मैं एक कवि हूँ ।कविता लिखना और सुनना बहुत अच्छा लगता है ।मैं सेवानिवृत्त वरिष्ठ अध्यापक हूँ मुझें चुटकलें .शायरी .गजल .बहुत अच्छे लगते है ।

# आज की प्रतियोगिता "
# विषय .खुद "
** कविता **
खुद पे तू ,भरोसा रख ।
खुद की तू ,पहचान बना ।।
खुद ही कर्म ,कर कर्मशील बन ।
खुद की हिमंत ,से आगे बढ़ ।।
जमाने की ठोकरों ,से खुद तू सीख ।
खुद पत्थरों से ,पानी निकालना सीख ।।
खुद के बलबुते पर ,मनसुबें बना ।
खुद के कर्मो से ,महान बन ।।
खुद के बलबुते पर ,धन को पैरों में बरसा ।
खुद के बुते पर ,ओरों को अपना बना ।।
बृजमोहन (बृजेश ) ,रणा ,कश्यप ,कवि ,अमदाबाद ,गुजरात ।

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# आज की प्रतियोगिता "
# विषय .भाग्य "
** कविता **
सभी जग में ,भाग्य की करामात बताते ।
पुरुषार्थ छोड़ सब ,भाग्य को सराहते ।।
अनहोनी हो या होनी हो ,सब भाग्य की बात समझते ।
निठ्ठल्ले बैठे बैठे ,भाग्य को ही कोसते ।।
ऐसे लोग कुछ कर नही पाते ,जीवित मृत देह होते ।
ध्रुव ने अपने पुरुषार्थ से ,ईश्वर को पांच वर्ष में पाया ।।
प्रह्लाद ने अपनी भक्ति से ,ईश्वर को है ध्याया ।
भाग्य के सहारे ,अकर्म आंसू ही गिनता ।।
पुरुषार्थ के पीछे तो ,भाग्य खुद चल कर आता ।
इसीलिए पुरुषार्थ की ,हर कोई सराहना करता ।।
बृजमोहन रणा ( बृजेश ) ,कश्यप ,कवि , अमदाबाद ,गुजरात ।

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कविता
विषय .नन्हों की करामात ।
नन्हें हाथों से हम ,इतिहास लिखेगें ।
कर्मशील बन कर ,भारत का विकास करेगें ।।
परिश्रम करके रुठे भाग्य ,को भी बदल देगें ।
भाग्य के भरोसे कभी ,हम न बैठें रहेगें ।।
फिर कोई भुखा ,नंगा ,देश में न रहेगा ।
अपने नन्हें हाथों से ,आंसू पोछ लेगें ।।
नये प्रयासों से भारत ,की गरीबी हटा देगें ।
पढ़ लिख कर नये ,इतिहास लिखेगें ।।
भाईचारे की अनुठी ,मिशाल बना देगें ।
मानवता की सुदंर ,गंगा बहा देगें ।।
हम बड़े होकर ,भारत के कर्णधार बनेगें ।
बृजेश अपनी बुद्धि से ,सबके दिल जीत लेगें ।।
बृजमोहन रणा (बृजेश ) ,कवि ,अमदाबाद ,गुजरात ।

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गजल ।
काफिया .आ ।
रदीफ़ .न करो ।
तुम बेवजह आया न करो ।
दिल को तड़पाया न करो ।।
तुम दीदार दिया न करो ।
दिल का चैन लुटा न करो ।।
हंसते हुए निकला न करो ।
प्यार में तरसाया न करो ।।
कजरारी आँखें दिखाया न करो ।
आँखों से गिराया न करो ।।
वफा का सलिका दिखाया न करो ।
बेवफा तुम बना न करो ।।
बृजमोहन रणा ( बृजेश ) ,कवि ,अमदाबाद ,गुजरात ।

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# आज की प्रतियोगिता "
# कविता ***
# विषय .प्रकाश "
प्रकाश उष्मा देता ।
प्रकाश नव जीवन देता ।।
प्रकाश नव अंकुरित करता ।
प्रकाव जीवन संचार करता ।।
प्रकाश प्रकृति को खिलाता ।
प्रकाश सूर्य से मिलता ।।
प्रकाश मार्ग प्रशस्त करता ।
प्रकाश आत्म अंधकार को दूर करता ।।
प्रकाश नयी चेतना देता ।
प्रकाश फूलों को खिलाता ।।
प्रकाश बिना अंधकार रहता ।।
बृजमोहन रणा ( बृजेश ) ,कश्यप ,कवि ,अमदाबाद ,गुजरात ।

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#आज की प्रतियोगिता "
# विषय .सीखना "
** कविता **
फूलों से ,खिलना सीखें ।
भौरों से नित ,गाना सीखें ।।
नदियों से ,निरन्तर बहना सीखें ।
पेडों से छाया ,देना सीखें ।।
मधुमक्खियों से संग्रह ,करना सीखें ।
कोयल से मीठा ,बोलना सीखें ।।
बन्दर से नकल ,करना सीखें ।
बच्चों से मौज में ,रहना सीखें ।।
प्रकृति से नित खिलना, महकना सीखें ।
नम्र बन कर ,ऊँचा उठना सीखें ।।
दीन दुःखियों के ,आंसू पौछना सीखें ।
कठिनाइयों में धैर्य ,से रहना सीखें ।।
बृजमोहन रणा ( बृजेश ) ,कश्यप ,कवि ,अमदाबाद ,गुजरात ।

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शानदार मुक्तक ..
आज दिल को यूँ लगे ,जाने कहीं कुछ खो रहा ।
याद करके कोई शायद ,आह भरते सो रहा ।।
क्या करुँ तू ही बता दे ,एखुदा उस यार का ।
रात भर जो छटपटाता ,क्यों नही जो सो रहा ।।
........
मेरे पहलू से उठ कर दिल तेरे कदमों में जा बैठा ।
भला क्यों छोड़ सागर वो गंदे नालों में जा बैठा ।।
वफादारी के बदले में जफाओं में गंवाता है ।
बडा ही संग दिल निकला दर्दे छालों में जा बैठा ।।
....
दिल की ये मजबूरियाँ ,नही छोड़ता प्रीत ।
एक चाह लेकर चले ,मिल जाए मन मीत ।।
भावुकता होती प्रबल ,चाहे हो नुकसान ।
यादों में खोया रहे ,गाता रहता सदा गीत ।।

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# आज की प्रतियोगिता "
# विषय .रखना "
** कविता **
दिल में प्रेम ,सजाए रखना ।
आँखों में सदा ,बसाए रखना ।।
निगाहों से कभी , दूर मत रखना ।
अपना हमेशा ,बनाये रखना ।।
फुरसत के पल ,सजाये रखना ।
प्यार के पल ,सजाये रखना ।।
आँखों का तारा ,बनायें रखना ।
उल्फत के पल ,सजाये रखना ।।
दिल की बातें ,संभालें रखना ।
मिलने के वादें ,याद रखना ।।
बृजमोहन रणा ( बृजेश ) ,कश्यप ,कवि ,अमदाबाद ,गुजरात ।

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# आज की प्रतियोगिता "
# विषय .पतंग "
# कविता "
पतंग आसमान ,में उड़ता ।
अपनी निराली ,छटा बिखेरता ।।
हवा के साथ उड़ता ,हुआ इतराता ।
पतंग दुसरों के ,इशारे पर नाचता ।।
कोई उसे बीच में ,काट भी डालता ।
अस्तित्व हीन सा ,नीचे गिर पड़ता ।।
हमारा जीवन ,भी पतंग सा होता ।
डोर हमारी ,ईश्वर के हाथ होती ।।
वह जैसे चाहे ,हमें नचाता ।
हमें उसके इशारों ,पर नाचना पड़ता ।।
आज मानव ,असहाय सा होता ।
अपनी मरजी ,से जी नहीं पाता ।।
उसका जीवन ,पल भर का होता ।
फिर भी वह ,बहुत इतराता ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,कवि ,अमदाबाद ,गुजरात ।

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# आज की प्रतियोगिता "
# विषय .शूरवीर "
# विधा .कविता **
शूरवीर नाम ,कर जाते ।
सबके दिलों में ,बस जाते ।।
आँखों के तारे ,पल में बन जाते ।
परोपकार कर ,इतिहास लिख जाते ।।
जीवन दुसरों ,केलिए महकाते ।
रात दिन मेहनत ,कर स्वस्थ बनाते ।।
पल में शत्रु को ,भगा देते ।
दुश्मनों के ,छक्के छुडा देते ।।
कोई असम्भव कार्य ,नहीं रहने देते ।
पल में दुःखियों ,को हरषाते ।।
ईश्वर की तरह ,प्राण बचाते।
जग में अमर ,पल में हो जाते ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,कवि ,अमदाबाद ,गुजरात ।
सभी डाक्टर ,नर्सो के लिए मेरी कविता समर्पित ।

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