"Change Your Thinking Will Change Everything."

"पंख फैलाये है अभी, उड़ान अब तक बाकी है।
ना मैं हारूँगा ना थकूंगा, जब तक जान बाकी है।।
- Dinesh Sen Jayal

#SupremeGodIsKrishna #पूर्णब्रह्म_श्रीकृष्ण
"प्रेम " से बढ़कर ना कोई शास्त्र था, ना है ,ना होगा। बस हम लोगों ने पढ़ा ही गलत तरीके से है, पढ़ा ही गलत नीयत से है। इसलिए आज प्रेम को इतनी गलत नज़र से देखा जाता है।“ परमात्मा के बाद इस दुनिया में अगर कोई पवित्र चीज है तो वो प्रेम है।"
#RealGodIsKrishna #GeetaQuotes
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संत कबीर का जन्म रामानन्द स्वामी के आशीर्वाद से काशी की एक विधवा ब्राह्मणी के गर्भ से हुआ था, उसने नवजात शिशु को लहरतारा ताल के पास छोड़ दिया। नीरू और नीमा ने उनका पालन-पोषण किया। उन्होंने जन्म के बारे में लिखा है -“काशी में परगट भये रामानंद चेताये।”
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संत कबीर की माता एक विधवा ब्राह्मणी थी जिसने लोक-लाज के भय से इन्हें लहरतारा तालाब के पास छोड़ दिया। नीरू और नीमा मुस्लिम जुलाहा पति एवं पत्नी ने इनका पालन पोषण किया। उनके एक दोहे में भी इसका वर्णन है- “जाति जुलाहा नाम कबीरा”, बनि बनि फिरो उदासी।
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संवत् चौदह सौ पचपन (1455) विक्रमी ज्येष्ठ सुदी पूर्णिमा सोमवार के दिन कबीर दास का जन्म एक विधवा ब्राह्मणी के हुआ उसने लोक-लाज के भय से उनको लहरतारा तालाब के पास छोड़ दिया।एक गरीब दंपति के द्वारा इनका पालन-पोषण हुआ
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आध्यात्मिक कवि और निर्गुण पंथ के संत कबीर का जन्म ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन एक ब्राह्मणी से हुआ।मुस्लिम जुलाहा दंपत्ति नीरू और नीमा ने इनका पालन पोषण किया। उन्होंने ही इनका नामकरण किया। इस्लाम के अनुसार 'कबीर' का अर्थ महान होता है।
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