प्रवक्ता,पत्रिका लेखन, स्वतंत्र लेखन, लोक गायिका l

मंदिर की घंटियाँ, करती हैं ये निनाद,
अब तो जगो सुनो तुम,
जीवन का प्रेम राग |
डॉ गीता द्विवेदी

देश की माटी की सुगंध बनाए रखने के लिए इसे अपने खून से सींचने वालों के प्रति भावपूर्ण श्रद्धांजलि


" चढ़कर बुलंदियों पर,
एहसान ना जताना,
करके बुराई देश की,
तुम मान ना घटाना |
हमने तुम्हें दिया है,
आजाद देश देखो ,
ऊंचाइयों पर रखना ,
अब काम है तुम्हारा |
डाॅ०गीता

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कठिन
कठिन तो अब यहाँ ज़िन्दगी है,
आसान आज मौत है यहाँ यारों|
डॉ गीता द्विवेदी

# तुम्हारा साथ हर मुश्किल को आसान कर देता है,
मेरे वजूद के लिए तेरा अहसास काफी है|
डॉ गीता द्विवेदी

#आधा #
बाँटो न दुख, आधा कर दो इसे |
बाँटो न सुख , पूरा भर दो इसे|
डॉ गीता द्विवेदी

#ठीक हो जाओ#
दुशवारियाँ बढ़ने लगीं,
मायूस रहना छोड़ दो,
ठीक हो जाओ प्रिये तुम,
समय पर सब छोड़ दो|
डॉ गीता द्विवेदी

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#लाभ #
नियति कर्म का मर्म पढ़ती है,
लाभ का मोह कर्म हीन कर प्रारब्ध बदल देता है|
डॉ गीता द्विवेदी

# ज्योति#
लपटों में पाप की फिर ,संसार घिर गया है,
रक्षा करो विधाता, ज्ञान ज्योति बारो|
डॉ गीता द्विवेदी

संसार में मालिक
बनाना रात जैसा ही,
मेरे व्यवहार में है मौला,
वो शीतल चाँदनी ही हो,
कभी जो बनूँ मैं सूरज,
तपिश मेरे लिए ही हो,
मैं रौशन करके ये दुनिया,
जहाँ को राह दिखलाऊँ|
डॉ०गीता द्विवेदी

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