Yayawar जिसे कही आराम नहीं... जो बस भटकना जानता है अब ठेहेर ना सिख रहा है... लिखना सिख रहा है... उस्मे छिपी awargi को पेहचान के yayawargi बनके जीना सिख रहा है... for more follow me on insta... with name yayawar.gi

मिले तुम्हे मुझसे बेहतर
पर शायद में मिलु ना !

गौरवर्ण हो अधिक, हो मधु सी आवाज़
रंग भी आँखों का मिले जाए नीला
पर उन आँखों में शायद प्यार दिखे ना

मिले तुम्हे मुझसे बेहतर
पर शायद में मिलु ना !

हर घर-काम में हो निपूर्ण
माँ अन्नपूर्णा स्वयं बसे हो हाथो में
पर उन अधरों के शायद स्वाद भाये ना

मिले तुम्हे मुझसे बेहतर
पर शायद में मिलु ना !

फ़र्ज़ भी जो करे सारे पुरे
उठाए सारी जिम्मेदारियां बेझिजक
पर उन सपनो को शायद अपना समजे ना

मिले तुम्हे मुझसे बेहतर
पर शायद में मिलु ना !

भले जिंदगी पर नाम जुड़े रहे
हाथो से हाथ बंधे रहे
रास्ते उसकी और मुड़े रहे
पर दिल कभी जुड़े ना
फिर भी शायद में तुम्हे मिलु ना !

-yayawargi
(Divangi joshi)

https://youtu.be/rnJxgiPBC3Q

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अभि कुछ लिख नहीं पा रही हूँ
चुप हूँ , गुम हूँ
हर्फ खो गए है कहीं
मैं लफ्ज ढूँढ रहि हूँ।

-यायावरगी

Please do reply which is better?

कोरोना काल के बाद पहली बार कोई पारिवारिक प्रसंग में शामिल हुए
किसी कोने में बैठ सब के बदलाव देखे,
सब एक सा जीवन तो जी रहे है
जैसा सब जीते थे
जिन्हो ने अपने प्यार से शादी की वो भी
जिन्हो ने शादी से प्यार किया वो भी
सब का एक सा जीवन
बस किसी के बच्चे बड़े तो किसी के छोटे
आमदनी के हिसाब से जरूरते और शौख
और इसी हिसाब से लिबास
जो है उससे ज़ादा दिखने की बेफिज़ूल कोशिश
मानो एक दलदल में सने दबे पड़े हो सब
और बाकि को उसी भीड़ में
शामिल करने को बड़े ही उत्सुक
मेरे ख्यालो के अब तो पुलाव बासी से लग रहे है
मुझे भी सब दलदल में खींचे जा रहे है
में बेमन सी धसती जा रही हूँ
चिल्ला ने पे बेआवाज़ हो रही हूँ
में भी एक सा जीवन जीती जा रही हूँ

-Yayawargi
(Divangi joshi)

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