Daanu is someone who enjoys the writer part of herself, but might lack bits of this and that. So, please feel to share reviews or any suggestions you have.

मैं क्यों बदलूं, क्यों बदलूं मैं,
कोशिशें शुरू होती है तब से, जब से मुझे महसूस करते हैं,
तब ना जाने क्यों उम्मीद करते हैं,
लड़की हूँ तो, लड़का बन जाऊंगा
और मैं हर पल बस यही सोचे जाऊं,
मैं क्यों  बदलूं, क्यों बदलूं मैं?

फिर जिंदगी बढ़ती है आगे,
और मैं उनसे, जो उनके मुझसे ज्यादा करीब है,
तो फिर एक बार उनकी यह उम्मीद है,
कि पीछे हट जाऊं, यह जगह दे जाऊं मैं,
और मैं सिर्फ यह कहती रह जाऊं, 

मैं क्यों बदलूं , क्यों बदलूं मैं?

फिर जब समझती हूँ,
समाज में रहने के तरीके को,अपनाती हू उसे दिल से,
माना मेरे भले के लिए,पर कुछ अंजानो के कारण,
एक बार फिर वो कह जाते, बदलने उस तरीके को,
और मैं बस ये पूछतीं रह जाऊँ,
मैं क्यों  बदलूं, क्यों बदलूं मैं?

फिर जब बड़े-बड़े फैसलों की बारी आई,
तो फिर एक बार मैंने अपनी समझदारी दिखाई,
सिर्फ़ वो ही नहीं सब उसे ठीक मानते फिर भी ना जाने क्यों,
उस पर चलने से घबराते और मुझे उसे बदलने को कहते,
और मैं सिर्फ यही सवाल करती रह जाऊँ,
मैं क्यों  बदलूं, क्यों बदलूं मैं?

इन बातों में जो बुलंद आवाज थी,
उसने उन्हें बता दिया कि अब ना पिछे हटूँगी मैं,
उनकी हर गलत बात पर बड़े से बड़ा सवाल करूंगी मैं,
जरूरत पड़ी तो अपने अपनों से भी कहूंगी मैं,
मैं क्यों  बदलूं, क्यों बदलूं मैं?

-Daanu

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Last night I had a dream that they are trying to find me but everyone there was looking like me, it was like I was in everyone. After having an hour long conversation with them, I realised that the wind here has flown everyone from the leftmost mr. liar to right most madam cunning in me. They were not able to find me, because I now have qualities of everyone's except my own. That childishness, that sweetness of mine was blown away to someone somewhere.

-Daanu

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