i write my heart, on paper as the first person I meet.com

पल पल अकेले ना कटे यह जिंदगी ,
परछाइयों के पीछे चले ना यह जिंदगी ।
हर आहट में उनको ढूंढते रहते हैं ,
फिर एकाकी में खुद ही घुटते रहते हैं ।

जीवन के उस दोराहे में खड़े हैं ,
जहां सबके बीच में होके भी हम अकेले खड़े हैं ।
पल, पल उस आसमान को देख काट रहे हैं ,
अपनेपन को अकेला ही ढूंढने चले हैं ।

हर समझ से विफल हो रहे हैं ,
आह से भरी जिंदगी को , काट जो कैसे रहे हैं जो कभी मेहमानों का इस्तकबाल कर आंखें चमकती थी ,
आज अकेलेपन की गहराइयों में खुद को ढूंढने चली हैं ।

उस नभ को एक तक ताक रहे हैं ,
उड़ते हुए पंछियों की आवाज सुन रहे हैं ।
जो सुनहरे आसमान में पंख फैला जा रहे हैं ,
अकेलेपन को काटने में पल-पल मददगार हो रहे हैं ।

आज आफताब की रोशनी में मेहताब भी रोशन हुआ है ,
मेरे दिल के आशियाने को देख यह कह रहा है ।

तो फिर उठ प्रज्वलित हो ,
इन तन्हाइयों को काट , फिर स्वइच्छा से स्वाबलंबी हो ।
पंख अपने फड़फड़ा ,
रोशन कर दे अंधेरे में यह आसमान ।

#Sentiment

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#Aspect
I adorn every aspect of my entity,
with the tunes of my like.
I spin in mirth ,
in the dark hours ,
believing I am the
queen of the night.

I cavort on baton ,
as if ,it will travel me to heaven.
I cry in delight, as I breathe joy.
The tunes, which hems my heart ,
makes me coryphee ,
under the stars till miles .

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कतरे कतरे पर खतरा है खड़ा ,
करुण अवस्था की व्यथा देख ,हर इंसान चुप है खरा ।
फूंक फूंक के कदम , इंसान बड़ा रहा है जरा ,
इस अनदेखे अदृश्य शत्रु से भयभीत है खड़ा ।

करोना के रोने का हाहाकार , पृथ्वी में हर वेश में है खड़ा ,
बारंबार हाथ धोने को इंसान चल पड़ा ।
मुखौटा डाल हर इंसान , अपनी रक्षा कर चला ,
आज नमस्कार की प्रथा सारा जग कर रहा ।
पशु पक्षियों को क्रूर नरभक्षी की तरह जो खा रहा था
आज प्रकृति के आक्रोष से स्वयं की रक्षा ना कर सका ।

इंसान इंसान को मरता देख चुप है खड़ा ,
स्वयं की रक्षा के लिए ,
आज चूहे की तरह हर जातक अपने बिल में है छुपा ।
सैकड़ों विशेषज्ञ एकजुट हो खड़े ,
अपितु इस आपदा का कोई उपचार ना खोज सका ,
प्रलयकारी करोना से ,
हर इंसान मुखौटा डाल छुपता है फिर रहा ।।

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