लेखन विधा- कहानी, लेख, छंदमुक्त कविता...आकाशवाणी से कहानियों का प्रसारण, दूरदर्शन से वार्ता प्रसारित, एक कहानी संग्रह मुम्बई से, सरिता,कादम्बिनी,नंदन,रूपायन अन्य बहुत पत्रिकाओं में प्रकाशित..........उपन्यास प्रेस में.......छाया अग्रवाल

खोदी गयीं रक्त रंजित दरारें
सड़कों पर देख रहीं थीं
अपने जैसा ही रंग
कुंठित दीवारों पर भी थीं कुछ छीटें
कुछ थीं अफवाहों के सपाट धरातल पर
धकेला हुआ द्रष्टिहीन रेला
दौड़ रहा था वेग में,

विवेकहीन लोभियों की रफ्तार से
उत्पन्न ऊर्जा को
बंदूक में भर कर चपल
दागता रहा उन पर
जो समेंट रहे थे राख के कण
और खोल रहे थे प्रकाश की उजली खिड़कियाँ,

सिसकियों से बँधा बजूद
सहमा रहा उन ध्वस्त हुये खण्डों से
जो खड़े थे प्रलय के अधखुले दरवाजे पर,

टूटती हुई निरीह पीड़ा में
निचोड़ कर ताकत की बूँदों को
सूखी हुई मांस-मज्जा लिये
दब जाते हैं सिकुड़े हुये बड़े शहरों के
अपाहिज कंकाल?????
छाया अग्रवाल
बरेली
दि. 28-2-20

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मेरे आत्मिये मित्रों,
प्रेम कथा 'एक थी अनु' की अपार सफलता के बाद अपने वायदे के अनुसार मैं आपके लिये अपनी दूसरी कहानी 'जूठन' लेकर शीघ्र ही आ रही हूँ, जो 3 मार्च को 12:00 बजे मातृभारती पर प्रकाशित की जायेगी। आपके स्नेह की आकाक्षीँ रहूँगी।
छाया अग्रवाल

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5 दिन में 513 डाउनलोड *एक थी अनु* के🙏
आपकी दोस्त
छाया अग्रवाल

'एक थी अनु' को इतना प्यार देने के लिये बहुत -बहुत शुक्रिया दोस्तों
😊👍

आप सब का बहुत बहुत आभार मित्रों, जिस तरह आप लोग हमारी कहानी 'एक थी अनु' को डाउनलोड कर रहे हैं। अभी 24 घण्टें भी नही हुये हैं और आपके ढेर सारे मैसेज आ चुके हैं। ज्यादा से ज्यादा इस कहानी को साझा करे हम वादा करते हैं जल्दी ही दूसरी कहानी को आपके बीच लेकर आयेगें।
छाया अग्रवाल

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नमस्कार दोस्तों, हमें खुशी है कि कल शाम 5:15 पर प्रकाशित होने वाली हमारी कहानी 'एक थी अनु' को मातृभारती पर कुछ ही घण्टों में 127 पाठक पढ़ चुके हैं और तेजी से डाउनलोड हो रहे हैं। आप सभी सुधी पाठकों का हार्दिक आभार
छाया अग्रवाल

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लीजिये दोस्तों, 'एक थी अनु'आज शाम मातृभारती पर प्रकाशित हो चुकी है। अब आप लोग पढ़ कर अपनी प्रतिक्रिया दीजिये।
छाया अग्रवाल

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लीजिये दोस्तों...अब इन्तजार खत्म हुआ..आज यानि 13 फरवरी शाम 5:15 मातृभारती पर आ रही है हमारी बेहद चर्चित कहानी 'एक थी अनु'
इस कहानी का कथानक तो प्रेम ही है परन्तु एक अलग प्रेम, रोचक संवाद और मार्मिकता लिये ये कहानी आपको भी अपने आकर्षण में बाँध पायेगी या नही ये जानने के लिये पढ़ कर देखें.......एक थी अनु
छाया अग्रवाल

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13 फरवरी दोपहर 12:30 पर हमारी एक कहानी 'एक थी अनु' मातृभारती पर प्रकाशित की जायेगी। ये एक अदभुत,अकथनीय प्रेम कथा है जहाँ पात्र मौन प्रेम करता है, रोचक संवाद शैली अन्त तक उत्सुकता बनाये रखती है और पाठक को गहरे सागर में डुबोती है। मित्रों पढ़ें और अपनी प्रतिक्रिया से हमें अविभूत करायें
धन्यवाद
छाया अग्रवाल

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दौड़ना और तेज दौड़ना संभव नही होता, उसकी अपनी एक मिंयाद होती है। उम्र के हिचकोले और समाजिक परिवर्तन को पछाड़ना, नये पल्लवित होते पत्तों का अल्प ही सही अपना वर्चस्व होता है, फिर नये ...फिर नये.....यूँ ही जिन्दगी की जमीं पर उगते रहते हैं नित्य नये पल्लव, अपने नये रंग, नयी खुशबू और आकर्षण के साथ, जहाँ पीले, सूखे और मुरझाये पत्तों का बुहारना ही बेहतर होता है.....
.............................................मेरी नई कहानी का कुछ अंश
छाया अग्रवाल

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