दीपक बुंदेला लेखक, निर्माता-निर्देशक टीवी सीरियल लेखन और एसोसिएट डायरेक्टर (मिले सुर मेरा तुम्हारा, भक्ति सागर, गज़ल स्पेसल, फ़िल्मी चक्कर, चाणक्य, टीपू सुल्तान, जय हनुमान, विवाह, अजीब और भाभी ) वीडियो सांग डायरेक्शन (मेड इन इंडिया, ठंडा ठंडा पानी, तेरे बालों में मोती पिरो दू, एक लड़की प्यारी प्यारी लग भाग 200गानों का फिल्मांकन और नए लोगों को इंटरडूस किया ) फीचर फ़िल्म- इन क्रिएटिब डायरेक्टर (लाल दुपट्टा मल मल का, जीना तेरी गली में, सूर्य पुत्र शनि देव, माँ वैष्णों देवी, बेबफा सनम. वर्तमान में

भरोसा... !

मन के अंधेरे...

सुर्खियां-ए-सेलाब आया.. !

मैं नहीं चाहता कि मैं तुम लोगों की तरह कातिल बनू..
मैं हर उस बात का हिसाब लूंगा जो पिछले 15 सालों से आज तक कुछ ऐसे मामले हुए है जिनका अभी तक जानता को इन्साफ नहीं मिला क्योंकि उसी जानता में मैं भी शामिल हूं जहां अपनों को खोने के गम में कल तक इन्साफ की आस के इंतज़ार में था... लेकिन कानून की मंदगति ने मेरे सब्र को तोड़ दिया..
मेरा ही नहीं ना जानें इस शहर में कितने ऐसे लोग है जो कानून पर विश्वास रख के घुट घुट के जी रहें है एक ज़िन्दा लाश की तरह.. लेकिन मैं ज़िन्दा लाश नहीं बनना चाहता था.. इसीलिए लिए मुझें ये कदम उठाना पड़ा...
(मंत्री, कमिश्नर, एसीपी, एसपी सब एक दूसरे को देखते है )

Read More

लोग... !

मैं समय हूं समय की हुंकार हूं

ज़िन्दगी लम्हा लम्हा हमें बिखेरती है,
और ज़िन्दगी को हम लम्हा लम्हा समेटते हैं..

दिखावे और बनावटी लोग..

ना हम है ना तुम