ચલો આઓ કૂછ અહસાસ સૂનતે હૈ...

तलाश है मुजे किसी ऐसे की जो मुजे मुझको मिलाये ....

इस दोड़भरी जिंदगी में भांग रही हु में ...

इस दौड़ में ही कही खो गईं हु मे ..

तलाश है किसी ऐसे की जो खुद से खुदको मिलाये ।

मुर्गजल सी है ये जिंदगी ..

हकीकत का कोई रूप ही नही ...

तलाश है किसी ऐसे की ....

जो हकीकत से रूबरू करवाये ....

सुबह से होती रात है ....

शाम कही गुम सी हैं ....

तलाश है किसी ऐसे की जो शाम से रूबरू करवाये ।

जी रही हु में जिंदगी मतलब के बीना ....

हंस रही हु में पर कोई अर्थ ही नही ....

तलाश है किसी ऐसे की जो मेरे शब्दों का अर्थ बनके आये ।

मेरी इस व्यर्थ सी जिंदगी का अर्थ बनके समजाये ...

Dr.Divya

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વિચારોનું વંટોળ ઉઠ્યું મનના અવકાશે ....
શું થમસે એ પ્રલય ના પહેલા પ્રહરે ..??

DR.DIVYA

ना माँगे कोई मुझसे उनको
बहोत ही कम है मेरे पास
बहोत ही ख़ास है वो मेरे लिए
ज्यादा होता तब भी नहीं बाटती

Dr.Divya

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वक्त को भी वक्त चाहिये वक्त बदलने के लिए ..

यूँही नहीं पलट जाते आसानी से सितारे ...

थोड़ा तो सबर कर ये मुसाफिर अपने वक्त का ....

फिर तू भी छायेगा आसमा में सितारों सा ....

वो भी तो वक्त है जो सब करता है ....

तू बस रख हौसला और कार कोशिस वक्त के लिए ..

एक दिन वो सुबह भी आयेंगी ....

जिसकी हर पल आरजू तूने की थी ....

वक्त खुद ही लायेगा तेरे दमन में खुशियां ....

जिसकी गुजारिश तूने की थी ....

Dr.Divya

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हाअब संभलने लगी हूँ में ....

तेरे वादों ने जो तोड़ा था मुजे ....

तेरी ही यादो से अब संभलने लगी हूँ में ....

प्यार में साथी के साथ वक्त कैसे कटता था पता है मुजे ....

पर अब साथी के बिना प्यार कैसे होता है ;
अब जानने लगी हूँ में ....

अब खुद से ही और प्यार करने लगी हूँ में ....

क्योंकि अब कही न कहीं तू भी तो बसता है मुजमे ...

तेरी तो जैसे आदत ही हो गई ही है मुजे ...

और तुने तो मेरी आदत को बहोत बिगाड़ा भी तो है ....

पर अब तेरी यादों की आदत के साथ जीने लगी हूँ में ...

तेरी यादो के साथ रहने लगी हूँ में ....
हा अब संभलने लगी हूँ में ....

Dr.Divya...

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गुजरे हुए रास्ते से आज फिर से गुजरे है ....

टूटे हुए ख़्वाब जहाँ बिखरे पड़े है ....

दिल चाहता है फिर से समेटलु वो ख़्वाब सारे ...

थामलू फिर से वो सारे जज्बातों का आँचल ....

वो ख़्वाब वो जज्बातों के बीच ही तो कहीं ज़िन्दगी बिखरी पड़ी है मेरी ....

शायद उन्हें समेटते समेटते कहीं ज़िंदगी भी समेट जाए खुद ....

उन ख़्वाबो और जज्बातो का आईना है जिंदगी मेरी ....

समेट पाऊ या न समेट पाऊ ....

बस थोड़ी देर उस रास्ते पे थमजा तू जरा ये जिंदगी ....


Dr.Divya

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आज फिरसे तेरी याद आयी है ;

क्योंकि आज फिरसे वो याद सामने आई है ....

वक्त फिरसे दोहरा रहा है ;
वो सारी बाते जो तेरे मेरे दरमियां थी ....

इसलिए आज फिरसे वो रात आयी है ....

आँखों के आगे छा रहे है फिरसे वो लम्हे ....

जो हमने साथ गुजारे थे उस वक्त में .....

वो वक्त फिरसे दोहरा रहा है खुदको ....

वक्त ही सामने लाया है हर एक लम्हे को ....

वक्त ने भी वो बात याद दिलाई है ....

जो वक्त के चलते भूल चुके थे हम ....

उस लम्हे में गुजरे वक्तने फिरसे तेरी याद दिलाई है ...

Dr.Divya....

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पत्ता नही क्या है ये ......

प्यार है या कुछ और .....

नाहीं हमें किसी और का होने देता है ...

नाहीं उनसे प्यार होने का यकीन दिलाता है ...

क्या है ये उनसे ये कुछ समज नही आता है ....

किसी और के पास क्या जाए .....

हर वक्त उनका ही ख्याल मन में रहता है ...

नाही हम उनके है ....

नाही किसी और के हो पा रहे है ....

इसी कशमकश में लगता है ....

की खुद से ही दूर जा रहे है ।

Dr.Divya

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तुजे पा तो लिया था मेने बस अपना बना न सके ..

चाहकर भी हम तेरे बिना मुसकरा न सके ..

तू था यही कहीं मेरे आसपास ही बस मेरे साथ न था

तेरे बिना कोई खुशी हम अपना न सके ....

तेरी हर बात पे आँख बंद करके यकीन किया मेंने ...

तूने तो हरपल कहा ही था कि चले जाओंगे तुम ...

पर हम तेरी यही बात पे यकीन कर ना सके ...

तेरी यादों का समंदर था मेरे पास तो बस ख्वाबो में ही रहे ...

चाह कर भी हकीकत को हम अपना न सके ...

तेरे साथ न होने के वजूद को मान न सके ....

Dr.Divya

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चलो मान लीया की तुजे भूला चुके है हम ...

चलो मान लिया कि तेरी यादों को
अपने जहन से मिटा चुके है हम ....

चलो मान लिया कि अब वो प्यार नही रहा ...

तो फिर ऐसा क्यों होता है ...

जब भी खुदा से कुछ मांगते है तो
जुबा पे तेरा ही नाम पेहले क्यों आता है ...!

चलो मान लिया कि दिल मे किसी
और को बसा लिया है हम ने ...

चलो मान लिया कि मन मे हर वक्त
किसी और कि छबि रहती है ...

तेरे हर एक इल्ज़ाम को हसके
मानने को तैयार है हम ...

तो फिर तू ही बता ....

ये कोनसी जगह है मुजमे जहाँ
कही ना कही तुम बसे हो ....

कैसे कहदे की तुमसे अब प्यार नही करते ...

माना कि पहले जैसा जुनून नही
अब मुजमे तुजे पाने का ...

तो फिर क्यों तेरा ही नाम जहन में
आता रहेता है हर वक्त ...

Dr.Divya

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