Welcome to DK"s World...

गुस्से में लोग लाल हो जाते है...
मगर वो गुलाबी नजर आते है...

जो देख ले उनकी नीली आंखों को...
वो सारे शराबी नजर आते है...

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बंजर जमीन बन गया वो... ये उसकी सजा थी...

बारीशों से इश्क़ हुआ था... ये उसकी खता थी...

मुकम्मल हो महोब्बत या ना हो...
किस्मत अपनी अपनी...

कोई भूल जाए कोई याद रखे...
आदत अपनी अपनी...

कोई बदले कोई नवाज दे...
ईबादत अपनी अपनी...

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तीर पे तीर खाये जा...
दर्द की ऐसी की तैसी...
आह न कर...
लबों को सी...
इश्क़ है... दिल्लगी नही...

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रोज तारों की नुमाइश में खलल पड़ता है...

ये चाँद पागल है अंधेरे में निकल पडता है...

वो मेरी कलम से संवरने लगे है...

मेरे लफ़्ज़-लफ़्ज़ महेकने लगे है...

लिखावट में जान भर दी हो जैसे...

शब्द-शब्द धड़कने लगे है...

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बेबस ख्वाब रातभर...
नींद की ख्वाइश में जागता रहेता है...

और ये कम्बख्त नींद ...
सारी रात... खयालों के साथ...
यहाँ वहां टहेलती रहेती है...

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तुम्हारे लफ्ज़ों में खासा़ वज़न लगता है...

तुम में दो शख्स रहेते है क्या...!

कभी शब्दों में ना करना तलाश वजूद मेरा...
मैं उतना लिख नही पाता जितना महसूस करता हूं...