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ईश्वर पर विश्वास है केहने वाले और कीसीको भी कुछ भी केहने वाले ही दुसरो से ज्यादा क्युं डरते है |🤔


ईश्वर पर विश्वास है तो भी संभल संभल क्यु कुछ भी खर्च करना 🤔 और जिनसे कुछ भी हो सकता है फिर भी क्यों दुसरो की वाहवाही के पीछे भागते है 🤔 और न मिलने पर 😒 ऐसा क्यों !?!...ॐD

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👉मुफ्त की बात, सलाह, खाना, पैसा आदि पच सके उतना ही लेना चाहिए ज्यादा नुकसान दे ही होता है |...ॐD

👉जैसे कि 50 रु. में बाहर महीने भर का खाना मिलता है पर घर पर 5 दिन का मिलता हो तो वह 5 दिन का हमारे स्वास्थ्य के लिए अच्छा है क्योंकि कभी कबार बचत के चक्कर में जीवन बिगाता हैं |...ॐD

👉कोई रोज ही मुफ्त का खिलाता पिलाता हो तो बहुत अच्छा लगता है पर जो बीमार पडे तो !?! खुद का स्वास्थ्य, पैसा, समय, कष्ट आदी खुद को भुगतना पड़ता है |...ॐD

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👉जीवन इतना किंमती बनाओ की मौत भी घुटने टेक दे |...ॐD

👉अगर किसीका जीवन किंमती न लगे तो समझो की वो मौका दुसरो के लिए है मतलब खुदका जीवन किंमती है कि नहीं उसकी पहचान के लिए है |...ॐD

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👉 हैसियत से ज्यादा कभी कुछ मिलता ही नहीं इसलिए कुछ ऐसा मांगना ही नहीं चाहिए क्योंकि घोर तपस्या के बाद अगर इंद्रासन के बदले निद्रांसन मीले तो कैसा लगे सोचे !?! ...ॐD

👉 वैसे ही जो पास है उसको पहेचान लेना चाहिए वरना भारी किंमत चुकाने पर भी मीले न मिले |...ॐD

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हमेशा काम, बर्ताव, व्यवहार, बोली, विचार आदि अच्छे रखने चाहिए वरना परिणाम बहुत बुरा होता है स्वार्थी को तो बहुत कुछ भुगतना पड़ता है—>

👉जब दूसरों के लिए हमारी वाणी वर्तन व्यवहार गलत या नुकसान पहुंचाने वाला होता है तब स्वयं सरस्वती देवी उनुचीत न हो जाए इसलिए कुछ ऐसा बुलवाती है कि दूसरों के बदले खुद का ही नुकसान होता है | अभिमानी जाऊंगी आज से बेईमान आदि को बहुत भुगतना पड़ता है पहले पहल तो वह बहुत ही मचल उठता है पर बाद में उसका जीवन नर्क से भी बदतर बन जाता है किसी को शारीरिक तकलीफ तो किसी को पारिवारिक आधी समस्या का सामना करना ही पड़ता है इसलिए जो अच्छा है न्याय पूर्ण है वही करना चाहिए वरना गलत सोच कर गलत परिणाम ही आता है |

इसलिए अपने मस्तिष्क यानी दिमाग और मीठी भाषा का प्रयोग हमेशा करना चाहिए वरना वहीं दिमाग और बोली हमारे लिए आशीर्वाद के बदले अभिशाप बन जाती है जैसे कुंभकरण के लिए अभिशाप बन गया था | छोटा सा भी बुरा विचार खुद को बर्बाद करवाने के लिए काफी है |...ॐD

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👉अगर कोई बेवक्त आता है और उसे भूख लगी है और खाना ना पका दे तो खाना ना पकाने वालों को पाप लगता है | 🤔...ॐD

👉यही बात बेवक्त आने वाले को भी लागू होती है कि वह बेवक्त आकर खाना पकाने को कहते हैं तो क्या उसे पाप नहीं लगता ? 🤔...ॐD

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पतिव्रता स्त्री बन सके तो पत्नीव्रता पुरुष को अच्छा नहीं कहा जाता ऐसा क्यों ?

👉जब शादी होती है तब दूल्हे के लिए उसका ससुराल नया होता है और दुल्हन के लिए उसका ससुराल नया होता है | दूल्हा जब ससुराल जाता है तब यह ख्वाहिश रहती है की दुल्हन पतिव्रता बन उसको जो जो पसंद है वह अपने पीहर से बनवाएं, मंगवाए जो कुछ भी कर वह अपने पति को खुश करती है | पर यही बात अगर दूल्हा दुल्हन के लिए करता है तो उसे पत्नी व्रता नहीं कहा जाता ऐसा क्यों ? दुल्हन के लिए भी उसका ससुराल नया है दूल्हे के लिए भी उसका ससुराल नया है | तो फिर एक तरफी बात क्यों ? दुल्हन को अपने ससुराल में या तो जो कुछ भी मिले वह चला लेना पड़ता है या फिर उसे खुद से मांगना पड़ता है ऐसा क्यों ?...ॐD

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कुदरत हमेशा समय की पक्की होती है इसलिए वह औरों को तकलीफ नहीं देती पर कुदरत का संतुलन बिगाड़ा जाता है इसलिए लगता है कि वह तकलीफ देती है पर दरअसल कुदरत तकलीफ नहीं देती जो बिगाड़ने वाले हैं वह अपने आप को ही तकलीफ देते हैं साथ ही कुदरत के संतुलन को बीगाडते है |

न सूरजने कभी कहा सेकंड भर देर से ऊगु क्या फर्क पड़ेगा ? ना पेड़ ने कभी कहा कि साल भर ठहर जा मेरा मूड नहीं |
यह तो मानव द्वारा प्रयोग किए गए, नए-नए शोध की गई इसलिए बिगड़ता चला गया वरना कुदरत तो आज भी समय की पक्की/पाबंद है ही |...ॐD

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