शुरू हो गया था। उनकी मां उनकी पहली गुरु थी। जो उन्हें घर पर ही शास्त्रीय संगीत (classical music) के शुरुआती पाठ पढ़ाती थी।
वह 4 साल की उम्र से ही उन्होंने हारमोनियम बजाना और गाना शुरू कर दिया था।
सा रे गा मा से मिली बड़ी पहचान साल (2000) में जब सिया सिर्फ 16 साल की थी उन्होंने लोगप्रिय टीवी सिंकिंग रियलिटी शो सा रे गा मा ( अब सा रे गा मा पा) के बच्चों के स्पेशल एपिसोड में हिस्सा लिया और विनर बनी।
इस शो में मशहूर फ़िल्म निर्माता निर्देशक संजय लीला भंसाली की मां ने उनकी गाय का को सुना और संजय लीला भंसाली को उनके बारे में बताया।उस समय भंसाली अपनी फिल्म देवदास के लिए एक ऐसी नई आवाज की तलाश कर रहे थे। जो पारो (ऐश्वर्या राय ) की किरदार को सही न्याय दे सके। देवदास से धमाकेदार शुरुआत और रातों-रात सफलता संजय लीला भंसाली ने सिर्फ 16 साल की श्रेया घोषाल को अपनी फिल्म देवदास (2002) में गाने का मौका दिया। उन्होंने श्रेयसी फिल्म में बैरी पिया सिलसिला यह चाहत का डोला रे डोला जैसे कुल पांच गाने गवाए। उस कम उम्र में सिंगर जैसे कविता कृष्णमूर्ति के साथ गाना आसान नहीं था लेकिन श्रेया ने अपनी सुरीली आवाज से इतिहास रच दिया।
उनकी इस जादुई शुरुआत के लिए उन्हें पहले ही प्रयास में सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका का (Best female play back )सिंगर का नेशनल फिल्म अवार्ड और फिल्मफेयर अवार्ड मिला।
बिना किसी गॉडफादर के बॉलीवुड का सफर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में पैर जमाना बहुत मुश्किल होता है खासकर तब जब परिवार का कोई फिल्मी बैकग्राउंड ना हो। लेकिन श्रेया ने अपनी सादगी अनुशासन और हर गाने में अलग भावना डालने की कला के दम पर इंडस्ट्री में अपनी जगह पक्की की उन्होंने हिंदी के अलावा बंगाली तमिल तेलगु कन्नड़ मलयालम और मराठी सहित कई भाषाओं में हजारों गाने गाए। आज उन्हें भारत की मेलोडी क्वीन(melody queen) कहां जाता है
प्रेरणा (Moral ) श्रेया घोषाल की यह कहानी हमें सिखाती है कि अगर आपके अंदर सच्ची लगन और होना रहे और आप बिना रुके अपनी मेहनत जारी रखते हैं तो विपरीत परिस्थितियों या साधारण परिवार से होने के बावजूद आप अपने सपनों की सबसे ऊंची उड़ान भर सकती है श्रेया घोषाल उसके सामने आई जितनी भी मुसीबत्ती थी उनसे डरने की बजाए उनके डेट कर सामना करती रही और अपने हुनर के दम पर अपना नाम और अपने माता-पिता का नाम रोशन किया।